Surah 39
Volume 4

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الزُّمَر

الزُّمَر

Surah Az-Zumar for kids content

नींद - मृत्यु का जुड़वाँ भाई

42अल्लाह ही है जो रूहों को उनकी मृत्यु के समय कब्ज़ कर लेता है, और उन लोगों की रूहों को भी जो सोए हुए होते हैं।

फिर वह उन रूहों को रोक लेता है जिनकी मृत्यु का उसने निर्णय कर लिया है, और दूसरों को एक निर्धारित अवधि तक वापस भेज देता है।

निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं जो चिंतन करते हैं।

ٱللَّهُ يَتَوَفَّى ٱلۡأَنفُسَ حِينَ مَوۡتِهَا وَٱلَّتِي لَمۡ تَمُتۡ فِي مَنَامِهَاۖ فَيُمۡسِكُ ٱلَّتِي قَضَىٰ عَلَيۡهَا ٱلۡمَوۡتَ وَيُرۡسِلُ ٱلۡأُخۡرَىٰٓ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمًّىۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ42

अल्लाह या बुत्त

43क्या उन्होंने अल्लाह के सिवा दूसरों को अपना शिफ़ारिशी बना लिया है जो 'क़यामत के दिन' उनकी ओर से बोलेंगे?

कहो, 'ऐ पैग़म्बर,' "क्या वे ऐसा तब भी करेंगे जबकि उनके पास न तो कोई शक्ति है और न ही कोई समझ?

"

44कहो, "केवल अल्लाह ही तय करता है कि कौन दूसरों की शिफ़ारिश करेगा।

आसमानों और ज़मीन की बादशाही उसी की है।

फिर तुम सब उसी की ओर लौटाए जाओगे।

"

45लेकिन जब केवल अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है, तो उन लोगों के दिल जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, सिकुड़ जाते हैं।

लेकिन जैसे ही उसके सिवा दूसरे देवताओं का ज़िक्र किया जाता है, वे ख़ुशी से भर जाते हैं।

أَمِ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ شُفَعَآءَۚ قُلۡ أَوَلَوۡ كَانُواْ لَا يَمۡلِكُونَ شَيۡ‍ٔٗا وَلَا يَعۡقِلُونَ43

قُل لِّلَّهِ ٱلشَّفَٰعَةُ جَمِيعٗاۖ لَّهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ ثُمَّ إِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ44

وَإِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَحۡدَهُ ٱشۡمَأَزَّتۡ قُلُوبُ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِۖ وَإِذَا ذُكِرَ ٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦٓ إِذَا هُمۡ يَسۡتَبۡشِرُونَ45

अल्लाह न्यायकर्ता है।

46कहो, 'हे पैगंबर,' "हे अल्लाह—आकाशों और पृथ्वी के रचयिता, दृश्य और अदृश्य के जानने वाले!

तुम अपने बंदों के बीच उन बातों का निर्णय करोगे जिनमें वे मतभेद रखते थे।

"

47यदि उन ज़ुल्म करने वालों के पास दुनिया की हर चीज़ दुगुनी मात्रा में होती, तो वे निश्चय ही उसे क़यामत के दिन की भीषण सज़ा से बचने

के लिए दे देते, क्योंकि वे अल्लाह की ओर से वह देखेंगे जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

48और उनके कर्मों के 'बुरे नतीजे' उनके सामने आ जाएँगे, और वे उस बात पर हैरान होंगे जिसका वे मज़ाक उड़ाया करते थे।

قُلِ ٱللَّهُمَّ فَاطِرَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ عَٰلِمَ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ أَنتَ تَحۡكُمُ بَيۡنَ عِبَادِكَ فِي مَا كَانُواْ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ46

وَلَوۡ أَنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ مَا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا وَمِثۡلَهُۥ مَعَهُۥ لَٱفۡتَدَوۡاْ بِهِۦ مِن سُوٓءِ ٱلۡعَذَابِ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ وَبَدَا لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مَا لَمۡ يَكُونُواْ يَحۡتَسِبُونَ47

وَبَدَا لَهُمۡ سَيِّ‍َٔاتُ مَا كَسَبُواْ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ48

कृतघ्न इंसान

49जब इंसान को कोई तकलीफ़ पहुँचती है, तो वह 'अकेले' हमें पुकारता है।

फिर जब हम उसे अपनी नेमतों से नवाज़ते हैं, तो वह कहता है, "यह सब मुझे 'मेरे' इल्म के कारण ही मिला है।

" हरगिज़ नहीं!

यह तो 'केवल' एक आज़माइश है, लेकिन उनमें से ज़्यादातर नहीं जानते।

50यही बात उनसे पहले 'तबाह' किए गए लोगों ने भी कही थी, लेकिन उनकी 'बेकार' कमाई उनके 'किसी काम' नहीं आई।

51तो उन्हें उनके आमाल के बुरे 'नतीजों' ने आ घेरा।

और इन 'मुशरिकों' में से जो ज़ुल्म करते हैं, उन्हें भी उनके आमाल के बुरे 'नतीजे' घेर लेंगे।

और उनके लिए कोई बच निकलने का रास्ता नहीं होगा।

52क्या वे नहीं जानते कि अल्लाह जिसे चाहता है, उसे कुशादा या तंग रिज़्क़ देता है?

बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए निशानियाँ हैं।

فَإِذَا مَسَّ ٱلۡإِنسَٰنَ ضُرّٞ دَعَانَا ثُمَّ إِذَا خَوَّلۡنَٰهُ نِعۡمَةٗ مِّنَّا قَالَ إِنَّمَآ أُوتِيتُهُۥ عَلَىٰ عِلۡمِۢۚ بَلۡ هِيَ فِتۡنَةٞ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ49

قَدۡ قَالَهَا ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ فَمَآ أَغۡنَىٰ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ50

فَأَصَابَهُمۡ سَيِّ‍َٔاتُ مَا كَسَبُواْۚ وَٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡ هَٰٓؤُلَآءِ سَيُصِيبُهُمۡ سَيِّ‍َٔاتُ مَا كَسَبُواْ وَمَا هُم بِمُعۡجِزِينَ51

أَوَ لَمۡ يَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ52

BACKGROUND STORY

पृष्ठभूमि की कहानी

  • कुछ मूर्ति-पूजकों ने इस्लाम स्वीकार करने से पहले भयानक काम किए थे।

    उनमें से एक वहशी था, जिसने पैगंबर (ﷺ) के चाचा हमज़ा (र.

    अ.

    ) को क़त्ल किया था।

    वहशी पैगंबर (ﷺ) के पास आया और कहा कि उसे इस्लाम की शिक्षाएँ पसंद हैं, लेकिन उसे डर था कि अल्लाह उसे कभी माफ़ नहीं करेगा, भले ही

    वह मुसलमान बन जाए।

    पैगंबर (ﷺ) ने उसे बताया कि उसके पाप कितने भी बड़े क्यों न हों, वे अल्लाह की रहमत से कभी बड़े नहीं हो सकते।

  • Illustration
  • कुछ नए मुसलमानों को उनके परिवारों द्वारा इस्लाम छोड़ने के लिए यातना दी गई और मजबूर किया गया।

    उन्हें यकीन नहीं था कि अगर वे फिर से मुसलमान बन जाते हैं तो अल्लाह उन्हें स्वीकार करेगा।

    तब आयत 59 नाज़िल हुई, जिसमें कहा गया था कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है।

    अल्लाह केवल उसी पाप को कभी माफ़ नहीं करेगा जब कोई अन्य देवताओं में विश्वास करते हुए या अल्लाह के अस्तित्व को नकारते हुए मर जाता है (4:48)।

WORDS OF WISDOM

ज्ञान की बातें

  • पैगंबर (ﷺ) ने बताया कि अल्लाह ने फरमाया, 'ऐ आदम की औलाद!

    जब तक तुम मुझसे दुआ करते रहोगे और मेरी रहमत की उम्मीद रखोगे, मुझे तुम्हारे गुनाहों को माफ़ करने में कोई परवाह नहीं होगी।

    '

  • Illustration
  • 'ऐ आदम की औलाद!

    अगर तुम्हारे गुनाह आसमान के बादलों तक पहुँच जाएँ, और तुम मुझसे माफ़ी माँगो, मुझे फिर भी तुम्हें माफ़ करने में कोई परवाह नहीं होगी।

    '

  • 'ऐ आदम की औलाद!

    अगर तुम मेरे पास इतनी गुनाह लेकर आओ कि पूरी दुनिया भर जाए, लेकिन मेरे साथ किसी को शरीक न किया हो, तो मैं तुम्हारे गुनाहों के बराबर

    माफ़ी दूँगा।

    '

SIDE STORY

छोटी कहानी

  • यह अल-क़नाबी नाम के एक युवक की सच्ची कहानी है, जो कई सदियों पहले इराक में रहता था और अपने दोस्तों के साथ शराब पीता था।

    एक दिन, वह अपने घर के सामने अपने दोस्तों का इंतजार कर रहा था, उसके एक हाथ में शराब की बोतल और दूसरे हाथ में चाकू था।

  • Illustration
  • अचानक, एक आदमी गधे पर सवार होकर गुजरा जिसके पीछे एक बड़ी भीड़ थी।

    अल-क़नाबी उत्सुक हुआ, इसलिए वह भीड़ के पास गया और पूछा, 'यह आदमी कौन है?

    ' उन्होंने जवाब दिया, 'इमाम शुअबा इब्न अल-हज्जाज, हदीस के महान विद्वान को कौन नहीं जानता?

    ' तो, उसने इमाम की ओर देखा और कहा, 'मुझे एक हदीस सुनाओ, वरना मैं तुम्हें चाकू मार दूँगा!

    '

  • बहस करने का कोई फायदा नहीं था, इसलिए इमाम ने उसे एक शक्तिशाली हदीस सुनाई जिसने उसकी जिंदगी बदल दी।

    उन्होंने उससे कहा कि पैगंबर (ﷺ) ने फरमाया, 'अगर तुम्हें शर्म नहीं है, तो जो चाहो करो।

    ' फिर इमाम लोगों के साथ चले गए।

  • जब अल-क़नाबी घर गया, तो उसने सोचना शुरू किया, 'उन्होंने यह खास हदीस क्यों चुनी?

    क्या उनका मतलब था कि मुझे कोई शर्म नहीं है?

    ' उन शब्दों ने अल-क़नाबी को इतनी गहराई से प्रभावित किया कि उसने अपने घर में शराब की सभी बोतलें तोड़ने का फैसला किया और अपनी माँ से

    कहा, 'जब मेरे दोस्त आएं, तो उनसे कहना कि मैंने शराब छोड़ दी है।

    '

  • फिर वह इमाम मालिक के साथ हदीस का अध्ययन करने के लिए मदीना चला गया।

    अंततः, अल-क़नाबी हदीस के महानतम विद्वानों में से एक बन गया।

    यह जानना दिलचस्प है कि इमाम अल-बुखारी और इमाम मुस्लिम उसके दो छात्र थे।

अल्लाह सभी गुनाहों को माफ़ करता है।

53कहो, 'अल्लाह फरमाता है,' 'ऐ मेरे बंदो जिन्होंने अपनी जानों पर बहुत ज़्यादती की है!

अल्लाह की रहमत से नाउम्मीद न हो; यक़ीनन अल्लाह सारे गुनाह बख़्श देता है।

बेशक वही बख़्शने वाला, निहायत मेहरबान है।

'

54अपने रब की तरफ़ तौबा करो और पूरी तरह उसके हवाले हो जाओ, इससे पहले कि तुम पर अज़ाब आ पहुँचे, क्योंकि फिर तुम्हारी मदद नहीं की जाएगी।

55और उस बेहतरीन चीज़ की पैरवी करो जो तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर नाज़िल की गई है, इससे पहले कि तुम पर अज़ाब अचानक आ जाए

और तुम्हें ख़बर भी न हो।

56ताकि कोई गुनाहगार जान (क़यामत के दिन) ये न कहे, 'हाय अफ़सोस मुझ पर, मैंने अल्लाह के हक़ में कोताही की,' जबकि मैं (उसकी आयतों का) मज़ाक़ उड़ाता

रहा।

57या कोई जान कहेगी, 'काश अल्लाह ने मुझे हिदायत दी होती, तो मैं यक़ीनन ईमान वालों में से होता!

'

58या कहे, जब वह अज़ाब देखे, 'काश मुझे एक और अवसर मिलता, तो मैं नेक काम करने वालों में से होता।

'

59'हरगिज़ नहीं!

' मेरी आयतें तुम्हारे पास आ चुकी थीं, लेकिन तुमने उन्हें झुठलाया, तकब्बुर किया, और तुम काफ़िरों में से थे!

