This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 51 - الذَّارِيَات

Aⱬ-Ⱬâriyât (Surah 51)

الذَّارِيَات (Scattering Winds)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

पिछली सूरह की तरह, यह मक्की सूरह क़ियामत की दलील देती है, ब्रह्मांड में अल्लाह की कुछ प्राकृतिक निशानियों का हवाला देते हुए ताकि मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने की उसकी शक्ति को प्रमाणित किया जा सके। क़ियामत को झुठलाने वाले उन लोगों के कई उदाहरण दिए गए हैं जिन्हें तबाह कर दिया गया, जो मोमिनों के इनाम के विपरीत हैं। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से आग्रह किया गया है कि वे नसीहत देते रहें। इस सूरह का अंत और अगली सूरह का आरंभ दोनों क़ियामत के दिन की चेतावनी देते हैं। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपालु, दयावान है

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

न्याय अटल है

1. उन हवाओं की क़सम जो (धूल) बिखेरती हैं, 2. और बारिश से लदी हुई, 3. और आसानी से चलने वाली, 4. और (वे फ़रिश्ते) जो अल्लाह के आदेश से व्यवस्था करते हैं! 5. बेशक, जिसका तुमसे वादा किया गया है, वह सत्य है। 6. और फ़ैसला अवश्य होकर रहेगा।

وَٱلذَّٰرِيَـٰتِ ذَرْوًا
١
فَٱلْحَـٰمِلَـٰتِ وِقْرًا
٢
فَٱلْجَـٰرِيَـٰتِ يُسْرًا
٣
فَٱلْمُقَسِّمَـٰتِ أَمْرًا
٤
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌ
٥
وَإِنَّ ٱلدِّينَ لَوَٰقِعٌ
٦

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 1-6


इनकार करने वालों को चेतावनी

7. और अपनी अद्भुत रचना वाले आकाश की क़सम! 8. निश्चित रूप से तुम विरोधाभासी बातों में पड़े हुए हो। 9. केवल वही लोग जो गुमराह किए गए हैं, उससे फेर दिए जाते हैं। 10. धिक्कार है झूठों को! 11. जो अज्ञानता में डूबे हुए और गाफिल हैं। 12. वे पूछते हैं, 'यह क़यामत का दिन कब आएगा?' 13. वह दिन जब उन्हें आग पर यातना दी जाएगी। 14. (उनसे कहा जाएगा,) “अपने अज़ाब का मज़ा चखो! यही वह है जिसकी तुम जल्दी मचाते थे।”

وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْحُبُكِ
٧
إِنَّكُمْ لَفِى قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍ
٨
يُؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ أُفِكَ
٩
قُتِلَ ٱلْخَرَّٰصُونَ
١٠
ٱلَّذِينَ هُمْ فِى غَمْرَةٍ سَاهُونَ
١١
يَسْـَٔلُونَ أَيَّانَ يَوْمُ ٱلدِّينِ
١٢
يَوْمَ هُمْ عَلَى ٱلنَّارِ يُفْتَنُونَ
١٣
ذُوقُوا فِتْنَتَكُمْ هَـٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تَسْتَعْجِلُونَ
١٤

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 7-14


परहेज़गारों के लिए खुशखबरी

15. बेशक, परहेज़गार लोग बाग़ों और चश्मों में होंगे, 16. वे प्रसन्नतापूर्वक वह सब ग्रहण करेंगे जो उनके रब उन्हें प्रदान करेंगे। इससे पहले वे (दुनिया में) वास्तव में सदाचारी थे। 17. वे रात को बहुत कम सोते थे। 18. और भोर से पहले मग़फ़िरत तलब करते थे। 19. और उनके माल में याचक और निर्धन का एक वाजिब हिस्सा था।

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
١٥
ءَاخِذِينَ مَآ ءَاتَىٰهُمْ رَبُّهُمْ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَبْلَ ذَٰلِكَ مُحْسِنِينَ
١٦
كَانُوا قَلِيلًا مِّنَ ٱلَّيْلِ مَا يَهْجَعُونَ
١٧
وَبِٱلْأَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَ
١٨
وَفِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّ لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِ
١٩

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 15-19


सृष्टि में अल्लाह की निशानियाँ

20. ज़मीन में दृढ़ विश्वास रखने वालों के लिए निशानियाँ हैं, 21. और तुम्हारे अपने आप में भी हैं। क्या तुम नहीं देखते? 22. आसमान में तुम्हारा रिज़्क़ है और जो कुछ तुमसे वादा किया गया है। 23. फिर आसमान और ज़मीन के रब की क़सम! यह यक़ीनन उतना ही सच है जितना कि तुम बात करते हो!

