This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 54 - القَمَر

Al-Qamar (Surah 54)

القَمَر (The Moon)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह, जिसका नाम आयत 1 में वर्णित चंद्रमा के विखंडन से लिया गया है, शीघ्र आने वाली क़यामत की चेतावनियों को अस्वीकार करने के लिए काफ़िरों की निंदा करती है। मूर्तिपूजकों को एक भयानक नियति की चेतावनी दी गई है, जो पूर्ववर्ती काफ़िरों जैसी थी, जिनका पिछली सूरह (53:50-54) में संक्षेप में उल्लेख किया गया था। सूरह का समापन इस घोषणा के साथ होता है कि नेक लोगों को सर्वशक्तिमान की उपस्थिति में सम्मानित किया जाएगा, जो अगली सूरह का मुख्य बिंदु है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

मक्की झुठलाने वालों को चेतावनी

1. क़यामत करीब आ गई है और चाँद फट गया। 2. और जब कभी वे कोई निशानी देखते हैं, तो मुँह मोड़ लेते हैं और कहते हैं, "यह तो वही पुराना जादू है!" 3. उन्होंने झुठलाया और अपनी ख्वाहिशों के पीछे चले—और हर बात का फैसला हो जाएगा। 4. हालाँकि, जो (तबाहशुदा क़ौमों की) कहानियाँ उनके पास पहले ही आ चुकी हैं, वे उनके लिए काफ़ी इबरत हैं। 5. (यह क़ुरआन) गहन हिकमत वाला है, लेकिन चेतावनियाँ उनके लिए कोई फ़ायदा नहीं देतीं। 6. तो उनसे मुँह मोड़ लो (ऐ पैग़म्बर)। (और उस दिन का इंतज़ार करो) जब पुकारने वाला उन्हें किसी ख़ौफ़नाक चीज़ के लिए पुकारेगा। 7. नीची निगाहों से वे क़ब्रों से निकलेंगे, मानो वे फैली हुई टिड्डियाँ हों, 8. पुकारने वाले की ओर दौड़ते हुए। इनकार करने वाले कहेंगे, "यह तो बड़ा सख़्त दिन है!"

ٱقْتَرَبَتِ ٱلسَّاعَةُ وَٱنشَقَّ ٱلْقَمَرُ
١
وَإِن يَرَوْا ءَايَةً يُعْرِضُوا وَيَقُولُوا سِحْرٌ مُّسْتَمِرٌّ
٢
وَكَذَّبُوا وَٱتَّبَعُوٓا أَهْوَآءَهُمْ ۚ وَكُلُّ أَمْرٍ مُّسْتَقِرٌّ
٣
وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّنَ ٱلْأَنۢبَآءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌ
٤
حِكْمَةٌۢ بَـٰلِغَةٌ ۖ فَمَا تُغْنِ ٱلنُّذُرُ
٥
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ ٱلدَّاعِ إِلَىٰ شَىْءٍ نُّكُرٍ
٦
خُشَّعًا أَبْصَـٰرُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ ٱلْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتَشِرٌ
٧
مُّهْطِعِينَ إِلَى ٱلدَّاعِ ۖ يَقُولُ ٱلْكَـٰفِرُونَ هَـٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ
٨

Surah 54 - القَمَر (चंद्रमा) - Verses 1-8


नूह के लोग

9. उनसे पहले, नूह की क़ौम ने (सत्य को) झुठलाया और हमारे बन्दे को ठुकराया, उसे दीवाना क़रार देते हुए। और उसे धमकाया गया। 10. तो उसने अपने रब को पुकारा, "मैं बेबस हूँ, अतः मेरी सहायता कर!" 11. तो हमने आकाश के द्वार मूसलाधार वर्षा के साथ खोल दिए, 12. और धरती से चश्मे फोड़ दिए, तो पानी एक निर्धारित नियति के लिए मिल गए। 13. हमने उसे तख्तों और कीलों वाले (जहाज़) पर सवार किया। 14. हमारी आँखों के सामने चलता हुआ—उसका बदला जिसे झुठलाया गया था। 15. हमने इसे एक निशानी बना दिया। तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करे? 16. तो कैसा था मेरा अज़ाब और मेरी चेतावनियाँ! 17. और हमने यक़ीनन क़ुरआन को याद करने के लिए आसान बना दिया है। तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करे?

۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَٱزْدُجِرَ
٩
فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنِّى مَغْلُوبٌ فَٱنتَصِرْ
١٠
فَفَتَحْنَآ أَبْوَٰبَ ٱلسَّمَآءِ بِمَآءٍ مُّنْهَمِرٍ
١١
وَفَجَّرْنَا ٱلْأَرْضَ عُيُونًا فَٱلْتَقَى ٱلْمَآءُ عَلَىٰٓ أَمْرٍ قَدْ قُدِرَ
١٢
وَحَمَلْنَـٰهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلْوَٰحٍ وَدُسُرٍ
١٣
تَجْرِى بِأَعْيُنِنَا جَزَآءً لِّمَن كَانَ كُفِرَ
١٤
وَلَقَد تَّرَكْنَـٰهَآ ءَايَةً فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
١٥
فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ
١٦
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
١٧

Surah 54 - القَمَر (चंद्रमा) - Verses 9-17


हूद के लोग

18. आद ने भी झुठलाया। तो कैसा था मेरा अज़ाब और मेरी चेतावनियाँ! 19. निश्चय ही हमने उन पर एक प्रचंड वायु भेजी, एक ऐसे दिन में जो निरंतर दुर्भाग्यपूर्ण था। 20. जिसने लोगों को उखाड़ फेंका, उन्हें जड़ से उखड़े खजूर के तनों की भाँति छोड़ दिया। 21. तो कैसी थी मेरी यातना और मेरी चेतावनियाँ! 22. और हमने यकीनन कुरान को याद रखने में आसान बना दिया है। तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करेगा?

كَذَّبَتْ عَادٌ فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ
١٨
إِنَّآ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا صَرْصَرًا فِى يَوْمِ نَحْسٍ مُّسْتَمِرٍّ
١٩
تَنزِعُ ٱلنَّاسَ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ مُّنقَعِرٍ
٢٠
فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ
٢١
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
٢٢

Surah 54 - القَمَر (चंद्रमा) - Verses 18-22


सालिह के लोग

23. समूद ने चेतावनियों को भी झुठलाया, 24. कहने लगे, “हम अपने ही में से एक इंसान की पैरवी कैसे करें? तब तो हम यकीनन गुमराह और पागल होंगे।” 25. क्या हम सब में से केवल उसी पर वह वह्य उतारी गई है? बल्कि वह एक बड़ा झूठा है। 26. वे शीघ्र ही जान लेंगे कि बड़ा झूठा कौन है। 27. हम ऊँटनी को उनके लिए एक परीक्षा के रूप में भेज रहे हैं। अतः उन पर नज़र रखो और सब्र करो। 28. और उन्हें बता दो कि पानी की बारी उनके और ऊँटनी के बीच बँटी हुई है, हर एक अपनी बारी पर पिएगा। 29. लेकिन उन्होंने अपने एक साथी को उकसाया, तो उसने उसे मारने की जुर्रत की। 30. तो कैसा था मेरा अज़ाब और मेरी चेतावनियाँ! 31. निःसंदेह हमने उन पर बस एक ही चीख़ भेजी, तो वे बाड़ बनाने वाले की सूखी टहनियों जैसे हो गए। 32. और निःसंदेह हमने क़ुरआन को याद करने के लिए आसान बना दिया है। तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करे?

كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِٱلنُّذُرِ
٢٣
فَقَالُوٓا أَبَشَرًا مِّنَّا وَٰحِدًا نَّتَّبِعُهُۥٓ إِنَّآ إِذًا لَّفِى ضَلَـٰلٍ وَسُعُرٍ
٢٤
أَءُلْقِىَ ٱلذِّكْرُ عَلَيْهِ مِنۢ بَيْنِنَا بَلْ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٌ
٢٥
سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَّنِ ٱلْكَذَّابُ ٱلْأَشِرُ
٢٦
إِنَّا مُرْسِلُوا ٱلنَّاقَةِ فِتْنَةً لَّهُمْ فَٱرْتَقِبْهُمْ وَٱصْطَبِرْ
٢٧
وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ ٱلْمَآءَ قِسْمَةٌۢ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُّحْتَضَرٌ
٢٨
فَنَادَوْا صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ
٢٩
فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ
٣٠
إِنَّآ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَٰحِدَةً فَكَانُوا كَهَشِيمِ ٱلْمُحْتَظِرِ
٣١
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
٣٢

Surah 54 - القَمَر (चंद्रमा) - Verses 23-32


लूत के लोग

33. लूत की क़ौम ने भी चेतावनियों को झुठलाया। 34. हमने उन पर पत्थरों का तूफान बरसाया। और लूत के परिवार को हमने भोर से पहले बचा लिया। 35. अपनी ओर से एक कृपा के रूप में। हम इसी तरह कृतज्ञता व्यक्त करने वालों को प्रतिफल देते हैं। 36. उसने उन्हें हमारी (विनाशकारी) मार से पहले ही आगाह कर दिया था, लेकिन उन्होंने चेतावनियों को झुठलाया। 37. और उन्होंने उसके फ़रिश्ता-मेहमानों को भी उससे माँगा, तो हमने उनकी आँखें अंधी कर दीं। (और उनसे कहा गया,) "तो चखो मेरा अज़ाब और मेरी चेतावनियाँ!" 38. और निश्चय ही, सुबह सवेरे उन पर एक अथक अज़ाब छा गया। 39. (फिर उनसे कहा गया,) "अब चखो मेरा अज़ाब और मेरी चेतावनियाँ!" 40. और हमने निश्चय ही क़ुरआन को याद करने के लिए आसान बना दिया है। तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करेगा?

كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍۭ بِٱلنُّذُرِ
٣٣
إِنَّآ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ ۖ نَّجَّيْنَـٰهُم بِسَحَرٍ
٣٤
نِّعْمَةً مِّنْ عِندِنَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِى مَن شَكَرَ
٣٥
وَلَقَدْ أَنذَرَهُم بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْا بِٱلنُّذُرِ
٣٦
وَلَقَدْ رَٰوَدُوهُ عَن ضَيْفِهِۦ فَطَمَسْنَآ أَعْيُنَهُمْ فَذُوقُوا عَذَابِى وَنُذُرِ
٣٧
وَلَقَدْ صَبَّحَهُم بُكْرَةً عَذَابٌ مُّسْتَقِرٌّ
٣٨
فَذُوقُوا عَذَابِى وَنُذُرِ
٣٩
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
٤٠

Surah 54 - القَمَر (चंद्रमा) - Verses 33-40


फ़िरौन के लोग

41. और निश्चय ही, चेतावनियाँ फ़िरऔन की क़ौम के पास भी आईं। 42. लेकिन उन्होंने हमारी सभी निशानियों को ठुकरा दिया, तो हमने उन्हें एक सर्वशक्तिमान, अत्यंत सामर्थ्यवान की ज़बरदस्त पकड़ से दबोच लिया।

وَلَقَدْ جَآءَ ءَالَ فِرْعَوْنَ ٱلنُّذُرُ
٤١
كَذَّبُوا بِـَٔايَـٰتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذْنَـٰهُمْ أَخْذَ عَزِيزٍ مُّقْتَدِرٍ
٤٢

Surah 54 - القَمَر (चंद्रमा) - Verses 41-42


मुशरिकों को चेतावनी

43. अब क्या तुम (मक्का के) काफ़िर उन (नष्ट किए गए लोगों) से बेहतर हो? या तुम्हें आसमानी किताबों में (सज़ा से) छूट मिली हुई है? 44. या वे कहते हैं, “हम सब एक संगठित दल हैं, जो अवश्य विजयी होगा।”? 45. जल्द ही उनका संगठित दल पराजित होगा और भाग जाएगा। 46. बल्कि क़यामत ही उनका निर्धारित समय है, और क़यामत अत्यंत विनाशकारी और अत्यंत कटु होगी। 47. बेशक, अपराधी गुमराही में हैं, और भड़कती आग में होंगे। 48. जिस दिन उन्हें उनके मुँह के बल आग में घसीटा जाएगा, (उनसे कहा जाएगा,) 'जहन्नम के स्पर्श का मज़ा चखो!' 49. निश्चित रूप से, हमने हर चीज़ को एक निश्चित माप के साथ पैदा किया है। 50. हमारा आदेश तो बस एक ही बात है, पलक झपकते ही हो जाता है। 51. हमने तुम्हारे जैसों को पहले ही नष्ट कर दिया है। तो क्या कोई नसीहत हासिल करेगा? 52. जो कुछ उन्होंने किया है, वह उनके लेखों में दर्ज है। 53. हर छोटा और बड़ा मामला लिखा हुआ है।

أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِّنْ أُولَـٰٓئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَآءَةٌ فِى ٱلزُّبُرِ
٤٣
أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُّنتَصِرٌ
٤٤
سَيُهْزَمُ ٱلْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ ٱلدُّبُرَ
٤٥
بَلِ ٱلسَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَٱلسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ
٤٦
إِنَّ ٱلْمُجْرِمِينَ فِى ضَلَـٰلٍ وَسُعُرٍ
٤٧
يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِى ٱلنَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ
٤٨
إِنَّا كُلَّ شَىْءٍ خَلَقْنَـٰهُ بِقَدَرٍ
٤٩
وَمَآ أَمْرُنَآ إِلَّا وَٰحِدَةٌ كَلَمْحٍۭ بِٱلْبَصَرِ
٥٠
وَلَقَدْ أَهْلَكْنَآ أَشْيَاعَكُمْ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
٥١
وَكُلُّ شَىْءٍ فَعَلُوهُ فِى ٱلزُّبُرِ
٥٢
وَكُلُّ صَغِيرٍ وَكَبِيرٍ مُّسْتَطَرٌ
٥٣

Surah 54 - القَمَر (चंद्रमा) - Verses 43-53


नेक लोगों का प्रतिफल

54. बेशक, परहेज़गार बाग़ों और नहरों के बीच होंगे, 55. महिमा के आसन पर सर्वशक्तिमान संप्रभु की उपस्थिति में।

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍ وَنَهَرٍ
٥٤
فِى مَقْعَدِ صِدْقٍ عِندَ مَلِيكٍ مُّقْتَدِرٍۭ
٥٥

Surah 54 - القَمَر (चंद्रमा) - Verses 54-55


Al-Qamar () - अध्याय 54 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा