Ad-Dukhân - The Haze
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हा-मीम। क़सम है इस रोशन किताब की! बेशक, हमने इसे एक बरकत वाली रात में उतारा, क्योंकि हम हमेशा आगाह करने वाले हैं।
यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

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हा-मीम। क़सम है इस रोशन किताब की! बेशक, हमने इसे एक बरकत वाली रात में उतारा, क्योंकि हम हमेशा आगाह करने वाले हैं।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।
1. हा-मीम।
2. क़सम है इस रोशन किताब की!
3. बेशक, हमने इसे एक बरकत वाली रात में उतारा, क्योंकि हम हमेशा आगाह करने वाले हैं।
4. उस रात में हर हिकमत वाला काम मुकर्रर किया जाता है।
5. हमारे हुक्म से, बेशक हम ही भेजते रहे हैं।
6. आपके रब की रहमत के तौर पर।
बेशक वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
7. आसमानों और ज़मीन का और जो कुछ उनके दरमियान है, उसका रब, अगर तुम यक़ीन करने वाले होते।
8. उसके सिवा कोई माबूद नहीं।
वही ज़िंदा करता है और मारता है।
वह तुम्हारा रब है और तुम्हारे बाप-दादाओं का रब।
حمٓ١
وَٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُبِينِ٢
إِنَّآ أَنزَلْنَـٰهُ فِى لَيْلَةٍ مُّبَـٰرَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ٣
فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ٤
أَمْرًا مِّنْ عِندِنَآ ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ٥
رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ٦
رَبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَآ ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ٧
لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْىِۦ وَيُمِيتُ ۖ رَبُّكُمْ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ٨
सूरह 44 - الدُّخَان (धुआं) - आयतें 1-8