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असत्य तर्क
35मूर्तिपूजक तर्क करते हैं, 'यदि अल्लाह चाहता, तो न तो हमने और न ही हमारे बाप-दादाओं ने उसके सिवा किसी और की इबादत की होती और न ही
उसकी अनुमति के बिना किसी चीज़ को हराम ठहराया होता।
' उनसे पहले वालों ने भी यही बात कही थी।
लेकिन रसूलों का काम क्या है सिवाय इसके कि वे संदेश को स्पष्ट रूप से पहुँचा दें?
وَقَالَ ٱلَّذِينَ أَشۡرَكُواْ لَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ مَا عَبَدۡنَا مِن دُونِهِۦ مِن شَيۡءٖ نَّحۡنُ وَلَآ ءَابَآؤُنَا وَلَا حَرَّمۡنَا مِن دُونِهِۦ مِن شَيۡءٖۚ كَذَٰلِكَ فَعَلَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ فَهَلۡ عَلَى ٱلرُّسُلِ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ35
वही हश्र
36हमने हर उम्मत में एक रसूल भेजा, यह कहते हुए कि 'अल्लाह की इबादत करो और तागूत से बचो।
' फिर उनमें से कुछ को अल्लाह ने हिदायत दी और कुछ पर गुमराही तय हो गई।
तो ज़मीन में चलो और देखो झुठलाने वालों का क्या अंजाम हुआ।
37हालाँकि, ऐ पैगंबर, तुम उन्हें हिदायत देने की कितनी भी कोशिश करो, अल्लाह उसे हिदायत नहीं देता जिसे वह गुमराह कर दे, और उनके लिए कोई मददगार नहीं
होगा।
وَلَقَدۡ بَعَثۡنَا فِي كُلِّ أُمَّةٖ رَّسُولًا أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ وَٱجۡتَنِبُواْ ٱلطَّٰغُوتَۖ فَمِنۡهُم مَّنۡ هَدَى ٱللَّهُ وَمِنۡهُم مَّنۡ حَقَّتۡ عَلَيۡهِ ٱلضَّلَٰلَةُۚ فَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَٱنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُكَذِّبِينَ36
إِن تَحۡرِصۡ عَلَىٰ هُدَىٰهُمۡ فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي مَن يُضِلُّۖ وَمَا لَهُم مِّن نَّٰصِرِينَ37
मृत्यु के बाद जीवन
38वे अल्लाह की कड़ी कसमें खाते हैं कि अल्लाह मुर्दों को कभी ज़िंदा नहीं करेगा।
ज़रूर करेगा!
यह उसका सच्चा वादा है जिसे वह पूरा करेगा, लेकिन ज़्यादातर लोग नहीं जानते।
39वह ऐसा करेगा ताकि वे उस सच्चाई को जान लें जिस पर वे मतभेद रखते थे, और इनकार करने वालों को पता चल जाए कि वे झूठे थे।
40जब हम किसी चीज़ के होने का इरादा करते हैं, तो हम बस कहते हैं: 'हो जा!
' और वह हो जाती है!
وَأَقۡسَمُواْ بِٱللَّهِ جَهۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡ لَا يَبۡعَثُ ٱللَّهُ مَن يَمُوتُۚ بَلَىٰ وَعۡدًا عَلَيۡهِ حَقّٗا وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ38
لِيُبَيِّنَ لَهُمُ ٱلَّذِي يَخۡتَلِفُونَ فِيهِ وَلِيَعۡلَمَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَنَّهُمۡ كَانُواْ كَٰذِبِينَ39
إِنَّمَا قَوۡلُنَا لِشَيۡءٍ إِذَآ أَرَدۡنَٰهُ أَن نَّقُولَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ40
सब्र करने वालों का इनाम
41और जिन्होंने अल्लाह की राह में हिजरत की, इस बात के बाद कि उन पर ज़ुल्म किया गया, हम उन्हें दुनिया में अवश्य ही एक अच्छा ठिकाना देंगे।
और आख़िरत का बदला तो बहुत ही उत्तम है, काश वे जानते।
42वे ही हैं जिन्होंने सब्र किया और अपने रब पर भरोसा रखा।
وَٱلَّذِينَ هَاجَرُواْ فِي ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مَا ظُلِمُواْ لَنُبَوِّئَنَّهُمۡ فِي ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٗۖ وَلَأَجۡرُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَكۡبَرُۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ41
ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمۡ يَتَوَكَّلُونَ42
पैगंबर फ़रिश्ते नहीं होते
43आपसे पहले भी, हे पैगंबर, हमने केवल ऐसे पुरुष भेजे जिन्हें हमने वही प्रदान किया था।
यदि तुम (मूर्तिपूजक) यह नहीं जानते, तो ज्ञानियों से पूछो।
44हमने उन्हें स्पष्ट प्रमाणों और पवित्र पुस्तकों के साथ भेजा।
और हमने आप पर (हे पैगंबर) यह ज़िक्र (स्मृतिग्रंथ) उतारा है ताकि आप लोगों को वह स्पष्ट रूप से समझा सकें जो उनके लिए अवतरित किया गया है,
और शायद वे विचार करें।
وَمَآ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ إِلَّا رِجَالٗا نُّوحِيٓ إِلَيۡهِمۡۖ فَسَۡٔلُوٓاْ أَهۡلَ ٱلذِّكۡرِ إِن كُنتُمۡ لَا تَعۡلَمُونَ43
بِٱلۡبَيِّنَٰتِ وَٱلزُّبُرِۗ وَأَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ ٱلذِّكۡرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ إِلَيۡهِمۡ وَلَعَلَّهُمۡ يَتَفَكَّرُونَ44
दुष्टों को चेतावनी
45क्या वे लोग जो बुरी योजनाएँ बनाते हैं, इस बात से निश्चिंत हैं कि अल्लाह उन्हें ज़मीन में गर्क नहीं कर देगा?
या वे इस बात से निश्चिंत हैं कि उन पर अज़ाब ऐसे तरीक़ों से नहीं आएगा जिसका वे गुमान भी नहीं कर सकते?
46या वे इस बात से निश्चिंत हैं कि वह उन्हें उस वक़्त नहीं पकड़ेगा जब वे अपने कामों में लगे होंगे, और फिर उनके लिए कोई बचने का
ठिकाना नहीं होगा?
47या वे इस बात से निश्चिंत हैं कि वह उन्हें आहिस्ता-आहिस्ता हलाक नहीं करेगा?
लेकिन तुम्हारा रब यक़ीनन बड़ा मेहरबान और निहायत रहम करने वाला है।
أَفَأَمِنَ ٱلَّذِينَ مَكَرُواْ ٱلسَّئَِّاتِ أَن يَخۡسِفَ ٱللَّهُ بِهِمُ ٱلۡأَرۡضَ أَوۡ يَأۡتِيَهُمُ ٱلۡعَذَابُ مِنۡ حَيۡثُ لَا يَشۡعُرُونَ45
أَوۡ يَأۡخُذَهُمۡ فِي تَقَلُّبِهِمۡ فَمَا هُم بِمُعۡجِزِينَ46
أَوۡ يَأۡخُذَهُمۡ عَلَىٰ تَخَوُّفٖ فَإِنَّ رَبَّكُمۡ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٌ47
सब कुछ अल्लाह के अधीन है।
48क्या वे उन चीज़ों को नहीं देखते जो अल्लाह ने पैदा की हैं, कैसे उनकी परछाइयाँ दाएँ और बाएँ मुड़ती हैं जैसे-जैसे सूरज चलता है, अल्लाह के सामने
पूरी विनम्रता से पूरी तरह से समर्पित होते हुए?
49आकाशों और पृथ्वी में सभी जीव अल्लाह को सजदा करते हैं, और फ़रिश्ते भी जो घमंड नहीं करते।
50वे फ़रिश्ते अपने रब से डरते हैं जो उनके ऊपर है, और वही करते हैं जिसका उन्हें हुक्म दिया जाता है।
أَوَ لَمۡ يَرَوۡاْ إِلَىٰ مَا خَلَقَ ٱللَّهُ مِن شَيۡءٖ يَتَفَيَّؤُاْ ظِلَٰلُهُۥ عَنِ ٱلۡيَمِينِ وَٱلشَّمَآئِلِ سُجَّدٗا لِّلَّهِ وَهُمۡ دَٰخِرُونَ48
وَلِلَّهِۤ يَسۡجُدُۤ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِ مِن دَآبَّةٖ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ وَهُمۡ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ49
٤٩ يَخَافُونَ رَبَّهُم مِّن فَوۡقِهِمۡ وَيَفۡعَلُونَ مَا يُؤۡمَرُونَ ۩50
केवल अल्लाह की इबादत करें
51अल्लाह ने हुक्म दिया है, 'दो ईश्वर मत अपनाओ; वह तो बस एक ही ईश्वर है।
मैं ही वह हूँ जिसका तुम्हें आदर करना चाहिए।
'
52जो कुछ आकाशों और धरती में है, वह उसी का है, और निष्ठावान आज्ञापालन सदैव उसी के लिए है।
तो क्या तुम अल्लाह के सिवा किसी और से डरोगे?
وَقَالَ ٱللَّهُ لَا تَتَّخِذُوٓاْ إِلَٰهَيۡنِ ٱثۡنَيۡنِۖ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ فَإِيَّٰيَ فَٱرۡهَبُونِ51
وَلَهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَلَهُ ٱلدِّينُ وَاصِبًاۚ أَفَغَيۡرَ ٱللَّهِ تَتَّقُونَ52
नाशुक्र इंसान
53तुम्हारे पास जो भी नेमतें हैं, वे अल्लाह की ओर से हैं।
फिर जब तुम्हें कोई तकलीफ़ पहुँचती है, तो तुम उसी को पुकारते हो मदद के लिए।
54फिर जैसे ही वह तुमसे वह तकलीफ़ दूर कर देता है, तुममें से एक गिरोह दूसरों को अपने रब का शरीक ठहराने लगता है,
55ताकि हमारी नेमतों का कुफ्र करें।
तो मजे कर लो - तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा।
وَمَا بِكُم مِّن نِّعۡمَةٖ فَمِنَ ٱللَّهِۖ ثُمَّ إِذَا مَسَّكُمُ ٱلضُّرُّ فَإِلَيۡهِ تَجَۡٔرُونَ53
ثُمَّ إِذَا كَشَفَ ٱلضُّرَّ عَنكُمۡ إِذَا فَرِيقٞ مِّنكُم بِرَبِّهِمۡ يُشۡرِكُونَ54
لِيَكۡفُرُواْ بِمَآ ءَاتَيۡنَٰهُمۡۚ فَتَمَتَّعُواْ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ55
मूर्तियों को चढ़ावा
56और वे उस रिज़्क़ में से, जो हमने उन्हें दिया है, उन 'मूर्तियों' के लिए एक हिस्सा निकालते हैं, जो कुछ नहीं जानतीं।
अल्लाह की क़सम!
तुमसे इन झूठों के बारे में यक़ीनन सवाल किया जाएगा।
وَيَجۡعَلُونَ لِمَا لَا يَعۡلَمُونَ نَصِيبٗا مِّمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡۗ تَٱللَّهِ لَتُسَۡٔلُنَّ عَمَّا كُنتُمۡ تَفۡتَرُونَ56
अल्लाह की बेटियाँ?
57और उन्होंने अल्लाह के लिए बेटियाँ गढ़ लीं - वह पाक है!
- उसके विपरीत जो वे अपने लिए चाहते हैं।
58जब उनमें से किसी को बेटी की खुशखबरी दी जाती है, तो उसका चेहरा काला पड़ जाता है और वह क्रोध से भर जाता है।
59वह लोगों से छिपता फिरता है उस बुरी खबर के कारण जो उसे मिली है।
क्या वह उसे अपमान के साथ रखे, या उसे मिट्टी में ज़िंदा दफ़न कर दे?
कितना बुरा है उनका निर्णय!
