This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 56 - الوَاقِعَة

Al-Wâqi’ah (Surah 56)

الوَاقِعَة (The Inevitable Event)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह पिछली सूरह के समान है, जिसमें क़यामत के दिन लोगों को तीन वर्गों में बाँटा गया है और इस बात पर चर्चा की गई है कि अल्लाह की नेमतों को कैसे हल्के में लिया जाता है। इन नेमतों को मृतकों को क़यामत के लिए दोबारा जीवित करने की उसकी क्षमता के प्रमाण के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, मानव जाति की रचना, क़ुरआन के ईश्वरीय स्वरूप और क़यामत की भयावहता का भी उल्लेख किया गया है। इस सूरह की अंतिम आयत और अगली सूरह की पहली आयत में अल्लाह की महिमा का गुणगान किया गया है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयालु, परम कृपालु है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

क़यामत के दिन तीन समूह

1. जब वह अनिवार्य घटना घटित होगी, 2. तब उसके घटित होने को कोई झुठलाने वाला नहीं होगा। 3. वह नीचा करने वाली और ऊँचा करने वाली होगी। 4. जब धरती को ज़ोरदार हिलाया जाएगा, 5. और पहाड़ चूर-चूर कर दिए जाएँगे, 6. बिखरी हुई धूल बनकर, 7. तुम सब तीन दलों में होगे। 8. दाहिने हाथ वाले, वे कितने भाग्यशाली होंगे! 9. बाएँ हाथ वाले, वे कितने अभागे होंगे! 10. और जो (ईमान में) अग्रणी थे, वे ही (जन्नत में) अग्रणी होंगे।

إِذَا وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ
١
لَيْسَ لِوَقْعَتِهَا كَاذِبَةٌ
٢
خَافِضَةٌ رَّافِعَةٌ
٣
إِذَا رُجَّتِ ٱلْأَرْضُ رَجًّا
٤
وَبُسَّتِ ٱلْجِبَالُ بَسًّا
٥
فَكَانَتْ هَبَآءً مُّنۢبَثًّا
٦
وَكُنتُمْ أَزْوَٰجًا ثَلَـٰثَةً
٧
فَأَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ
٨
وَأَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ
٩
وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلسَّـٰبِقُونَ
١٠

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 1-10


अग्रणी

11. वे ही अल्लाह के निकटतम हैं। 12. नेमतों के बागों में। 13. पूर्ववर्ती पीढ़ियों में से एक बड़ी संख्या 14. और परवर्ती पीढ़ियों में से कुछ। 15. रत्नजड़ित सिंहासनों पर, 16. आमने-सामने तकिया लगाए हुए। 17. उनकी सेवा ऐसे नौजवान करेंगे जो हमेशा नौजवान ही रहेंगे 18. प्यालों, सुराहियों और बहते हुए चश्मे से (शुद्ध) शराब के साथ, 19. जिससे न उन्हें सिरदर्द होगा और न वे मदहोश होंगे। 20. और कोई भी फल जो वे चाहें 21. और पक्षी का गोश्त जो वे चाहें। 22. और बड़ी-बड़ी आँखों वाली हूरें होंगी, 23. जैसे छिपे हुए मोती, 24. यह उनके कर्मों का प्रतिफल होगा। 25. वहाँ वे कभी कोई व्यर्थ या गुनाह की बात नहीं सुनेंगे— 26. केवल भली और नेक बात ही।

أُولَـٰٓئِكَ ٱلْمُقَرَّبُونَ
١١
فِى جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ
١٢
ثُلَّةٌ مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ
١٣
وَقَلِيلٌ مِّنَ ٱلْـَٔاخِرِينَ
١٤
عَلَىٰ سُرُرٍ مَّوْضُونَةٍ
١٥
مُّتَّكِـِٔينَ عَلَيْهَا مُتَقَـٰبِلِينَ
١٦
يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَٰنٌ مُّخَلَّدُونَ
١٧
بِأَكْوَابٍ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٍ مِّن مَّعِينٍ
١٨
لَّا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنزِفُونَ
١٩
وَفَـٰكِهَةٍ مِّمَّا يَتَخَيَّرُونَ
٢٠
وَلَحْمِ طَيْرٍ مِّمَّا يَشْتَهُونَ
٢١
وَحُورٌ عِينٌ
٢٢
كَأَمْثَـٰلِ ٱللُّؤْلُؤِ ٱلْمَكْنُونِ
٢٣
جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
٢٤
لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا تَأْثِيمًا
٢٥
إِلَّا قِيلًا سَلَـٰمًا سَلَـٰمًا
٢٦

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 11-26


दाहिने हाथ वाले

27. और दाहिने हाथ वाले—क्या ही उनका भाग्य होगा! 28. बिना काँटों की बेरियों के बीच, 29. केलों के गुच्छे, 30. फैली हुई छाया, 31. बहता जल 32. प्रचुर फल— 33. न कभी समाप्त होने वाले और न वर्जित— 34. और ऊँचे फ़र्श। 35. बेशक, हमने उन्हें एक ख़ास अंदाज़ में पैदा किया है। 36. तो उन्हें कुँवारी बनाया है। 37. प्रेम करने वाली और हमउम्र, 38. दाहिने हाथ वालों के लिए, 39. (जो होंगे) पहले के लोगों में से एक बड़ी जमात 40. और बाद वालों में से एक बड़ी जमात।

وَأَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ
٢٧
فِى سِدْرٍ مَّخْضُودٍ
٢٨
وَطَلْحٍ مَّنضُودٍ
٢٩
وَظِلٍّ مَّمْدُودٍ
٣٠
وَمَآءٍ مَّسْكُوبٍ
٣١
وَفَـٰكِهَةٍ كَثِيرَةٍ
٣٢
لَّا مَقْطُوعَةٍ وَلَا مَمْنُوعَةٍ
٣٣
وَفُرُشٍ مَّرْفُوعَةٍ
٣٤
إِنَّآ أَنشَأْنَـٰهُنَّ إِنشَآءً
٣٥
فَجَعَلْنَـٰهُنَّ أَبْكَارًا
٣٦
عُرُبًا أَتْرَابًا
٣٧
لِّأَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ
٣٨
ثُلَّةٌ مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ
٣٩
وَثُلَّةٌ مِّنَ ٱلْـَٔاخِرِينَ
٤٠

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 27-40


बाएँ हाथ वाले

41. और बाएँ हाथ वाले—क्या ही बुरा हाल होगा उनका! 42. झुलसा देने वाली गर्मी और खौलते हुए पानी में, 43. काले धुएँ के साये में, 44. न ठंडा और न ताज़गी देने वाला। 45. बेशक, इससे पहले वे ऐशो-आराम में मग्न थे। 46. और सबसे बड़े पाप पर अड़े रहे। 47. वे (उपहासपूर्वक) पूछते थे, “जब हम मर जाएँगे और मिट्टी तथा हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या हमें सचमुच दोबारा उठाया जाएगा? 48. और हमारे पूर्वज भी?” 49. कहो, निःसंदेह, पहले और बाद की नस्लें 50. एक निर्धारित दिन के लिए अवश्य इकट्ठा किए जाएँगे। 51. फिर तुम, ऐ गुमराह झुठलाने वालो, 52. ज़क़्क़ूम के वृक्षों (के फल) से अवश्य खाओगे, 53. उससे अपने पेट भरोगे। 54. फिर उसके ऊपर तुम खौलता हुआ पानी पियोगे— 55. और तुम प्यासे ऊँटों की तरह पियोगे। 56. यह क़यामत के दिन उनका ठिकाना होगा।

وَأَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ
٤١
فِى سَمُومٍ وَحَمِيمٍ
٤٢
وَظِلٍّ مِّن يَحْمُومٍ
٤٣
لَّا بَارِدٍ وَلَا كَرِيمٍ
٤٤
إِنَّهُمْ كَانُوا قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَ
٤٥
وَكَانُوا يُصِرُّونَ عَلَى ٱلْحِنثِ ٱلْعَظِيمِ
٤٦
وَكَانُوا يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
٤٧
أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ
٤٨
قُلْ إِنَّ ٱلْأَوَّلِينَ وَٱلْـَٔاخِرِينَ
٤٩
لَمَجْمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَـٰتِ يَوْمٍ مَّعْلُومٍ
٥٠
ثُمَّ إِنَّكُمْ أَيُّهَا ٱلضَّآلُّونَ ٱلْمُكَذِّبُونَ
٥١
لَـَٔاكِلُونَ مِن شَجَرٍ مِّن زَقُّومٍ
٥٢
فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ
٥٣
فَشَـٰرِبُونَ عَلَيْهِ مِنَ ٱلْحَمِيمِ
٥٤
فَشَـٰرِبُونَ شُرْبَ ٱلْهِيمِ
٥٥
هَـٰذَا نُزُلُهُمْ يَوْمَ ٱلدِّينِ
٥٦

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 41-56


अल्लाह की शक्ति: 1) इंसानों को पैदा करना

57. हमने ही तुम्हें पैदा किया। तो क्या तुम ईमान नहीं लाओगे? 58. क्या तुमने देखा है उस (वीर्य) को जो तुम टपकाते हो? 59. क्या तुम उसे पैदा करते हो या हम पैदा करते हैं? 60. हमने तुम सब पर मौत मुकर्रर कर दी है और हम आजिज़ नहीं हैं। 61. तुम्हें ऐसे रूपों में रूपांतरित करने और पुनः सृजित करने से, जिन्हें तुम नहीं जानते। 62. तुम्हें पहले से ही ज्ञात है कि तुम्हारी पहली रचना कैसे हुई थी। तो क्या तुम फिर भी सचेत नहीं होगे?

نَحْنُ خَلَقْنَـٰكُمْ فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَ
٥٧
أَفَرَءَيْتُم مَّا تُمْنُونَ
٥٨
ءَأَنتُمْ تَخْلُقُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلْخَـٰلِقُونَ
٥٩
نَحْنُ قَدَّرْنَا بَيْنَكُمُ ٱلْمَوْتَ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ
٦٠
عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَـٰلَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِى مَا لَا تَعْلَمُونَ
٦١
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُولَىٰ فَلَوْلَا تَذَكَّرُونَ
٦٢

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 57-62


2) पौधों को उगाना

63. क्या तुमने विचार किया है कि तुम क्या बोते हो? 64. क्या तुम उसे उगाते हो या हम हैं उगाने वाले? 65. यदि हम चाहें तो इसे भूसा बना दें, फिर तुम विलाप करते रह जाओगे, 66. “हमें सचमुच भारी घाटा हुआ है।” 67. बेशक, हमें वंचित कर दिया गया है।

أَفَرَءَيْتُم مَّا تَحْرُثُونَ
٦٣
ءَأَنتُمْ تَزْرَعُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلزَّٰرِعُونَ
٦٤
لَوْ نَشَآءُ لَجَعَلْنَـٰهُ حُطَـٰمًا فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُونَ
٦٥
إِنَّا لَمُغْرَمُونَ
٦٦
بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ
٦٧

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 63-67


3) बारिश बरसाना

68. क्या तुमने उस पानी पर गौर किया है जिसे तुम पीते हो? 69. क्या तुम उसे बादलों से उतारते हो, या हम हैं जो ऐसा करते हैं? 70. यदि हम चाहते, तो उसे खारा कर देते। तो क्या तुम शुक्र अदा नहीं करते?

أَفَرَءَيْتُمُ ٱلْمَآءَ ٱلَّذِى تَشْرَبُونَ
٦٨
ءَأَنتُمْ أَنزَلْتُمُوهُ مِنَ ٱلْمُزْنِ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنزِلُونَ
٦٩
لَوْ نَشَآءُ جَعَلْنَـٰهُ أُجَاجًا فَلَوْلَا تَشْكُرُونَ
٧٠

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 68-70


4) पेड़ों से आग पैदा करना

71. क्या तुमने उस आग पर गौर किया है जिसे तुम सुलगाते हो? 72. क्या तुम उसके वृक्ष उगाते हो या हम हैं उसके उगाने वाले? 73. हमने इसे (जहन्नम की आग की) एक याद और मुसाफिरों के लिए एक सामान बनाया है। 74. तो अपने रब के नाम की तस्बीह करो, जो सबसे महान है।

أَفَرَءَيْتُمُ ٱلنَّارَ ٱلَّتِى تُورُونَ
٧١
ءَأَنتُمْ أَنشَأْتُمْ شَجَرَتَهَآ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنشِـُٔونَ
٧٢
نَحْنُ جَعَلْنَـٰهَا تَذْكِرَةً وَمَتَـٰعًا لِّلْمُقْوِينَ
٧٣
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ
٧٤

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 71-74


क़ुरान के इनकार करने वालों के लिए संदेश

75. तो मैं तारों के स्थानों की क़सम खाता हूँ— 76. और यह, यदि तुम जानते, निश्चय ही एक महान शपथ है— 77. कि यह निश्चय ही एक गरिमापूर्ण कुरान है, 78. एक भली-भाँति सुरक्षित अभिलेख में, 79. जिसे पाक किए हुए (फ़रिश्तों) के सिवा कोई नहीं छूता। 80. यह समस्त लोकों के रब की ओर से अवतरण है। 81. तो तुम इस संदेश को कैसे हल्के में लेते हो, 82. और अपनी रोज़ी का बदला इनकार से चुकाते हो?

۞ فَلَآ أُقْسِمُ بِمَوَٰقِعِ ٱلنُّجُومِ
٧٥
وَإِنَّهُۥ لَقَسَمٌ لَّوْ تَعْلَمُونَ عَظِيمٌ
٧٦
إِنَّهُۥ لَقُرْءَانٌ كَرِيمٌ
٧٧
فِى كِتَـٰبٍ مَّكْنُونٍ
٧٨
لَّا يَمَسُّهُۥٓ إِلَّا ٱلْمُطَهَّرُونَ
٧٩
تَنزِيلٌ مِّن رَّبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
٨٠
أَفَبِهَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ
٨١
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ
٨٢

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 75-82


आख़िरत के इनकार करने वालों के लिए चुनौती

83. तो फिर क्यों (तुम बेबस हो जाते हो) जब जान हलक़ तक आ पहुँचती है, 84. जबकि तुम देख रहे होते हो? 85. और हम ऐसे व्यक्ति के तुमसे अधिक निकट हैं, मगर तुम देख नहीं पाते। 86. तो अब, यदि तुम हमारी इच्छा के अधीन नहीं हो (जैसा कि तुम दावा करते हो), 87. उस रूह को वापस ले आओ, यदि तुम्हारी बात सच है।

فَلَوْلَآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلْحُلْقُومَ
٨٣
وَأَنتُمْ حِينَئِذٍ تَنظُرُونَ
٨٤
وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَـٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ
٨٥
فَلَوْلَآ إِن كُنتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ
٨٦
تَرْجِعُونَهَآ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
٨٧

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 83-87


आप तीनों में से कौन से होंगे?

88. तो, यदि मृतक (अल्लाह के) निकट लाए गए लोगों में से है, 89. तो (उसके लिए) सुकून, सुगंध और नेमतों का बाग होगा। 90. और यदि मृतक दाहिने हाथ वालों में से है, 91. फिर (उनसे कहा जाएगा,) "तुम पर सलाम हो, दाहिने हाथ वालों की ओर से।" 92. और अगर वह गुमराह और झुठलाने वालों में से हो, 93. तो उनका आतिथ्य खौलता हुआ पानी होगा। 94. और जहन्नम की आग में जलते रहना। 95. निःसंदेह, यह अटल सत्य है। 96. तो अपने महान रब के नाम की महिमा करो।

فَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ
٨٨
فَرَوْحٌ وَرَيْحَانٌ وَجَنَّتُ نَعِيمٍ
٨٩
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ
٩٠
فَسَلَـٰمٌ لَّكَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ
٩١
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُكَذِّبِينَ ٱلضَّآلِّينَ
٩٢
فَنُزُلٌ مِّنْ حَمِيمٍ
٩٣
وَتَصْلِيَةُ جَحِيمٍ
٩٤
إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ حَقُّ ٱلْيَقِينِ
٩٥
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ
٩٦

Surah 56 - الوَاقِعَة (अवश्यंभावी घटना) - Verses 88-96


Al-Wâqi'ah () - अध्याय 56 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा