Yâ-Sĩn - Yâ-Sĩn
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या-सीन। क़सम है हिकमत से भरपूर क़ुरआन की! आप (ऐ नबी) बेशक रसूलों में से हैं।
यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

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या-सीन। क़सम है हिकमत से भरपूर क़ुरआन की! आप (ऐ नबी) बेशक रसूलों में से हैं।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।
1. या-सीन।
2. क़सम है हिकमत से भरपूर क़ुरआन की!
3. आप (ऐ नबी) बेशक रसूलों में से हैं।
4. सीधे मार्ग पर।
5. यह अवतरण है सर्वशक्तिमान, अत्यंत दयालु की ओर से,
6. ताकि तुम ऐसे लोगों को आगाह करो जिनके पूर्वजों को आगाह नहीं किया गया था, और इसलिए वे ग़ाफ़िल हैं।
7. उनमें से अधिकांश पर (अज़ाब का) फ़ैसला पहले ही वाजिब हो चुका है, क्योंकि वे कभी ईमान नहीं लाएँगे।
8. हमने उनकी गर्दनों में ठोड़ियों तक तौक़ डाल दिए हैं, जिससे उनके सर ऊपर को खिंच गए हैं।
9. और हमने उनके आगे एक दीवार खड़ी कर दी है और उनके पीछे एक दीवार खड़ी कर दी है और उन्हें ढाँप दिया है, ताकि वे देख न
सकें।
يسٓ١
وَٱلْقُرْءَانِ ٱلْحَكِيمِ٢
إِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ٣
عَلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ٤
تَنزِيلَ ٱلْعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ٥
لِتُنذِرَ قَوْمًا مَّآ أُنذِرَ ءَابَآؤُهُمْ فَهُمْ غَـٰفِلُونَ٦
لَقَدْ حَقَّ ٱلْقَوْلُ عَلَىٰٓ أَكْثَرِهِمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ٧
إِنَّا جَعَلْنَا فِىٓ أَعْنَـٰقِهِمْ أَغْلَـٰلًا فَهِىَ إِلَى ٱلْأَذْقَانِ فَهُم مُّقْمَحُونَ٨
وَجَعَلْنَا مِنۢ بَيْنِ أَيْدِيهِمْ سَدًّا وَمِنْ خَلْفِهِمْ سَدًّا فَأَغْشَيْنَـٰهُمْ فَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ٩
सूरह 36 - يٰس (यासीन) - आयतें 1-9