60सभी बुरे गुण उन लोगों के लिए हैं जो परलोक को झुठलाते हैं, जबकि सर्वोत्तम गुण अल्लाह के लिए हैं।
और वह सर्वशक्तिमान, तत्वदर्शी है।
وَيَجۡعَلُونَ لِلَّهِ ٱلۡبَنَٰتِ سُبۡحَٰنَهُۥ وَلَهُم مَّا يَشۡتَهُونَ57
وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِٱلۡأُنثَىٰ ظَلَّ وَجۡهُهُۥ مُسۡوَدّٗا وَهُوَ كَظِيمٞ58
يَتَوَٰرَىٰ مِنَ ٱلۡقَوۡمِ مِن سُوٓءِ مَا بُشِّرَ بِهِۦٓۚ أَيُمۡسِكُهُۥ عَلَىٰ هُونٍ أَمۡ يَدُسُّهُۥ فِي ٱلتُّرَابِۗ أَلَا سَآءَ مَا يَحۡكُمُونَ59
لِلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ مَثَلُ ٱلسَّوۡءِۖ وَلِلَّهِ ٱلۡمَثَلُ ٱلۡأَعۡلَىٰۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ60

छोटी कहानी
- •
यह 1960 के दशक में ट्यूनीशिया में घटी एक सच्ची कहानी है।
एक युवा विद्वान बाज़ार जाता था और लोगों को नमाज़ के लिए मस्जिद में आमंत्रित करता था।
बहुत कम लोग उसके साथ जाने को तैयार होते थे।
एक दिन, उसने लगभग 100 लोगों से बात की और केवल एक आदमी उसके साथ नमाज़ पढ़ने आया।
जैसे ही उस आदमी ने मस्जिद में प्रवेश किया, नमाज़ी नाराज़ हो गए क्योंकि उन्हें उसके मुँह से शराब की गंध आ रही थी।
उन्होंने विद्वान से पूछा कि वह ऐसे व्यक्ति को मस्जिद में क्यों लाए, और विद्वान ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि वह आदमी नशे में था।
इमाम ने नरमी से उस आदमी से जाने और अगले दिन जब वह ताज़ा हो तब वापस आने को कहा, लेकिन उस आदमी ने मना कर दिया और
कहा कि वह सचमुच नमाज़ पढ़ना चाहता है।
अंततः, उन्होंने उसे उनके साथ मग़रिब की नमाज़ पढ़ने दी, लेकिन उन्होंने उससे कहा कि वह बिलकुल पीछे अकेले खड़ा रहे।
नमाज़ खत्म होने के बाद और कुछ लोगों के जाने लगने पर, वह आदमी अभी भी सज्दे में था।
लोगों ने उसे बताने की कोशिश की कि नमाज़ खत्म हो गई थी, तभी उन्हें पता चला कि वह आदमी सज्दे में ही मर गया था।
इमाम और दूसरे दोनों उस आदमी पर अल्लाह की रहमत के कारण रोने लगे।
- •
आयत 61 के अनुसार, अल्लाह बहुत दयालु और रहमदिल है।
यदि लोग गुनाह करते हैं तो वह उन्हें तुरंत सज़ा नहीं देता।
इसके बजाय, वह उन्हें तौबा करने और उसकी ओर लौटने के कई मौके देता है।
हालाँकि, यदि कोई तौबा किए बिना मर जाता है, तो क़यामत के दिन कोई दूसरा मौका नहीं दिया जाएगा।

अनुग्रह ११) तौबा के लिए मोहलत देना
61यदि अल्लाह लोगों को उनके कुकर्मों के लिए तत्काल दंडित करना चाहता, तो वह धरती पर एक भी जीव को बाकी न छोड़ता।
लेकिन वह उन्हें एक निर्धारित अवधि तक विलंबित करता है।
जब उनका समय पूरा हो जाता है, तो वे उसे एक पल के लिए भी टाल नहीं सकते और न ही उसे आगे बढ़ा सकते हैं।
وَلَوۡ يُؤَاخِذُ ٱللَّهُ ٱلنَّاسَ بِظُلۡمِهِم مَّا تَرَكَ عَلَيۡهَا مِن دَآبَّةٖ وَلَٰكِن يُؤَخِّرُهُمۡ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمّٗىۖ فَإِذَا جَآءَ أَجَلُهُمۡ لَا يَسۡتَٔۡخِرُونَ سَاعَةٗ وَلَا يَسۡتَقۡدِمُونَ61
खोखली उम्मीदें
62वे अल्लाह के बारे में वह कहते हैं जिससे वे स्वयं घृणा करते हैं, फिर भी उनकी ज़बानें यह झूठ कहने की जुर्रत करती हैं कि उन्हें सबसे
उत्तम प्रतिफल मिलेगा।
निःसंदेह, उन्हें केवल आग ही मिलेगी, जहाँ उन्हें अकेला छोड़ दिया जाएगा।
وَيَجۡعَلُونَ لِلَّهِ مَا يَكۡرَهُونَۚ وَتَصِفُ أَلۡسِنَتُهُمُ ٱلۡكَذِبَ أَنَّ لَهُمُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ لَا جَرَمَ أَنَّ لَهُمُ ٱلنَّارَ وَأَنَّهُم مُّفۡرَطُونَ62
दुष्ट कौमें
63अल्लाह की क़सम!
हमने तुमसे पहले भी कई उम्मतों में रसूल भेजे हैं, ऐ पैगंबर, लेकिन शैतान ने उनके बुरे कर्मों को उनके लिए सुशोभित कर दिया।
अब, आज वह इन काफ़िरों का संरक्षक है, और उन्हें एक दर्दनाक अज़ाब मिलेगा।
64हमने तुम पर यह किताब केवल इसलिए नाज़िल की है ताकि तुम उनके लिए वह स्पष्ट कर दो जिसमें वे मतभेद करते थे, और उन लोगों के लिए
मार्गदर्शन और रहमत के रूप में जो ईमान लाते हैं।
تَٱللَّهِ لَقَدۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَىٰٓ أُمَمٖ مِّن قَبۡلِكَ فَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَهُوَ وَلِيُّهُمُ ٱلۡيَوۡمَ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيم63
وَمَآ أَنزَلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ إِلَّا لِتُبَيِّنَ لَهُمُ ٱلَّذِي ٱخۡتَلَفُواْ فِيهِ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٗ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ64
नेमत १२) बारिश
65और अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है, जिससे वह धरती को उसकी मृत्यु के बाद जीवन प्रदान करता है।
निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए एक निशानी है जो सुनते हैं।
وَٱللَّهُ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَحۡيَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَآۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَسۡمَعُونَ65
नेमत १३) दूध और फल
66और तुम्हारे लिए चौपायों में निश्चय ही एक शिक्षा है: उनके पेटों से, पचे हुए भोजन और रक्त के बीच से, हम तुम्हें शुद्ध दूध देते हैं, पीने
में स्वादिष्ट।
67और खजूरों और अंगूरों के फलों से तुम नशीले पेय और अच्छा भोजन बनाते हो।
निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए एक निशानी है जो समझते हैं।
وَإِنَّ لَكُمۡ فِي ٱلۡأَنۡعَٰمِ لَعِبۡرَةٗۖ نُّسۡقِيكُم مِّمَّا فِي بُطُونِهِۦ مِنۢ بَيۡنِ فَرۡثٖ وَدَمٖ لَّبَنًا خَالِصٗا سَآئِغٗا لِّلشَّٰرِبِينَ66
وَمِن ثَمَرَٰتِ ٱلنَّخِيلِ وَٱلۡأَعۡنَٰبِ تَتَّخِذُونَ مِنۡهُ سَكَرٗا وَرِزۡقًا حَسَنًاۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ67

ज्ञान की बातें
- •
आयत 68-69 में, अल्लाह मधुमक्खियों का उल्लेख अपनी अनेक नेमतों में से एक के रूप में करते हैं।
मधुमक्खियाँ ग्रह के लिए और हमारे अस्तित्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
मधुमक्खियों और शहद के बारे में कुछ रोचक तथ्य निम्नलिखित हैं।
- •
मधुमक्खियाँ 30 मिलियन वर्षों से अस्तित्व में हैं।
मधुमक्खियाँ दुनिया के एकमात्र ऐसे कीट हैं जो ऐसा भोजन बनाते हैं जिसे मनुष्य खा सकते हैं।
- •
दुनिया के अधिकांश फूल वाले पौधे फल और बीज पैदा करने में सक्षम होने के लिए परागण के लिए मधुमक्खियों पर निर्भर करते हैं।
मधुमक्खियों के बिना, हम जीवित नहीं रह सकते।
- •
केवल मादा श्रमिक मधुमक्खियाँ ही अमृत इकट्ठा करने और शहद बनाने के लिए जिम्मेदार होती हैं।
यह दिलचस्प है कि आयत 68-69 में अल्लाह केवल मादा मधुमक्खियों को निर्देश देते हैं।
- •
एक पाउंड शहद के लिए पर्याप्त अमृत इकट्ठा करने के लिए, मधुमक्खियों को कम से कम 2 मिलियन फूलों का दौरा करना चाहिए और दुनिया भर में एक
बार से अधिक की दूरी तय करनी चाहिए।
एक औसत श्रमिक मधुमक्खी अपने जीवनकाल में लगभग 1/12 चम्मच शहद बनाती है।
- •
• कार्यशील मौसम के दौरान एक मधुमक्खी का औसत जीवनकाल लगभग 3-6 सप्ताह होता है।
मधुमक्खियों के दो पेट होते हैं—एक खाने के लिए और एक अमृत जमा करने के लिए।
- •
• केवल मादा मधुमक्खियों के पास डंक होते हैं।
यदि कोई मधुमक्खी अपने डंक का उपयोग करती है, तो वह मर जाएगी।
शहद विभिन्न रंगों और स्वादों में आता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि अमृत किस फूल से एकत्र किया गया था।
- •
• शहद इतना अम्लीय होता है कि यह इसमें बैक्टीरिया और फफूंद को बढ़ने से रोकता है, इसलिए इसका उपयोग घावों और जले हुए स्थानों को ठीक करने
में मदद के लिए किया जा सकता है।
मिस्र की कुछ प्राचीन कब्रों में शहद पाया गया था और यह अभी भी खाने योग्य था!
एक मधुमक्खी एक घंटे में 24 किमी उड़ सकती है।
इसके पंख प्रति सेकंड 200 बार या प्रति मिनट 12,000 बार फड़फड़ाते हैं।

नियमत १४) मधुमक्खियाँ और शहद
68और आपके रब ने मधुमक्खियों को इल्हाम (प्रेरणा) किया कि अपने छत्ते पहाड़ों में, पेड़ों में और उन चीज़ों में बनाओ जो लोग बनाते हैं,
69और हर प्रकार के फलों का रस चूमो, और अपने रब के आसान किए हुए रास्तों पर चलो।
उनके पेट से विभिन्न रंगों का एक पेय निकलता है, जिसमें लोगों के लिए शिफ़ा (आरोग्य) है।
निश्चित रूप से इसमें उन लोगों के लिए एक निशानी है जो चिंतन करते हैं।
وَأَوۡحَىٰ رَبُّكَ إِلَى ٱلنَّحۡلِ أَنِ ٱتَّخِذِي مِنَ ٱلۡجِبَالِ بُيُوتٗا وَمِنَ ٱلشَّجَرِ وَمِمَّا يَعۡرِشُونَ68
ثُمَّ كُلِي مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ فَٱسۡلُكِي سُبُلَ رَبِّكِ ذُلُلٗاۚ يَخۡرُجُ مِنۢ بُطُونِهَا شَرَابٞ مُّخۡتَلِفٌ أَلۡوَٰنُهُۥ فِيهِ شِفَآءٞ لِّلنَّاسِۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ69
अल्लाह की कुदरत
70अल्लाह ने तुम्हें पैदा किया, फिर वही तुम्हें मौत देता है।
और तुम में से कुछ ऐसे हैं जिनकी उम्र बुढ़ापे की सबसे कमज़ोर अवस्था तक बढ़ा दी जाती है ताकि बहुत कुछ जानने के बाद वे कुछ भी
न जानें।
निःसंदेह अल्लाह बड़ा जानने वाला, बड़ी कुदरत वाला है।
وَٱللَّهُ خَلَقَكُمۡ ثُمَّ يَتَوَفَّىٰكُمۡۚ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰٓ أَرۡذَلِ ٱلۡعُمُرِ لِكَيۡ لَا يَعۡلَمَ بَعۡدَ عِلۡمٖ شَيًۡٔاۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٞ قَدِيرٞ70
फ़ज़्ल १५) संसाधन
71और अल्लाह ने तुम में से बाज़ को बाज़ पर रोज़ी में फ़ज़ीलत दी है।
तो जिन को फ़ज़ीलत दी गई है, वे अपना माल अपने गुलामों को नहीं देते कि वे उसमें उनके बराबर हो जाएँ।
तो क्या वे अल्लाह की नेमतों का इनकार करते हैं?
وَٱللَّهُ فَضَّلَ بَعۡضَكُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٖ فِي ٱلرِّزۡقِۚ فَمَا ٱلَّذِينَ فُضِّلُواْ بِرَآدِّي رِزۡقِهِمۡ عَلَىٰ مَا مَلَكَتۡ أَيۡمَٰنُهُمۡ فَهُمۡ فِيهِ سَوَآءٌۚ أَفَبِنِعۡمَةِ ٱللَّهِ يَجۡحَدُونَ71
नियमत १६) परिवार
72और अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जाति के जोड़े बनाए हैं, और उनसे तुम्हें संतान और पोते-पोतियाँ दी हैं।
और उसने तुम्हें अच्छी, पाक रोज़ी दी है।
तो क्या वे 'शिर्क करने वाले' फिर भी असत्य पर विश्वास करते हैं और अल्लाह के एहसानों का इनकार करते हैं?
وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّنۡ أَنفُسِكُمۡ أَزۡوَٰجٗا وَجَعَلَ لَكُم مِّنۡ أَزۡوَٰجِكُم بَنِينَ وَحَفَدَةٗ وَرَزَقَكُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَٰتِۚ أَفَبِٱلۡبَٰطِلِ يُؤۡمِنُونَ وَبِنِعۡمَتِ ٱللَّهِ هُمۡ يَكۡفُرُونَ72
अल्लाह या शक्तिहीन बुत्त?
73फिर भी वे अल्लाह के सिवा उन बुतों की इबादत करते हैं जो उन्हें आसमानों या ज़मीन से कुछ भी देने पर क़ादिर नहीं, और न ही वे
किसी चीज़ पर क़ादिर हैं।
74तो अल्लाह के लिए शरीक न ठहराओ; बेशक अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।
75अल्लाह एक मिसाल देता है: एक गुलाम जो अपने दम पर कुछ भी नहीं कर सकता, उसके मुक़ाबले एक आज़ाद शख़्स जिसे हमने अच्छी रोज़ी दी, जिसमें से
वह गुप्त और खुले तौर पर ख़र्च करता है।
क्या वे बराबर हैं?
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है।
बल्कि, उनमें से ज़्यादातर नहीं जानते।
76अल्लाह दो आदमियों की भी एक मिसाल देता है: उनमें से एक गूंगा है और किसी चीज़ पर भी क़ादिर नहीं।
वह अपने मालिक पर बोझ है।
जहाँ कहीं भी उसे भेजा जाए, वह कोई भलाई नहीं लाता।
क्या वह व्यक्ति उसके बराबर हो सकता है जो इंसाफ़ का हुक्म देता है और सीधी राह पर है?
وَيَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَمۡلِكُ لَهُمۡ رِزۡقٗا مِّنَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ شَيۡٔٗا وَلَا يَسۡتَطِيعُونَ73
فَلَا تَضۡرِبُواْ لِلَّهِ ٱلۡأَمۡثَالَۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ وَأَنتُمۡ لَا تَعۡلَمُونَ74
ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًا عَبۡدٗا مَّمۡلُوكٗا لَّا يَقۡدِرُ عَلَىٰ شَيۡءٖ وَمَن رَّزَقۡنَٰهُ مِنَّا رِزۡقًا حَسَنٗا فَهُوَ يُنفِقُ مِنۡهُ سِرّٗا وَجَهۡرًاۖ هَلۡ يَسۡتَوُۥنَۚ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ75
وَضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلٗا رَّجُلَيۡنِ أَحَدُهُمَآ أَبۡكَمُ لَا يَقۡدِرُ عَلَىٰ شَيۡءٖ وَهُوَ كَلٌّ عَلَىٰ مَوۡلَىٰهُ أَيۡنَمَا يُوَجِّههُّ لَا يَأۡتِ بِخَيۡرٍ هَلۡ يَسۡتَوِي هُوَ وَمَن يَأۡمُرُ بِٱلۡعَدۡلِ وَهُوَ عَلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيم76
How to study Surah An-Naḥl with children
Use this children's lesson as a guided path: read the short explanation, look at the Arabic verse, listen to related recitation, and return to the full surah when your child is ready for more detail.
Parents can review one section at a time, ask the child to repeat the main idea, and then continue with the next part or a nearby surah. This keeps the lesson connected with Quran reading, audio, and daily practice.