यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 95 - At-Tîn

At-Tîn (सूरह 95)

At-Tîn (The Fig)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचयUnseen

यह मक्की सूरह इस बात पर बल देती है कि अल्लाह ने इंसानों को सम्मानित किया है, लेकिन उनमें से कई आख़िरत में उससे मिलने से इनकार करके खुद को नीचा गिराते हैं। अबू जहल, जो सबसे कुख्यात इनकार करने वालों में से एक था, उसका ज़िक्र अगली सूरह में किया गया है। अल्लाह के नाम से—जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

At-Tîn - The Fig

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अंजीर और ज़ैतून की क़सम (बैतुल मुक़द्दस के), और तूर सीना की, और इस अमन वाले शहर (मक्का) की!