وَفِى ٱلْأَرْضِ ءَايَـٰتٌ لِّلْمُوقِنِينَ
٢٠
وَفِىٓ أَنفُسِكُمْ ۚ أَفَلَا تُبْصِرُونَ
٢١
وَفِى ٱلسَّمَآءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ
٢٢
فَوَرَبِّ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ إِنَّهُۥ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَآ أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ
٢٣

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 20-23


इब्राहीम से फ़रिश्तों की मुलाक़ात

24. क्या तुम्हें इब्राहीम के सम्मानित मेहमानों की कहानी पहुँची है (ऐ पैग़म्बर)? 25. जब वे उसके पास आए और सलाम किया, "सलाम!" उसने जवाब दिया, "सलाम!" (फिर उसने अपने मन में कहा,) "ये तो अनजान लोग हैं।" 26. फिर वह चुपके से अपने घर वालों के पास गया और एक मोटा भुना हुआ बछड़ा ले आया। 27. और उसे उनके सामने रखा, पूछते हुए, "क्या तुम खाते नहीं?" 28. (उन्होंने खाया नहीं,) तो उसे उनसे भय हुआ। उन्होंने कहा, "भयभीत न हो," और उसे एक ज्ञानी पुत्र की शुभ सूचना दी। 29. फिर उसकी पत्नी चीखती हुई सामने आई, अपना माथा पीटती हुई (आश्चर्य से), कहने लगी, "एक बांझ, बूढ़ी औरत से (बच्चा)!" 30. उन्होंने कहा, "तुम्हारे रब ने ऐसा ही फरमाया है। निःसंदेह वह अत्यंत बुद्धिमान, सर्वज्ञ है।"

هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ ٱلْمُكْرَمِينَ
٢٤
إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَـٰمًا ۖ قَالَ سَلَـٰمٌ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ
٢٥
فَرَاغَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ فَجَآءَ بِعِجْلٍ سَمِينٍ
٢٦
فَقَرَّبَهُۥٓ إِلَيْهِمْ قَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ
٢٧
فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَـٰمٍ عَلِيمٍ
٢٨
فَأَقْبَلَتِ ٱمْرَأَتُهُۥ فِى صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌ
٢٩
قَالُوا كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْحَكِيمُ ٱلْعَلِيمُ
٣٠

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 24-30


लूत की क़ौम का विनाश

31. फिर इब्राहीम ने पूछा, "ऐ रसूलों, तुम्हारा क्या कार्य है?" 32. उन्होंने जवाब दिया, "हमें दरअसल एक दुष्ट क़ौम की ओर भेजा गया है, 33. ताकि उन पर पकी हुई मिट्टी के पत्थर बरसाएँ," 34. आपके रब के पास से हद से गुज़रने वालों के लिए निशानज़द। 35. फिर (अज़ाब से पहले) हमने ईमान वालों को शहर से निकाल लिया। 36. लेकिन हमें केवल एक ही घराना मिला जिसने इस्लाम क़बूल किया था। 37. और हमने वहाँ एक निशानी छोड़ी है उन लोगों के लिए जो दर्दनाक अज़ाब से डरते हैं।

۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَ
٣١
قَالُوٓا إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ
٣٢
لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن طِينٍ
٣٣
مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَ
٣٤
فَأَخْرَجْنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
٣٥
فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٍ مِّنَ ٱلْمُسْلِمِينَ
٣٦
وَتَرَكْنَا فِيهَآ ءَايَةً لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَلِيمَ
٣٧

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 31-37


फ़िरौन की क़ौम का विनाश

38. और मूसा में भी (एक निशानी थी), जब हमने उसे फ़िरऔन के पास खुली दलील के साथ भेजा। 39. लेकिन फ़िरऔन अपनी सत्ता के घमंड में चूर था, कहता था (मूसा के बारे में), "एक जादूगर या एक दीवाना!" 40. तो हमने उसे और उसके सैनिकों को पकड़ लिया और उन्हें समुद्र में फेंक दिया, जबकि वह निंदनीय था।

وَفِى مُوسَىٰٓ إِذْ أَرْسَلْنَـٰهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَـٰنٍ مُّبِينٍ
٣٨
فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِۦ وَقَالَ سَـٰحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ
٣٩
فَأَخَذْنَـٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذْنَـٰهُمْ فِى ٱلْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌ
٤٠

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 38-40


हूद की क़ौम का विनाश

41. और आद में, जब हमने उन पर विनाशकारी हवा भेजी। 42. वह जिस चीज़ पर भी आती थी, उसे राख कर देती थी।

وَفِى عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ ٱلرِّيحَ ٱلْعَقِيمَ
٤١
مَا تَذَرُ مِن شَىْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَٱلرَّمِيمِ
٤٢

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 41-42


सालेह की क़ौम का विनाश

43. और समूद में (भी एक निशानी थी), जब उनसे कहा गया, "कुछ समय के लिए लाभ उठा लो।" 44. फिर भी उन्होंने अपने रब के आदेशों की अवहेलना की, तो उन्हें एक ज़बरदस्त चीख़ ने आ पकड़ा जबकि वे देख रहे थे। 45. फिर वे उठ न सके, और न ही उनकी मदद की गई।

وَفِى ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا حَتَّىٰ حِينٍ
٤٣
فَعَتَوْا عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّـٰعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ
٤٤
فَمَا ٱسْتَطَـٰعُوا مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا مُنتَصِرِينَ
٤٥

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 43-45


नूह की क़ौम का विनाश

46. और नूह की क़ौम को भी इससे पहले (नष्ट किया गया था)। वे यक़ीनन बड़े सरकश लोग थे।

وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَـٰسِقِينَ
٤٦

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 46-46


अल्लाह की सृजन शक्ति

47. और हमने आसमान को अपनी कुदरत से बनाया, और हम यक़ीनन उसका विस्तार कर रहे हैं। 48. और ज़मीन को, हमने उसे बिछाया। क्या ही ख़ूब बिछाया हमने उसे! 49. और हमने हर चीज़ के जोड़े पैदा किए ताकि शायद तुम नसीहत हासिल करो।

وَٱلسَّمَآءَ بَنَيْنَـٰهَا بِأَيْيدٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
٤٧
وَٱلْأَرْضَ فَرَشْنَـٰهَا فَنِعْمَ ٱلْمَـٰهِدُونَ
٤٨
وَمِن كُلِّ شَىْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
٤٩

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 47-49


इनकार करने वालों को जगाने वाली पुकार

50. तो (ऐ पैगंबर, कहो): “अल्लाह की तरफ़ भागो! मैं यक़ीनन उसकी तरफ़ से तुम्हारे लिए एक खुली चेतावनी लेकर भेजा गया हूँ।” 51. और अल्लाह के साथ कोई दूसरा माबूद न ठहराओ। मैं यक़ीनन उसकी तरफ़ से तुम्हारे लिए एक खुली चेतावनी लेकर भेजा गया हूँ।”

فَفِرُّوٓا إِلَى ٱللَّهِ ۖ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
٥٠
وَلَا تَجْعَلُوا مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ ۖ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
٥١

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 50-51


पहले के इनकार करने वाले

52. इसी तरह उनसे पहले भी कोई रसूल ऐसा नहीं आया जिसे यह न कहा गया हो कि यह जादूगर है या दीवाना। 53. क्या उन्होंने एक-दूसरे को इसकी वसीयत की है? बल्कि वे सब सरकश लोग रहे हैं। 54. तो उनसे मुँह फेर लो, तुम पर कोई मलामत नहीं होगी। 55. और नसीहत करते रहो, क्योंकि नसीहत ईमानवालों को फ़ायदा देती है।

كَذَٰلِكَ مَآ أَتَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُوا سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ
٥٢
أَتَوَاصَوْا بِهِۦ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ
٥٣
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٍ
٥٤
وَذَكِّرْ فَإِنَّ ٱلذِّكْرَىٰ تَنفَعُ ٱلْمُؤْمِنِينَ
٥٥

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 52-55


जीवन का उद्देश्य

56. मैंने जिन्न और इंसानों को केवल अपनी इबादत के लिए ही पैदा किया है। 57. मैं उनसे कोई रिज़्क़ नहीं चाहता और न मैं चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ। 58. बेशक, अल्लाह ही परम रोज़ी देने वाला है, बल का स्वामी, अत्यंत सामर्थ्यवान।

وَمَا خَلَقْتُ ٱلْجِنَّ وَٱلْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ
٥٦
مَآ أُرِيدُ مِنْهُم مِّن رِّزْقٍ وَمَآ أُرِيدُ أَن يُطْعِمُونِ
٥٧
إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلْقُوَّةِ ٱلْمَتِينُ
٥٨

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 56-58


इनकार करने वालों को चेतावनी

59. ज़ालिमों को निश्चित रूप से उनके पूर्ववर्तियों जैसा हिस्सा मिलेगा। अतः वे मुझसे इसे शीघ्र करने की माँग न करें। 60. तो धिक्कार है उन काफ़िरों पर जब वे अपने उस दिन का सामना करेंगे जिसकी उन्हें चेतावनी दी गई है!

فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذَنُوبًا مِّثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَـٰبِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِ
٥٩
فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِن يَوْمِهِمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَ
٦٠

Surah 51 - الذَّارِيَات (बिखरती हवाएं) - Verses 59-60


Aⱬ-Ⱬâriyât () - अध्याय 51 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा