यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 25 - Al-Furqân

Al-Furqân (सूरह 25)

Al-Furqân (The Standard)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचयDoctrineUnseen

यह मक्की सूरह अपना नाम आयत 1-6 से लेती है, जो मुशरिकों के उन दावों का खंडन करती हैं कि कुरान मनगढ़ंत था और पिछली धर्मग्रंथों से नकल किया गया था। अन्य अंश शिर्क, क़यामत के इनकार और पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का उपहास करने की निंदा करते हैं। इस सूरह और पिछली सूरह में अल्लाह की कुदरत पर बल दिया गया है, जो सृष्टि के अद्भुत कार्यों और वर्षा में प्रकट होती है। अल्लाह के नेक बंदों के गुण आयतों 63-76 में खूबसूरती से बताए गए हैं। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयालु, परम कृपालु है।

Al-Furqân - The Standard

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अत्यंत बरकत वाला है वह जिसने अपने बंदे पर कसौटी (सत्य-असत्य का मानदंड) उतारा, ताकि वह समस्त संसार के लिए चेतावनी देने वाला हो। उसी (अल्लाह) का है आकाशों और धरती का राज्य, जिसने न कोई संतान ली है और न राज्य में उसका कोई साझी है। उसने हर चीज़ को पैदा किया है, उसे ठीक-ठीक माप के साथ ठहराते हुए। फिर भी उन्होंने उसके सिवा ऐसे पूज्य बना लिए हैं जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते, बल्कि वे स्वयं पैदा किए गए हैं। और न वे अपनी रक्षा कर सकते हैं और न स्वयं को लाभ पहुँचा सकते हैं। और न वे जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान पर अधिकार रखते हैं।