At-Tîn - The Fig
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अंजीर और ज़ैतून की क़सम (बैतुल मुक़द्दस के), और तूर सीना की, और इस अमन वाले शहर (मक्का) की!
यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

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अंजीर और ज़ैतून की क़सम (बैतुल मुक़द्दस के), और तूर सीना की, और इस अमन वाले शहर (मक्का) की!
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।
1. अंजीर और ज़ैतून की क़सम (बैतुल मुक़द्दस के),
2. और तूर सीना की,
3. और इस अमन वाले शहर (मक्का) की!
4. निःसंदेह, हमने इंसान को बेहतरीन तक़्वीम पर पैदा किया।
5. फिर हम उसे सबसे निचले दर्जे में लौटा देंगे,
6. सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल किए, उनके लिए कभी न ख़त्म होने वाला अज्र है।
7. अब तुम्हें किस चीज़ ने क़यामत को झुठलाने पर मजबूर किया है?
8. क्या अल्लाह सब हाकिमों में सबसे बड़ा हाकिम नहीं है?
وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ١
وَطُورِ سِينِينَ٢
وَهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ ٱلْأَمِينِ٣
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِىٓ أَحْسَنِ تَقْوِيمٍ٤
ثُمَّ رَدَدْنَـٰهُ أَسْفَلَ سَـٰفِلِينَ٥
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا وَعَمِلُوا ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ٦
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِٱلدِّينِ٧
أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِأَحْكَمِ ٱلْحَـٰكِمِينَ٨
सूरह 95 - التِّين (अंजीर) - आयतें 1-8