यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 80 - عَبَسَ

’Abasa (सूरह 80)

عَبَسَ (He Frowned)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

अत्-तिर्मिज़ी द्वारा संकलित एक हदीस में, अब्दुल्लाह इब्न उम मक्तूम नामक एक नेत्रहीन व्यक्ति, जो एक प्रारंभिक मुस्लिम थे, पैगंबर (ﷺ) के पास दीन (धर्म) के बारे में अधिक जानने की इच्छा से आए। उस समय पैगंबर (ﷺ) एक कुलीन मक्का के मूर्तिपूजक के साथ चर्चा के बीच में थे, और उसे अपने बुतों को छोड़ने तथा एक सच्चे अल्लाह पर ईमान लाने के लिए समझाने का प्रयास कर रहे थे। अब्दुल्लाह इतने अधीर थे कि उन्होंने कई बार चर्चा में बाधा डाली। पैगंबर (ﷺ) ने त्यौरी चढ़ाई और अपना सारा ध्यान उस व्यक्ति की ओर कर दिया जिससे वे पहले से बात कर रहे थे। यह मक्की सूरह बाद में अवतरित हुई, जिसमें पैगंबर (ﷺ) को बताया गया कि उन्हें उस ईमानदार व्यक्ति पर ध्यान देना चाहिए था जो सीखने के लिए उत्सुक था। इस सूरह के अवतरित होने के बाद, पैगंबर (ﷺ) अब्दुल्लाह का सम्मान करते थे और उन्हें 'वह व्यक्ति जिसके लिए मेरे रब ने मुझे फटकारा' कहकर पुकारते थे। उन्होंने (ﷺ) तो उन्हें कई बार मदीना पर अपने नायब (प्रतिनिधि) के रूप में भी नियुक्त किया। यह सूरह कृतघ्न काफ़िरों को आह्वान करती है कि वे इस बात पर विचार करें कि अल्लाह किस प्रकार धरती से पौधे उगाता है, ताकि वे समझ सकें कि वह किस प्रकार मुर्दों को उनकी क़ब्रों से निकाल सकता है। प्रलय (क़यामत) की भयावहताओं का वर्णन अगली सूरह में जारी रखा गया है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

नबी को एक सबक

1. उसने तेवरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया, 2. केवल इसलिए कि उसके पास एक अंधा व्यक्ति आया। 3. तुम्हें क्या पता, शायद वह पवित्र हो जाए, 4. या वह सचेत हो जाए और नसीहत से लाभ उठाए। 5. और जो बेपरवाह था, 6. तुमने उस पर पूरी तवज्जो दी, 7. हालाँकि आप पर कोई दोष नहीं है यदि वह शुद्ध न होता। 8. लेकिन जो आपके पास लालायित होकर आया, 9. अल्लाह का भय रखते हुए, 10. आप उससे गाफिल थे। 11. हरगिज़ नहीं! यह बेशक एक नसीहत है। 12. पस जो चाहे, इसे याद रखे। 13. यह सम्मानित पृष्ठों में है— 14. अत्यंत प्रतिष्ठित, पवित्र— 15. फ़रिश्ता-लिपिकों के हाथों से, 16. नेक और सदाचारी।
عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓ
١
أَن جَآءَهُ ٱلْأَعْمَىٰ
٢
وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰٓ
٣
أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكْرَىٰٓ
٤
أَمَّا مَنِ ٱسْتَغْنَىٰ
٥
فَأَنتَ لَهُۥ تَصَدَّىٰ
٦
وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ
٧
وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰ
٨
وَهُوَ يَخْشَىٰ
٩
فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ
١٠
كَلَّآ إِنَّهَا تَذْكِرَةٌ
١١
فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ
١٢
فِى صُحُفٍ مُّكَرَّمَةٍ
١٣
مَّرْفُوعَةٍ مُّطَهَّرَةٍۭ
١٤
بِأَيْدِى سَفَرَةٍ
١٥
كِرَامٍۭ بَرَرَةٍ
١٦

सूरह 80 - عَبَسَ (वह तेवर बदला) - आयतें 1-16


क़यामत का इनकार करने वालों को एक नसीहत

17. लानत हो इंसान पर! वह कितना नाशुकरा है! 18. उसने उन्हें किस चीज़ से पैदा किया? 19. उसने उन्हें एक वीर्य-बिंदु से पैदा किया, और उनके विकास का विधान किया। 20. फिर वह उनके लिए मार्ग आसान बनाता है, 21. फिर उन्हें मृत्यु देता है और दफ़न करवाता है। 22. फिर जब वह चाहेगा, वह उन्हें उठाएगा। 23. हरगिज़ नहीं! उन्होंने उसके आदेश का पालन नहीं किया। 24. तो इन्सान अपने भोजन पर विचार करे। 25. कि हम वर्षा को कैसे बहुतायत से बरसाते हैं, 26. और हम भूमि को भली-भाँति चीरते हैं, 27. उसमें अनाज उगाते हैं, 28. और अंगूर और साग-सब्जी, 29. और ज़ैतून और खजूर के पेड़, 30. और घने बाग़ात, 31. और फल और चारा— 32. ये सब तुम्हारे और तुम्हारे जानवरों के लिए रिज़्क़ के तौर पर।
قُتِلَ ٱلْإِنسَـٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥ
١٧
مِنْ أَىِّ شَىْءٍ خَلَقَهُۥ
١٨
مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥ
١٩
ثُمَّ ٱلسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥ
٢٠
ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥ
٢١
ثُمَّ إِذَا شَآءَ أَنشَرَهُۥ
٢٢
كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَآ أَمَرَهُۥ
٢٣
فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦٓ
٢٤
أَنَّا صَبَبْنَا ٱلْمَآءَ صَبًّا
٢٥
ثُمَّ شَقَقْنَا ٱلْأَرْضَ شَقًّا
٢٦
فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبًّا
٢٧
وَعِنَبًا وَقَضْبًا
٢٨
وَزَيْتُونًا وَنَخْلًا
٢٩
وَحَدَآئِقَ غُلْبًا
٣٠
وَفَـٰكِهَةً وَأَبًّا
٣١
مَّتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ
٣٢

सूरह 80 - عَبَسَ (वह तेवर बदला) - आयतें 17-32


छा जाने वाला दिन

33. फिर जब वह सख़्त चीख़ आ जाएगी— 34. उस दिन हर व्यक्ति अपने भाई-बहनों से भागेगा, 35. और अपनी माँ और बाप से, 36. और अपनी जीवनसाथी और बच्चों से। 37. तब तो हर किसी को अपनी ही चिंता काफी होगी। 38. उस दिन कुछ चेहरे चमकते हुए होंगे, 39. हँसते हुए और प्रसन्न होते हुए, 40. जबकि (अन्य) चेहरे धूल से सने होंगे, 41. काले पड़े होंगे— 42. वे ही काफ़िर, महापापी हैं।
فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُ
٣٣
يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ
٣٤
وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ
٣٥
وَصَـٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِ
٣٦
لِكُلِّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍ شَأْنٌ يُغْنِيهِ
٣٧
وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ مُّسْفِرَةٌ
٣٨
ضَاحِكَةٌ مُّسْتَبْشِرَةٌ
٣٩
وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌ
٤٠
تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ
٤١
أُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَفَرَةُ ٱلْفَجَرَةُ
٤٢

सूरह 80 - عَبَسَ (वह तेवर बदला) - आयतें 33-42


Full text of Surah 'Abasa with translation

Surah 'Abasa, verse 1

عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓ
उसने तेवरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया,

Surah 'Abasa, verse 2

أَن جَآءَهُ ٱلْأَعْمَىٰ
केवल इसलिए कि उसके पास एक अंधा व्यक्ति आया।

Surah 'Abasa, verse 3

وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰٓ
तुम्हें क्या पता, शायद वह पवित्र हो जाए,

Surah 'Abasa, verse 4

أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكْرَىٰٓ
या वह सचेत हो जाए और नसीहत से लाभ उठाए।

Surah 'Abasa, verse 5

أَمَّا مَنِ ٱسْتَغْنَىٰ
और जो बेपरवाह था,

Surah 'Abasa, verse 6

فَأَنتَ لَهُۥ تَصَدَّىٰ
तुमने उस पर पूरी तवज्जो दी,

Surah 'Abasa, verse 7

وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ
हालाँकि आप पर कोई दोष नहीं है यदि वह शुद्ध न होता।

Surah 'Abasa, verse 8

وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰ
लेकिन जो आपके पास लालायित होकर आया,

Surah 'Abasa, verse 9

وَهُوَ يَخْشَىٰ
अल्लाह का भय रखते हुए,

Surah 'Abasa, verse 10

فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ
आप उससे गाफिल थे।

Surah 'Abasa, verse 11

كَلَّآ إِنَّهَا تَذْكِرَةٌ
हरगिज़ नहीं! यह बेशक एक नसीहत है।

Surah 'Abasa, verse 12

فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ
पस जो चाहे, इसे याद रखे।

Surah 'Abasa, verse 13

فِى صُحُفٍ مُّكَرَّمَةٍ
यह सम्मानित पृष्ठों में है—

Surah 'Abasa, verse 14

مَّرْفُوعَةٍ مُّطَهَّرَةٍۭ
अत्यंत प्रतिष्ठित, पवित्र—

Surah 'Abasa, verse 15

بِأَيْدِى سَفَرَةٍ
फ़रिश्ता-लिपिकों के हाथों से,

Surah 'Abasa, verse 16

كِرَامٍۭ بَرَرَةٍ
नेक और सदाचारी।

Surah 'Abasa, verse 17

قُتِلَ ٱلْإِنسَـٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥ
लानत हो इंसान पर! वह कितना नाशुकरा है!

Surah 'Abasa, verse 18

مِنْ أَىِّ شَىْءٍ خَلَقَهُۥ
उसने उन्हें किस चीज़ से पैदा किया?

Surah 'Abasa, verse 19

مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥ
उसने उन्हें एक वीर्य-बिंदु से पैदा किया, और उनके विकास का विधान किया।

Surah 'Abasa, verse 20

ثُمَّ ٱلسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥ
फिर वह उनके लिए मार्ग आसान बनाता है,

Surah 'Abasa, verse 21

ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥ
फिर उन्हें मृत्यु देता है और दफ़न करवाता है।

Surah 'Abasa, verse 22

ثُمَّ إِذَا شَآءَ أَنشَرَهُۥ
फिर जब वह चाहेगा, वह उन्हें उठाएगा।

Surah 'Abasa, verse 23

كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَآ أَمَرَهُۥ
हरगिज़ नहीं! उन्होंने उसके आदेश का पालन नहीं किया।

Surah 'Abasa, verse 24

فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦٓ
तो इन्सान अपने भोजन पर विचार करे।

Surah 'Abasa, verse 25

أَنَّا صَبَبْنَا ٱلْمَآءَ صَبًّا
कि हम वर्षा को कैसे बहुतायत से बरसाते हैं,

Surah 'Abasa, verse 26

ثُمَّ شَقَقْنَا ٱلْأَرْضَ شَقًّا
और हम भूमि को भली-भाँति चीरते हैं,

Surah 'Abasa, verse 27

فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبًّا
उसमें अनाज उगाते हैं,

Surah 'Abasa, verse 28

وَعِنَبًا وَقَضْبًا
और अंगूर और साग-सब्जी,

Surah 'Abasa, verse 29

وَزَيْتُونًا وَنَخْلًا
और ज़ैतून और खजूर के पेड़,

Surah 'Abasa, verse 30

وَحَدَآئِقَ غُلْبًا
और घने बाग़ात,

Surah 'Abasa, verse 31

وَفَـٰكِهَةً وَأَبًّا
और फल और चारा—

Surah 'Abasa, verse 32

مَّتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ
ये सब तुम्हारे और तुम्हारे जानवरों के लिए रिज़्क़ के तौर पर।

Surah 'Abasa, verse 33

فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُ
फिर जब वह सख़्त चीख़ आ जाएगी—

Surah 'Abasa, verse 34

يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ
उस दिन हर व्यक्ति अपने भाई-बहनों से भागेगा,

Surah 'Abasa, verse 35

وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ
और अपनी माँ और बाप से,

Surah 'Abasa, verse 36

وَصَـٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِ
और अपनी जीवनसाथी और बच्चों से।

Surah 'Abasa, verse 37

لِكُلِّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍ شَأْنٌ يُغْنِيهِ
तब तो हर किसी को अपनी ही चिंता काफी होगी।

Surah 'Abasa, verse 38

وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ مُّسْفِرَةٌ
उस दिन कुछ चेहरे चमकते हुए होंगे,

Surah 'Abasa, verse 39

ضَاحِكَةٌ مُّسْتَبْشِرَةٌ
हँसते हुए और प्रसन्न होते हुए,

Surah 'Abasa, verse 40

وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌ
जबकि (अन्य) चेहरे धूल से सने होंगे,

Surah 'Abasa, verse 41

تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ
काले पड़े होंगे—

Surah 'Abasa, verse 42

أُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَفَرَةُ ٱلْفَجَرَةُ
वे ही काफ़िर, महापापी हैं।