This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 15 - الحِجْر

Al-Ḥijr (Surah 15)

الحِجْر (The Stone Valley)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह आयत 80-84 में उल्लिखित उस स्थान से अपना नाम लेती है, जहाँ सालेह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम कभी रहती थी। अन्य नष्ट की गई क़ौमों का उल्लेख अरब के इनकार करने वालों के लिए एक चेतावनी के रूप में किया गया है, जिन्हें अगली सूरह के आरंभ में भी चेतावनी दी गई है। शैतान का अल्लाह के प्रति घमंड और मानवता के प्रति उसकी शत्रुता पर ज़ोर दिया गया है। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को धैर्य रखने और इबादत में सुकून पाने का आग्रह किया गया है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

काफ़िरों को चेतावनी

1. अलिफ़-लाम-रा। ये किताब की आयतें हैं; स्पष्ट कुरान। 2. काफ़िर अवश्य चाहेंगे कि काश उन्होंने समर्पण किया होता। 3. तो उन्हें खाने दो और मज़े करने दो और झूठी उम्मीद में बहके रहने दो, क्योंकि वे जल्द ही जान जाएँगे। 4. हमने किसी बस्ती को तबाह नहीं किया, सिवाय एक मुकर्रर मुद्दत के। 5. कोई कौम न अपनी मुद्दत को आगे बढ़ा सकती है और न उसे पीछे कर सकती है।

الٓر ۚ تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْكِتَـٰبِ وَقُرْءَانٍ مُّبِينٍ
١
رُّبَمَا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا لَوْ كَانُوا مُسْلِمِينَ
٢
ذَرْهُمْ يَأْكُلُوا وَيَتَمَتَّعُوا وَيُلْهِهِمُ ٱلْأَمَلُ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
٣
وَمَآ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٌ مَّعْلُومٌ
٤
مَّا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَـْٔخِرُونَ
٥

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 1-5


मूर्तिपूजकों द्वारा पैगंबर का उपहास

6. वे कहते हैं, "ऐ जिस पर ज़िक्र नाज़िल किया गया है! तुम तो यकीनन पागल हो!" 7. तुम हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं लाते, यदि तुम सच्चे हो? 8. हम फ़रिश्तों को नहीं उतारते सिवाय हक़ के साथ, और तब काफ़िरों को मोहलत नहीं दी जाएगी। 9. निश्चय ही हम ही ने यह ज़िक्र उतारा है, और निश्चय ही हम ही इसकी रक्षा करेंगे।

وَقَالُوا يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِى نُزِّلَ عَلَيْهِ ٱلذِّكْرُ إِنَّكَ لَمَجْنُونٌ
٦
لَّوْ مَا تَأْتِينَا بِٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ
٧
مَا نُنَزِّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ إِلَّا بِٱلْحَقِّ وَمَا كَانُوٓا إِذًا مُّنظَرِينَ
٨
إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا ٱلذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُۥ لَحَـٰفِظُونَ
٩

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 6-9


कुफ़्र पर दृढ़

10. निसंदेह, हमने आपसे पहले (ऐ पैगंबर) पिछली कौमों में रसूल भेजे। 11. परन्तु उनके पास कोई रसूल ऐसा नहीं आया जिसका उपहास न किया गया हो। 12. इसी तरह हम मुजरिमों के दिलों में कुफ्र डाल देते हैं। 13. वे इस पर (क़ुरआन पर) ईमान नहीं लाते, उनसे पहले तबाह किए गए लोगों के कई दृष्टांतों के बावजूद। 14. और अगर हम उनके लिए आसमान का एक दरवाज़ा खोल दें, जिससे वे ऊपर चढ़ते चले जाते, 15. तब भी वे कहते, “हमारी आँखें सचमुच चौंधिया गई हैं! बल्कि, हम पर ज़रूर जादू कर दिया गया है।”

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِى شِيَعِ ٱلْأَوَّلِينَ
١٠
وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ
١١
كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُۥ فِى قُلُوبِ ٱلْمُجْرِمِينَ
١٢
لَا يُؤْمِنُونَ بِهِۦ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ ٱلْأَوَّلِينَ
١٣
وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَظَلُّوا فِيهِ يَعْرُجُونَ
١٤
لَقَالُوٓا إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَـٰرُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَّسْحُورُونَ
١٥

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 10-15


ईश्वरीय शक्ति

16. बेशक, हमने आसमान में बुर्ज बनाए हैं, और उसे देखने वालों के लिए सजाया है। 17. और हमने उसे हर लानती शैतान से सुरक्षित रखा है, 18. सिवाय उसके जो चोरी-छिपे सुनता है, तो एक स्पष्ट उल्कापिंड उसका पीछा करता है। 19. और पृथ्वी को हमने बिछाया और उस पर मज़बूत पहाड़ रखे, और उसमें हर चीज़ को एक निश्चित संतुलन के साथ उगाया। 20. और हमने उसमें तुम्हारे लिए और उन दूसरों के लिए आजीविका के साधन बनाए, जिनकी रोज़ी तुम नहीं देते। 21. कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसके भंडार हमारे पास न हों, और हम उसे केवल एक निश्चित मात्रा में ही उतारते हैं। 22. हम गर्भधारण करने वाली हवाएँ भेजते हैं, और तुम्हारे पीने के लिए आकाश से वर्षा उतारते हैं। तुम इसके भंडार के स्वामी नहीं हो। 23. निःसंदेह हम ही जीवन देते हैं और मृत्यु देते हैं। और हम ही (शाश्वत) वारिस हैं। 24. हम निश्चित रूप से उन लोगों को जानते हैं जो तुमसे पहले गुज़र चुके हैं और उन लोगों को भी जो तुम्हारे बाद आएँगे। 25. निश्चित रूप से आपका रब ही उन्हें इकट्ठा करेगा। वह वास्तव में सर्व-बुद्धिमान, सर्वज्ञ है।

وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِى ٱلسَّمَآءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّـٰهَا لِلنَّـٰظِرِينَ
١٦
وَحَفِظْنَـٰهَا مِن كُلِّ شَيْطَـٰنٍ رَّجِيمٍ
١٧
إِلَّا مَنِ ٱسْتَرَقَ ٱلسَّمْعَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌ مُّبِينٌ
١٨
وَٱلْأَرْضَ مَدَدْنَـٰهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ وَأَنۢبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ شَىْءٍ مَّوْزُونٍ
١٩
وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَـٰيِشَ وَمَن لَّسْتُمْ لَهُۥ بِرَٰزِقِينَ
٢٠
وَإِن مِّن شَىْءٍ إِلَّا عِندَنَا خَزَآئِنُهُۥ وَمَا نُنَزِّلُهُۥٓ إِلَّا بِقَدَرٍ مَّعْلُومٍ
٢١
وَأَرْسَلْنَا ٱلرِّيَـٰحَ لَوَٰقِحَ فَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً فَأَسْقَيْنَـٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمْ لَهُۥ بِخَـٰزِنِينَ
٢٢
وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْىِۦ وَنُمِيتُ وَنَحْنُ ٱلْوَٰرِثُونَ
٢٣
وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَـْٔخِرِينَ
٢٤
وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُۥ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
٢٥

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 16-25


आदम की रचना

26. बेशक, हमने इंसान को खनखनाती हुई मिट्टी से पैदा किया, जो काले कीचड़ से ढाली गई थी। 27. और जिन्नों को हमने उनसे पहले धुआँ रहित आग से पैदा किया था। 28. जब आपके रब ने फ़रिश्तों से कहा, "मैं बजती हुई मिट्टी से, जो काले गारे से ढाली गई है, एक इंसान पैदा करने वाला हूँ।" 29. तो जब मैं उसे ठीक कर लूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ, तो उसके सामने सजदे में गिर जाना।"

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن صَلْصَـٰلٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
٢٦
وَٱلْجَآنَّ خَلَقْنَـٰهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ ٱلسَّمُومِ
٢٧
وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَـٰٓئِكَةِ إِنِّى خَـٰلِقٌۢ بَشَرًا مِّن صَلْصَـٰلٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
٢٨
فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا لَهُۥ سَـٰجِدِينَ
٢٩

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 26-29


शैतान की अवज्ञा

30. तो फ़रिश्तों ने सब के सब ने सजदा किया— 31. इब्लीस के सिवा, जिसने दूसरों के साथ सजदा करने से इनकार कर दिया। 32. अल्लाह ने फरमाया, “ऐ इब्लीस! तुझे क्या हुआ है कि तूने दूसरों के साथ सजदा नहीं किया?” 33. उसने जवाब दिया, “मेरे लिए यह मुनासिब नहीं कि मैं एक ऐसे इंसान को सजदा करूँ जिसे तूने खड़खड़ाती हुई, काली कीचड़ से ढाली हुई मिट्टी से पैदा किया है।” 34. अल्लाह ने फ़रमाया, "तो जन्नत से निकल जा, क्योंकि तू यक़ीनन मलऊन (शापित) है। 35. और यक़ीनन तुझ पर क़यामत के दिन तक लानत है।"

فَسَجَدَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ
٣٠
إِلَّآ إِبْلِيسَ أَبَىٰٓ أَن يَكُونَ مَعَ ٱلسَّـٰجِدِينَ
٣١
قَالَ يَـٰٓإِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ ٱلسَّـٰجِدِينَ
٣٢
قَالَ لَمْ أَكُن لِّأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُۥ مِن صَلْصَـٰلٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ
٣٣
قَالَ فَٱخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌ
٣٤
وَإِنَّ عَلَيْكَ ٱللَّعْنَةَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلدِّينِ
٣٥

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 30-35


शैतान की अपील

36. शैतान ने दुआ की, "ऐ मेरे रब! तो मुझे उस दिन तक मोहलत दे जब तक वे दोबारा उठाए जाएँ।" 37. अल्लाह ने फ़रमाया, "तुम्हें मोहलत दी जाएगी 38. मुकर्रर दिन तक।" 39. शैतान ने जवाब दिया, "ऐ मेरे रब! जिस कारण तूने मुझे गुमराह किया है, मैं उन्हें धरती पर ज़रूर बहकाऊँगा और उन सबको एक साथ गुमराह कर दूँगा, 40. उनमें से आपके चुने हुए बंदों के सिवा।” 41. अल्लाह ने फ़रमाया, “यह वह मार्ग है जो मुझ पर अनिवार्य है: 42. निश्चित रूप से तुम्हारा मेरे बंदों पर कोई अधिकार नहीं होगा, सिवाय उन पथभ्रष्टों के जो तुम्हारा अनुसरण करेंगे, 43. और निःसंदेह जहन्नम उन सबका एक साथ ठिकाना है। 44. उसके सात द्वार हैं, उनमें से प्रत्येक के लिए एक गिरोह नियत है।

قَالَ رَبِّ فَأَنظِرْنِىٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
٣٦
قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ ٱلْمُنظَرِينَ
٣٧
إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْوَقْتِ ٱلْمَعْلُومِ
٣٨
قَالَ رَبِّ بِمَآ أَغْوَيْتَنِى لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ
٣٩
إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ ٱلْمُخْلَصِينَ
٤٠
قَالَ هَـٰذَا صِرَٰطٌ عَلَىَّ مُسْتَقِيمٌ
٤١
إِنَّ عِبَادِى لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَـٰنٌ إِلَّا مَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلْغَاوِينَ
٤٢
وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ أَجْمَعِينَ
٤٣
لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَٰبٍ لِّكُلِّ بَابٍ مِّنْهُمْ جُزْءٌ مَّقْسُومٌ
٤٤

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 36-44


जन्नत में नेक लोग

45. निःसंदेह, परहेज़गार लोग बाग़ों और चश्मों में होंगे। 46. दाख़िल हो जाओ सलामती और अमन के साथ। 47. हम उनके दिलों से जो कुछ भी द्वेष होगा, उसे निकाल देंगे। वे भाई-भाई बनकर तख्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे। 48. वहाँ उन्हें कोई थकान नहीं छुएगी और न ही उन्हें कभी वहाँ से निकलने को कहा जाएगा।

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
٤٥
ٱدْخُلُوهَا بِسَلَـٰمٍ ءَامِنِينَ
٤٦
وَنَزَعْنَا مَا فِى صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ إِخْوَٰنًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَـٰبِلِينَ
٤٧
لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُم مِّنْهَا بِمُخْرَجِينَ
٤٨

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 45-48


अल्लाह की रहमत और अज़ाब

49. मेरे बंदों को (ऐ पैगंबर) बता दो कि मैं ही निश्चित रूप से अत्यंत क्षमाशील, परम दयालु हूँ। 50. और यह कि मेरा अज़ाब ही वास्तव में सबसे दर्दनाक है।

۞ نَبِّئْ عِبَادِىٓ أَنِّىٓ أَنَا ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ
٤٩
وَأَنَّ عَذَابِى هُوَ ٱلْعَذَابُ ٱلْأَلِيمُ
٥٠

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 49-50


फ़रिश्तों द्वारा इब्राहीम से भेंट

51. और उन्हें (ऐ पैगंबर) इब्राहीम के मेहमानों के बारे में बताओ। 52. जो उसके पास दाखिल हुए और सलाम किया, "सलाम!" उसने कहा, "बेशक हम तुमसे डरते हैं।" 53. उन्होंने आश्वस्त किया, "डरो मत! बेशक हम तुम्हें एक ज्ञानी पुत्र की खुशखबरी देते हैं।" 54. उसने आश्चर्य किया, "क्या तुम मुझे मेरी वृद्धावस्था के बावजूद खुशखबरी देते हो? यह कितनी असंभव खबर है!" 55. उन्होंने कहा, "हम तुम्हें सत्य के साथ शुभ-सूचना देते हैं, अतः निराश होने वालों में से न हो।" 56. उसने कहा, "अपने रब की रहमत से गुमराहों के सिवा और कौन निराश होता है?" 57. उसने (फिर) कहा, "ऐ रसूल-फ़रिश्तो, तुम्हारा क्या कार्य है?" 58. उन्होंने जवाब दिया, "हमें वास्तव में एक दुष्ट कौम के पास भेजा गया है।" 59. लूत के घरवालों को तो हम अवश्य बचा लेंगे, 60. सिवाय उसकी पत्नी के। हमने तय कर लिया है कि वह पीछे रह जाने वालों में से होगी।"

وَنَبِّئْهُمْ عَن ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ
٥١
إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَـٰمًا قَالَ إِنَّا مِنكُمْ وَجِلُونَ
٥٢
قَالُوا لَا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَـٰمٍ عَلِيمٍ
٥٣
قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِى عَلَىٰٓ أَن مَّسَّنِىَ ٱلْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ
٥٤
قَالُوا بَشَّرْنَـٰكَ بِٱلْحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلْقَـٰنِطِينَ
٥٥
قَالَ وَمَن يَقْنَطُ مِن رَّحْمَةِ رَبِّهِۦٓ إِلَّا ٱلضَّآلُّونَ
٥٦
قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَ
٥٧
قَالُوٓا إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ
٥٨
إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَ
٥٩
إِلَّا ٱمْرَأَتَهُۥ قَدَّرْنَآ ۙ إِنَّهَا لَمِنَ ٱلْغَـٰبِرِينَ
٦٠

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 51-60


फ़रिश्तों द्वारा लूत से भेंट

61. तो जब दूत लूत के परिवार के पास आए, 62. उसने कहा, “तुम तो यकीनन अजनबी लोग हो!” 63. उन्होंने जवाब दिया, “हम तुम्हारे पास वह (अज़ाब) लेकर आए हैं जिसके बारे में वे संदेह करते थे।” 64. हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं, और हम निश्चित रूप से सच्चे हैं। 65. तो अपने परिवार के साथ रात के अंधेरे में यात्रा करो, और उनके पीछे-पीछे चलो। तुम में से कोई पीछे मुड़कर न देखे, और वहाँ जाओ जहाँ तुम्हें हुक्म दिया गया है। 66. हमने उसे यह फ़रमान वह्यी किया: “वे (पापी) सुबह जड़ से उखाड़ दिए जाएँगे।”

فَلَمَّا جَآءَ ءَالَ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلُونَ
٦١
قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ
٦٢
قَالُوا بَلْ جِئْنَـٰكَ بِمَا كَانُوا فِيهِ يَمْتَرُونَ
٦٣
وَأَتَيْنَـٰكَ بِٱلْحَقِّ وَإِنَّا لَصَـٰدِقُونَ
٦٤
فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِّنَ ٱلَّيْلِ وَٱتَّبِعْ أَدْبَـٰرَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌ وَٱمْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ
٦٥
وَقَضَيْنَآ إِلَيْهِ ذَٰلِكَ ٱلْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَـٰٓؤُلَآءِ مَقْطُوعٌ مُّصْبِحِينَ
٦٦

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 61-66


लूत की कौम का विनाश

67. और शहर के लोग खुशी मनाते हुए आ पहुँचे। 68. लूत ने विनती की, “निःसंदेह, ये मेरे मेहमान हैं, तो मुझे शर्मिंदा न करो। 69. अल्लाह से डरो और मुझे अपमानित न करो।” 70. उन्होंने जवाब दिया, "क्या हमने तुम्हें किसी को भी पनाह देने से मना नहीं किया था?" 71. उन्होंने कहा, "ऐ मेरी क़ौम! ये मेरी बेटियाँ हैं, अगर तुम (शादी करना) चाहो तो।" 72. आपकी जान की क़सम (ऐ पैग़म्बर), वे यक़ीनन अपनी हवस के नशे में अंधे होकर भटक रहे थे। 73. अतः उन्हें सूर्योदय के समय भीषण गर्जना ने आ घेरा। 74. और हमने उन बस्तियों को उलट दिया और उन पर पक्की मिट्टी के पत्थर बरसाए। 75. निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं जो चिंतन करते हैं। 76. उनके खंडहर अभी भी एक ज्ञात मार्ग पर पड़े हैं। 77. निश्चित रूप से इसमें उन लोगों के लिए एक निशानी है जो ईमान लाते हैं। 77. निश्चित रूप से इसमें उन लोगों के लिए एक निशानी है जो ईमान लाते हैं।

وَجَآءَ أَهْلُ ٱلْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ
٦٧
قَالَ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ ضَيْفِى فَلَا تَفْضَحُونِ
٦٨
وَٱتَّقُوا ٱللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ
٦٩
قَالُوٓا أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ ٱلْعَـٰلَمِينَ
٧٠
قَالَ هَـٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِىٓ إِن كُنتُمْ فَـٰعِلِينَ
٧١
لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِى سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ
٧٢
فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَ
٧٣
فَجَعَلْنَا عَـٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ
٧٤
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّلْمُتَوَسِّمِينَ
٧٥
وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍ مُّقِيمٍ
٧٦
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ
٧٧

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 67-77


शुऐब की कौम

78. और अयकह के निवासी वास्तव में ज़ालिम थे, 79. तो हमने उन पर अज़ाब नाज़िल किया। उन दोनों कौमों के खंडहर एक जाने-पहचाने मार्ग पर अभी भी पड़े हैं।

وَإِن كَانَ أَصْحَـٰبُ ٱلْأَيْكَةِ لَظَـٰلِمِينَ
٧٨
فَٱنتَقَمْنَا مِنْهُمْ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍ مُّبِينٍ
٧٩

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 78-79


सालेह की कौम

80. बेशक, अल-हिज्र के निवासियों ने भी रसूलों को झुठलाया। 81. हमने उन्हें अपनी आयतें दीं, लेकिन उन्होंने उनसे मुँह मोड़ लिया। 82. उन्होंने पहाड़ों में अपने घर तराशे, स्वयं को सुरक्षित मानते हुए। 83. लेकिन सुबह के समय एक प्रचंड गर्जना ने उन्हें आ घेरा, 84. और जो कुछ भी उन्होंने प्राप्त किया था, वह उनके कुछ भी काम न आया।

وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَـٰبُ ٱلْحِجْرِ ٱلْمُرْسَلِينَ
٨٠
وَءَاتَيْنَـٰهُمْ ءَايَـٰتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
٨١
وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًا ءَامِنِينَ
٨٢
فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ
٨٣
فَمَآ أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ
٨٤

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 80-84


पैगंबर को नसीहत

85. हमने आकाशों और पृथ्वी को और जो कुछ उनके बीच है, उसे किसी उद्देश्य के बिना नहीं बनाया है। और क़यामत निश्चित रूप से आने वाली है, अतः सुंदर क्षमा करो। 86. निःसंदेह तुम्हारा रब ही महास्रष्टा, सर्वज्ञ है। 87. हमने तुम्हें निश्चय ही सात बार-बार दुहराई जाने वाली आयतें और महान क़ुरआन प्रदान किया है। 88. अपनी आँखें उन क्षणिक सुखों के लिए तरसाओ मत जो हमने कुछ काफ़िरों को दिए हैं, और न उनके लिए दुख करो। और ईमानवालों के प्रति विनम्र रहो।

وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ ۗ وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَـَٔاتِيَةٌ ۖ فَٱصْفَحِ ٱلصَّفْحَ ٱلْجَمِيلَ
٨٥
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلْخَلَّـٰقُ ٱلْعَلِيمُ
٨٦
وَلَقَدْ ءَاتَيْنَـٰكَ سَبْعًا مِّنَ ٱلْمَثَانِى وَٱلْقُرْءَانَ ٱلْعَظِيمَ
٨٧
لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِۦٓ أَزْوَٰجًا مِّنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَٱخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِينَ
٨٨

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 85-88


पैगंबर को और नसीहत

89. और कहो, "मैं वास्तव में एक स्पष्ट चेतावनी के साथ भेजा गया हूँ"— 90. (एक चेतावनी) वैसी ही जैसी हमने उन लोगों के पास भेजी थी जिन्होंने (धर्मग्रंथों को) बाँट दिया था, 91. जो कुरान के कुछ हिस्सों को मानते हैं और कुछ को नकारते हैं। 92. तो तुम्हारे रब की क़सम! हम उन सब से ज़रूर सवाल करेंगे 93. उस बारे में जो वे किया करते थे। 94. तो आप वही एलान कर दीजिए जिसका आपको हुक्म दिया गया है, और मुशरिकों से मुँह फेर लीजिए। 95. बेशक हम आपके लिए उन मज़ाक उड़ाने वालों के मुकाबले में काफी होंगे, 96. जो अल्लाह के साथ दूसरे पूज्य बनाते हैं। वे जल्द ही जान लेंगे।

وَقُلْ إِنِّىٓ أَنَا ٱلنَّذِيرُ ٱلْمُبِينُ
٨٩
كَمَآ أَنزَلْنَا عَلَى ٱلْمُقْتَسِمِينَ
٩٠
ٱلَّذِينَ جَعَلُوا ٱلْقُرْءَانَ عِضِينَ
٩١
فَوَرَبِّكَ لَنَسْـَٔلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ
٩٢
عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
٩٣
فَٱصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ وَأَعْرِضْ عَنِ ٱلْمُشْرِكِينَ
٩٤
إِنَّا كَفَيْنَـٰكَ ٱلْمُسْتَهْزِءِينَ
٩٥
ٱلَّذِينَ يَجْعَلُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
٩٦

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 89-96


अल्लाह ही पनाहगाह है

97. हम निश्चित रूप से जानते हैं कि उनकी बातों से आपका हृदय सचमुच व्यथित होता है। 98. तो अपने रब की प्रशंसा का गुणगान करें और नमाज़ पढ़ने वालों में से हो जाएँ। 99. और अपने रब की इबादत करें जब तक कि अटल (सत्य) आपके पास न आ जाए।

وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَ
٩٧
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُن مِّنَ ٱلسَّـٰجِدِينَ
٩٨
وَٱعْبُدْ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأْتِيَكَ ٱلْيَقِينُ
٩٩

Surah 15 - الحِجْر (हिज्र) - Verses 97-99


Al-Ḥijr () - अध्याय 15 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा