This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 71 - نُوح

Nûḥ (Surah 71)

نُوح (Noah)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह वर्णन करती है कि नूह (अलैहिस्सलाम) ने 950 वर्षों तक अपनी क़ौम तक संदेश पहुँचाने के लिए कैसे संघर्ष किया (जो इस सूरह में अरबी अक्षरों की कुल संख्या के बराबर है)। उन्होंने उन्हें गोपनीय रूप से और सार्वजनिक रूप से सत्य की ओर बुलाया, अल्लाह की दया और उसकी एकेश्वरता को सिद्ध करने के लिए तार्किक दलीलों का प्रयोग किया। लेकिन उनकी क़ौम इनकार पर अड़ी रही और अंततः जलप्रलय में नष्ट हो गई। पिछली सूरह में अरब के मूर्तिपूजकों की हठधर्मिता और इस सूरह में नूह की क़ौम के लंबे इनकार को इसके विपरीत दिखाया गया है कि कैसे कुछ जिन्न अगली सूरह में सत्य को सुनते ही तुरंत ईमान ले आए। बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम नूह का अपनी क़ौम को आह्वान

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

नूह का अपनी क़ौम से आह्वान

1. निःसंदेह हमने नूह को उसकी क़ौम के पास भेजा (यह कहते हुए कि), "अपनी क़ौम को चेतावनी दो, इससे पहले कि उन पर एक पीड़ादायक अज़ाब आ जाए।" 2. नूह ने घोषणा की, "ऐ मेरी क़ौम! मैं निश्चित रूप से तुम्हारे पास एक स्पष्ट चेतावनी के साथ भेजा गया हूँ:" 3. "अकेले अल्लाह की इबादत करो, उसका भय रखो और मेरी आज्ञा मानो।" 4. वह तुम्हारे गुनाहों को बख्श देगा और तुम्हें एक निर्धारित अवधि तक मोहलत देगा। निःसंदेह, जब अल्लाह का निर्धारित समय आ जाता है, तो उसे टाला नहीं जा सकता, काश तुम जानते!

إِنَّآ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦٓ أَنْ أَنذِرْ قَوْمَكَ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
١
قَالَ يَـٰقَوْمِ إِنِّى لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
٢
أَنِ ٱعْبُدُوا ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ
٣
يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ إِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
٤

Surah 71 - نُوح (नूह) - Verses 1-4


950 साल का प्रचार

5. उसने पुकारा, “ऐ मेरे रब! मैंने निश्चय ही अपनी क़ौम को दिन-रात बुलाया है, 6. लेकिन मेरी पुकारों ने उन्हें और दूर भगा दिया। 7. और जब भी मैं उन्हें आपकी क्षमा के लिए आमंत्रित करता हूँ, तो वे अपनी उँगलियाँ अपने कानों में ठूँस लेते हैं, अपने कपड़ों से स्वयं को ढाँप लेते हैं, (अपने इनकार पर) अड़े रहते हैं और अत्यंत अहंकार करते हैं। 8. फिर मैंने उन्हें अवश्य खुलेआम बुलाया, 9. फिर मैंने उन्हें अवश्य सार्वजनिक रूप से और निजी तौर पर उपदेश दिया, 10. कहो, 'अपने रब से क्षमा माँगो, क्योंकि वह निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील है।' 11. वह तुम पर प्रचुर वर्षा बरसाएगा, 12. और तुम्हें माल और औलाद से नवाज़ेगा, और तुम्हें बाग़ तथा नहरें देगा। 13. तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की अज़मत से नहीं डरते, 14. जबकि उसने तुम्हें यक़ीनन मरहलों में पैदा किया है? 15. क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह ने कैसे सात आसमानों को तह-ब-तह पैदा किया? 16. उनमें चाँद को एक (परावर्तित) प्रकाश और सूरज को एक (चमकता) चिराग बनाया है? 17. अल्लाह ने ही तुम्हें धरती से एक पौधे की तरह उगाया। 18. फिर वह तुम्हें उसी में लौटा देगा, और फिर तुम्हें (सरलता से) दोबारा बाहर निकालेगा। 19. और अल्लाह ने ही तुम्हारे लिए ज़मीन को बिछाया। 20. ताकि तुम उसके चौड़े रास्तों पर चलो।’”

قَالَ رَبِّ إِنِّى دَعَوْتُ قَوْمِى لَيْلًا وَنَهَارًا
٥
فَلَمْ يَزِدْهُمْ دُعَآءِىٓ إِلَّا فِرَارًا
٦
وَإِنِّى كُلَّمَا دَعَوْتُهُمْ لِتَغْفِرَ لَهُمْ جَعَلُوٓا أَصَـٰبِعَهُمْ فِىٓ ءَاذَانِهِمْ وَٱسْتَغْشَوْا ثِيَابَهُمْ وَأَصَرُّوا وَٱسْتَكْبَرُوا ٱسْتِكْبَارًا
٧
ثُمَّ إِنِّى دَعَوْتُهُمْ جِهَارًا
٨
ثُمَّ إِنِّىٓ أَعْلَنتُ لَهُمْ وَأَسْرَرْتُ لَهُمْ إِسْرَارًا
٩
فَقُلْتُ ٱسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ إِنَّهُۥ كَانَ غَفَّارًا
١٠
يُرْسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا
١١
وَيُمْدِدْكُم بِأَمْوَٰلٍ وَبَنِينَ وَيَجْعَل لَّكُمْ جَنَّـٰتٍ وَيَجْعَل لَّكُمْ أَنْهَـٰرًا
١٢
مَّا لَكُمْ لَا تَرْجُونَ لِلَّهِ وَقَارًا
١٣
وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا
١٤
أَلَمْ تَرَوْا كَيْفَ خَلَقَ ٱللَّهُ سَبْعَ سَمَـٰوَٰتٍ طِبَاقًا
١٥
وَجَعَلَ ٱلْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًا وَجَعَلَ ٱلشَّمْسَ سِرَاجًا
١٦
وَٱللَّهُ أَنۢبَتَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ نَبَاتًا
١٧
ثُمَّ يُعِيدُكُمْ فِيهَا وَيُخْرِجُكُمْ إِخْرَاجًا
١٨
وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ بِسَاطًا
١٩
لِّتَسْلُكُوا مِنْهَا سُبُلًا فِجَاجًا
٢٠

Surah 71 - نُوح (नूह) - Verses 5-20


सैलाब

21. (आखिरकार,) नूह ने पुकारा, “ऐ मेरे रब! इन्होंने यकीनन मेरी नाफरमानी पर अड़े रहे हैं, और उन (सरदारों) का अनुसरण किया है जिनकी दौलत और औलाद उन्हें केवल घाटे में ही बढ़ाती है, 22. और जिन्होंने एक भयानक साज़िश रची है, 23. (अपने अनुयायियों को) उकसाते हुए, ‘अपने बुतों को मत छोड़ो—विशेषकर वद्द, सुवाअ, यग़ूस, यऊक़ और नस्र को।’ 24. उन (सरदारों) ने पहले ही बहुतों को गुमराह कर दिया है। अतः (हे मेरे रब), ज़ालिमों को केवल और अधिक भटकने दे।” 25. तो उनके गुनाहों के कारण उन्हें डुबो दिया गया, फिर आग में दाखिल किए गए। और उन्होंने अल्लाह के मुक़ाबले में अपना कोई मददगार न पाया।

قَالَ نُوحٌ رَّبِّ إِنَّهُمْ عَصَوْنِى وَٱتَّبَعُوا مَن لَّمْ يَزِدْهُ مَالُهُۥ وَوَلَدُهُۥٓ إِلَّا خَسَارًا
٢١
وَمَكَرُوا مَكْرًا كُبَّارًا
٢٢
وَقَالُوا لَا تَذَرُنَّ ءَالِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّا وَلَا سُوَاعًا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًا
٢٣
وَقَدْ أَضَلُّوا كَثِيرًا ۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا ضَلَـٰلًا
٢٤
مِّمَّا خَطِيٓـَٔـٰتِهِمْ أُغْرِقُوا فَأُدْخِلُوا نَارًا فَلَمْ يَجِدُوا لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارًا
٢٥

Surah 71 - نُوح (नूह) - Verses 21-25


सैलाब से पहले नूह की दुआ

26. नूह ने दुआ की थी, “ऐ मेरे रब! ज़मीन पर एक भी काफ़िर को न छोड़। 27. क्योंकि यदि तू उनमें से किसी को भी छोड़ देगा, तो वे निश्चय ही तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे, और केवल दुष्ट गुनाहगारों, पक्के काफ़िरों को ही जन्म देंगे।” 28. हे मेरे पालनहार! मुझे, मेरे माता-पिता को, और हर उस व्यक्ति को जो मेरे घर में ईमान के साथ दाखिल हो, और सभी मोमिन पुरुषों और मोमिन स्त्रियों को क्षमा कर दे। और ज़ालिमों को केवल विनाश में ही बढ़ा।

وَقَالَ نُوحٌ رَّبِّ لَا تَذَرْ عَلَى ٱلْأَرْضِ مِنَ ٱلْكَـٰفِرِينَ دَيَّارًا
٢٦
إِنَّكَ إِن تَذَرْهُمْ يُضِلُّوا عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوٓا إِلَّا فَاجِرًا كَفَّارًا
٢٧
رَّبِّ ٱغْفِرْ لِى وَلِوَٰلِدَىَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِىَ مُؤْمِنًا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا تَبَارًۢا
٢٨

Surah 71 - نُوح (नूह) - Verses 26-28


Nûḥ () - अध्याय 71 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा