Surah 15
Volume 3

The Stone Valley

الحِجْر

الحِجر

Surah Al-Ḥijr for kids content

LEARNING POINTS

सीखने के बिंदु

  • मूर्तिपूजक सत्य का उपहास करते हैं, लेकिन क़यामत के दिन उन्हें इसका पछतावा होगा।

  • क़ुरआन अल्लाह द्वारा नाज़िल किया गया था और वह हमेशा इसकी रक्षा करेगा।

  • अल्लाह ही महान सृष्टिकर्ता है जो अपनी सृष्टि का ध्यान रखता है।

  • शैतान ने अल्लाह के साथ घमंड से पेश आया और उन लोगों को गुमराह करने का वादा किया जो उसका अनुसरण करते हैं।

  • यह सूरह उन क़ौमों की कहानियाँ बताती है जो अतीत में नष्ट हो गई थीं, मक्का के मुशरिकों के लिए एक चेतावनी के तौर पर।

  • नबी (ﷺ) को सब्र करने और सब्र तथा नमाज़ में सुकून पाने के लिए कहा गया है।

Illustration

काफ़िरों को चेतावनी

1अलिफ़-लाम-रा।

ये किताब की आयतें हैं - स्पष्ट क़ुरआन।

2वह दिन आएगा जब काफ़िर चाहेंगे कि उन्होंने इस्लाम क़बूल कर लिया होता।

3तो उन्हें खाने दो और मज़े करने दो और झूठी उम्मीद में खोए रहने दो; वे जल्द ही देखेंगे।

4हमने कभी किसी बस्ती को एक निर्धारित समय के बिना तबाह नहीं किया।

5कोई भी क़ौम अपनी नियत अवधि को न तो आगे बढ़ा सकती है और न ही पीछे हटा सकती है।

الٓرۚ تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱلۡكِتَٰبِ وَقُرۡءَانٖ مُّبِين1

رُّبَمَا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡ كَانُواْ مُسۡلِمِينَ2

ذَرۡهُمۡ يَأۡكُلُواْ وَيَتَمَتَّعُواْ وَيُلۡهِهِمُ ٱلۡأَمَلُۖ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ3

وَمَآ أَهۡلَكۡنَا مِن قَرۡيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٞ مَّعۡلُومٞ4

مَّا تَسۡبِقُ مِنۡ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسۡتَ‍ٔۡخِرُونَ5

मक्कावासी पैगंबर का उपहास करते हैं

6फिर भी वे कहते हैं, 'ऐ वो जिसने ज़िक्र प्राप्त करने का दावा किया है!

तुम तो निश्चित रूप से पागल हो!

'

7तुम हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं लाते, अगर तुम्हारी बात सच है?

8लेकिन हम फ़रिश्तों को केवल हक़ के साथ उतारते हैं, और तब इन लोगों को मोहलत नहीं दी जाएगी।

9बेशक हमने ही ज़िक्र को नाज़िल किया है, और हम ही उसकी हिफ़ाज़त करने वाले हैं।

وَقَالُواْ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِي نُزِّلَ عَلَيۡهِ ٱلذِّكۡرُ إِنَّكَ لَمَجۡنُونٞ6

لَّوۡ مَا تَأۡتِينَا بِٱلۡمَلَٰٓئِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّٰدِقِينَ7

مَا نُنَزِّلُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةَ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ وَمَا كَانُوٓاْ إِذٗا مُّنظَرِينَ8

إِنَّا نَحۡنُ نَزَّلۡنَا ٱلذِّكۡرَ وَإِنَّا لَهُۥ لَحَٰفِظُونَ9

निरंतर कुफ्र

10हमने आपसे पहले, ऐ पैगंबर, पिछली कौमों में रसूल भेजे थे,

11लेकिन उनके पास कोई रसूल ऐसा नहीं आया जिसका मज़ाक न उड़ाया गया हो।

12इसी तरह हम मुजरिमों के दिलों में कुफ्र को दाखिल करते हैं।

13वे इस 'कुरान' पर ईमान नहीं लाएँगे, हालाँकि उनसे पहले हलाक किए गए लोगों की मिसालें बहुत ज़्यादा हैं।

14और अगर हम उनके लिए आसमान का कोई दरवाज़ा खोल दें, जिससे वे चढ़ते ही चले जाएँ,

15फिर भी वे कहते, 'हमारी आँखों को निश्चित रूप से धोखा दिया गया है!

बल्कि, हम पर अवश्य जादू कर दिया गया है।

'

وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ فِي شِيَعِ ٱلۡأَوَّلِينَ10

وَمَا يَأۡتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ11

كَذَٰلِكَ نَسۡلُكُهُۥ فِي قُلُوبِ ٱلۡمُجۡرِمِينَ12

لَا يُؤۡمِنُونَ بِهِۦ وَقَدۡ خَلَتۡ سُنَّةُ ٱلۡأَوَّلِينَ13

وَلَوۡ فَتَحۡنَا عَلَيۡهِم بَابٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَظَلُّواْ فِيهِ يَعۡرُجُونَ14

لَقَالُوٓاْ إِنَّمَا سُكِّرَتۡ أَبۡصَٰرُنَا بَلۡ نَحۡنُ قَوۡمٞ مَّسۡحُورُونَ15

अल्लाह की शक्ति

16निश्चय ही हमने आकाश में नक्षत्र बनाए हैं और उसे देखने वालों के लिए सुसज्जित किया है।

17और हमने उसे हर धिक्कारे हुए शैतान से सुरक्षित रखा है।

18परन्तु जो कोई छिपकर सुनने का प्रयास करता है, उसे एक जलता हुआ तारा खदेड़ता है।

19और धरती को हमने बिछाया है और उस पर अटल पहाड़ रखे हैं, और उसमें हर चीज़ एक निश्चित संतुलन में उगाई है।

20और हमने उसमें तुम्हारे लिए और दूसरों के लिए, जिनकी तुम रोज़ी नहीं देते, जीविका के सभी साधन बनाए हैं।

21हमारे पास कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसके असीमित भंडार न हों, और हम उसे केवल एक निर्धारित मात्रा में ही उतारते हैं।

22हम हवाओं को उपजाऊ बनाने के लिए भेजते हैं, और आकाश से तुम्हारे पीने के लिए पानी बरसाते हैं।

तुम उसके स्रोतों के मालिक नहीं हो।

23निःसंदेह हम ही जीवन देते हैं और मृत्यु देते हैं।

और अंततः हर चीज़ हमारी ही है।

24हम उन सबको भली-भाँति जानते हैं जो तुमसे पहले गुज़र चुके हैं और जो तुम्हारे बाद आएँगे।

25निःसंदेह तुम्हारा रब ही उन्हें इकट्ठा करेगा।

वह वास्तव में पूर्ण हिकमत और ज्ञान रखता है।

وَلَقَدۡ جَعَلۡنَا فِي ٱلسَّمَآءِ بُرُوجٗا وَزَيَّنَّٰهَا لِلنَّٰظِرِينَ16

وَحَفِظۡنَٰهَا مِن كُلِّ شَيۡطَٰنٖ رَّجِيمٍ17

إِلَّا مَنِ ٱسۡتَرَقَ ٱلسَّمۡعَ فَأَتۡبَعَهُۥ شِهَابٞ مُّبِينٞ18

وَٱلۡأَرۡضَ مَدَدۡنَٰهَا وَأَلۡقَيۡنَا فِيهَا رَوَٰسِيَ وَأَنۢبَتۡنَا فِيهَا مِن كُلِّ شَيۡءٖ مَّوۡزُون19

وَجَعَلۡنَا لَكُمۡ فِيهَا مَعَٰيِشَ وَمَن لَّسۡتُمۡ لَهُۥ بِرَٰزِقِينَ20

وَإِن مِّن شَيۡءٍ إِلَّا عِندَنَا خَزَآئِنُهُۥ وَمَا نُنَزِّلُهُۥٓ إِلَّا بِقَدَرٖ مَّعۡلُوم21

وَأَرۡسَلۡنَا ٱلرِّيَٰحَ لَوَٰقِحَ فَأَنزَلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَسۡقَيۡنَٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمۡ لَهُۥ بِخَٰزِنِينَ22

وَإِنَّا لَنَحۡنُ نُحۡيِۦ وَنُمِيتُ وَنَحۡنُ ٱلۡوَٰرِثُونَ23

وَلَقَدۡ عَلِمۡنَا ٱلۡمُسۡتَقۡدِمِينَ مِنكُمۡ وَلَقَدۡ عَلِمۡنَا ٱلۡمُسۡتَ‍ٔۡخِرِينَ24

وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحۡشُرُهُمۡۚ إِنَّهُۥ حَكِيمٌ عَلِيمٞ25

BACKGROUND STORY

पृष्ठभूमि की कहानी

  • जैसा कि हमने सूरह 38 में उल्लेख किया है, शैतान को आग से बनाया गया था, और आदम (अ.

    स.

    ) को मिट्टी से बनाया गया था।

    शैतान एक जिन्न है, फ़रिश्ता नहीं (18:50)।

    जब अल्लाह ने आदम (अ.

    स.

    ) को बनाया, तो उसने फ़रिश्तों से कहा कि वह उसे ज़मीन पर एक अधिकारी के रूप में रखने वाला है।

    चूंकि शैतान अल्लाह की बहुत इबादत करता था, वह हमेशा उन फ़रिश्तों के साथ रहता था जिन्हें हर समय अल्लाह की इबादत करने का काम सौंपा गया था।

    जब अल्लाह ने उन फ़रिश्तों को आदम (अ.

    स.

    ) को सजदा करने का आदेश दिया, तो शैतान उनके साथ खड़ा था।

    उन सब ने सजदा किया, सिवाय शैतान के।

    उसने विरोध किया, "मैं उससे बेहतर हूँ—मुझे आग से बनाया गया है और उसे मिट्टी से बनाया गया है।

    मैं उसे सजदा क्यों करूँ?

    " तो जब शैतान ने अल्लाह की नाफ़रमानी की, उसने फ़रिश्तों के बीच अपनी जगह खो दी और उसके अहंकार के कारण उसे अल्लाह की रहमत से निकाल

    दिया गया।

    {इमाम इब्न कसीर}

WORDS OF WISDOM

ज्ञान की बातें

  • कोई पूछ सकता है, "कुरान में क्यों कहा गया है कि अल्लाह ने आदम (अ.

    स.

    ) को एक जगह धूल से और दूसरी जगहों पर कीचड़ या मिट्टी से बनाया?

    " कुरान के अनुसार, आदम (अ.

    स.

    ) को पहले धूल से बनाया गया था, जो बाद में कीचड़ में बदल गई, और फिर एक इंसान के रूप में विकसित होने से पहले मिट्टी में

    बदल गई।

    यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई बेकर रोटी बनाने की प्रक्रिया का वर्णन करता है।

    वह कह सकता है कि उसने रोटी अनाज से बनाई, या वह कह सकता है कि उसने इसे आटे से बनाया, या फिर गुंथे हुए आटे (लोई) से

    बनाया।

    ये सभी बातें सच हैं क्योंकि ये एक ही प्रक्रिया के अलग-अलग चरण हैं।

आदम की रचना

26और हमने तो इंसान को सड़ी हुई कीचड़ से बनी हुई सूखी मिट्टी से पैदा किया।

27और जिन्न को हमने इससे पहले धुएँ से रहित आग से पैदा किया था।

28और याद करो, जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों से कहा, 'मैं सड़ी हुई कीचड़ से बनी हुई सूखी मिट्टी से एक बशर पैदा करने वाला हूँ।

29तो जब मैं उसे ठीक से बना लूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ, तो उसके सामने सजदा करना।

'

وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ مِن صَلۡصَٰلٖ مِّنۡ حَمَإٖ مَّسۡنُون26

وَٱلۡجَآنَّ خَلَقۡنَٰهُ مِن قَبۡلُ مِن نَّارِ ٱلسَّمُومِ27

وَإِذۡ قَالَ رَبُّكَ لِلۡمَلَٰٓئِكَةِ إِنِّي خَٰلِقُۢ بَشَرٗا مِّن صَلۡصَٰلٖ مِّنۡ حَمَإٖ مَّسۡنُون28

فَإِذَا سَوَّيۡتُهُۥ وَنَفَخۡتُ فِيهِ مِن رُّوحِي فَقَعُواْ لَهُۥ سَٰجِدِينَ29

WORDS OF WISDOM

ज्ञान की बातें

  • कोई पूछ सकता है, "अगर शैतान इतना बुरा है, तो अल्लाह ने उसे बनाया ही क्यों?

    " हमें यह समझना होगा कि अल्लाह सबसे बुद्धिमान है; वह हमेशा अपने अनंत ज्ञान और हिकमत (बुद्धिमत्ता) के आधार पर काम करता है।

    कभी-कभी हम उसकी हिकमत को समझते हैं, कभी-कभी नहीं।

    इमाम इब्न अल-कय्यिम के अनुसार (अपनी किताब 'शिफा' अल-अलील' 'बीमार का इलाज' में), शायद अल्लाह ने शैतान को इसलिए बनाया ताकि:

  • • हमें विपरीत चीज़ों को बनाकर अपनी रचनात्मक शक्तियों को दिखाए।

    उदाहरण के लिए, उसने दिन और रात, गर्मी और सर्दी, फ़रिश्ते और शैतान आदि बनाए।

  • • हमें यह साबित करे कि कौन अपनी इबादत (पूजा) में वास्तव में सच्चा है और कौन नहीं।

    हर कोई एक अच्छा मुसलमान होने का दावा कर सकता है।

    केवल शैतान की आज़माइश (परीक्षा) ही यह दिखाएगी कि कौन सच्चा है और कौन नहीं।

    इसी तरह, समुद्र तट पर खड़ा हर कोई यह दावा कर सकता है कि वह अच्छा तैराक है।

    पानी में होना ही एकमात्र ऐसी चीज़ है जो यह दिखा सकती है कि कौन अच्छा तैराक है और कौन नहीं।

  • • हमें विनम्र बनाए ताकि हम अहंकारी न बनें।

    इब्लीस के पास बहुत ज्ञान था और उसने अल्लाह की बहुत इबादत की थी।

    इस बात ने उसे बहुत घमंडी बना दिया।

    विद्वान कहते हैं कि एक ऐसा गुनाह (पाप) जो आपको विनम्र बनाता है और आपको तौबा (पश्चाताप) कराता है, उस नेकी (अच्छे काम) से बेहतर है जो आपको

    अहंकारी बनाता है।

WORDS OF WISDOM

ज्ञान की बातें

  • कोई पूछ सकता है, "आयत 39 में, शैतान लोगों को गुमराह करने का वादा करता है।

    वह ऐसा कैसे करता है?

    " शैतान आमतौर पर लोगों को संदेहों (उदाहरण के लिए, यह पूछकर कि अल्लाह को किसने बनाया और लोग काबा की सात बार परिक्रमा क्यों करते हैं) के

    साथ-साथ इच्छाओं (जैसे पैसे, अधिकार आदि का लालच) से धोखा देता है।

    उसकी कुछ चालें निम्नलिखित हैं: बुरी चीज़ों को अच्छा दिखाना और हराम को हलाल के रूप में पेश करना।

  • वह लोगों को यह विश्वास दिलाता है कि वे अभी युवा हैं ताकि वे जो चाहें कर सकें और शायद बाद में तौबा कर लें।

    वह लोगों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि वे दूसरों से बेहतर हैं।

    वह गुनाहगारों को अल्लाह की रहमत से उम्मीद खोने पर मजबूर करता है।

    वह एक व्यक्ति को परिणामों के बारे में सोचे बिना गुनाह में जल्दबाजी करने पर मजबूर करता है।

    वह एक व्यक्ति को गुस्से में कोई निर्णय लेने या कार्रवाई करने पर मजबूर करता है, जो ऐसी चीज़ है जिसका उन्हें जीवन भर पछतावा हो सकता है।

    वह लोगों को उनके अच्छे कर्मों का सवाब खोने का कारण बनता है, उदाहरण के लिए, जब लोग नमाज़ पढ़ते हैं और फिर धोखा देते हैं, जब वे

    सदक़ा देते हैं और फिर दिखावा करते हैं, और इसी तरह।

    वह धीरे-धीरे एक व्यक्ति को गुनाह में फंसाता है।

    उदाहरण के लिए, शुरुआत में किसी व्यक्ति को बैंक लूटने के लिए राजी करना मुश्किल होगा।

    इसलिए शैतान उस व्यक्ति को एक पेंसिल चुराने के लिए राजी करके शुरुआत करेगा, फिर $10, फिर $1,000।

    बाद में, बैंक लूटना ठीक लगेगा।

  • Illustration
  • 4:76 में, अल्लाह हमें बताता है कि शैतान की चालें कमज़ोर हैं।

    7:200 के अनुसार, हमें शैतान की चालों से अल्लाह की पनाह मांगनी चाहिए।

शैतान का अहंकार

30तो फ़रिश्तों ने सब के सब सजदा किया।

31सिवाय इब्लीस के, जिसने दूसरों के साथ सजदा करने से इनकार कर दिया।

32अल्लाह ने फ़रमाया, 'ऐ इब्लीस!

तुझे क्या हुआ कि तूने सजदा करने वालों के साथ सजदा नहीं किया?

'

33उसने कहा, 'मुझे शोभा नहीं देता कि मैं ऐसे मनुष्य को सजदा करूँ जिसे तूने सूखी खनखनाती मिट्टी से बनाया है, जो सड़ी हुई कीचड़ से ढाली गई

थी।

'

34अल्लाह ने फ़रमाया, 'तो यहाँ से निकल जा, क्योंकि तू धिक्कारा हुआ है।

'

35और तुम यकीनन क़यामत के दिन तक हलाक हो।

فَسَجَدَ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ كُلُّهُمۡ أَجۡمَعُونَ30

إِلَّآ إِبۡلِيسَ أَبَىٰٓ أَن يَكُونَ مَعَ ٱلسَّٰجِدِينَ31

قَالَ يَٰٓإِبۡلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ ٱلسَّٰجِدِينَ32

قَالَ لَمۡ أَكُن لِّأَسۡجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقۡتَهُۥ مِن صَلۡصَٰلٖ مِّنۡ حَمَإٖ مَّسۡنُونٖ33

قَالَ فَٱخۡرُجۡ مِنۡهَا فَإِنَّكَ رَجِي34

وَإِنَّ عَلَيۡكَ ٱللَّعۡنَةَ إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلدِّينِ35

शैतान की याचना

36शैतान ने अर्ज की, 'ऐ मेरे रब!

तो मुझे उस दिन तक मोहलत दे जिस दिन लोग उठाए जाएँगे।

'

37अल्लाह ने फरमाया, 'तुझे मोहलत दी जाएगी

38एक मुकर्रर दिन तक।

'"

39शैतान ने कहा, 'ऐ मेरे रब!

चूंकि तूने मुझे गुमराह किया है, तो मैं यकीनन उन्हें ज़मीन पर बहकाऊँगा और उन सबको गुमराह करूँगा,

40सिवाय तेरे मुखलिस बंदों के।

'"

41अल्लाह ने फ़रमाया, 'यह एक वचन है जिसे मुझे निभाना है:

42मेरे निष्ठावान बंदों पर तुम्हारा कोई अधिकार नहीं होगा, सिवाय उन गुमराहों के जो तुम्हारा अनुसरण करेंगे।

43और वे सब जहन्नम में पहुँचेंगे।

44उसके सात द्वार हैं, प्रत्येक द्वार के लिए उनमें से एक समूह नियुक्त किया जाएगा।

قَالَ رَبِّ فَأَنظِرۡنِيٓ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ36

قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ ٱلۡمُنظَرِينَ37

إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡوَقۡتِ ٱلۡمَعۡلُومِ38

قَالَ رَبِّ بِمَآ أَغۡوَيۡتَنِي لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَأُغۡوِيَنَّهُمۡ أَجۡمَعِينَ39

إِلَّا عِبَادَكَ مِنۡهُمُ ٱلۡمُخۡلَصِينَ40

قَالَ هَٰذَا صِرَٰطٌ عَلَيَّ مُسۡتَقِيمٌ41

إِنَّ عِبَادِي لَيۡسَ لَكَ عَلَيۡهِمۡ سُلۡطَٰنٌ إِلَّا مَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلۡغَاوِينَ42

وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوۡعِدُهُمۡ أَجۡمَعِينَ43

لَهَا سَبۡعَةُ أَبۡوَٰبٖ لِّكُلِّ بَابٖ مِّنۡهُمۡ جُزۡءٞ مَّقۡسُومٌ44

मोमिन जन्नत में

45निश्चय ही, ईमान वाले बाग़ों और चश्मों के बीच में होंगे,

46उनसे कहा जाएगा, 'सलामती और अमन के साथ दाखिल हो जाओ।

'

47हम उनके दिलों से जो कुछ भी द्वेष होगा, उसे निकाल देंगे।

वे भाई-भाई बनकर तख्तों पर एक-दूसरे के सामने बैठे होंगे।

48वहाँ उन्हें न तो कोई तकलीफ़ पहुँचेगी और न ही उन्हें वहाँ से निकाला जाएगा।

إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي جَنَّٰتٖ وَعُيُونٍ45

ٱدۡخُلُوهَا بِسَلَٰمٍ ءَامِنِينَ46

وَنَزَعۡنَا مَا فِي صُدُورِهِم مِّنۡ غِلٍّ إِخۡوَٰنًا عَلَىٰ سُرُرٖ مُّتَقَٰبِلِينَ47

لَا يَمَسُّهُمۡ فِيهَا نَصَبٞ وَمَا هُم مِّنۡهَا بِمُخۡرَجِينَ48

अल्लाह की रहमत और अज़ाब

49मेरे बंदों को (ऐ पैग़म्बर) बता दो कि मैं ही बेशक ग़फ़ूर और रहीम हूँ,

50और यह कि मेरा अज़ाब ही बेशक निहायत दर्दनाक है।

نَبِّئۡ عِبَادِيٓ أَنِّيٓ أَنَا ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ49

وَأَنَّ عَذَابِي هُوَ ٱلۡعَذَابُ ٱلۡأَلِيمُ50

इब्राहीम से फ़रिश्तों की मुलाक़ात

51और उन्हें (ऐ पैगंबर) इब्राहीम के मेहमानों के बारे में सुनाओ।

52जब वे उसके पास आए, तो उन्होंने 'सलाम' कहा।

उसने कहा, 'हमें तुमसे सचमुच डर लगता है।

'

53उन्होंने कहा, 'डरो मत!

हम तुम्हें एक ज्ञानी बेटे की खुशखबरी देते हैं।

'

54उसने आश्चर्य से कहा, 'तुम मुझे इस बुढ़ापे में यह खुशखबरी कैसे दे सकते हो?

यह कितनी अनहोनी बात है!

'

55उन्होंने जवाब दिया, 'हम तुम्हें पूरी सच्चाई के साथ खुशखबरी देते हैं, तो निराश मत हो।

'

56उसने कहा, 'अपने रब की रहमत से केवल गुमराह लोग ही निराश होते हैं।

'

57उसने आगे कहा, 'ऐ फ़रिश्तो, तुम्हारा क्या प्रयोजन है?

'

58उन्होंने जवाब दिया, 'हमें दरअसल एक दुष्ट कौम के विरुद्ध भेजा गया है।

'

59लूत के परिवार को तो हम अवश्य बचा लेंगे,

60सिवाय उसकी पत्नी के।

हमने उसे तबाह होने वालों में शुमार किया है।

وَنَبِّئۡهُمۡ عَن ضَيۡفِ إِبۡرَٰهِيمَ51

إِذۡ دَخَلُواْ عَلَيۡهِ فَقَالُواْ سَلَٰمٗا قَالَ إِنَّا مِنكُمۡ وَجِلُونَ52

قَالُواْ لَا تَوۡجَلۡ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَٰمٍ عَلِيم53

قَالَ أَبَشَّرۡتُمُونِي عَلَىٰٓ أَن مَّسَّنِيَ ٱلۡكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ54

قَالُواْ بَشَّرۡنَٰكَ بِٱلۡحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلۡقَٰنِطِينَ55

قَالَ وَمَن يَقۡنَطُ مِن رَّحۡمَةِ رَبِّهِۦٓ إِلَّا ٱلضَّآلُّونَ56

قَالَ فَمَا خَطۡبُكُمۡ أَيُّهَا ٱلۡمُرۡسَلُونَ57

قَالُوٓاْ إِنَّآ أُرۡسِلۡنَآ إِلَىٰ قَوۡمٖ مُّجۡرِمِينَ58

إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمۡ أَجۡمَعِينَ59

إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُۥ قَدَّرۡنَآ إِنَّهَا لَمِنَ ٱلۡغَٰبِرِينَ60

लूत के पास फ़रिश्तों का आना

61फिर जब दूत लूत के घर वालों के पास आए,

62उन्होंने कहा, 'तुम अवश्य अजनबी हो!

'

63उन्होंने जवाब दिया, 'बल्कि हम वह अज़ाब लेकर आए हैं जिसके बारे में वे झुठलाने वाले संदेह करते रहे हैं।

'

64हम तुम्हारे पास सत्य के साथ आए हैं, और हम सचमुच गंभीर हैं।

65तो अपने परिवार के साथ रात के पिछले पहर में निकलो, और उनके पीछे-पीछे चलो।

तुम में से कोई पीछे मुड़कर न देखे, और वहीं जाओ जहाँ तुम्हें जाने का हुक्म दिया गया है।

66हमने उसे यह फ़ैसला वह्यी किया: 'वे गुनाहगार सुबह होते ही तबाह कर दिए जाएँगे।

'

فَلَمَّا جَآءَ ءَالَ لُوطٍ ٱلۡمُرۡسَلُونَ61

قَالَ إِنَّكُمۡ قَوۡمٞ مُّنكَرُونَ62

قَالُواْ بَلۡ جِئۡنَٰكَ بِمَا كَانُواْ فِيهِ يَمۡتَرُونَ63

وَأَتَيۡنَٰكَ بِٱلۡحَقِّ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ64

فَأَسۡرِ بِأَهۡلِكَ بِقِطۡعٖ مِّنَ ٱلَّيۡلِ وَٱتَّبِعۡ أَدۡبَٰرَهُمۡ وَلَا يَلۡتَفِتۡ مِنكُمۡ أَحَدٞ وَٱمۡضُواْ حَيۡثُ تُؤۡمَرُونَ65

وَقَضَيۡنَآ إِلَيۡهِ ذَٰلِكَ ٱلۡأَمۡرَ أَنَّ دَابِرَ هَٰٓؤُلَآءِ مَقۡطُوعٞ مُّصۡبِحِينَ66

लूत की क़ौम की तबाही

67और शहर के लोग दौड़ते हुए आए।

68लूत ने कहा, 'ये मेरे मेहमान हैं, अतः मुझे शर्मिंदा न करो।

69अल्लाह से डरो, और मुझे अपमानित न करो।

'

70उन्होंने कहा, 'क्या हमने तुम्हें किसी की भी हिमायत करने से मना नहीं किया था?

'

71उसने जवाब दिया, 'ऐ मेरी क़ौम!

ये मेरी बेटियाँ हैं, तो उनसे विवाह कर लो यदि तुम ऐसा करना चाहते हो।

'

72तुम्हारी जान की क़सम, ऐ पैग़म्बर, वे अपनी वासना में पूरी तरह अंधे हो गए थे।

73तो उन्हें सूर्योदय के समय एक ज़बरदस्त चीख़ ने आ पकड़ा।

74और हमने उन बस्तियों को उलट दिया और उन पर पकी हुई मिट्टी के पत्थर बरसाए।

75निश्चय ही इसमें समझदार लोगों के लिए निशानियाँ हैं।

76उनके खंडहर आज भी रास्ते के किनारे मौजूद हैं।

77बेशक इसमें उन लोगों के लिए एक आयत है जो ईमान लाते हैं।

وَجَآءَ أَهۡلُ ٱلۡمَدِينَةِ يَسۡتَبۡشِرُونَ67

٦٧ قَالَ إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ ضَيۡفِي فَلَا تَفۡضَحُونِ68

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَلَا تُخۡزُونِ69

قَالُوٓاْ أَوَ لَمۡ نَنۡهَكَ عَنِ ٱلۡعَٰلَمِينَ70

قَالَ هَٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِيٓ إِن كُنتُمۡ فَٰعِلِينَ71

لَعَمۡرُكَ إِنَّهُمۡ لَفِي سَكۡرَتِهِمۡ يَعۡمَهُونَ72

فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلصَّيۡحَةُ مُشۡرِقِينَ73

فَجَعَلۡنَا عَٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِمۡ حِجَارَةٗ مِّن سِجِّيلٍ74

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّلۡمُتَوَسِّمِينَ75

وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٖ مُّقِيمٍ76

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ77

शुऐब की क़ौम

78और वन के निवासी भी सदा अन्याय करते थे,

79अतः हमने उन्हें सज़ा दी।

दोनों कौमों के खंडहर एक जाने-पहचाने मार्ग पर आज भी मौजूद हैं।

وَإِن كَانَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡأَيۡكَةِ لَظَٰلِمِينَ78

فَٱنتَقَمۡنَا مِنۡهُمۡ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٖ مُّبِينٖ79

क़ौम सालेह

80निःसंदेह, हिज्र घाटी के लोगों ने भी रसूलों को झुठलाया।

81हमने उन्हें अपनी आयतें दीं, किंतु वे उनसे मुँह फेर गए।

82वे पहाड़ों में अपने घर तराशते थे, निश्चिंत होकर।

83किंतु सुबह होते ही उन्हें 'प्रचंड' गर्जना ने आ घेरा,

84और जो कुछ उन्होंने प्राप्त किया था, वह उनके काम न आया।

وَلَقَدۡ كَذَّبَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡحِجۡرِ ٱلۡمُرۡسَلِينَ80

وَءَاتَيۡنَٰهُمۡ ءَايَٰتِنَا فَكَانُواْ عَنۡهَا مُعۡرِضِينَ81

وَكَانُواْ يَنۡحِتُونَ مِنَ ٱلۡجِبَالِ بُيُوتًا ءَامِنِينَ82

فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلصَّيۡحَةُ مُصۡبِحِينَ83

فَمَآ أَغۡنَىٰ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ84

नबी को नसीहत

85हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, किसी उद्देश्य के बिना नहीं बनाया है।

और क़यामत की घड़ी निश्चित रूप से आने वाली है, अतः भली प्रकार क्षमा करो।

86निःसंदेह तुम्हारा रब ही महासृष्टिकर्ता, सर्वज्ञ है।

87हमने तुम्हें निश्चय ही सात दोहराई जाने वाली आयतें और महान क़ुरआन दिया है।

88उन थोड़ी सी सुख-सुविधाओं पर अपनी निगाहें न उठाओ जो हमने उन इनकार करने वालों में से कुछ को दी हैं, और न उन पर दुखी हो।

और ईमान वालों के प्रति विनम्र रहो।

وَمَا خَلَقۡنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَآ إِلَّا بِٱلۡحَقِّۗ وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَأٓتِيَةٞۖ فَٱصۡفَحِ ٱلصَّفۡحَ ٱلۡجَمِيلَ85

إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلۡخَلَّٰقُ ٱلۡعَلِيمُ86

وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَٰكَ سَبۡعٗا مِّنَ ٱلۡمَثَانِي وَٱلۡقُرۡءَانَ ٱلۡعَظِيمَ87

لَا تَمُدَّنَّ عَيۡنَيۡكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعۡنَا بِهِۦٓ أَزۡوَٰجٗا مِّنۡهُمۡ وَلَا تَحۡزَنۡ عَلَيۡهِمۡ وَٱخۡفِضۡ جَنَاحَكَ لِلۡمُؤۡمِنِينَ88

नबी को और नसीहत

89और कहो, 'निश्चय ही मैं एक स्पष्ट चेतावनी के साथ भेजा गया हूँ।

'

90'एक चेतावनी' वैसी ही जैसी हमने उन लोगों की ओर भेजी थी जो 'धर्म-ग्रंथों में से' चुनते और छोड़ते हैं,

91जो 'अब कुरान के कुछ हिस्सों को स्वीकार करते हैं और दूसरों को अस्वीकार करते हैं।

'

92तो तुम्हारे रब की क़सम!

हम निश्चय ही उन सब से प्रश्न करेंगे

93जो वे किया करते थे उसके बारे में।

94तो जो तुम्हें हुक्म दिया गया है, उसे स्पष्ट रूप से घोषित करो, और मूर्ति-पूजकों से मुँह मोड़ लो।

95निश्चित रूप से हम उन लोगों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं जो तुम्हारा उपहास करते हैं,

96जो अल्लाह के साथ दूसरों को पूज्य ठहराते हैं।

वे जल्द ही देखेंगे।

وَقُلۡ إِنِّيٓ أَنَا ٱلنَّذِيرُ ٱلۡمُبِينُ89

كَمَآ أَنزَلۡنَا عَلَى ٱلۡمُقۡتَسِمِينَ90

ٱلَّذِينَ جَعَلُواْ ٱلۡقُرۡءَانَ عِضِينَ91

فَوَرَبِّكَ لَنَسۡ‍َٔلَنَّهُمۡ أَجۡمَعِينَ92

عَمَّا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ93

فَٱصۡدَعۡ بِمَا تُؤۡمَرُ وَأَعۡرِضۡ عَنِ ٱلۡمُشۡرِكِينَ94

إِنَّا كَفَيۡنَٰكَ ٱلۡمُسۡتَهۡزِءِينَ95

ٱلَّذِينَ يَجۡعَلُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَۚ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ96

Illustration
SIDE STORY

छोटी कहानी

  • एक प्रसिद्ध मुस्लिम वैज्ञानिक थे जिनका नाम इब्न सीना था।

    उनकी चिकित्सा पर लिखी किताबें सदियों तक यूरोपीय स्कूलों में पढ़ाई जाती थीं।

    उन्होंने 2 मेमनों को 2 अलग-अलग पिंजरों में रखकर एक दिलचस्प प्रयोग किया।

    दोनों मेमने एक ही उम्र और वजन के थे, और उन्हें एक ही भोजन दिया जाता था।

    सभी परिस्थितियाँ समान थीं।

    हालांकि, उन्होंने एक भेड़िये को एक अलग पिंजरे में रखा, जहाँ केवल एक मेमना भेड़िये को देख और सुन सकता था, लेकिन दूसरा मेमना नहीं।

    अगले कुछ हफ्तों में, वह मेमना जो हमेशा भेड़िये को देखता और सुनता था, चिड़चिड़ा और बेचैन हो गया और उसका वजन कम होने लगा।

    आखिरकार, यह मेमना मर गया, जबकि दूसरा मेमना जिसने भेड़िये को नहीं देखा या सुना था, वह बहुत स्वस्थ था।

    हालांकि भेड़िये ने उस बेचारे मेमने को कुछ नहीं किया, लेकिन मेमने द्वारा अनुभव किए गए डर और तनाव के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

    लेकिन दूसरा मेमना जिसने इस डरावने अनुभव से नहीं गुजरा, उसने शांतिपूर्ण जीवन जिया और एक मजबूत शरीर विकसित किया।

    इस प्रयोग में, इब्न सीना ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और तनाव तथा चिंता पैदा करने वाली चीजों से दूर रहने का प्रदर्शन किया।

How to study Surah Al-Ḥijr with children

Use this children's lesson as a guided path: read the short explanation, look at the Arabic verse, listen to related recitation, and return to the full surah when your child is ready for more detail.

Parents can review one section at a time, ask the child to repeat the main idea, and then continue with the next part or a nearby surah. This keeps the lesson connected with Quran reading, audio, and daily practice.