This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 112 - الإخْلَاص

Al-Ikhlâṣ (Surah 112)

الإخْلَاص (Purity of Faith)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह त्रिमूर्ति, मूर्तिपूजा, नास्तिकता और शिर्क का खंडन करती है और एकमात्र सच्चे अल्लाह की ओर पूर्ण समर्पण का आह्वान करती है, जो इबादत के योग्य है और जिसकी पनाह मांगी जानी चाहिए, अगली दो सूरहों के अनुसार। अल्लाह के नाम से जो परम कृपालु, अत्यंत दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

अल्लाह की पूर्ण वहदानियत

1. कहो, वह अल्लाह एक है। 2. अल्लाह बेनियाज़ है। 3. न उसकी कोई संतान है और न वह पैदा हुआ है। 4. और उसके तुल्य कोई नहीं है।

قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ
١
ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ
٢
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
٣
وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ
٤

Surah 112 - الإخْلَاص (ईमान की शुद्धता) - Verses 1-4


Al-Ikhlāṣ () - अध्याय 112 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा