यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 36 - Yâ-Sĩn

Yâ-Sĩn (सूरह 36)

Yâ-Sĩn (Yâ-Sĩn)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचयStoriesUnseen

यह मक्की सूरह क़ुरआन के दैवीय स्वरूप और उद्देश्य पर बल देती है। अरब के मुशरिकों को पूर्ववर्ती इनकार करने वालों के अंजाम की याद दिलाई जाती है और शैतान का अनुसरण करने, क़यामत का इनकार करने, क़ुरआन को झुठलाने और पैगंबर (ﷺ) को 'एक कवि' कहकर ठुकराने के लिए उनकी निंदा की जाती है। अगली सूरह की तरह, अल्लाह की रचना के अद्भुत उदाहरण दिए गए हैं ताकि मृतकों को फिर से जीवित करने की उनकी क्षमता को सिद्ध किया जा सके। अल्लाह के नाम पर—जो अत्यंत दयावान, परम कृपालु है

Yâ-Sĩn - Yâ-Sĩn

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या-सीन। क़सम है हिकमत से भरपूर क़ुरआन की! आप (ऐ नबी) बेशक रसूलों में से हैं।