Surah 23
Volume 3

The Believers

المُؤْمِنُون

المؤمنون

Surah Al-Mu'minûn for kids content

LEARNING POINTS

सीखने के बिंदु

  • ईमान वाले कामयाब होंगे, जबकि काफ़िरों को असफलता ही मिलेगी।

  • अल्लाह ही एकमात्र सच्चा ईश्वर है जो हमारी इबादत का हक़दार है।

  • अल्लाह ने हमें इतनी सारी नेमतों से नवाज़ा है जिनके लिए हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए।

  • अल्लाह ही महान सृष्टिकर्ता है जिसके पास सबको न्याय के लिए दोबारा जीवित करने की शक्ति है।

  • अल्लाह हमेशा अपने नबियों की मदद करता है।

  • मक्कावासियों के पास कुरान को अस्वीकार करने का कोई तर्क नहीं है और बुतों की पूजा करने का कोई प्रमाण नहीं है।

  • हमें सदैव बुराई से अल्लाह की पनाह मांगनी चाहिए।

  • दुष्ट लोग क़यामत के दिन एक और अवसर के लिए याचना करेंगे, लेकिन तब बहुत देर हो चुकी होगी।

Illustration

सच्चे मोमिन

1निःसंदेह मोमिन कामयाब होंगे:

2जो अपनी नमाज़ में विनम्र होते हैं;

3जो व्यर्थ बातों से बचते हैं;

4जो ज़कात अदा करते हैं;

5और जो अपनी इच्छाओं को पूरा करते हैं।

6केवल अपनी पत्नियों के साथ या जो उनके वैध अधिकार में हैं, तो उन पर कोई दोष नहीं।

7लेकिन जो इससे आगे जाते हैं, वे वास्तव में हद पार कर रहे हैं।

8और ईमान वाले वे भी हैं जो अपनी अमानतों और वादों को पूरा करते हैं;

9और जो हमेशा अपनी नमाज़ कायम रखते हैं।

10ऐसे लोग ही सफल होने वाले हैं।

11जिन्हें जन्नत उनकी अपनी मिल्कियत के रूप में प्रदान की जाएगी।

वे उसमें सदा रहेंगे।

قَدۡ أَفۡلَحَ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ1

ٱلَّذِينَ هُمۡ فِي صَلَاتِهِمۡ خَٰشِعُونَ2

وَٱلَّذِينَ هُمۡ عَنِ ٱللَّغۡوِ مُعۡرِضُونَ3

وَٱلَّذِينَ هُمۡ لِلزَّكَوٰةِ فَٰعِلُونَ4

وَٱلَّذِينَ هُمۡ لِفُرُوجِهِمۡ حَٰفِظُونَ5

إِلَّا عَلَىٰٓ أَزۡوَٰجِهِمۡ أَوۡ مَا مَلَكَتۡ أَيۡمَٰنُهُمۡ فَإِنَّهُمۡ غَيۡرُ مَلُومِينَ6

فَمَنِ ٱبۡتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡعَادُونَ7

وَٱلَّذِينَ هُمۡ لِأَمَٰنَٰتِهِمۡ وَعَهۡدِهِمۡ رَٰعُونَ8

وَٱلَّذِينَ هُمۡ عَلَىٰ صَلَوَٰتِهِمۡ يُحَافِظُونَ9

أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡوَٰرِثُونَ10

ٱلَّذِينَ يَرِثُونَ ٱلۡفِرۡدَوۡسَ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ11

Illustration

मानव की सृष्टि

12और निश्चय ही हमने पहला इंसान मिट्टी के सार से बनाया,

13फिर हमने हर व्यक्ति को एक मानव बीज के रूप में एक सुरक्षित स्थान (गर्भाशय) में रखा,

14फिर हमने उस बीज को एक छोटी सी लटकी हुई चीज़ में विकसित किया, फिर उस छोटी चीज़ को मांस के एक लोथड़े में विकसित किया, फिर उस

लोथड़े से एक कंकाल विकसित किया, फिर उन हड्डियों को मांस से ढका, फिर हमने उसे एक नई रचना के रूप में अस्तित्व में लाया।

तो धन्य है अल्लाह, सबसे अच्छा निर्माता।

15फिर अंत में, तुम निश्चित रूप से मर जाओगे,

16फिर क़यामत के दिन तुम्हें फिर से जीवित किया जाएगा।

وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ مِن سُلَٰلَةٖ مِّن طِين12

ثُمَّ جَعَلۡنَٰهُ نُطۡفَةٗ فِي قَرَارٖ مَّكِين13

ثُمَّ خَلَقۡنَا ٱلنُّطۡفَةَ عَلَقَةٗ فَخَلَقۡنَا ٱلۡعَلَقَةَ مُضۡغَةٗ فَخَلَقۡنَا ٱلۡمُضۡغَةَ عِظَٰمٗا فَكَسَوۡنَا ٱلۡعِظَٰمَ لَحۡمٗا ثُمَّ أَنشَأۡنَٰهُ خَلۡقًا ءَاخَرَۚ فَتَبَارَكَ ٱللَّهُ أَحۡسَنُ ٱلۡخَٰلِقِينَ14

ثُمَّ إِنَّكُم بَعۡدَ ذَٰلِكَ لَمَيِّتُونَ15

ثُمَّ إِنَّكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ تُبۡعَثُونَ16

अल्लाह की कुदरत

17और निश्चय ही, हमने तुम्हारे ऊपर सात आसमान बनाए।

और हम अपनी सृष्टि से कभी ग़ाफ़िल नहीं होते।

18और हम आसमान से एक निश्चित मात्रा में बारिश बरसाते हैं, फिर उसे ज़मीन में समा देते हैं।

और निश्चय ही, हम उसे वापस ले जाने पर सक्षम हैं।

19इसी 'बारिश' से हम तुम्हारे लिए खजूरों और अंगूरों के बाग़ पैदा करते हैं, जिनमें तुम्हारे लिए बहुत से फल होते हैं, जिनसे तुम खाते हो,

20और जैतून के पेड़ भी, जो तूर सीना पर उगते हैं, जो तेल और खाने के लिए सालन प्रदान करते हैं।

21और निश्चय ही तुम्हारे लिए चौपायों में एक सबक़ है, उनके पेटों से हम तुम्हें पीने के लिए 'शुद्ध दूध' देते हैं, और उनमें तुम्हारे लिए बहुत से

अन्य लाभ हैं, और उनसे तुम खाते भी हो।

22और तुम उनमें से कुछ पर और जहाजों पर ढोए जाते हो।

وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا فَوۡقَكُمۡ سَبۡعَ طَرَآئِقَ وَمَا كُنَّا عَنِ ٱلۡخَلۡقِ غَٰفِلِينَ17

وَأَنزَلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءَۢ بِقَدَرٖ فَأَسۡكَنَّٰهُ فِي ٱلۡأَرۡضِۖ وَإِنَّا عَلَىٰ ذَهَابِۢ بِهِۦ لَقَٰدِرُونَ18

فَأَنشَأۡنَا لَكُم بِهِۦ جَنَّٰتٖ مِّن نَّخِيلٖ وَأَعۡنَٰبٖ لَّكُمۡ فِيهَا فَوَٰكِهُ كَثِيرَةٞ وَمِنۡهَا تَأۡكُلُونَ19

وَشَجَرَةٗ تَخۡرُجُ مِن طُورِ سَيۡنَآءَ تَنۢبُتُ بِٱلدُّهۡنِ وَصِبۡغٖ لِّلۡأٓكِلِينَ20

وَإِنَّ لَكُمۡ فِي ٱلۡأَنۡعَٰمِ لَعِبۡرَةٗۖ نُّسۡقِيكُم مِّمَّا فِي بُطُونِهَا وَلَكُمۡ فِيهَا مَنَٰفِعُ كَثِيرَةٞ وَمِنۡهَا تَأۡكُلُونَ21

وَعَلَيۡهَا وَعَلَى ٱلۡفُلۡكِ تُحۡمَلُونَ22

नबी नूह

23निःसंदेह, हमने नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा।

उसने कहा, 'ऐ मेरी क़ौम!

केवल अल्लाह की इबादत करो।

तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई माबूद नहीं।

तो क्या तुम डरते नहीं?

'

24लेकिन उसकी क़ौम के काफ़िर सरदारों ने कहा, 'यह तो बस तुम्हारे जैसा एक इंसान है, जो तुम सब पर अपनी श्रेष्ठता जताना चाहता है।

अगर अल्लाह चाहता, तो वह आसानी से फ़रिश्ते उतार देता।

हमने अपने बाप-दादाओं से ऐसा कभी नहीं सुना।

'

25'वह तो बस दीवाना है, तो कुछ समय के लिए उसके साथ सब्र करो।

'

وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ فَقَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥٓۚ أَفَلَا تَتَّقُونَ23

فَقَالَ ٱلۡمَلَؤُاْ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ مَا هَٰذَآ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ يُرِيدُ أَن يَتَفَضَّلَ عَلَيۡكُمۡ وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَأَنزَلَ مَلَٰٓئِكَةٗ مَّا سَمِعۡنَا بِهَٰذَا فِيٓ ءَابَآئِنَا ٱلۡأَوَّلِينَ24

إِنۡ هُوَ إِلَّا رَجُلُۢ بِهِۦ جِنَّةٞ فَتَرَبَّصُواْ بِهِۦ حَتَّىٰ حِينٖ25

जलप्रलय

26नूह ने दुआ की, 'मेरे रब!

मेरी मदद कर, क्योंकि उन्होंने मुझे झुठलाया है।

'

27तो हमने उसे वह्यी की: 'हमारी आँखों के सामने और हमारी हिदायत के अनुसार कश्ती बनाओ।

फिर जब हमारा हुक्म आ जाए और तंदूर से पानी उबल पड़े, तो हर जाति में से एक-एक जोड़ा और अपने घरवालों को उसमें सवार कर लेना –

सिवाय उनके जिन पर (अज़ाब का) फैसला हो चुका है।

और उन लोगों के बारे में मुझसे बहस न करना जिन्होंने ज़ुल्म किया है; वे ज़रूर डुबो दिए जाएँगे।

'

28फिर जब तुम और तुम्हारे साथ वाले कश्ती में बैठ जाओ, तो कहना, 'सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें ज़ालिम लोगों से बचाया।

'

29और दुआ करना, 'मेरे रब!

मुझे बरकत वाली जगह उतारना; तू सबसे अच्छा उतारने वाला है।

'

30बेशक इसमें निशानियाँ हैं।

हम हमेशा लोगों को आज़माते रहते हैं।

قَالَ رَبِّ ٱنصُرۡنِي بِمَا كَذَّبُونِ26

فَأَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡهِ أَنِ ٱصۡنَعِ ٱلۡفُلۡكَ بِأَعۡيُنِنَا وَوَحۡيِنَا فَإِذَا جَآءَ أَمۡرُنَا وَفَارَ ٱلتَّنُّورُ فَٱسۡلُكۡ فِيهَا مِن كُلّٖ زَوۡجَيۡنِ ٱثۡنَيۡنِ وَأَهۡلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيۡهِ ٱلۡقَوۡلُ مِنۡهُمۡۖ وَلَا تُخَٰطِبۡنِي فِي ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ إِنَّهُم مُّغۡرَقُونَ27

فَإِذَا ٱسۡتَوَيۡتَ أَنتَ وَمَن مَّعَكَ عَلَى ٱلۡفُلۡكِ فَقُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي نَجَّىٰنَا مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِينَ28

وَقُل رَّبِّ أَنزِلۡنِي مُنزَلٗا مُّبَارَكٗا وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلۡمُنزِلِينَ29

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ وَإِن كُنَّا لَمُبۡتَلِينَ30

पैगंबर हूद

31फिर हमने उनके बाद एक और पीढ़ी उठाई।

32और उन्हीं में से एक रसूल उनकी ओर भेजा, यह कहते हुए, 'अल्लाह की ही इबादत करो।

उसके सिवा तुम्हारा कोई और माबूद नहीं।

तो क्या तुम डरोगे नहीं?

'

33लेकिन उसकी क़ौम के सरदार, जिन्होंने कुफ़्र किया, और आख़िरत में अल्लाह से मिलने का इनकार किया, और जिन्हें हमने दुनियावी ज़िंदगी में ऐशो-आराम दिया था, उन्होंने कहा,

'यह तो बस तुम्हारे जैसा एक इंसान है।

यह वही खाता है जो तुम खाते हो, और वही पीता है जो तुम पीते हो।

'

34और अगर तुम अपने जैसे एक इंसान की बात मानोगे, तो तुम यक़ीनन घाटे में रहोगे।

35क्या वह तुमसे वादा करता है कि जब तुम मर जाओगे और मिट्टी और हड्डियाँ बन जाओगे, तो तुम्हें (दोबारा) निकाला जाएगा?

36असंभव!

जो तुमसे वादा किया गया है, वह तो सरासर असंभव है!

37इस दुनिया के बाद कुछ नहीं है।

हम मरते हैं, दूसरे पैदा होते हैं, और कोई भी फिर से ज़िंदा नहीं होगा।

38वह तो बस एक आदमी है जिसने अल्लाह के बारे में झूठ गढ़ा है, और हम उस पर कभी ईमान नहीं लाएँगे।

ثُمَّ أَنشَأۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِمۡ قَرۡنًا ءَاخَرِينَ31

فَأَرۡسَلۡنَا فِيهِمۡ رَسُولٗا مِّنۡهُمۡ أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥٓۚ أَفَلَا تَتَّقُونَ32

وَقَالَ ٱلۡمَلَأُ مِن قَوۡمِهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِلِقَآءِ ٱلۡأٓخِرَةِ وَأَتۡرَفۡنَٰهُمۡ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا مَا هَٰذَآ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ يَأۡكُلُ مِمَّا تَأۡكُلُونَ مِنۡهُ وَيَشۡرَبُ مِمَّا تَشۡرَبُونَ33

وَلَئِنۡ أَطَعۡتُم بَشَرٗا مِّثۡلَكُمۡ إِنَّكُمۡ إِذٗا لَّخَٰسِرُونَ34

أَيَعِدُكُمۡ أَنَّكُمۡ إِذَا مِتُّمۡ وَكُنتُمۡ تُرَابٗا وَعِظَٰمًا أَنَّكُم مُّخۡرَجُونَ35

هَيۡهَاتَ هَيۡهَاتَ لِمَا تُوعَدُونَ36

إِنۡ هِيَ إِلَّا حَيَاتُنَا ٱلدُّنۡيَا نَمُوتُ وَنَحۡيَا وَمَا نَحۡنُ بِمَبۡعُوثِينَ37

إِنۡ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبٗا وَمَا نَحۡنُ لَهُۥ بِمُؤۡمِنِينَ38

महानाद

39रसूल ने दुआ की, 'ऐ मेरे रब!

मेरी मदद कर, क्योंकि उन्होंने मुझे झुठलाया है।

'

40अल्लाह ने फरमाया, 'अनक़रीब वे पछताएंगे।

'

41फिर उन्हें हक़ के साथ एक सख़्त चीख़ ने आ पकड़ा, और हमने उन्हें कूड़ा-करकट बना दिया।

तो धिक्कार है ज़ालिमों पर!

قَالَ رَبِّ ٱنصُرۡنِي بِمَا كَذَّبُونِ39

قَالَ عَمَّا قَلِيلٖ لَّيُصۡبِحُنَّ نَٰدِمِينَ40

فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلصَّيۡحَةُ بِٱلۡحَقِّ فَجَعَلۡنَٰهُمۡ غُثَآءٗۚ فَبُعۡدٗا لِّلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِينَ41

और पैगंबर

42फिर हमने उनके बाद दूसरी पीढ़ियों को पैदा किया।

43कोई भी कौम अपने विनाश को न तो जल्दी ला सकती है और न ही उसे टाल सकती है।

44फिर हमने अपने रसूलों को एक के बाद एक भेजा।

जब भी कोई रसूल अपनी कौम के पास आया, उन्होंने उसे झुठलाया।

तो हमने उन्हें एक के बाद एक तबाह कर दिया और उन्हें एक मिसाल बना दिया।

तो धिक्कार है उन पर जो ईमान लाने से इनकार करते हैं!

ثُمَّ أَنشَأۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِمۡ قُرُونًا ءَاخَرِينَ42

مَا تَسۡبِقُ مِنۡ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسۡتَ‍ٔۡخِرُونَ43

ثُمَّ أَرۡسَلۡنَا رُسُلَنَا تَتۡرَاۖ كُلَّ مَا جَآءَ أُمَّةٗ رَّسُولُهَا كَذَّبُوهُۖ فَأَتۡبَعۡنَا بَعۡضَهُم بَعۡضٗا وَجَعَلۡنَٰهُمۡ أَحَادِيثَۚ فَبُعۡدٗا لِّقَوۡمٖ لَّا يُؤۡمِنُونَ44

पैगंबर मूसा और पैगंबर हारून

45फिर हमने मूसा और उसके भाई हारून को अपनी निशानियों और स्पष्ट प्रमाण के साथ भेजा।

46फ़िरौन और उसके सरदारों के पास, तो उन्होंने अहंकार किया और वे बड़े अभिमानी थे।

47उन्होंने तर्क दिया, 'हम दो ऐसे इंसानों पर कैसे ईमान लाएँ जो हमारी ही तरह हैं, जबकि उनकी क़ौम हमारे गुलाम हैं?

'

48उन्होंने उन दोनों को झुठलाया, तो वे तबाह किए गए लोगों में से थे।

49और हमने यक़ीनन मूसा को किताब दी, ताकि शायद उसकी क़ौम हिदायत पाए।

ثُمَّ أَرۡسَلۡنَا مُوسَىٰ وَأَخَاهُ هَٰرُونَ بِ‍َٔايَٰتِنَا وَسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٍ45

إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَٱسۡتَكۡبَرُواْ وَكَانُواْ قَوۡمًا عَالِينَ46

فَقَالُوٓاْ أَنُؤۡمِنُ لِبَشَرَيۡنِ مِثۡلِنَا وَقَوۡمُهُمَا لَنَا عَٰبِدُونَ47

فَكَذَّبُوهُمَا فَكَانُواْ مِنَ ٱلۡمُهۡلَكِينَ48

وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ لَعَلَّهُمۡ يَهۡتَدُونَ49

पैगंबर ईसा और उनकी माँ

50और हमने मरियम के बेटे और उसकी माँ को एक निशानी बनाया, और उन्हें एक ऊँची जगह पर पनाह दी, जो ठहरने के लिए उपयुक्त थी और जहाँ

बहता पानी था।

وَجَعَلۡنَا ٱبۡنَ مَرۡيَمَ وَأُمَّهُۥٓ ءَايَةٗ وَءَاوَيۡنَٰهُمَآ إِلَىٰ رَبۡوَةٖ ذَاتِ قَرَارٖ وَمَعِين50

एक ही मार्ग

51ऐ रसूलों!

पाक चीज़ें खाओ और नेक काम करो।

मैं तुम्हारे कामों को खूब जानता हूँ।

52बेशक, तुम्हारा यह दीन (धर्म) केवल एक ही है, और मैं तुम्हारा रब हूँ, तो मुझ ही को याद रखो।

53मगर लोगों ने इसे अलग-अलग फिरक़ों में बाँट लिया है, हर एक अपने पास जो कुछ है, उसी पर मगन है।

54तो ऐ पैग़म्बर!

उन्हें उनकी ग़फ़लत में कुछ समय तक रहने दो।

55क्या वे यह समझते हैं कि हम उन्हें माल और औलाद दिए जा रहे हैं-

56कि हम उन्हें नेमतों से नवाज़ने में जल्दबाज़ी कर रहे हैं?

हरगिज़ नहीं!

उन्हें खबर नहीं है।

يَٰٓأَيُّهَا ٱلرُّسُلُ كُلُواْ مِنَ ٱلطَّيِّبَٰتِ وَٱعۡمَلُواْ صَٰلِحًاۖ إِنِّي بِمَا تَعۡمَلُونَ عَلِيمٞ51

وَإِنَّ هَٰذِهِۦٓ أُمَّتُكُمۡ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ وَأَنَا۠ رَبُّكُمۡ فَٱتَّقُونِ52

فَتَقَطَّعُوٓاْ أَمۡرَهُم بَيۡنَهُمۡ زُبُرٗاۖ كُلُّ حِزۡبِۢ بِمَا لَدَيۡهِمۡ فَرِحُونَ53

فَذَرۡهُمۡ فِي غَمۡرَتِهِمۡ حَتَّىٰ حِينٍ54

أَيَحۡسَبُونَ أَنَّمَا نُمِدُّهُم بِهِۦ مِن مَّالٖ وَبَنِينَ55

نُسَارِعُ لَهُمۡ فِي ٱلۡخَيۡرَٰتِۚ بَل لَّا يَشۡعُرُونَ56

WORDS OF WISDOM

ज्ञान की बातें

  • आयतों ५७-६१ के अनुसार, सच्चे ईमान वाले अल्लाह से अच्छा संबंध बनाए रखते हैं और हमेशा बेहतर करने का प्रयास करते हैं।

    नबी की पत्नी आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने उनसे पूछा कि क्या आयत ६० उन लोगों के बारे में है जो चोरी करते हैं या शराब पीते हैं।

  • नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने जवाब दिया, "नहीं, यह उन लोगों के बारे में है जो नमाज़ पढ़ते हैं, रोज़े रखते हैं और सदक़ा करते हैं, लेकिन

    इस बात से डरते हैं कि उनके नेक अमल कबूल नहीं होंगे क्योंकि वे उतने अच्छे नहीं हैं।

    " फिर उन्होंने आयत का अंतिम अंश तिलावत किया: "वे भलाई के कामों में एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते हैं, हमेशा आगे रहते हैं!

    " {इमाम अत-तिर्मिज़ी}

SIDE STORY

छोटी कहानी

  • एक बूढ़ा राजमिस्त्री सेवानिवृत्त होना चाहता था, इसलिए उसने अपने मालिक को बताया कि वह कंपनी छोड़ रहा है और अधिक आरामदायक जीवन जीना चाहता है।

    उसके मालिक ने कहा कि उसे जाते हुए देखकर उसे बहुत दुख होगा और कंपनी पर एक एहसान के तौर पर उससे एक और घर बनाने के लिए

    कहा।

    राजमिस्त्री योजना पर सहमत हो गया।

    हालाँकि उसने हमेशा शानदार घर बनाए थे, उसने आखिरी वाले में खराब काम किया।

    उसने घटिया सामग्री का उपयोग किया और विवरणों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

    जब काम पूरा हो गया, तो मालिक ने राजमिस्त्री को चाबी सौंप दी और कहा, "कृपया इस घर को अपने सेवानिवृत्ति उपहार के रूप में स्वीकार करें।

    " राजमिस्त्री सदमे में था!

    उसे नहीं पता था कि यह उसका घर होने वाला था।

    अगर उसे पता होता, तो उसने बेहतर काम किया होता।

  • यहाँ सबक यह है कि हमें आयतों 57-61 में वर्णित सच्चे विश्वासियों के उदाहरण से सीखना चाहिए।

    जब वे नेक काम करते हैं, तो उन्हें लगता है कि वे कर्म पर्याप्त अच्छे नहीं हैं और उन्हें अगली बार बेहतर करना चाहिए।

    अल्लाह के लिए यह मायने नहीं रखता कि हम जीवन में कैसे शुरुआत करते हैं, बल्कि यह मायने रखता है कि हम कैसे समाप्त करते हैं।

  • Illustration

सच्चे मुअम्मिन

57निःसंदेह वे लोग जो अपने रब से भयभीत रहते हैं,

58और जो अपने रब की आयतों पर ईमान लाते हैं,

59और जो अपने रब के साथ किसी को शरीक नहीं ठहराते,

60और जो कुछ भी नेक काम करते हैं, उनके दिल इस बात से भयभीत रहते हैं कि उन्हें अपने रब की ओर लौटना है—

61वे नेक कामों में दौड़ते हैं, हमेशा अग्रणी रहते हैं।

62हम किसी जान पर उसकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डालते।

إِنَّ ٱلَّذِينَ هُم مِّنۡ خَشۡيَةِ رَبِّهِم مُّشۡفِقُونَ57

وَٱلَّذِينَ هُم بِ‍َٔايَٰتِ رَبِّهِمۡ يُؤۡمِنُونَ58

وَٱلَّذِينَ هُم بِرَبِّهِمۡ لَا يُشۡرِكُونَ59

وَٱلَّذِينَ يُؤۡتُونَ مَآ ءَاتَواْ وَّقُلُوبُهُمۡ وَجِلَةٌ أَنَّهُمۡ إِلَىٰ رَبِّهِمۡ رَٰجِعُونَ60

أُوْلَٰٓئِكَ يُسَٰرِعُونَ فِي ٱلۡخَيۡرَٰتِ وَهُمۡ لَهَا سَٰبِقُونَ61

وَلَا نُكَلِّفُ نَفۡسًا إِلَّا وُسۡعَهَاۚ وَلَدَيۡنَا كِتَٰبٞ يَنطِقُ بِٱلۡحَقِّ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ62

काफ़िर

63बल्कि उन काफ़िरों के दिल इन सब से ग़ाफ़िल हैं और इसके अलावा वे दूसरे बुरे काम भी करते हैं।

64मगर ज्यों ही हमने उनके ऐश-परस्त सरदारों को अज़ाब दिया, वे फ़रियाद करने लगे।

65'उनसे कहा जाएगा,' 'आज फ़रियाद मत करो; तुम्हें हमसे कभी नजात नहीं मिलेगी।

'

66मेरी आयतें तुम्हें हमेशा सुनाई जाती थीं, लेकिन तुम 'घृणा' से मुँह मोड़ लेते थे।

67इस पर शेखी बघारते हुए और सारी रात अनाप-शनाप बकते हुए।

بَلۡ قُلُوبُهُمۡ فِي غَمۡرَةٖ مِّنۡ هَٰذَا وَلَهُمۡ أَعۡمَٰلٞ مِّن دُونِ ذَٰلِكَ هُمۡ لَهَا عَٰمِلُونَ63

حَتَّىٰٓ إِذَآ أَخَذۡنَا مُتۡرَفِيهِم بِٱلۡعَذَابِ إِذَا هُمۡ يَجۡ‍َٔرُونَ64

لَا تَجۡ‍َٔرُواْ ٱلۡيَوۡمَۖ إِنَّكُم مِّنَّا لَا تُنصَرُونَ65

قَدۡ كَانَتۡ ءَايَٰتِي تُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ فَكُنتُمۡ عَلَىٰٓ أَعۡقَٰبِكُمۡ تَنكِصُونَ66

مُسۡتَكۡبِرِينَ بِهِۦ سَٰمِرٗا تَهۡجُرُونَ67

उन्होंने क़ुरआन को क्यों अस्वीकार किया?

68क्या उन्होंने इस संदेश पर कभी गहराई से विचार नहीं किया?

या इसलिए कि उन्हें कुछ ऐसा मिला है जो उनके बाप-दादा को नहीं मिला था?

69या इसलिए कि वे अपने रसूल को पहचान नहीं पाए, तो उन्होंने उसे ठुकरा दिया?

70या इसलिए कि वे दावा करते हैं, 'वह पागल है?

' बल्कि, वह उनके पास सत्य लेकर आया है, लेकिन उनमें से अधिकतर सत्य के पूर्णतः विरुद्ध हैं।

71यदि सत्य उनकी इच्छाओं के अनुसार चलता, तो आकाश, धरती और उनमें जो कुछ भी है, सब बिगड़ जाते।

बल्कि, हमने उनके पास गौरव का एक स्रोत भेजा है लेकिन वे बस उससे मुँह मोड़ते रहते हैं।

72या इसलिए कि हे नबी, आप उनसे इस संदेश के लिए कोई शुल्क मांग रहे हैं?

लेकिन आपके रब का प्रतिफल कहीं बेहतर है; वह सबसे उत्तम रोज़ी देने वाला है।

73और आप यकीनन उन्हें सीधे मार्ग की ओर बुला रहे हैं,

74लेकिन जो आख़िरत का इनकार करते हैं, वे यकीनन उस मार्ग से भटक रहे हैं।

أَفَلَمۡ يَدَّبَّرُواْ ٱلۡقَوۡلَ أَمۡ جَآءَهُم مَّا لَمۡ يَأۡتِ ءَابَآءَهُمُ ٱلۡأَوَّلِينَ68

أَمۡ لَمۡ يَعۡرِفُواْ رَسُولَهُمۡ فَهُمۡ لَهُۥ مُنكِرُونَ69

أَمۡ يَقُولُونَ بِهِۦ جِنَّةُۢۚ بَلۡ جَآءَهُم بِٱلۡحَقِّ وَأَكۡثَرُهُمۡ لِلۡحَقِّ كَٰرِهُونَ70

وَلَوِ ٱتَّبَعَ ٱلۡحَقُّ أَهۡوَآءَهُمۡ لَفَسَدَتِ ٱلسَّمَٰوَٰتُ وَٱلۡأَرۡضُ وَمَن فِيهِنَّۚ بَلۡ أَتَيۡنَٰهُم بِذِكۡرِهِمۡ فَهُمۡ عَن ذِكۡرِهِم مُّعۡرِضُونَ71

أَمۡ تَسۡ‍َٔلُهُمۡ خَرۡجٗا فَخَرَاجُ رَبِّكَ خَيۡرٞۖ وَهُوَ خَيۡرُ ٱلرَّٰزِقِينَ72

وَإِنَّكَ لَتَدۡعُوهُمۡ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ73

وَإِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ عَنِ ٱلصِّرَٰطِ لَنَٰكِبُونَ74

BACKGROUND STORY

पृष्ठभूमि की कहानी

  • कई वर्षों तक, बुतपरस्तों ने इस्लाम को अस्वीकार किया और मक्का में शुरुआती मुसलमानों को सताया, इसलिए पैगंबर (ﷺ) ने उनके लिए बद्दुआ की।

    तब, लंबे समय तक बारिश नहीं हुई और मक्का के लोग भूखे मरने लगे।

    उनमें से कुछ कुत्ते और मुर्दा जानवर खाने पर मजबूर हो गए।

    मक्कावासियों के लिए हालात तब और भी बदतर हो गए जब थुमामा इब्न उथाल (बनु हनीफा के सरदार) ने इस्लाम कबूल किया और उनकी भोजन आपूर्ति बंद कर

    दी।

  • आखिरकार, मक्कावासियों ने पैगंबर (ﷺ) से उन पर रहम करने और थुमामा (र.

    अ.

    ) से उनकी आपूर्ति जारी रखने के लिए कहने की विनती की।

    उनकी विनती स्वीकार कर ली गई।

    आयतें 75-77 बुतपरस्तों को बताती हैं कि जैसे ही अल्लाह उनके लिए हालात आसान कर देता है, वे फिर से गलत काम करेंगे।

    {इमाम अल-कुरतुबी}

Illustration

जो इनकार करते रहते हैं।

75और यदि हम उन पर दया करते और उनकी तकलीफ़ दूर कर देते, तो भी वे अपनी सरकशी में अंधे होकर भटकते रहते।

76हमने उन्हें पहले ही तकलीफ़ों में डाला है, लेकिन वे अपने रब के सामने कभी विनम्र नहीं हुए और न ही उन्होंने उससे दया की याचना की।

77लेकिन जैसे ही हम उनके लिए सख़्त अज़ाब का एक दरवाज़ा खोलेंगे, वे हताश हो जाएँगे।

وَلَوۡ رَحِمۡنَٰهُمۡ وَكَشَفۡنَا مَا بِهِم مِّن ضُرّٖ لَّلَجُّواْ فِي طُغۡيَٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ75

وَلَقَدۡ أَخَذۡنَٰهُم بِٱلۡعَذَابِ فَمَا ٱسۡتَكَانُواْ لِرَبِّهِمۡ وَمَا يَتَضَرَّعُونَ76

حَتَّىٰٓ إِذَا فَتَحۡنَا عَلَيۡهِم بَابٗا ذَا عَذَابٖ شَدِيدٍ إِذَا هُمۡ فِيهِ مُبۡلِسُونَ77

नाशुक्रे इंसान

78वह वही है जिसने तुम्हारे लिए कान, आँखें और दिल बनाए।

फिर भी तुम बहुत कम शुक्र अदा करते हो।

79और वह वही है जिसने तुम्हें ज़मीन में फैलाया है, और उसी की ओर तुम सब इकट्ठे किए जाओगे।

80और वह वही है जो ज़िंदा करता है और मारता है, और दिन और रात का उलट-फेर उसी के हाथ में है।

तो क्या तुम फिर भी नहीं समझोगे?

81बल्कि वे तो वही कहते हैं जो उनसे पहले वालों ने कहा था।

82उन्होंने कहा, 'क्या!

जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या हमें सचमुच फिर से ज़िंदा किया जाएगा?

'

83हमसे इसका वादा पहले ही किया जा चुका है, जैसे हमारे बाप-दादाओं से पहले किया गया था।

यह तो बस पुरानी कहानियाँ हैं!

وَهُوَ ٱلَّذِيٓ أَنشَأَ لَكُمُ ٱلسَّمۡعَ وَٱلۡأَبۡصَٰرَ وَٱلۡأَفۡ‍ِٔدَةَۚ قَلِيلٗا مَّا تَشۡكُرُونَ78

وَهُوَ ٱلَّذِي ذَرَأَكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَإِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ79

وَهُوَ ٱلَّذِي يُحۡيِۦ وَيُمِيتُ وَلَهُ ٱخۡتِلَٰفُ ٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ80

بَلۡ قَالُواْ مِثۡلَ مَا قَالَ ٱلۡأَوَّلُونَ81

قَالُوٓاْ أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابٗا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ82

لَقَدۡ وُعِدۡنَا نَحۡنُ وَءَابَآؤُنَا هَٰذَا مِن قَبۡلُ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّآ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ83

अल्लाह की शक्ति

84उनसे पूछो, हे पैगंबर, 'पृथ्वी और उस पर जो कुछ भी है, उसका मालिक कौन है, यदि तुम जानते हो?

'

85वे कहेंगे, 'अल्लाह!

' कहो, 'तो क्या तुम सबक नहीं सीखोगे?

'

86उनसे पूछो, 'सात आकाशों का रब कौन है और महान सिंहासन का रब कौन है?

'

87वे कहेंगे, 'अल्लाह।

' कहो, 'तो क्या तुम उसे याद नहीं रखोगे?

'

88उनसे पूछो, 'किसके हाथ में हर चीज़ का अधिकार है, जो सबकी रक्षा करता है, और जिसके विरुद्ध कोई रक्षा नहीं कर सकता, यदि तुम जानते हो?

'

89वे कहेंगे, 'अल्लाह।

' कहो, 'फिर तुम कैसे बहकाए जा रहे हो?

'

90बल्कि हमने उनके पास हक़ पहुँचाया है, और वे यक़ीनन झूठे हैं।

91अल्लाह ने कभी कोई संतान नहीं बनाई, और उसके साथ कोई दूसरा माबूद नहीं है।

अन्यथा, हर माबूद अपनी बनाई हुई चीज़ को ले जाता और वे एक-दूसरे पर हावी होने की कोशिश करते।

अल्लाह उन बातों से बहुत पाक है जो वे कहते हैं।

92वह ग़ैब और शहादत का जानने वाला है।

और वह उन सभी चीज़ों से बहुत पाक है जिन्हें वे उसका शरीक ठहराते हैं।

قُل لِّمَنِ ٱلۡأَرۡضُ وَمَن فِيهَآ إِن كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ84

سَيَقُولُونَ لِلَّهِۚ قُلۡ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ85

قُلۡ مَن رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ ٱلسَّبۡعِ وَرَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡعَظِيمِ86

سَيَقُولُونَ لِلَّهِۚ قُلۡ أَفَلَا تَتَّقُونَ87

قُلۡ مَنۢ بِيَدِهِۦ مَلَكُوتُ كُلِّ شَيۡءٖ وَهُوَ يُجِيرُ وَلَا يُجَارُ عَلَيۡهِ إِن كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ88

سَيَقُولُونَ لِلَّهِۚ قُلۡ فَأَنَّىٰ تُسۡحَرُونَ89

بَلۡ أَتَيۡنَٰهُم بِٱلۡحَقِّ وَإِنَّهُمۡ لَكَٰذِبُونَ90

مَا ٱتَّخَذَ ٱللَّهُ مِن وَلَدٖ وَمَا كَانَ مَعَهُۥ مِنۡ إِلَٰهٍۚ إِذٗا لَّذَهَبَ كُلُّ إِلَٰهِۢ بِمَا خَلَقَ وَلَعَلَا بَعۡضُهُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٖۚ سُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ91

عَٰلِمِ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ فَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ92

How to study Surah Al-Mu'minûn with children

Use this children's lesson as a guided path: read the short explanation, look at the Arabic verse, listen to related recitation, and return to the full surah when your child is ready for more detail.

Parents can review one section at a time, ask the child to repeat the main idea, and then continue with the next part or a nearby surah. This keeps the lesson connected with Quran reading, audio, and daily practice.