قُلۡ يَٰعِبَادِيَ ٱلَّذِينَ أَسۡرَفُواْ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمۡ لَا تَقۡنَطُواْ مِن رَّحۡمَةِ ٱللَّهِۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَغۡفِرُ ٱلذُّنُوبَ جَمِيعًاۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ53

وَأَنِيبُوٓاْ إِلَىٰ رَبِّكُمۡ وَأَسۡلِمُواْ لَهُۥ مِن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَكُمُ ٱلۡعَذَابُ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ54

وَٱتَّبِعُوٓاْ أَحۡسَنَ مَآ أُنزِلَ إِلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُم مِّن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَكُمُ ٱلۡعَذَابُ بَغۡتَةٗ وَأَنتُمۡ لَا تَشۡعُرُونَ55

أَن تَقُولَ نَفۡسٞ يَٰحَسۡرَتَىٰ عَلَىٰ مَا فَرَّطتُ فِي جَنۢبِ ٱللَّهِ وَإِن كُنتُ لَمِنَ ٱلسَّٰخِرِينَ56

أَوۡ تَقُولَ لَوۡ أَنَّ ٱللَّهَ هَدَىٰنِي لَكُنتُ مِنَ ٱلۡمُتَّقِينَ57

أَوۡ تَقُولَ حِينَ تَرَى ٱلۡعَذَابَ لَوۡ أَنَّ لِي كَرَّةٗ فَأَكُونَ مِنَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ58

بَلَىٰ قَدۡ جَآءَتۡكَ ءَايَٰتِي فَكَذَّبۡتَ بِهَا وَٱسۡتَكۡبَرۡتَ وَكُنتَ مِنَ ٱلۡكَٰفِرِينَ59

क़यामत का दिन

60क़यामत के दिन तुम उन लोगों को देखोगे जिन्होंने अल्लाह पर झूठ गढ़ा, उनके चेहरे अंधेरे से ढके हुए होंगे।

क्या जहन्नम (नरक) अहंकारियों के लिए एक पर्याप्त ठिकाना नहीं है?

61और अल्लाह उन लोगों को, जिन्होंने उसे याद रखा, सुरक्षित रूप से उनकी महानतम सफलता के ठिकाने तक पहुंचाएगा।

उन्हें कोई बुराई नहीं छू सकेगी और वे कभी दुखी नहीं होंगे।

62अल्लाह सभी चीज़ों का सृष्टिकर्ता है, और वह हर चीज़ का प्रबंध करता है।

63आसमानों और ज़मीन के खज़ानों की कुंजियाँ उसी के पास हैं।

और जो लोग अल्लाह की निशानियों को झुठलाते हैं, वे ही वास्तविक घाटे में रहने वाले हैं।

وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ تَرَى ٱلَّذِينَ كَذَبُواْ عَلَى ٱللَّهِ وُجُوهُهُم مُّسۡوَدَّةٌۚ أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّمَ مَثۡوٗى لِّلۡمُتَكَبِّرِينَ60

وَيُنَجِّي ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ بِمَفَازَتِهِمۡ لَا يَمَسُّهُمُ ٱلسُّوٓءُ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ61

ٱللَّهُ خَٰلِقُ كُلِّ شَيۡءٖۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ وَكِيلٞ62

لَّهُۥ مَقَالِيدُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۗ وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِ‍َٔايَٰتِ ٱللَّهِ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ63

एकमात्र अल्लाह

64कहो, 'ऐ नबी,' 'क्या तुम मुझसे अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करने को कहते हो, ऐ जाहिलो?

'

65तुम्हारी तरफ़ पहले ही वह्य की जा चुकी है—और उन 'नबियों' की तरफ़ भी जो तुमसे पहले थे—कि अगर तुमने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराया, तो

तुम्हारे आमाल ज़रूर ज़ाया हो जाएँगे और तुम यक़ीनन घाटा उठाने वालों में से होगे।

66बल्कि, अल्लाह ही की इबादत करो और शुक्रगुज़ारो में से हो जाओ।

قُلۡ أَفَغَيۡرَ ٱللَّهِ تَأۡمُرُوٓنِّيٓ أَعۡبُدُ أَيُّهَا ٱلۡجَٰهِلُونَ64

وَلَقَدۡ أُوحِيَ إِلَيۡكَ وَإِلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكَ لَئِنۡ أَشۡرَكۡتَ لَيَحۡبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ65

بَلِ ٱللَّهَ فَٱعۡبُدۡ وَكُن مِّنَ ٱلشَّٰكِرِينَ66

अंत की शुरुआत

67उन्होंने अल्लाह की वैसी कद्र नहीं की जैसी उसकी कद्र होनी चाहिए थी—जबकि क़यामत के दिन तो सारी ज़मीन उसकी मुट्ठी में होगी, और आसमान उसके दाहिने हाथ

में लिपटे हुए होंगे।

वह पाक है और बहुत बुलंद है उन सब से जिन्हें वे उसका शरीक ठहराते हैं!

68सूर फूँका जाएगा तो आसमानों में जो हैं और ज़मीन में जो हैं, सब मर जाएँगे, सिवाय उनके जिन्हें अल्लाह चाहेगा।

फिर वह दोबारा फूँका जाएगा तो अचानक वे उठ खड़े होंगे, आँखें फाड़े हुए।

وَمَا قَدَرُواْ ٱللَّهَ حَقَّ قَدۡرِهِۦ وَٱلۡأَرۡضُ جَمِيعٗا قَبۡضَتُهُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَٱلسَّمَٰوَٰتُ مَطۡوِيَّٰتُۢ بِيَمِينِهِۦۚ سُبۡحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ67

وَنُفِخَ فِي ٱلصُّورِ فَصَعِقَ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا مَن شَآءَ ٱللَّهُۖ ثُمَّ نُفِخَ فِيهِ أُخۡرَىٰ فَإِذَا هُمۡ قِيَامٞ يَنظُرُونَ68

Illustration

पूर्ण न्याय

69पृथ्वी अपने रब के नूर से जगमगा उठेगी, आमालनामे खोल दिए जाएँगे, नबी और गवाह पेश किए जाएँगे—और उन सबके बीच इंसाफ़ के साथ फ़ैसला किया जाएगा।

किसी पर ज़ुल्म नहीं किया जाएगा।

70हर नफ़्स को उसके आमाल का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा, और अल्लाह ही बेहतर जानता है कि उन्होंने क्या किया है।

وَأَشۡرَقَتِ ٱلۡأَرۡضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ ٱلۡكِتَٰبُ وَجِاْيٓءَ بِٱلنَّبِيِّ‍ۧنَ وَٱلشُّهَدَآءِ وَقُضِيَ بَيۡنَهُم بِٱلۡحَقِّ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ69

وَوُفِّيَتۡ كُلُّ نَفۡسٖ مَّا عَمِلَتۡ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِمَا يَفۡعَلُونَ70

मोमिनों का सवाब

73और वे लोग जिन्होंने अपने रब का ध्यान रखा, उन्हें टोलियों में जन्नत की ओर ले जाया जाएगा।

जब वे उसके पहले से ही खुले हुए दरवाज़ों पर पहुँचेंगे, तो उसके रखवाले कहेंगे, 'तुम पर सलामती हो!

तुमने अच्छा किया, तो इसमें प्रवेश करो, हमेशा रहने के लिए।

'

74और ईमान वाले कहेंगे, 'तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमसे अपना वादा पूरा किया, और हमें यह ज़मीन हमारी मिल्कियत में दी, ताकि हम जन्नत में

जहाँ चाहें वहाँ रहें।

' नेक काम करने वालों का क्या ही अच्छा बदला है!

وَسِيقَ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ رَبَّهُمۡ إِلَى ٱلۡجَنَّةِ زُمَرًاۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُوهَا وَفُتِحَتۡ أَبۡوَٰبُهَا وَقَالَ لَهُمۡ خَزَنَتُهَا سَلَٰمٌ عَلَيۡكُمۡ طِبۡتُمۡ فَٱدۡخُلُوهَا خَٰلِدِينَ73

وَقَالُواْ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي صَدَقَنَا وَعۡدَهُۥ وَأَوۡرَثَنَا ٱلۡأَرۡضَ نَتَبَوَّأُ مِنَ ٱلۡجَنَّةِ حَيۡثُ نَشَآءُۖ فَنِعۡمَ أَجۡرُ ٱلۡعَٰمِلِينَ74

अल्लाह प्रशंसित है

75आप फ़रिश्तों को सिंहासन के चारों ओर देखेंगे, अपने रब की महिमा का गुणगान करते हुए।

और सभी पर न्यायपूर्वक निर्णय दिया जा चुका होगा।

और कहा जाएगा, 'सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है - सारे जहानों के रब!

'

وَتَرَى ٱلۡمَلَٰٓئِكَةَ حَآفِّينَ مِنۡ حَوۡلِ ٱلۡعَرۡشِ يُسَبِّحُونَ بِحَمۡدِ رَبِّهِمۡۚ وَقُضِيَ بَيۡنَهُم بِٱلۡحَقِّۚ وَقِيلَ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ75

How to study Surah Az-Zumar with children

Use this children's lesson as a guided path: read the short explanation, look at the Arabic verse, listen to related recitation, and return to the full surah when your child is ready for more detail.

Parents can review one section at a time, ask the child to repeat the main idea, and then continue with the next part or a nearby surah. This keeps the lesson connected with Quran reading, audio, and daily practice.