This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 44 - الدُّخَان

Ad-Dukhân (Surah 44)

الدُّخَان (The Haze)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

इस मक्की सूरह का नाम धुएँ (जो सूखे के कारण हुआ था) पर रखा गया है, जिसका ज़िक्र आयत 10 में है। पिछली सूरह की तरह, मक्का के मूर्तिपूजकों को फ़िरौन की क़ौम के समान माना गया है, क्योंकि उन्होंने उनसे अज़ाब हटाए जाने के बाद अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण के अपने वादे से मुकर गए थे। कहा जाता है कि क़ुरआन को इंसानियत की हिदायत के लिए एक मुबारक रात में नाज़िल किया गया था। जो इसकी हिदायत को अपनाएंगे, उन्हें जन्नत में सम्मानित किया जाएगा और जो इसे ठुकराएंगे, उन्हें जहन्नम में अपमानित किया जाएगा। यही अंजाम अगली सूरह का मूल विषय है। अल्लाह के नाम से—जो अत्यंत दयालु, परम कृपालु है

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

कुरान एक रहमत

1. हा-मीम। 2. क़सम है इस रोशन किताब की! 3. बेशक, हमने इसे एक बरकत वाली रात में उतारा, क्योंकि हम हमेशा आगाह करने वाले हैं। 4. उस रात में हर हिकमत वाला काम मुकर्रर किया जाता है। 5. हमारे हुक्म से, बेशक हम ही भेजते रहे हैं। 6. आपके रब की रहमत के तौर पर। बेशक वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। 7. आसमानों और ज़मीन का और जो कुछ उनके दरमियान है, उसका रब, अगर तुम यक़ीन करने वाले होते। 8. उसके सिवा कोई माबूद नहीं। वही ज़िंदा करता है और मारता है। वह तुम्हारा रब है और तुम्हारे बाप-दादाओं का रब।

حمٓ
١
وَٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُبِينِ
٢
إِنَّآ أَنزَلْنَـٰهُ فِى لَيْلَةٍ مُّبَـٰرَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ
٣
فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ
٤
أَمْرًا مِّنْ عِندِنَآ ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ
٥
رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ
٦
رَبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَآ ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ
٧
لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْىِۦ وَيُمِيتُ ۖ رَبُّكُمْ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ
٨

Surah 44 - الدُّخَان (धुआं) - Verses 1-8


मक्कावासियों को अकाल की चेतावनी

9. बल्कि वे शक में हैं, खेलते-कूदते हुए। 10. तो प्रतीक्षा करो (ऐ पैग़म्बर) उस दिन की जब आकाश स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले धुएँ से ढक जाएगा, 11. जो लोगों को अपनी चपेट में ले लेगा। (वे पुकारेंगे,) “यह एक दर्दनाक अज़ाब है। 12. हमारे रब! हमसे (यह) अज़ाब हटा दे, (और) हम अवश्य ईमान ले आएँगे।” 13. उन्हें कैसे नसीहत दी जा सकती है जबकि उनके पास एक रसूल (पैगंबर) आ चुका है, जिसने बातें खोल-खोल कर बयान कर दी हैं? 14. फिर वे उससे मुँह मोड़ गए, यह कहते हुए कि, "यह तो एक दीवाना है, जिसे दूसरों ने सिखाया है!"? 15. निःसंदेह, हम उस अज़ाब को थोड़ी देर के लिए हटा देंगे, और तुम (मक्कावासी) फिर (कुफ्र की ओर) लौट जाओगे। 16. फिर जिस दिन हम तुम्हें सबसे बड़ी चोट देंगे, हम निश्चय ही बदला लेंगे।

بَلْ هُمْ فِى شَكٍّ يَلْعَبُونَ
٩
فَٱرْتَقِبْ يَوْمَ تَأْتِى ٱلسَّمَآءُ بِدُخَانٍ مُّبِينٍ
١٠
يَغْشَى ٱلنَّاسَ ۖ هَـٰذَا عَذَابٌ أَلِيمٌ
١١
رَّبَّنَا ٱكْشِفْ عَنَّا ٱلْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَ
١٢
أَنَّىٰ لَهُمُ ٱلذِّكْرَىٰ وَقَدْ جَآءَهُمْ رَسُولٌ مُّبِينٌ
١٣
ثُمَّ تَوَلَّوْا عَنْهُ وَقَالُوا مُعَلَّمٌ مَّجْنُونٌ
١٤
إِنَّا كَاشِفُوا ٱلْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَآئِدُونَ
١٥
يَوْمَ نَبْطِشُ ٱلْبَطْشَةَ ٱلْكُبْرَىٰٓ إِنَّا مُنتَقِمُونَ
١٦

Surah 44 - الدُّخَان (धुआं) - Verses 9-16


मूसा और फिरौन के लोग

17. निःसंदेह, उनसे पहले हमने फ़िरऔन की क़ौम को आज़माया: उनके पास एक प्रतिष्ठित रसूल आया, 18. "अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले कर दो। मैं तुम्हारे लिए निश्चय ही एक अमानतदार रसूल हूँ।" 19. और अल्लाह के सामने तकब्बुर न करो। मैं यक़ीनन तुम्हारे पास एक खुली दलील लेकर आया हूँ। 20. और बेशक, मैं अपने रब और तुम्हारे रब की पनाह माँगता हूँ ताकि तुम मुझे संगसार न करो। 21. और अगर तुम मुझ पर ईमान नहीं लाते, तो मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो। 22. अंततः उसने अपने रब से पुकारा, "ये लोग अपराधी हैं!"

