Surah 23
Volume 3

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المؤمنون

Surah Al-Mu'minûn for kids content

पैगंबर को नसीहत

93कहो, 'ऐ नबी,' 'ऐ मेरे रब!

यदि तू मुझे वह अज़ाब दिखाने वाला है जिसकी उन मुशरिकों को धमकी दी गई है,'

94तो, ऐ मेरे रब, मुझे उन ज़ालिमों में शुमार न करना।

'

95हम निश्चय ही तुम्हें वह दिखाने पर क़ादिर हैं जिससे हमने उन्हें आगाह किया है।

96बुराई को उस चीज़ से दूर करो जो सबसे अच्छी हो।

हम खूब जानते हैं जो वे कहते हैं।

97और कहो, 'ऐ मेरे रब!

मैं तुझमें शैतानों के वसवसों से पनाह माँगता हूँ।

'

98और मैं तुझसे पनाह माँगता हूँ, मेरे रब, कि वे मेरे पास भी न आएँ।

قُل رَّبِّ إِمَّا تُرِيَنِّي مَا يُوعَدُونَ93

رَبِّ فَلَا تَجۡعَلۡنِي فِي ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِينَ94

وَإِنَّا عَلَىٰٓ أَن نُّرِيَكَ مَا نَعِدُهُمۡ لَقَٰدِرُونَ95

ٱدۡفَعۡ بِٱلَّتِي هِيَ أَحۡسَنُ ٱلسَّيِّئَةَۚ نَحۡنُ أَعۡلَمُ بِمَا يَصِفُونَ96

وَقُل رَّبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنۡ هَمَزَٰتِ ٱلشَّيَٰطِينِ97

وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحۡضُرُونِ98

Illustration

दुष्टों के लिए अब बहुत देर हो चुकी है।

99जब उनमें से किसी को मौत आती है, तो वे पुकारते हैं, 'मेरे रब!

मुझे वापस भेज दे,'

100'ताकि मैं उसकी भरपाई कर सकूँ जो मैंने छोड़ा था!

' हरगिज़ नहीं!

यह तो बस एक बेकार की बात है जो वे कहते हैं।

लेकिन उन्हें 'इस दुनिया से' तब तक रोक कर रखा जाएगा जब तक कि उन्हें दोबारा जीवित नहीं किया जाता।

11

101फिर, जब सूर फूंका जाएगा,12 उस दिन उनके बीच कोई पारिवारिक संबंध नहीं रहेगा, और वे एक-दूसरे के बारे में पूछने की भी परवाह नहीं करेंगे।

13

102और जिनके पलड़े 'अच्छे कर्मों से' भारी होंगे, वे ही वास्तव में सफल होंगे।

103लेकिन जिनके पलड़े हल्के होंगे, ऐसे लोगों ने स्वयं को बर्बाद कर लिया है, हमेशा के लिए जहन्नम में रहेंगे।

104आग उनके चेहरों को जला देगी, उन्हें विकृत कर देगी।

105उनसे कहा जाएगा, 'क्या मेरी आयतें तुम्हें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थीं, लेकिन तुम उन्हें झुठलाते थे?

'

106वे पुकारेंगे, 'ऐ हमारे रब!

हमारी बदकिस्मती हम पर हावी हो गई, तो हम गुमराह हो गए।

107ऐ हमारे रब!

हमें यहाँ से निकाल दे।

फिर अगर हमने दोबारा ऐसा किया, तो हम निश्चित रूप से ज़ालिम होंगे।

108अल्लाह जवाब देगा, 'वहीं धिक्कारे हुए पड़े रहो, और मुझसे कभी बात मत करना!

'

109मेरे बंदों में से एक गिरोह ऐसा था जो दुआ किया करता था, 'ऐ हमारे रब!

हम ईमान लाए हैं, तो हमें बख़्श दे और हम पर रहम कर; तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।

'

110मगर तुम उनका मज़ाक़ उड़ाने में इतने मशगूल थे कि तुम मुझे बिल्कुल भूल गए।

और तुम उन पर हँसते रहे।

111आज मैंने उन्हें उनके सब्र का बदला दिया है: वे ही असल में कामयाब हैं।

112वह उनसे पूछेगा, 'तुम ज़मीन पर कितने साल ठहरे?

'

113वे जवाब देंगे, 'हम तो बस एक दिन या दिन का कुछ हिस्सा ठहरे।

लेकिन उन लोगों से पूछो जिन्होंने गिनती रखी थी।

'

114वह कहेगा, 'तुम बस थोड़ी ही देर ठहरे थे, काश तुम जानते।

'

115क्या तुमने यह गुमान किया था कि हमने तुम्हें बस खेल-कूद के लिए बनाया था, और कि तुम्हें कभी हमारी ओर लौटाया नहीं जाएगा?

حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَ أَحَدَهُمُ ٱلۡمَوۡتُ قَالَ رَبِّ ٱرۡجِعُونِ99

لَعَلِّيٓ أَعۡمَلُ صَٰلِحٗا فِيمَا تَرَكۡتُۚ كَلَّآۚ إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَآئِلُهَاۖ وَمِن وَرَآئِهِم بَرۡزَخٌ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ100

فَإِذَا نُفِخَ فِي ٱلصُّورِ فَلَآ أَنسَابَ بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَئِذٖ وَلَا يَتَسَآءَلُونَ101

فَمَن ثَقُلَتۡ مَوَٰزِينُهُۥ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ102

وَمَنۡ خَفَّتۡ مَوَٰزِينُهُۥ فَأُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ فِي جَهَنَّمَ خَٰلِدُونَ103

تَلۡفَحُ وُجُوهَهُمُ ٱلنَّارُ وَهُمۡ فِيهَا كَٰلِحُونَ104

أَلَمۡ تَكُنۡ ءَايَٰتِي تُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ فَكُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ105

قَالُواْ رَبَّنَا غَلَبَتۡ عَلَيۡنَا شِقۡوَتُنَا وَكُنَّا قَوۡمٗا ضَآلِّينَ106

رَبَّنَآ أَخۡرِجۡنَا مِنۡهَا فَإِنۡ عُدۡنَا فَإِنَّا ظَٰلِمُونَ107

قَالَ ٱخۡسَ‍ُٔواْ فِيهَا وَلَا تُكَلِّمُونِ108

إِنَّهُۥ كَانَ فَرِيقٞ مِّنۡ عِبَادِي يَقُولُونَ رَبَّنَآ ءَامَنَّا فَٱغۡفِرۡ لَنَا وَٱرۡحَمۡنَا وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلرَّٰحِمِينَ109

فَٱتَّخَذۡتُمُوهُمۡ سِخۡرِيًّا حَتَّىٰٓ أَنسَوۡكُمۡ ذِكۡرِي وَكُنتُم مِّنۡهُمۡ تَضۡحَكُونَ110

إِنِّي جَزَيۡتُهُمُ ٱلۡيَوۡمَ بِمَا صَبَرُوٓاْ أَنَّهُمۡ هُمُ ٱلۡفَآئِزُونَ111

قَٰلَ كَمۡ لَبِثۡتُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ عَدَدَ سِنِينَ112

قَالُواْ لَبِثۡنَا يَوۡمًا أَوۡ بَعۡضَ يَوۡمٖ فَسۡ‍َٔلِ ٱلۡعَآدِّينَ113

قَٰلَ إِن لَّبِثۡتُمۡ إِلَّا قَلِيلٗاۖ لَّوۡ أَنَّكُمۡ كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ114

أَفَحَسِبۡتُمۡ أَنَّمَا خَلَقۡنَٰكُمۡ عَبَثٗا وَأَنَّكُمۡ إِلَيۡنَا لَا تُرۡجَعُونَ115

एक ही अल्लाह

116अल्लाह, सच्चा बादशाह, अत्यंत उच्च है!

उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, वह सम्मानित सिंहासन का रब है।

117जो कोई अल्लाह के सिवा किसी और पूज्य को पुकारता है—जिसके लिए उसके पास कोई प्रमाण नहीं है—तो वह अपने रब के पास उसका दंड पाएगा।

निःसंदेह, काफ़िर कभी सफल नहीं होंगे।

118कहो, "ऐ नबी, 'मेरे रब!

बख़्श दे और रहम कर।

तू सबसे बढ़कर रहम करने वाला है।

'"

فَتَعَٰلَى ٱللَّهُ ٱلۡمَلِكُ ٱلۡحَقُّۖ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡكَرِيمِ116

وَمَن يَدۡعُ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ لَا بُرۡهَٰنَ لَهُۥ بِهِۦ فَإِنَّمَا حِسَابُهُۥ عِندَ رَبِّهِۦٓۚ إِنَّهُۥ لَا يُفۡلِحُ ٱلۡكَٰفِرُونَ117

وَقُل رَّبِّ ٱغۡفِرۡ وَٱرۡحَمۡ وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلرَّٰحِمِينَ118

How to study Surah Al-Mu'minûn with children

Use this children's lesson as a guided path: read the short explanation, look at the Arabic verse, listen to related recitation, and return to the full surah when your child is ready for more detail.

Parents can review one section at a time, ask the child to repeat the main idea, and then continue with the next part or a nearby surah. This keeps the lesson connected with Quran reading, audio, and daily practice.