Jonah
يُونُس
یُونس
Surah Yûnus for kids content
अल्लाह के कोई बच्चे नहीं हैं।
68वे कहते हैं, "अल्लाह के बच्चे हैं।" वह पाक है! वह बेनियाज़ है। जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, उसी का है। तुम्हारे पास इसका कोई प्रमाण नहीं! क्या तुम अल्लाह के बारे में वह कहते हो जो तुम नहीं जानते?
69कहो, 'ऐ नबी, "निःसंदेह, वे लोग जो अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं, वे कभी सफल नहीं होंगे।"'
70उन्हें इस दुनिया में बस थोड़ा सा सुख भोगना है, फिर हमारी ही ओर उनका लौटना है और फिर हम उन्हें उनके कुफ़्र के कारण कठोर यातना का स्वाद चखाएँगे।
قَالُواْ ٱتَّخَذَ ٱللَّهُ وَلَدٗاۗ سُبۡحَٰنَهُۥۖ هُوَ ٱلۡغَنِيُّۖ لَهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۚ إِنۡ عِندَكُم مِّن سُلۡطَٰنِۢ بِهَٰذَآۚ أَتَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ68
٦٨ قُلۡ إِنَّ ٱلَّذِينَ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَ لَا يُفۡلِحُونَ69
مَتَٰعٞ فِي ٱلدُّنۡيَا ثُمَّ إِلَيۡنَا مَرۡجِعُهُمۡ ثُمَّ نُذِيقُهُمُ ٱلۡعَذَابَ ٱلشَّدِيدَ بِمَا كَانُواْ يَكۡفُرُونَ70

नूह और उनकी क़ौम
71उन्हें 'ऐ नबी' नूह का वृत्तांत सुनाओ, जब उसने अपनी क़ौम से कहा, "ऐ मेरी क़ौम! यदि मेरी मौजूदगी और अल्लाह की निशानियों की मेरी याददिहानी तुम्हें भारी लगती है, तो (यह जान लो कि) मैंने अल्लाह पर ही भरोसा किया है। तो तुम अपने झूठे पूज्यों (देवताओं) के साथ मिलकर कोई साज़िश कर लो, और तुम्हें गुप्त रूप से योजना बनाने की आवश्यकता नहीं है। फिर बिना किसी विलंब के मेरे विरुद्ध कार्यवाही करो!"
72और यदि तुम मुँह मोड़ते हो, तो (याद रखो कि) मैंने तुमसे (संदेश पहुँचाने का) कोई प्रतिफल नहीं माँगा है। मेरा प्रतिफल तो केवल अल्लाह के पास है। और मुझे आदेश दिया गया है कि मैं उन लोगों में से होऊँ जो उसके समक्ष समर्पण करते हैं।
73लेकिन उन्होंने फिर भी उसे झुठलाया, तो हमने उसे और उसके साथ वालों को कश्ती में बचा लिया, उन्हें धरती का वारिस बनाकर, और उन लोगों को डुबो दिया जिन्होंने हमारी निशानियों को झुठलाया था। तो देखो उन लोगों का क्या अंजाम हुआ जिन्हें चेतावनी दी गई थी!
۞ وَٱتۡلُ عَلَيۡهِمۡ نَبَأَ نُوحٍ إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ إِن كَانَ كَبُرَ عَلَيۡكُم مَّقَامِي وَتَذۡكِيرِي بَِٔايَٰتِ ٱللَّهِ فَعَلَى ٱللَّهِ تَوَكَّلۡتُ فَأَجۡمِعُوٓاْ أَمۡرَكُمۡ وَشُرَكَآءَكُمۡ ثُمَّ لَا يَكُنۡ أَمۡرُكُمۡ عَلَيۡكُمۡ غُمَّةٗ ثُمَّ ٱقۡضُوٓاْ إِلَيَّ وَلَا تُنظِرُونِ71
فَإِن تَوَلَّيۡتُمۡ فَمَا سَأَلۡتُكُم مِّنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِۖ وَأُمِرۡتُ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ72
فَكَذَّبُوهُ فَنَجَّيۡنَٰهُ وَمَن مَّعَهُۥ فِي ٱلۡفُلۡكِ وَجَعَلۡنَٰهُمۡ خَلَٰٓئِفَ وَأَغۡرَقۡنَا ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بَِٔايَٰتِنَاۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُنذَرِينَ73
नूह के बाद के रसूल
74फिर उसके बाद हमने दूसरे रसूलों को उनकी अपनी क़ौम की ओर भेजा और वे उनके पास खुली निशानियों के साथ आए। लेकिन उन्होंने उसमें ईमान नहीं लाया जिसे दूसरों ने पहले ही झुठलाया था। इसी तरह हम हद से गुज़रने वालों के दिलों पर मुहर लगा देते हैं।
ثُمَّ بَعَثۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِۦ رُسُلًا إِلَىٰ قَوۡمِهِمۡ فَجَآءُوهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَمَا كَانُواْ لِيُؤۡمِنُواْ بِمَا كَذَّبُواْ بِهِۦ مِن قَبۡلُۚ كَذَٰلِكَ نَطۡبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِ ٱلۡمُعۡتَدِينَ74
मूसा और हारून बनाम फ़िरऔन
75फिर इन रसूलों के बाद हमने मूसा और हारून को फिरौन और उसके सरदारों के पास अपनी निशानियों के साथ भेजा। मगर उन्होंने तकब्बुर किया और वे एक फ़ासिक़ क़ौम थे।
76जब हमारी तरफ़ से उनके पास हक़ आया, तो उन्होंने कहा, "यह तो यक़ीनन खुला जादू है!"
77मूसा ने जवाब दिया, "क्या तुम हक़ के बारे में ऐसी बात कहते हो जब वह तुम्हारे पास आ चुका हो? क्या यह जादू है? जादूगर कभी कामयाब नहीं होते।"
78उन्होंने कहा, "क्या तुम हमें हमारे बाप-दादा के दीन से फेरने आए हो ताकि तुम दोनों इस ज़मीन में बड़े बन जाओ? हम तुम पर कभी ईमान नहीं लाएँगे!"
79फिरौन ने हुक्म दिया, "मेरे पास हर माहिर जादूगर को लाओ।"
80जब जादूगर आए, मूसा ने उनसे कहा, "जो कुछ तुम्हें फेंकना है, फेंको!"
81जब उन्होंने ऐसा किया, मूसा ने चेतावनी दी, "तुमने जो कुछ किया है, वह केवल जादू है, अल्लाह उसे अवश्य व्यर्थ कर देगा। निश्चित रूप से अल्लाह बिगाड़ने वालों के कार्य को बरकत नहीं देता।"
82और अल्लाह अपने वचनों से सत्य को स्थापित करता है, भले ही अपराधी इसे कितना ही नापसंद करें।
ثُمَّ بَعَثۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِم مُّوسَىٰ وَهَٰرُونَ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ بَِٔايَٰتِنَا فَٱسۡتَكۡبَرُواْ وَكَانُواْ قَوۡمٗا مُّجۡرِمِينَ75
فَلَمَّا جَآءَهُمُ ٱلۡحَقُّ مِنۡ عِندِنَا قَالُوٓاْ إِنَّ هَٰذَا لَسِحۡرٞ مُّبِينٞ76
قَالَ مُوسَىٰٓ أَتَقُولُونَ لِلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَكُمۡۖ أَسِحۡرٌ هَٰذَا وَلَا يُفۡلِحُ ٱلسَّٰحِرُونَ77
قَالُوٓاْ أَجِئۡتَنَا لِتَلۡفِتَنَا عَمَّا وَجَدۡنَا عَلَيۡهِ ءَابَآءَنَا وَتَكُونَ لَكُمَا ٱلۡكِبۡرِيَآءُ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا نَحۡنُ لَكُمَا بِمُؤۡمِنِينَ78
وَقَالَ فِرۡعَوۡنُ ٱئۡتُونِي بِكُلِّ سَٰحِرٍ عَلِيم79
فَلَمَّا جَآءَ ٱلسَّحَرَةُ قَالَ لَهُم مُّوسَىٰٓ أَلۡقُواْ مَآ أَنتُم مُّلۡقُونَ80
فَلَمَّآ أَلۡقَوۡاْ قَالَ مُوسَىٰ مَا جِئۡتُم بِهِ ٱلسِّحۡرُۖ إِنَّ ٱللَّهَ سَيُبۡطِلُهُۥٓ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُصۡلِحُ عَمَلَ ٱلۡمُفۡسِدِينَ81
وَيُحِقُّ ٱللَّهُ ٱلۡحَقَّ بِكَلِمَٰتِهِۦ وَلَوۡ كَرِهَ ٱلۡمُجۡرِمُونَ82
कुछ मोमिन
83लेकिन मूसा पर उसकी क़ौम के कुछ नौजवानों के सिवा कोई ईमान नहीं लाया, इस डर से कि फ़िरऔन और उनके अपने सरदार उन पर ज़ुल्म करेंगे। फ़िरऔन ज़मीन में सचमुच एक ज़ालिम था और वह बुराई में वास्तव में हद से गुज़र गया था।
84मूसा ने कहा, "ऐ मेरी क़ौम! अगर तुम अल्लाह पर ईमान रखते हो और उसके आगे समर्पण करते हो, तो उसी पर भरोसा करो।"
85उन्होंने जवाब दिया, "अल्लाह पर ही हमने भरोसा किया। ऐ हमारे रब! हमें ज़ालिम लोगों के हाथों ज़ुल्म का शिकार न होने दे,"
86"और अपनी रहमत से हमें काफ़िर लोगों से बचा।"
فَمَآ ءَامَنَ لِمُوسَىٰٓ إِلَّا ذُرِّيَّةٞ مِّن قَوۡمِهِۦ عَلَىٰ خَوۡفٖ مِّن فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِمۡ أَن يَفۡتِنَهُمۡۚ وَإِنَّ فِرۡعَوۡنَ لَعَالٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَإِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلۡمُسۡرِفِينَ83
وَقَالَ مُوسَىٰ يَٰقَوۡمِ إِن كُنتُمۡ ءَامَنتُم بِٱللَّهِ فَعَلَيۡهِ تَوَكَّلُوٓاْ إِن كُنتُم مُّسۡلِمِينَ84
فَقَالُواْ عَلَى ٱللَّهِ تَوَكَّلۡنَا رَبَّنَا لَا تَجۡعَلۡنَا فِتۡنَةٗ لِّلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِينَ85
وَنَجِّنَا بِرَحۡمَتِكَ مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡكَٰفِرِينَ86

ज्ञान की बातें
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आयतें 87-89 नमाज़ की ताकत के बारे में बात करती हैं। जब फ़िरौन ने मूसा और उनके लोगों को परेशान किया, तो उनसे कहा गया कि वे अपने घरों को इबादतगाहों में बदल दें और नमाज़ पढ़ें। दूसरे नबियों को दुआओं के ज़रिए अल्लाह की मदद मांगने के लिए कहा गया।
उदाहरण के लिए, आयत 15:97-99 में पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बताया गया है कि अल्लाह जानता है कि मूर्तिपूजकों के झूठ उन्हें कितना परेशान करते हैं, और इसलिए उन्हें अपने रब की इबादत और नमाज़ जारी रखनी चाहिए।
हमें आयत 37:143-144 में यह भी बताया गया है कि यूनुस को व्हेल के पेट से उनकी दुआओं के कारण बचाया गया था।
दुआ की शक्ति
87हमने मूसा और उसके भाई को वह्यी की, "अपनी क़ौम के लिए मिस्र में घर बनाओ, और अपने घरों को क़िब्ला बनाओ, और नमाज़ क़ायम करो, और ईमान वालों को ख़ुशख़बरी दो!"
88मूसा ने दुआ की, "ऐ हमारे रब! तूने फ़िरऔन और उसके सरदारों को दुनियावी ज़िंदगी में ज़ीनत और माल दिया है। और ऐ हमारे रब, वे तेरी राह से दूसरों को गुमराह कर रहे हैं! ऐ हमारे रब, उनके माल को तबाह कर दे और उनके दिलों को सख़्त कर दे ताकि वे ईमान न लाएँ जब तक कि दर्दनाक अज़ाब न देख लें।"
89अल्लाह ने मूसा और हारून को जवाब दिया, "तुम्हारी दुआ क़ुबूल हो गई! तो तुम दोनों इस्तिक़ामत पर क़ायम रहो, और उन लोगों की राह पर मत चलना जो नहीं जानते।"
وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰ وَأَخِيهِ أَن تَبَوَّءَا لِقَوۡمِكُمَا بِمِصۡرَ بُيُوتٗا وَٱجۡعَلُواْ بُيُوتَكُمۡ قِبۡلَةٗ وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ87
وَقَالَ مُوسَىٰ رَبَّنَآ إِنَّكَ ءَاتَيۡتَ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَأَهُۥ زِينَةٗ وَأَمۡوَٰلٗا فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا رَبَّنَا لِيُضِلُّواْ عَن سَبِيلِكَۖ رَبَّنَا ٱطۡمِسۡ عَلَىٰٓ أَمۡوَٰلِهِمۡ وَٱشۡدُدۡ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ فَلَا يُؤۡمِنُواْ حَتَّىٰ يَرَوُاْ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ88
قَالَ قَدۡ أُجِيبَت دَّعۡوَتُكُمَا فَٱسۡتَقِيمَا وَلَا تَتَّبِعَآنِّ سَبِيلَ ٱلَّذِينَ لَا يَعۡلَمُونَ89

ज्ञान की बातें
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कोई पूछ सकता है, "आयतों 90-92 के अनुसार, फिरौन ने अल्लाह पर अपने ईमान का ऐलान किया, तो उसे सज़ा क्यों मिली?" तकनीकी रूप से, यदि कोई अपनी मृत्यु से पहले इस्लाम स्वीकार करता है, तो वह जन्नत में जाएगा, बशर्ते वह सच्चा हो।
यही कारण है कि पैगंबर (ﷺ) ने लोगों को उनके मृत्यु-शय्या पर मुसलमान बनने के लिए मनाने की कोशिश की।
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हालाँकि, आयतों 90-92 में, फिरौन ने डूबते समय अल्लाह पर अपने ईमान का ऐलान किया। उसका अचानक का ईमान स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि वह सिर्फ मरने से डर रहा था, न कि इसलिए कि उसे वास्तव में अल्लाह पर ईमान था।
आयतें कहती हैं कि उसका मृत शरीर पाया जाएगा और उसे आने वाली सभी पीढ़ियों के लिए एक मिसाल के तौर पर संरक्षित किया जाएगा।
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कुछ विद्वान कहते हैं कि रामसेस द्वितीय या उसका बेटा मर्नेप्टाह (जिनकी ममी मिस्र के काहिरा संग्रहालय में प्रदर्शित हैं) मूसा (عليه السلام) की कहानी में डूबने वाला फिरौन हो सकता है। और अल्लाह सबसे बेहतर जानता है।
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इसी तरह, 5:27-31 में, जब आदम के 2 बेटों में से एक ने दूसरे को मार डाला, तो उसे बाद में पछतावा हुआ। लेकिन उसका पछतावा स्वीकार नहीं किया गया, सिर्फ इसलिए कि वह इस बात से नाराज़ था कि कौवा उससे ज़्यादा चालाक था, न कि इसलिए कि उसने अपने ही भाई को मारा था।

छोटी कहानी
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यह मुझे कुछ चोरों की कहानी याद दिलाता है जिन्होंने एक बैंक लूटा और फिर पैसे लेकर शहर के बाहर एक गुफा में भाग गए। गुफा में, चोरों में से एक ने नकदी के विशाल ढेरों को देखा और रोने लगा। दूसरे चोर ने उससे पूछा, "तुम्हें क्या हुआ?
क्या तुम्हें चोरी करने का पछतावा है?" उसने जवाब दिया, "बेशक नहीं! मैं बस इसलिए रो रहा हूँ क्योंकि इस सारे पैसे को गिनने में हमें हमेशा के लिए लग जाएगा, और मैं अपना हिस्सा लेने का इंतजार नहीं कर सकता।" दूसरे चोर ने जवाब दिया, "तुम मूर्ख! हमें कुछ भी गिनने की जरूरत नहीं है।
अगर हम आज रात खबर देखेंगे, तो वे हमें ठीक-ठीक बता देंगे कि बैंक से कितना चुराया गया था!"

फ़िरऔन का अंत
90हमने बनी इस्राईल को समुद्र पार कराया। फिर फ़िरऔन और उसके सैनिकों ने अत्याचार और ज़्यादती से उनका पीछा किया। यहाँ तक कि जब फ़िरऔन डूबने लगा, तो वह चिल्लाया, "मैं अब ईमान लाया कि कोई पूज्य नहीं सिवाय उसके जिस पर बनी इस्राईल ईमान लाए हैं, और मैं आज्ञाकारियों में से हूँ।"
91उसे कहा गया, "क्या! अब? जबकि तूने हमेशा नाफ़रमानी की और तू फ़साद करने वालों में से था।"
92आज हम तेरे मृत शरीर को बचाएँगे ताकि तू अपने बाद आने वालों के लिए एक इबरत बन जाए। और निश्चय ही अधिकतर लोग हमारी निशानियों से ग़ाफ़िल हैं!
۞ وَجَٰوَزۡنَا بِبَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱلۡبَحۡرَ فَأَتۡبَعَهُمۡ فِرۡعَوۡنُ وَجُنُودُهُۥ بَغۡيٗا وَعَدۡوًاۖ حَتَّىٰٓ إِذَآ أَدۡرَكَهُ ٱلۡغَرَقُ قَالَ ءَامَنتُ أَنَّهُۥ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا ٱلَّذِيٓ ءَامَنَتۡ بِهِۦ بَنُوٓاْ إِسۡرَٰٓءِيلَ وَأَنَا۠ مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ90
ءَآلۡـَٰٔنَ وَقَدۡ عَصَيۡتَ قَبۡلُ وَكُنتَ مِنَ ٱلۡمُفۡسِدِينَ91
فَٱلۡيَوۡمَ نُنَجِّيكَ بِبَدَنِكَ لِتَكُونَ لِمَنۡ خَلۡفَكَ ءَايَةٗۚ وَإِنَّ كَثِيرٗا مِّنَ ٱلنَّاسِ عَنۡ ءَايَٰتِنَا لَغَٰفِلُونَ92
अल्लाह की कृपा
93निश्चित रूप से हमने बनी इस्राईल को एक बरकत वाली भूमि में बसाया और उन्हें अच्छी, पाक रोज़ी दी। उन्होंने मतभेद नहीं किया जब तक कि उनके पास ज्ञान नहीं आ गया। तुम्हारा रब क़यामत के दिन उनके बीच उन बातों का फ़ैसला करेगा जिनमें वे मतभेद करते थे।
وَلَقَدۡ بَوَّأۡنَا بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ مُبَوَّأَ صِدۡقٖ وَرَزَقۡنَٰهُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَٰتِ فَمَا ٱخۡتَلَفُواْ حَتَّىٰ جَآءَهُمُ ٱلۡعِلۡمُۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقۡضِي بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ فِيمَا كَانُواْ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ93
सत्य की पुष्टि
94यदि तुम (ऐ पैगंबर) इन वृत्तांतों के विषय में संदेह में हो जो हमने तुम पर अवतरित किए हैं, तो उनसे पूछो जो तुमसे पहले ग्रंथ का पाठ करते थे। सत्य निश्चित रूप से तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारे पास आ चुका है, अतः संदेह करने वालों में से मत होना।
95और अल्लाह की आयतों को झुठलाने वालों में से मत होना, अन्यथा तुम घाटा उठाने वालों में से होगे।
فَإِن كُنتَ فِي شَكّٖ مِّمَّآ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ فَسَۡٔلِ ٱلَّذِينَ يَقۡرَءُونَ ٱلۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلِكَۚ لَقَدۡ جَآءَكَ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُمۡتَرِينَ94
وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بَِٔايَٰتِ ٱللَّهِ فَتَكُونَ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ95

पृष्ठभूमि की कहानी
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जैसा कि हमने सूरह 37 में उल्लेख किया है, पैगंबर यूनुस ने कई सालों तक अपनी कौम को इस्लाम की दावत दी, लेकिन उन्होंने उनके पैगाम को ठुकरा दिया। जब वे बहुत निराश हो गए, तो उन्होंने उन्हें आने वाली सज़ा से आगाह किया। फिर वे अल्लाह की इजाज़त के बिना शहर छोड़कर चले गए।
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जब उनकी कौम ने सज़ा आने से पहले अपनी गलती महसूस की, तो उन्होंने अल्लाह से माफी मांगी, और उसने उनकी तौबा कबूल कर ली। यूनुस अपनी बेसब्री के कारण व्हेल के पेट में जा पहुंचे। वे व्हेल के अंदर इतने परेशान थे कि कई दिनों तक दुआ करते रहे।
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अल्लाह ने उनकी दुआएं कबूल कीं, और व्हेल ने उन्हें एक खुले किनारे पर छोड़ दिया। फिर अल्लाह ने एक कद्दू का पौधा उगाया ताकि उन्हें धूप और कीड़े-मकोड़ों से पनाह मिल सके।
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आखिरकार, वे अपनी कौम के पास वापस गए और उन्होंने उनके पैगाम पर ईमान ले आए। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यूनुस की कौम ही कुरान में उल्लिखित एकमात्र ऐसी कौम है जिसे अपने पैगंबर को ठुकराने के बाद भी सज़ा से बचाया गया। {इमाम इब्न कसीर और इमाम अल-कुरतुबी}
यूनुस की क़ौम
96निःसंदेह, जिन पर तुम्हारे रब का अज़ाब वाजिब हो चुका है, वे ईमान नहीं लाएँगे-
97चाहे उनके पास हर निशानी आ जाए, जब तक वे दर्दनाक अज़ाब न देख लें।
98काश कोई ऐसी बस्ती होती जिसने अज़ाब देखने से पहले ईमान लाया होता और अपने ईमान से लाभ उठाया होता, यूनुस की क़ौम की तरह। जब उन्होंने ईमान लाया, तो हमने उनसे दुनियावी रुसवाई का अज़ाब उठा लिया और उन्हें एक निर्धारित समय तक जीवन का आनंद लेने दिया।
إِنَّ ٱلَّذِينَ حَقَّتۡ عَلَيۡهِمۡ كَلِمَتُ رَبِّكَ لَا يُؤۡمِنُونَ96
وَلَوۡ جَآءَتۡهُمۡ كُلُّ ءَايَةٍ حَتَّىٰ يَرَوُاْ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ97
فَلَوۡلَا كَانَتۡ قَرۡيَةٌ ءَامَنَتۡ فَنَفَعَهَآ إِيمَٰنُهَآ إِلَّا قَوۡمَ يُونُسَ لَمَّآ ءَامَنُواْ كَشَفۡنَا عَنۡهُمۡ عَذَابَ ٱلۡخِزۡيِ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَمَتَّعۡنَٰهُمۡ إِلَىٰ حِين98
स्वतंत्र पसंद
99अगर आपके रब चाहते, ऐ नबी, तो ज़मीन के तमाम लोग ईमान वाले बन जाते - हर एक। तो क्या आप लोगों को ज़बरदस्ती ईमान लाने पर मजबूर करेंगे?
100किसी भी जान के लिए मुमकिन नहीं कि वह अल्लाह की इज़ाज़त के बग़ैर ईमान लाए। और वह उन लोगों को जो होश में नहीं आते, भयानक अंजाम चखाएगा।
وَلَوۡ شَآءَ رَبُّكَ لَأٓمَنَ مَن فِي ٱلۡأَرۡضِ كُلُّهُمۡ جَمِيعًاۚ أَفَأَنتَ تُكۡرِهُ ٱلنَّاسَ حَتَّىٰ يَكُونُواْ مُؤۡمِنِينَ99
وَمَا كَانَ لِنَفۡسٍ أَن تُؤۡمِنَ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ وَيَجۡعَلُ ٱلرِّجۡسَ عَلَى ٱلَّذِينَ لَا يَعۡقِلُونَ100
सोच-विचार का आमंत्रण
101कहो, 'ऐ नबी,' 'आसमानों और ज़मीन में उन सभी अद्भुत चीज़ों पर गौर करो!' फिर भी निशानियाँ और चेतावनी देने वाले उन लोगों को लाभ नहीं पहुँचाते जो ईमान लाने से इनकार करते हैं।
102क्या वे उसी सज़ा का इंतज़ार कर रहे हैं जो उनसे पहले वालों पर आई थी? कहो, 'तो इंतज़ार करते रहो! मैं भी तुम्हारे साथ इंतज़ार कर रहा हूँ।'
103फिर हमने अपने रसूलों को और उन लोगों को बचाया जो ईमान लाए थे। ईमान वालों को बचाना हमारा फ़र्ज़ है।
قُلِ ٱنظُرُواْ مَاذَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَمَا تُغۡنِي ٱلۡأٓيَٰتُ وَٱلنُّذُرُ عَن قَوۡمٖ لَّا يُؤۡمِنُونَ101
فَهَلۡ يَنتَظِرُونَ إِلَّا مِثۡلَ أَيَّامِ ٱلَّذِينَ خَلَوۡاْ مِن قَبۡلِهِمۡۚ قُلۡ فَٱنتَظِرُوٓاْ إِنِّي مَعَكُم مِّنَ ٱلۡمُنتَظِرِينَ102
ثُمَّ نُنَجِّي رُسُلَنَا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْۚ كَذَٰلِكَ حَقًّا عَلَيۡنَا نُنجِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ103
सच्चा ईमान
104कहो, 'हे पैगंबर,' 'हे लोगो! यदि तुम मेरे ईमान के बारे में संदेह में हो, तो जान लो कि मैं उन 'शक्तिहीन मूर्तियों' की इबादत नहीं करता जिनकी तुम अल्लाह के बजाय इबादत करते हो। बल्कि मैं अल्लाह की इबादत करता हूँ, जिसके पास तुम्हारी जान लेने की शक्ति है। और मुझे आज्ञा दी गई है, 'ईमान वालों में से एक बनो;'
105और, 'हमेशा अपने दीन पर अटल रहो, पूरी तरह से सीधे रहते हुए, और मूर्ति-पूजकों में से मत बनो,'
106और 'अल्लाह के बजाय उन चीज़ों को मत पुकारो जो तुम्हें न तो लाभ पहुँचा सकती हैं और न ही हानि--क्योंकि यदि तुम ऐसा करते हो, तो तुम निश्चित रूप से ज़ालिमों में से होगे।'
107और 'यदि अल्लाह तुम्हें किसी कठिनाई में डालता है, तो उसे उसके सिवा कोई दूर नहीं कर सकता। और यदि वह तुम्हें किसी अच्छी चीज़ से नवाज़ना चाहता है, तो उसकी कृपा को कोई रोक नहीं सकता, वह उसे अपने बंदों में से जिसे चाहता है देता है। और वह क्षमाशील और दयालु है।'
قُلۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِن كُنتُمۡ فِي شَكّٖ مِّن دِينِي فَلَآ أَعۡبُدُ ٱلَّذِينَ تَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلَٰكِنۡ أَعۡبُدُ ٱللَّهَ ٱلَّذِي يَتَوَفَّىٰكُمۡۖ وَأُمِرۡتُ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ104
وَأَنۡ أَقِمۡ وَجۡهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفٗا وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ105
وَلَا تَدۡعُ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكَ وَلَا يَضُرُّكَۖ فَإِن فَعَلۡتَ فَإِنَّكَ إِذٗا مِّنَ ٱلظَّٰلِمِينَ106
وَإِن يَمۡسَسۡكَ ٱللَّهُ بِضُرّٖ فَلَا كَاشِفَ لَهُۥٓ إِلَّا هُوَۖ وَإِن يُرِدۡكَ بِخَيۡرٖ فَلَا رَآدَّ لِفَضۡلِهِۦۚ يُصِيبُ بِهِۦ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۚ وَهُوَ ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ107
मानवता को आह्वान
108कहो, 'हे नबी,' 'हे लोगो! तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारे पास सत्य आ चुका है। तो जो कोई मार्गदर्शन चुनता है, वह अपने ही भले के लिए है। और जो कोई भटकना चुनता है, वह अपने ही नुकसान के लिए है। और मैं तुम पर कोई रखवाला नहीं हूँ।'
قُلۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدۡ جَآءَكُمُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكُمۡۖ فَمَنِ ٱهۡتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهۡتَدِي لِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيۡهَاۖ وَمَآ أَنَا۠ عَلَيۡكُم بِوَكِيل108
नबी को नसीहत
109और उसका अनुसरण करो जो तुम्हारी ओर वह्य की गई है, और सब्र करो यहाँ तक कि अल्लाह अपना फ़ैसला सुना दे। और वही सबसे उत्तम न्यायकर्ता है।
وَٱتَّبِعۡ مَا يُوحَىٰٓ إِلَيۡكَ وَٱصۡبِرۡ حَتَّىٰ يَحۡكُمَ ٱللَّهُۚ وَهُوَ خَيۡرُ ٱلۡحَٰكِمِينَ109