This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 67 - المُلْك

Al-Mulk (Surah 67)

المُلْك (All Authority)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह इस बात पर बल देती है कि अल्लाह की असीम शक्ति उसकी परिपूर्ण रचना के माध्यम से प्रकट होती है। जो लोग अल्लाह का इनकार करते हैं और पुनरुत्थान (क़यामत) को झुठलाते हैं, वे जहन्नम में पछताएंगे, जबकि जो अपने रब का भय रखते हैं, उन्हें जन्नत में भरपूर प्रतिफल मिलेगा। अल्लाह के पूर्ण प्रभुत्व को झूठे पूज्यों की शक्तिहीनता के विपरीत दर्शाया गया है। इस सूरह में (आयतों 20, 21 और 30) और अगली सूरह (68:17-33) में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि अल्लाह के अज़ाब (यातना) से कोई बचाव नहीं है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

जीवन एक परीक्षा है।

1. बड़ा बरकत वाला है वह जिसके हाथ में (समस्त) राज है, और वह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है। 2. जिसने मृत्यु और जीवन को पैदा किया ताकि वह तुम्हें परखे कि तुममें से कौन कर्मों में सबसे अच्छा है। और वह सर्वशक्तिमान, अत्यंत क्षमाशील है।

تَبَـٰرَكَ ٱلَّذِى بِيَدِهِ ٱلْمُلْكُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
١
ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلْمَوْتَ وَٱلْحَيَوٰةَ لِيَبْلُوَكُمْ أَيُّكُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْغَفُورُ
٢

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 1-2


अल्लाह की परिपूर्ण रचना।

3. जिसने सात आसमान बनाए, एक के ऊपर एक। तुम रहमान की रचना में कोई कमी नहीं देखोगे। तो फिर से देखो: क्या तुम्हें कोई कमी नज़र आती है? 4. फिर बार-बार देखो, तुम्हारी निगाह नाकाम और थकी हुई लौटेगी। 5. और यक़ीनन हमने दुनिया के आसमान को (सितारों जैसे) चिराग़ों से सजाया, और उन्हें शैतानों को पत्थर मारने का ज़रिया बनाया, और उनके लिए हमने भड़कती आग का अज़ाब भी तैयार कर रखा है।

ٱلَّذِى خَلَقَ سَبْعَ سَمَـٰوَٰتٍ طِبَاقًا ۖ مَّا تَرَىٰ فِى خَلْقِ ٱلرَّحْمَـٰنِ مِن تَفَـٰوُتٍ ۖ فَٱرْجِعِ ٱلْبَصَرَ هَلْ تَرَىٰ مِن فُطُورٍ
٣
ثُمَّ ٱرْجِعِ ٱلْبَصَرَ كَرَّتَيْنِ يَنقَلِبْ إِلَيْكَ ٱلْبَصَرُ خَاسِئًا وَهُوَ حَسِيرٌ
٤
وَلَقَدْ زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِمَصَـٰبِيحَ وَجَعَلْنَـٰهَا رُجُومًا لِّلشَّيَـٰطِينِ ۖ وَأَعْتَدْنَا لَهُمْ عَذَابَ ٱلسَّعِيرِ
٥

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 3-5


काफ़िरों का प्रतिफल।

6. जिन्होंने अपने रब का इनकार किया, उनके लिए जहन्नम का अज़ाब है, और वह क्या ही बुरा ठिकाना है! 7. जब उन्हें उसमें डाला जाएगा, तो वे उसकी गर्जना सुनेंगे जब वह खौल रहा होगा, 8. क्रोध से लगभग फट पड़ेगा। जब भी कोई समूह उसमें डाला जाएगा, तो उसके रखवाले उनसे पूछेंगे, "क्या तुम्हारे पास कोई डराने वाला नहीं आया था?" 9. वे जवाब देंगे, "हाँ, हमारे पास एक डराने वाला आया था, लेकिन हमने झुठलाया और कहा, 'अल्लाह ने कुछ भी नाज़िल नहीं किया है। तुम तो बहुत गुमराह हो।'" 10. और वे विलाप करेंगे, "काश हमने सुना होता और बुद्धि का प्रयोग किया होता, तो हम इस धधकती आग (जहन्नम) के निवासियों में से न होते!" 11. और इस प्रकार वे अपने पापों को स्वीकार करेंगे। तो धधकती आग (जहन्नम) के निवासियों का नाश हो!

وَلِلَّذِينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ عَذَابُ جَهَنَّمَ ۖ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
٦
إِذَآ أُلْقُوا فِيهَا سَمِعُوا لَهَا شَهِيقًا وَهِىَ تَفُورُ
٧
تَكَادُ تَمَيَّزُ مِنَ ٱلْغَيْظِ ۖ كُلَّمَآ أُلْقِىَ فِيهَا فَوْجٌ سَأَلَهُمْ خَزَنَتُهَآ أَلَمْ يَأْتِكُمْ نَذِيرٌ
٨
قَالُوا بَلَىٰ قَدْ جَآءَنَا نَذِيرٌ فَكَذَّبْنَا وَقُلْنَا مَا نَزَّلَ ٱللَّهُ مِن شَىْءٍ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا فِى ضَلَـٰلٍ كَبِيرٍ
٩
وَقَالُوا لَوْ كُنَّا نَسْمَعُ أَوْ نَعْقِلُ مَا كُنَّا فِىٓ أَصْحَـٰبِ ٱلسَّعِيرِ
١٠
فَٱعْتَرَفُوا بِذَنۢبِهِمْ فَسُحْقًا لِّأَصْحَـٰبِ ٱلسَّعِيرِ
١١

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 6-11


मोमिनों का प्रतिफल।

12. निःसंदेह, वे लोग जो अपने रब से बिना देखे डरते हैं, उनके लिए क्षमा और एक महान प्रतिफल है।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُم بِٱلْغَيْبِ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ كَبِيرٌ
١٢

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 12-12


प्रश्न 1) क्या अल्लाह अपनी रचना को नहीं जानता?

13. चाहे तुम अपनी बात गुप्त रखो या उसे ज़ाहिर करो—वह भली-भाँति जानता है कि दिलों में क्या है। 14. वह अपनी ही सृष्टि को कैसे न जानेगा? वही तो है जो अत्यंत सूक्ष्म, सर्वज्ञ है। 15. वही तो है जिसने तुम्हारे लिए धरती को बिछाया, तो उसके किनारों पर चलो और उसके दिए हुए रिज़्क से खाओ। और उसी की ओर है लौटना।

وَأَسِرُّوا قَوْلَكُمْ أَوِ ٱجْهَرُوا بِهِۦٓ ۖ إِنَّهُۥ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
١٣
أَلَا يَعْلَمُ مَنْ خَلَقَ وَهُوَ ٱللَّطِيفُ ٱلْخَبِيرُ
١٤
هُوَ ٱلَّذِى جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ ذَلُولًا فَٱمْشُوا فِى مَنَاكِبِهَا وَكُلُوا مِن رِّزْقِهِۦ ۖ وَإِلَيْهِ ٱلنُّشُورُ
١٥

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 13-15


प्रश्न 2) क्या तुम अल्लाह की पहुँच से बाहर हो?

16. क्या तुम इस बात से बेखौफ हो कि जो आकाश में है, वह तुम्हें ज़मीन में धँसा न देगा, जबकि वह (ज़मीन) ज़ोर से काँप रही हो? 17. या क्या तुम इस बात से बेखौफ हो कि जो आकाश में है, वह तुम पर पत्थरों का तूफ़ान न बरसाएगा? तब तुम्हें मालूम होगा कि मेरी चेतावनी कैसी थी! 18. और निश्चय ही उनसे पहले वालों ने भी झुठलाया, तो मेरी पकड़ कितनी कठोर थी!

ءَأَمِنتُم مَّن فِى ٱلسَّمَآءِ أَن يَخْسِفَ بِكُمُ ٱلْأَرْضَ فَإِذَا هِىَ تَمُورُ
١٦
أَمْ أَمِنتُم مَّن فِى ٱلسَّمَآءِ أَن يُرْسِلَ عَلَيْكُمْ حَاصِبًا ۖ فَسَتَعْلَمُونَ كَيْفَ نَذِيرِ
١٧
وَلَقَدْ كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
١٨

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 16-18


प्रश्न 3) क्या तुम अल्लाह की शक्ति नहीं देखते?

19. क्या उन्होंने अपने ऊपर पक्षियों को नहीं देखा, पंख फैलाते और सिकोड़ते हुए? रहमान (परम कृपालु) के सिवा उन्हें कोई नहीं थामे रखता। निश्चय ही वह हर चीज़ को देखने वाला है। 20. बल्कि कौन सी ऐसी (कमजोर) सेना है जो रहमान (परम कृपालु) के सिवा तुम्हारी सहायता करेगी? निश्चय ही काफ़िर केवल धोखे में हैं। 21. या कौन है जो तुम्हें रोज़ी देगा यदि वह अपनी रोज़ी रोक ले? बल्कि वे सरकशी और (सत्य से) विमुखता में अड़े हुए हैं।

أَوَلَمْ يَرَوْا إِلَى ٱلطَّيْرِ فَوْقَهُمْ صَـٰٓفَّـٰتٍ وَيَقْبِضْنَ ۚ مَا يُمْسِكُهُنَّ إِلَّا ٱلرَّحْمَـٰنُ ۚ إِنَّهُۥ بِكُلِّ شَىْءٍۭ بَصِيرٌ
١٩
أَمَّنْ هَـٰذَا ٱلَّذِى هُوَ جُندٌ لَّكُمْ يَنصُرُكُم مِّن دُونِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ۚ إِنِ ٱلْكَـٰفِرُونَ إِلَّا فِى غُرُورٍ
٢٠
أَمَّنْ هَـٰذَا ٱلَّذِى يَرْزُقُكُمْ إِنْ أَمْسَكَ رِزْقَهُۥ ۚ بَل لَّجُّوا فِى عُتُوٍّ وَنُفُورٍ
٢١

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 19-21


प्रश्न 4) क्या मोमिन और काफ़िर बराबर हैं?

22. कौन ज़्यादा हिदायत याफ्ता है: वह जो औंधे मुँह घिसटता है या वह जो सीधे रास्ते पर सीधा खड़ा होकर चलता है?

أَفَمَن يَمْشِى مُكِبًّا عَلَىٰ وَجْهِهِۦٓ أَهْدَىٰٓ أَمَّن يَمْشِى سَوِيًّا عَلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ
٢٢

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 22-22


प्रश्न 5) तुम्हें किसने पैदा किया?

23. कहो, "(ऐ पैग़म्बर,) वही है जिसने तुम्हें अस्तित्व में लाया और तुम्हें सुनने की शक्ति, देखने की शक्ति और बुद्धि दी। (फिर भी) तुम बहुत कम शुक्र अदा करते हो।" 24. और कहो, "वही है जिसने तुम्हें (सबको) ज़मीन पर फैलाया है, और उसी की ओर तुम (सब) जमा किए जाओगे।"

قُلْ هُوَ ٱلَّذِىٓ أَنشَأَكُمْ وَجَعَلَ لَكُمُ ٱلسَّمْعَ وَٱلْأَبْصَـٰرَ وَٱلْأَفْـِٔدَةَ ۖ قَلِيلًا مَّا تَشْكُرُونَ
٢٣
قُلْ هُوَ ٱلَّذِى ذَرَأَكُمْ فِى ٱلْأَرْضِ وَإِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
٢٤

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 23-24


प्रश्न 6) क्या तुम अभी भी क़यामत का इनकार करते हो?

25. वे पूछते हैं, "यह धमकी कब पूरी होगी, अगर तुम सच्चे हो?" 26. कहो, "उसका ज्ञान केवल अल्लाह के पास है, और मैं तो बस एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ।" 27. फिर जब वे अज़ाब को करीब आते देखेंगे, तो काफ़िरों के चेहरे उदास हो जाएँगे, और उनसे कहा जाएगा, "यही है वह जिसके लिए तुम जल्दी मचाते थे।"

وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَـٰذَا ٱلْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
٢٥
قُلْ إِنَّمَا ٱلْعِلْمُ عِندَ ٱللَّهِ وَإِنَّمَآ أَنَا۠ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
٢٦
فَلَمَّا رَأَوْهُ زُلْفَةً سِيٓـَٔتْ وُجُوهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا وَقِيلَ هَـٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تَدَّعُونَ
٢٧

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 25-27


प्रश्न 7) तुम्हारी सहायता और कौन कर सकता है?

28. कहो, "तुम क्या समझते हो, चाहे अल्लाह मुझे और मेरे साथ वालों को मृत्यु दे या हम पर दया करे, तो काफ़िरों को दर्दनाक अज़ाब से कौन बचाएगा?" 29. कहो, "वह रहमान है—उसी पर हम ईमान लाए हैं, और उसी पर हमने भरोसा किया है। तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि कौन खुली गुमराही में है।" 30. कहो, "भला बताओ तो सही, यदि तुम्हारा पानी ज़मीन में धँस जाए, तो कौन तुम्हें बहता हुआ पानी ला देगा?"

قُلْ أَرَءَيْتُمْ إِنْ أَهْلَكَنِىَ ٱللَّهُ وَمَن مَّعِىَ أَوْ رَحِمَنَا فَمَن يُجِيرُ ٱلْكَـٰفِرِينَ مِنْ عَذَابٍ أَلِيمٍ
٢٨
قُلْ هُوَ ٱلرَّحْمَـٰنُ ءَامَنَّا بِهِۦ وَعَلَيْهِ تَوَكَّلْنَا ۖ فَسَتَعْلَمُونَ مَنْ هُوَ فِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ
٢٩
قُلْ أَرَءَيْتُمْ إِنْ أَصْبَحَ مَآؤُكُمْ غَوْرًا فَمَن يَأْتِيكُم بِمَآءٍ مَّعِينٍۭ
٣٠

Surah 67 - المُلْك (सार्वभौमिकता) - Verses 28-30


Al-Mulk () - अध्याय 67 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा