यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

An-Nâzi’ât (सूरह 79)
النَّازِعَات (Those ˹Angels˺ Stripping out ˹Souls˺)
परिचय
यह मक्की सूरह इस बात पर ज़ोर देती है कि क़यामत का दिन अटल है और उसका समय केवल अल्लाह को ही ज्ञात है। फ़िरऔन के विनाश को इनकार करने वालों के लिए एक चेतावनी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।
आख़िरत अटल है।
1. क़सम है उन की जो सख़्ती से (जानें) नोच निकालते हैं, 2. और उन की जो नरमी से (जानें) खींच निकालते हैं, 3. और उन की जो तेज़ी से तैरते हैं, 4. और फुर्ती से आगे बढ़ने वाले, 5. और मामलों का प्रबंध करने वाले! 6. वह दिन जब थर्रा देने वाला धमाका घटित होगा, 7. उसके बाद एक दूसरा धमाका। 8. उस दिन दिल थरथरा रहे होंगे। 9. उनकी नज़रें झुकी हुई होंगी। 10. वे (उपहासपूर्वक) पूछते हैं, “क्या हमें सचमुच हमारी पहली हालत में लौटाया जाएगा, 11. जबकि हम सड़ी-गली हड्डियाँ बन चुके होंगे?” 12. और कहते हैं, “तब ऐसा लौटना तो (हमारे लिए) एक (कुल) घाटा होगा!” 13. और निश्चय ही, वह तो बस एक ही ज़ोरदार धमाका होगा, 14. और तभी वे धरती के ऊपर आ जाएँगे।
सूरह 79 - النَّازِعَات (खींचने वाले) - आयतें 1-14
फ़िरौन को झुठलाने के कारण तबाह किया गया।
15. क्या मूसा का वृत्तांत तुम्हें पहुँचा है (ऐ पैग़म्बर)? 16. उसके रब ने उसे तूवा की मुक़द्दस वादी में पुकारा, 17. (कहा,) "फ़िरऔन के पास जाओ, क्योंकि उसने सचमुच हद पार कर दी है। 18. और कहो, 'क्या तुम पाक होना चाहोगे, 19. और मैं तुम्हें तुम्हारे रब की ओर मार्गदर्शन दूँ ताकि तुम (उससे) डरो?” 20. फिर मूसा ने उसे बड़ी निशानी दिखाई, 21. लेकिन उसने झुठलाया और नाफ़रमानी की, 22. फिर उसने पीठ फेरी, जद्दोजहद करता हुआ। 23. फिर उसने बुलाया और आवाज़ दी, 24. कहते हुए, “मैं तुम्हारा रब हूँ, सर्वोच्च!” 25. तो अल्लाह ने उसे अपनी पकड़ में ले लिया और उसे इस दुनिया और आख़िरत के लिए एक मिसाल बना दिया। 26. बेशक इसमें एक नसीहत है हर उस व्यक्ति के लिए जो (अल्लाह का) भय रखता है।
सूरह 79 - النَّازِعَات (खींचने वाले) - आयतें 15-26
पुनरुत्थान सृजन से आसान है।
27. तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन है या आसमान को? उसने उसे बनाया, 28. उसे ऊँचा उठाया और उसे पूर्णता से बनाया। 29. उसने उसकी रात को अँधेरा किया, और उसके दिन को प्रकट किया। 30. और धरती को, उसने उसे भी बिछाया। 31. उससे उसका पानी और चारागाह निकालना 32. और पहाड़ों को उस पर मज़बूती से जमाया 33. यह सब तुम्हारे और तुम्हारे चौपायों के लिए रोज़ी के तौर पर
सूरह 79 - النَّازِعَات (खींचने वाले) - आयतें 27-33
क़यामत के दिन की भयावहता।
34. लेकिन, जब वह महाविपत्ति आ पड़ेगी— 35. जिस दिन हर व्यक्ति अपने सारे प्रयासों को याद करेगा, 36. और जहन्नम सबके सामने प्रकट की जाएगी— 37. तो जिन्होंने हद से तजावुज़ किया, 38. और दुनिया की (फानी) ज़िंदगी को तरजीह दी, 39. तो यकीनन जहन्नम ही उनका ठिकाना होगा। 40. और जहाँ तक उनका संबंध है जो अपने रब के सामने खड़े होने का भय रखते थे और जिन्होंने स्वयं को (बुरी) इच्छाओं से रोका, 41. जन्नत ही निश्चित रूप से उनका ठिकाना होगा।