This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Al-Fâtiḥah (Surah 1)
الْفَاتِحَة (The Opening)
Introduction
यह मक्की सूरह, जिसे पांच दैनिक नमाजों में कुल सत्रह बार पढ़ा जाता है, कुरान का आधार स्तंभ है। यह सृष्टिकर्ता और उसकी सृष्टि के बीच के संबंध को संक्षेप में प्रस्तुत करती है, इस दुनिया और आख़िरत में अल्लाह की निर्विवाद सत्ता को दर्शाती है, और मानवता की मार्गदर्शन और सहायता के लिए उसकी निरंतर निर्भरता को व्यक्त करती है। इसका मूल विषय यह स्वीकार करना है कि वह एकमात्र ईश्वर है जो पूजा के योग्य है—एक सरल सत्य जिसे नास्तिक समझ नहीं पाते। इस सूरह में समाहित सभी मौलिक सिद्धांतों को कुरान के बाकी हिस्सों में स्पष्ट रूप से वर्णित किया गया है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.
मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना
1. अल्लाह के नाम से—जो सबसे दयालु, सबसे कृपालु है। 2. सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए है—सभी संसारों के रब, 3. सबसे दयालु, सबसे मेहरबान, 4. न्याय के दिन का मालिक। 5. हम केवल आपकी ही पूजा करते हैं और केवल आपसे ही सहायता मांगते हैं। 6. हमें सीधे रास्ते पर चलने की राह दिखा। 7. उनका मार्ग जिन पर आपने कृपा की, न कि उन पर जिन पर आप नाराज़ हैं, और न ही उन पर जो भटके हुए हैं।