۞ وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَآءَهُمْ رَسُولٌ كَرِيمٌ
١٧
أَنْ أَدُّوٓا إِلَىَّ عِبَادَ ٱللَّهِ ۖ إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
١٨
وَأَن لَّا تَعْلُوا عَلَى ٱللَّهِ ۖ إِنِّىٓ ءَاتِيكُم بِسُلْطَـٰنٍ مُّبِينٍ
١٩
وَإِنِّى عُذْتُ بِرَبِّى وَرَبِّكُمْ أَن تَرْجُمُونِ
٢٠
وَإِن لَّمْ تُؤْمِنُوا لِى فَٱعْتَزِلُونِ
٢١
فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ قَوْمٌ مُّجْرِمُونَ
٢٢

Surah 44 - الدُّخَان (धुआं) - Verses 17-22


ज़ालिम तबाह किए गए

23. (अल्लाह ने कहा,) "रात को मेरे बंदों के साथ निकल जाओ, क्योंकि तुम्हारा पीछा अवश्य किया जाएगा। 24. और समुद्र को खुला रहने दो, क्योंकि वे निश्चित रूप से एक सेना हैं जिन्हें डूबना ही है।" 25. कितने ही बाग़ और चश्मे थे जो ज़ालिम छोड़ गए, 26. और तरह-तरह की फसलें और शानदार महल, 27. और ऐशो-आराम जिनका उन्होंने भरपूर आनंद लिया। 28. तो ऐसा ही हुआ। और हमने यह सब एक अन्य कौम को अता किया। 29. उन पर न तो आकाश रोया और न ही धरती, और न ही उनकी मुद्दत को टाला गया। 30. और हमने यकीनन बनी इस्राईल को ज़िल्लत भरे अज़ाब से निजात दी। 31. फ़िरऔन। वह वास्तव में एक अत्याचारी, एक हद से गुज़रने वाला था। 32. और निःसंदेह, हमने बनी इस्राईल को दूसरों से बढ़कर जानते हुए चुना। 33. और हमने उन्हें ऐसी निशानियाँ दिखाईं जिनमें एक स्पष्ट परीक्षा थी।

فَأَسْرِ بِعِبَادِى لَيْلًا إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
٢٣
وَٱتْرُكِ ٱلْبَحْرَ رَهْوًا ۖ إِنَّهُمْ جُندٌ مُّغْرَقُونَ
٢٤
كَمْ تَرَكُوا مِن جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
٢٥
وَزُرُوعٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ
٢٦
وَنَعْمَةٍ كَانُوا فِيهَا فَـٰكِهِينَ
٢٧
كَذَٰلِكَ ۖ وَأَوْرَثْنَـٰهَا قَوْمًا ءَاخَرِينَ
٢٨
فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ ٱلسَّمَآءُ وَٱلْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنظَرِينَ
٢٩
وَلَقَدْ نَجَّيْنَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ مِنَ ٱلْعَذَابِ ٱلْمُهِينِ
٣٠
مِن فِرْعَوْنَ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَالِيًا مِّنَ ٱلْمُسْرِفِينَ
٣١
وَلَقَدِ ٱخْتَرْنَـٰهُمْ عَلَىٰ عِلْمٍ عَلَى ٱلْعَـٰلَمِينَ
٣٢
وَءَاتَيْنَـٰهُم مِّنَ ٱلْـَٔايَـٰتِ مَا فِيهِ بَلَـٰٓؤٌا مُّبِينٌ
٣٣

Surah 44 - الدُّخَان (धुआं) - Verses 23-33


क़यामत के इनकार करने वालों को चेतावनी

34. बेशक ये लोग कहते हैं, 35. "हमारी इस पहली मौत के बाद कुछ नहीं है, और हमें फिर कभी उठाया नहीं जाएगा।" 36. "हमारे बाप-दादाओं को वापस ले आओ, अगर तुम सच्चे हो।" 37. क्या वे तुब्बा की क़ौम और उनसे पहले वालों से बेहतर हैं? हमने उन सबको हलाक कर दिया, क्योंकि वे वाकई मुजरिम थे। 38. हमने आसमानों और ज़मीन को और जो कुछ उनके दरमियान है, खेल-कूद के लिए नहीं बनाया। 39. हमने उन्हें तो बस एक मक़सद से बनाया है, लेकिन इनमें से ज़्यादातर नहीं जानते। 40. निश्चित रूप से, निर्णय का दिन उन सभी के लिए निर्धारित समय है। 41. जिस दिन कोई संबंधी किसी दूसरे के ज़रा भी काम नहीं आएगा, और न ही उनकी सहायता की जाएगी। 42. सिवाय उन लोगों के जिन पर अल्लाह दया करेगा। वह वास्तव में सर्वशक्तिमान, अत्यंत दयालु है।

إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ لَيَقُولُونَ
٣٤
إِنْ هِىَ إِلَّا مَوْتَتُنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُنشَرِينَ
٣٥
فَأْتُوا بِـَٔابَآئِنَآ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
٣٦
أَهُمْ خَيْرٌ أَمْ قَوْمُ تُبَّعٍ وَٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ أَهْلَكْنَـٰهُمْ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا مُجْرِمِينَ
٣٧
وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَـٰعِبِينَ
٣٨
مَا خَلَقْنَـٰهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
٣٩
إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ مِيقَـٰتُهُمْ أَجْمَعِينَ
٤٠
يَوْمَ لَا يُغْنِى مَوْلًى عَن مَّوْلًى شَيْـًٔا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
٤١
إِلَّا مَن رَّحِمَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
٤٢

Surah 44 - الدُّخَان (धुआं) - Verses 34-42


जहन्नम का पेड़

43. निश्चित रूप से ज़क़्क़ूम का वृक्ष 44. दुष्कर्मी का भोजन होगा। 45. पिघली हुई धातु की तरह, वह पेटों में खौलेगा। 46. खौलते पानी की तरह। 47. (कहा जाएगा,) "उन्हें पकड़ो और उन्हें जहन्नम की गहराइयों में घसीटो। 48. फिर उनके सिरों पर खौलते पानी का अज़ाब उँडेलो।" 49. इसे चखो। ऐ बलवान, ऐ प्रतिष्ठित! 50. यह वही है जिस पर तुम संदेह करते थे।

إِنَّ شَجَرَتَ ٱلزَّقُّومِ
٤٣
طَعَامُ ٱلْأَثِيمِ
٤٤
كَٱلْمُهْلِ يَغْلِى فِى ٱلْبُطُونِ
٤٥
كَغَلْىِ ٱلْحَمِيمِ
٤٦
خُذُوهُ فَٱعْتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ
٤٧
ثُمَّ صُبُّوا فَوْقَ رَأْسِهِۦ مِنْ عَذَابِ ٱلْحَمِيمِ
٤٨
ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْكَرِيمُ
٤٩
إِنَّ هَـٰذَا مَا كُنتُم بِهِۦ تَمْتَرُونَ
٥٠

Surah 44 - الدُّخَان (धुआं) - Verses 43-50


जन्नत की नेमतें

51. बेशक, परहेज़गार लोग एक महफूज़ जगह में होंगे। 52. बाग़ों और झरनों के बीच, 53. बारीक रेशम और क़ीमती ब्रोकेड पहने हुए, आमने-सामने। 54. ऐसा ही होगा। और हम उनका जोड़ा बड़ी-बड़ी आँखों वाली हूरों से बना देंगे। 55. वहाँ वे हर फल शांतिपूर्वक माँगेंगे। 56. वहाँ वे पहली मृत्यु के बाद फिर कभी मृत्यु का स्वाद नहीं चखेंगे। और वह उन्हें जहन्नम की यातना से बचाएगा। 57. तुम्हारे रब की ओर से अनुग्रह के रूप में। यही निश्चित रूप से महानतम विजय है।

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى مَقَامٍ أَمِينٍ
٥١
فِى جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
٥٢
يَلْبَسُونَ مِن سُندُسٍ وَإِسْتَبْرَقٍ مُّتَقَـٰبِلِينَ
٥٣
كَذَٰلِكَ وَزَوَّجْنَـٰهُم بِحُورٍ عِينٍ
٥٤
يَدْعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَـٰكِهَةٍ ءَامِنِينَ
٥٥
لَا يَذُوقُونَ فِيهَا ٱلْمَوْتَ إِلَّا ٱلْمَوْتَةَ ٱلْأُولَىٰ ۖ وَوَقَىٰهُمْ عَذَابَ ٱلْجَحِيمِ
٥٦
فَضْلًا مِّن رَّبِّكَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
٥٧

Surah 44 - الدُّخَان (धुआं) - Verses 51-57


कुरान आसान है

58. निःसंदेह, हमने इस (कुरान) को आपकी अपनी भाषा में (ऐ पैगंबर) आसान बना दिया है, ताकि शायद वे नसीहत हासिल करें। 59. तो इंतज़ार करो! वे भी यक़ीनन इंतज़ार कर रहे हैं।

فَإِنَّمَا يَسَّرْنَـٰهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
٥٨
فَٱرْتَقِبْ إِنَّهُم مُّرْتَقِبُونَ
٥٩

Surah 44 - الدُّخَان (धुआं) - Verses 58-59


Ad-Dukhân () - अध्याय 44 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा