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الرَّعْد
الرَّعْد
Surah Ar-Ra'd for kids content

सीखने के बिंदु
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अल्लाह के पास असीमित शक्ति और ज्ञान है।
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मूर्तियाँ शक्तिहीन हैं और अल्लाह के बराबर नहीं हो सकतीं।
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अल्लाह की सृष्टि के अजूबे उसकी इस क्षमता को साबित करना चाहिए कि वह सबको न्याय के लिए पुनः जीवित कर सकता है।
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अल्लाह ही एकमात्र है जिसकी इबादत की जानी चाहिए।
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कुरान अल्लाह की वही है और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उसके रसूल हैं।
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मोमिन सत्य को देखना चुनते हैं, जबकि काफ़िर अंधे रहना चुनते हैं।
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दोनों समूहों को आख़िरत में उनके कर्मों का फल मिलेगा।
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हालाँकि मुशरिक हक़ को नकारते रहते हैं, नबी (ﷺ) को बताया जाता है कि अंत में उनका कार्य सफल होगा।

हक़
1अलिफ़-लाम-मीम-रा।
ये किताब की आयतें हैं।
जो कुछ आपके रब की ओर से आप पर (ऐ पैगंबर!
) नाज़िल किया गया है, वह सत्य है, लेकिन ज़्यादातर लोग ईमान नहीं लाते।
الٓمٓرۚ تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱلۡكِتَٰبِۗ وَٱلَّذِيٓ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَ ٱلۡحَقُّ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤۡمِنُونَ1
अल्लाह की कुदरत
2अल्लाह ही वह है जिसने आकाशों को बिना स्तंभों के उठाया है - जैसा कि तुम देखते हो - फिर वह सिंहासन पर स्थापित हुआ।
उसने सूर्य और चंद्रमा को तुम्हारे अधीन किया है, प्रत्येक एक निश्चित अवधि तक चलता है।
वह हर काम का प्रबंध करता है।
वह निशानियों को स्पष्ट करता है ताकि तुम अपने रब से मुलाक़ात के बारे में सुनिश्चित हो सको।
3और वही है जिसने ज़मीन को फैलाया और उस पर अटल पहाड़ और नदियाँ बनाईं, और हर प्रकार के फल जोड़े-जोड़े में पैदा किए।
वह दिन पर रात को डालता है।
निश्चित रूप से इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं जो विचार करते हैं।
4और ज़मीन में एक-दूसरे से लगे हुए अलग-अलग टुकड़े हैं, और अंगूरों के बाग़, विभिन्न फसलें, खजूर के पेड़ - कुछ एक ही जड़ से निकले हुए और
कुछ अलग-अलग।
उन सबको एक ही पानी मिलता है, फिर भी हम उनमें से कुछ को दूसरों से बेहतर स्वाद वाला बनाते हैं।
निश्चित रूप से इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं जो समझते हैं।
ٱللَّهُ ٱلَّذِي رَفَعَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ بِغَيۡرِ عَمَدٖ تَرَوۡنَهَاۖ ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰ عَلَى ٱلۡعَرۡشِۖ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَۖ كُلّٞ يَجۡرِي لِأَجَلٖ مُّسَمّٗىۚ يُدَبِّرُ ٱلۡأَمۡرَ يُفَصِّلُ ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّكُم بِلِقَآءِ رَبِّكُمۡ تُوقِنُونَ2
وَهُوَ ٱلَّذِي مَدَّ ٱلۡأَرۡضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَٰسِيَ وَأَنۡهَٰرٗاۖ وَمِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ جَعَلَ فِيهَا زَوۡجَيۡنِ ٱثۡنَيۡنِۖ يُغۡشِي ٱلَّيۡلَ ٱلنَّهَارَۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ3
وَفِي ٱلۡأَرۡضِ قِطَعٞ مُّتَجَٰوِرَٰتٞ وَجَنَّٰتٞ مِّنۡ أَعۡنَٰبٖ وَزَرۡعٞ وَنَخِيلٞ صِنۡوَانٞ وَغَيۡرُ صِنۡوَانٖ يُسۡقَىٰ بِمَآءٖ وَٰحِدٖ وَنُفَضِّلُ بَعۡضَهَا عَلَىٰ بَعۡضٖ فِي ٱلۡأُكُلِۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ4
मुशरिक अल्लाह की कुदरत का इनकार करते हैं।
5अब, ऐ नबी, यदि कोई बात आपको आश्चर्यचकित करे तो वह उनका यह सवाल होना चाहिए: 'क्या!
जब हम मिट्टी हो जाएँगे तो क्या हमें सचमुच फिर से जीवित किया जाएगा?
' ऐसे लोगों का अपने रब पर कोई ईमान नहीं है।
उनके गले में ज़ंजीरें होंगी।
वे आग वाले होंगे, जहाँ वे हमेशा रहेंगे।
6वे आपसे, ऐ नबी, रहमत के बजाय अज़ाब को जल्दी लाने के लिए कहते हैं, हालाँकि उनसे पहले 'कई' अज़ाब गुज़र चुके हैं।
बेशक आपका रब लोगों के लिए बहुत बख़्शने वाला है, भले ही वे कितना भी बुरा करें, और आपका रब वास्तव में सज़ा देने में सख्त है।
7काफ़िर कहते हैं, 'काश उसके रब की ओर से उस पर कोई निशानी उतारी जाती।
' आप, ऐ नबी, तो केवल एक चेतावनी देने वाले हैं।
और हर क़ौम के लिए एक मार्गदर्शक था।
۞ وَإِن تَعۡجَبۡ فَعَجَبٞ قَوۡلُهُمۡ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبًا أَءِنَّا لَفِي خَلۡقٖ جَدِيدٍۗ أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمۡۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ ٱلۡأَغۡلَٰلُ فِيٓ أَعۡنَاقِهِمۡۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ5
وَيَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبۡلَ ٱلۡحَسَنَةِ وَقَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِهِمُ ٱلۡمَثُلَٰتُۗ وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغۡفِرَةٖ لِّلنَّاسِ عَلَىٰ ظُلۡمِهِمۡۖ وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ6
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡلَآ أُنزِلَ عَلَيۡهِ ءَايَةٞ مِّن رَّبِّهِۦٓۗ إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرٞۖ وَلِكُلِّ قَوۡمٍ هَادٍ7
अल्लाह का इल्म
8अल्लाह जानता है कि हर मादा के गर्भ में क्या है और गर्भाशयों में क्या बढ़ता और घटता है।
और उसके पास हर चीज़ एक निश्चित माप के साथ है।
9वह प्रकट और अप्रकट का जानने वाला है, महान और अत्यंत सम्मानित।
10उसके लिए बराबर है कि तुम में से कोई गुप्त रूप से बात करे या खुले तौर पर, और चाहे कोई रात के अंधेरे में छिपा रहे या
दिन के उजाले में चलता फिरे।
ٱللَّهُ يَعۡلَمُ مَا تَحۡمِلُ كُلُّ أُنثَىٰ وَمَا تَغِيضُ ٱلۡأَرۡحَامُ وَمَا تَزۡدَادُۚ وَكُلُّ شَيۡءٍ عِندَهُۥ بِمِقۡدَارٍ8
عَٰلِمُ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ ٱلۡكَبِيرُ ٱلۡمُتَعَالِ9
سَوَآءٞ مِّنكُم مَّنۡ أَسَرَّ ٱلۡقَوۡلَ وَمَن جَهَرَ بِهِۦ وَمَنۡ هُوَ مُسۡتَخۡفِۢ بِٱلَّيۡلِ وَسَارِبُۢ بِٱلنَّهَارِ10
अल्लाह की शक्ति
11हर व्यक्ति के लिए फ़रिश्ते हैं जो अल्लाह के हुक्म से बारी-बारी से आगे और पीछे से उनकी रक्षा करते हैं।
निश्चित रूप से, अल्लाह किसी क़ौम की हालत 'नेमत की' नहीं बदलता जब तक वे अपनी हालत 'ईमान की' न बदल लें।
और अगर अल्लाह किसी क़ौम को सज़ा देना चाहे, तो उसे कभी रोका नहीं जा सकता, और वे उसके सिवा कोई हिमायती नहीं पा सकते।
12वही है जो तुम्हें बिजली दिखाता है, जिससे आशा और भय दोनों पैदा होते हैं, और भारी बादल बनाता है।
13गरज उसकी महिमा का गुणगान करती है, और फ़रिश्ते भी उसके भय से उसकी प्रशंसा करते हैं।
वह बिजली गिराता है, जिसे वह चाहता है उसे मारता है।
फिर भी वे इनकार करने वाले अल्लाह के बारे में बहस करते हैं, हालांकि वह शक्ति में अत्यंत प्रबल है।
لَهُۥ مُعَقِّبَٰتٞ مِّنۢ بَيۡنِ يَدَيۡهِ وَمِنۡ خَلۡفِهِۦ يَحۡفَظُونَهُۥ مِنۡ أَمۡرِ ٱللَّهِۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوۡمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُواْ مَا بِأَنفُسِهِمۡۗ وَإِذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِقَوۡمٖ سُوٓءٗا فَلَا مَرَدَّ لَهُۥۚ وَمَا لَهُم مِّن دُونِهِۦ مِن وَالٍ11
هُوَ ٱلَّذِي يُرِيكُمُ ٱلۡبَرۡقَ خَوۡفٗا وَطَمَعٗا وَيُنشِئُ ٱلسَّحَابَ ٱلثِّقَالَ12
وَيُسَبِّحُ ٱلرَّعۡدُ بِحَمۡدِهِۦ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ مِنۡ خِيفَتِهِۦ وَيُرۡسِلُ ٱلصَّوَٰعِقَ فَيُصِيبُ بِهَا مَن يَشَآءُ وَهُمۡ يُجَٰدِلُونَ فِي ٱللَّهِ وَهُوَ شَدِيدُ ٱلۡمِحَالِ13
व्यर्थ मूर्तियाँ
14एकमात्र सच्ची दुआ (प्रार्थना) केवल उसी के लिए है।
लेकिन वे 'देवता' जिन्हें वे उसके सिवा पुकारते हैं, उन्हें किसी भी तरह से कभी जवाब नहीं दे सकते।
यह उस व्यक्ति की तरह है जो पानी की ओर अपने हाथ फैलाता है, इस उम्मीद में कि वह उसके मुँह तक पहुँच जाएगा, लेकिन वह कभी ऐसा
नहीं कर सकता।
काफ़िरों (अविश्वासियों) की पुकारें बस व्यर्थ हैं।
لَهُۥ دَعۡوَةُ ٱلۡحَقِّۚ وَٱلَّذِينَ يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسۡتَجِيبُونَ لَهُم بِشَيۡءٍ إِلَّا كَبَٰسِطِ كَفَّيۡهِ إِلَى ٱلۡمَآءِ لِيَبۡلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَٰلِغِهِۦۚ وَمَا دُعَآءُ ٱلۡكَٰفِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَٰلٖ14
सच्चा रब
15आकाशों और धरती में जो कोई भी है, वह अल्लाह को सजदा करता है—स्वेच्छा से या अनिच्छा से—और उनकी परछाइयाँ भी सुबह और शाम।
⁶
وَلِلَّهِۤ يَسۡجُدُۤ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ طَوۡعٗا وَكَرۡهٗا وَظِلَٰلُهُم بِٱلۡغُدُوِّ وَٱلۡأٓصَالِ ۩15
अल्लाह या शक्तिहीन मूर्तियाँ?
16उनसे कहो, हे पैगंबर, 'आकाशों और धरती का रब कौन है?
' कहो, 'अल्लाह!
' उनसे पूछो, 'फिर तुमने उसके सिवा ऐसे पूज्य क्यों बना लिए हैं जो न तो अपने लिए कोई लाभ कर सकते हैं और न ही अपना बचाव
कर सकते हैं?
' कहो, 'क्या अंधा व्यक्ति उस व्यक्ति के बराबर हो सकता है जो देखता है?
या क्या अँधेरा प्रकाश के बराबर हो सकता है?
'⁷ या उन्होंने अल्लाह के ऐसे साझीदार बना लिए हैं जिन्होंने उसकी सृष्टि के समान ही कुछ रचा हो, जिससे वे दोनों सृष्टियों के बीच भ्रमित हो गए
हों?
कहो, 'अल्लाह ही हर चीज़ का एकमात्र रचयिता है, और वह एक है और सर्वोच्च है।
'
قُلۡ مَن رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ قُلِ ٱللَّهُۚ قُلۡ أَفَٱتَّخَذۡتُم مِّن دُونِهِۦٓ أَوۡلِيَآءَ لَا يَمۡلِكُونَ لِأَنفُسِهِمۡ نَفۡعٗا وَلَا ضَرّٗاۚ قُلۡ هَلۡ يَسۡتَوِي ٱلۡأَعۡمَىٰ وَٱلۡبَصِيرُ أَمۡ هَلۡ تَسۡتَوِي ٱلظُّلُمَٰتُ وَٱلنُّورُۗ أَمۡ جَعَلُواْ لِلَّهِ شُرَكَآءَ خَلَقُواْ كَخَلۡقِهِۦ فَتَشَٰبَهَ ٱلۡخَلۡقُ عَلَيۡهِمۡۚ قُلِ ٱللَّهُ خَٰلِقُ كُلِّ شَيۡءٖ وَهُوَ ٱلۡوَٰحِدُ ٱلۡقَهَّٰرُ16
हक़ और बातिल का उदाहरण
17वह आसमान से पानी बरसाता है, जिससे वादियाँ अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार बह निकलती हैं।
फिर धारा अपने साथ ऊपर उठा हुआ झाग बहा ले जाती है, जैसे धातु का मैल जिसे लोग आग में पिघलाते हैं, आभूषण या औज़ार बनाने के लिए।
इसी प्रकार अल्लाह सत्य और असत्य की उपमा देता है।
फिर वह निरर्थक मैल फेंक दिया जाता है, लेकिन जो चीज़ लोगों को लाभ पहुँचाती है, वह धरती पर रह जाती है।
इसी प्रकार अल्लाह मिसालें देता है।
أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَسَالَتۡ أَوۡدِيَةُۢ بِقَدَرِهَا فَٱحۡتَمَلَ ٱلسَّيۡلُ زَبَدٗا رَّابِيٗاۖ وَمِمَّا يُوقِدُونَ عَلَيۡهِ فِي ٱلنَّارِ ٱبۡتِغَآءَ حِلۡيَةٍ أَوۡ مَتَٰعٖ زَبَدٞ مِّثۡلُهُۥۚ كَذَٰلِكَ يَضۡرِبُ ٱللَّهُ ٱلۡحَقَّ وَٱلۡبَٰطِلَۚ فَأَمَّا ٱلزَّبَدُ فَيَذۡهَبُ جُفَآءٗۖ وَأَمَّا مَا يَنفَعُ ٱلنَّاسَ فَيَمۡكُثُ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ كَذَٰلِكَ يَضۡرِبُ ٱللَّهُ ٱلۡأَمۡثَالَ17

सत्य के प्रति अंधे
18जो अपने रब की पुकार का जवाब देते हैं, उनके लिए बेहतरीन प्रतिफल है।
और जो उसे जवाब नहीं देते, अगर उनके पास दुनिया की हर चीज़ दुगनी भी हो, तो वे उसे अपने आप को बचाने के लिए ज़रूर पेश कर
देंगे।
उनका हिसाब सख़्त होगा, और जहन्नम उनका ठिकाना होगा।
वह कितना बुरा ठिकाना है!
19क्या वह व्यक्ति जो आपके रब की आप पर 'ऐ पैग़म्बर' अवतरित की गई वह्यी को सत्य मानता है, उस व्यक्ति के बराबर हो सकता है जो अनदेखा
करता है?
इसे केवल वही लोग ध्यान में रखेंगे जो समझ रखते हैं।
لِلَّذِينَ ٱسۡتَجَابُواْ لِرَبِّهِمُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ وَٱلَّذِينَ لَمۡ يَسۡتَجِيبُواْ لَهُۥ لَوۡ أَنَّ لَهُم مَّا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا وَمِثۡلَهُۥ مَعَهُۥ لَٱفۡتَدَوۡاْ بِهِۦٓۚ أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ سُوٓءُ ٱلۡحِسَابِ وَمَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمِهَادُ18
أَفَمَن يَعۡلَمُ أَنَّمَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَ ٱلۡحَقُّ كَمَنۡ هُوَ أَعۡمَىٰٓۚ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ19
जो वास्तव में समझते हैं
20वे जो अल्लाह के वादे को पूरा करते हैं और वचन भंग नहीं करते;
21और जो उन संबंधों को बनाए रखते हैं जिन्हें अल्लाह ने बनाए रखने का आदेश दिया है, अपने रब का सम्मान करते हैं, और कठोर हिसाब से डरते
हैं।
22और वे जो अपने रब की प्रसन्नता की आशा में धैर्यवान हैं, नमाज़ क़ायम करते हैं, जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से गुप्त रूप से और
खुले तौर पर दान करते हैं, और बुराई को भलाई से दूर करते हैं।
उनके लिए अंतिम ठिकाना होगा:
23हमेशा रहने वाले बाग़, जिनमें वे अपने माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों में से जो ईमान वाले होंगे, उनके साथ प्रवेश करेंगे।
और फ़रिश्ते हर द्वार से उनके पास प्रवेश करेंगे, कहते हुए,
24तुम्हारे सब्र के बदले तुम पर शांति हो।
क्या ही अच्छा है यह अंतिम ठिकाना!
ٱلَّذِينَ يُوفُونَ بِعَهۡدِ ٱللَّهِ وَلَا يَنقُضُونَ ٱلۡمِيثَٰقَ20
وَٱلَّذِينَ يَصِلُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيَخۡشَوۡنَ رَبَّهُمۡ وَيَخَافُونَ سُوٓءَ ٱلۡحِسَابِ21
وَٱلَّذِينَ صَبَرُواْ ٱبۡتِغَآءَ وَجۡهِ رَبِّهِمۡ وَأَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَأَنفَقُواْ مِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ سِرّٗا وَعَلَانِيَةٗ وَيَدۡرَءُونَ بِٱلۡحَسَنَةِ ٱلسَّيِّئَةَ أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ عُقۡبَى ٱلدَّارِ22
جَنَّٰتُ عَدۡنٖ يَدۡخُلُونَهَا وَمَن صَلَحَ مِنۡ ءَابَآئِهِمۡ وَأَزۡوَٰجِهِمۡ وَذُرِّيَّٰتِهِمۡۖ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ يَدۡخُلُونَ عَلَيۡهِم مِّن كُلِّ بَابٖ23
سَلَٰمٌ عَلَيۡكُم بِمَا صَبَرۡتُمۡۚ فَنِعۡمَ عُقۡبَى ٱلدَّارِ24
दुष्ट
25और जो लोग अल्लाह के अहद को मज़बूत करने के बाद तोड़ देते हैं, और उन रिश्तों को काटते हैं जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का हुक्म दिया है,
और ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं— ऐसे लोगों के लिए लानत है और उनके लिए बुरा ठिकाना है।
⁹
وَٱلَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهۡدَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مِيثَٰقِهِۦ وَيَقۡطَعُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُ ٱللَّعۡنَةُ وَلَهُمۡ سُوٓءُ ٱلدَّارِ25

ज्ञान की बातें
- •
एक दिन नबी (ﷺ) अपने साथियों के साथ चल रहे थे, जब वे एक मरी हुई, दुबली-पतली, छोटे कानों वाली बकरी के पास से गुज़रे।
उन्होंने पूछा, "कौन इस बकरी को एक चाँदी के सिक्के में खरीदना चाहेगा?
" उन्होंने जवाब दिया, "कोई इसके लिए कुछ भी नहीं देगा।
" उन्होंने कहा, "क्या तुम इसे मुफ्त में लोगे?
" उन्होंने जवाब दिया, "अगर यह ज़िंदा भी होती, तो भी कोई इसमें दिलचस्पी नहीं लेता।
" नबी (ﷺ) ने फरमाया, "अल्लाह की क़सम!
यह दुनिया अल्लाह के नज़दीक उससे कहीं ज़्यादा बेक़ीमत है, जितनी यह (मरी हुई बकरी) तुम्हारे लिए बेक़ीमत है।
" {इमाम मुस्लिम}


छोटी कहानी
- •
एक बार इब्न अस-सम्माक नामक एक विद्वान ने हारून अल-रशीद को सलाह दी, जो एक महान मुस्लिम शासक थे और जिनका साम्राज्य चीन से उत्तरी अफ्रीका तक फैला
हुआ था।
उन्होंने कहा, "ऐ अमीरुल मोमिनीन!
यदि आपको बहुत प्यास लगी हो, तो क्या आप एक गिलास पानी के लिए अपने आधे राज्य का त्याग कर देंगे?
" हारून ने उत्तर दिया, "हाँ।
" तब इब्न अस-सम्माक ने पूछा, "क्या आप अपने राज्य का दूसरा आधा हिस्सा त्याग देंगे यदि उस पानी को निकालने के लिए शौचालय का उपयोग करने का
यही एकमात्र तरीका हो?
" फिर से हारून ने कहा, "हाँ।
" इब्न अस-सम्माक ने सलाह दी, "तो हमेशा याद रखें कि आपका राज्य एक गिलास पानी के बराबर भी नहीं है।
" हारून इस सलाह से प्रभावित हुए और रोने लगे।
सुख का भ्रम
26अल्लाह जिसे चाहता है, प्रचुर या सीमित संसाधन देता है।
फिर भी वे इनकार करने वाले इस दुनिया के सुखों पर बहुत इतराते हैं।
लेकिन यह दुनिया, आखिरत के मुकाबले में, बस एक क्षणिक उपभोग है।
ٱللَّهُ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ وَفَرِحُواْ بِٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَمَا ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا فِي ٱلۡأٓخِرَةِ إِلَّا مَتَٰعٞ26
एक और चमत्कार की माँग
27काफ़िर कहते हैं, 'काश उसके रब की ओर से उस पर कोई निशानी उतारी जाती।
' कहो, 'ऐ पैग़म्बर, अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है, और अपनी ओर रास्ता दिखाता है जो उसकी ओर रुजू करता है-
28वे लोग जो ईमान लाए हैं और जिनके दिलों को अल्लाह के ज़िक्र से सुकून मिलता है।
बेशक दिल अल्लाह के ज़िक्र से ही सुकून पाते हैं।
29जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उनके लिए ख़ुशहाली और एक बेहतरीन ठिकाना है।
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡلَآ أُنزِلَ عَلَيۡهِ ءَايَةٞ مِّن رَّبِّهِۦۚ قُلۡ إِنَّ ٱللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِيٓ إِلَيۡهِ مَنۡ أَنَابَ27
ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَتَطۡمَئِنُّ قُلُوبُهُم بِذِكۡرِ ٱللَّهِۗ أَلَا بِذِكۡرِ ٱللَّهِ تَطۡمَئِنُّ ٱلۡقُلُوبُ28
ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ طُوبَىٰ لَهُمۡ وَحُسۡنُ مََٔابٖ29
सबसे दयालु का इनकार
30और इसी तरह हमने आपको (हे पैगंबर) एक समुदाय की ओर भेजा है, जैसा कि हमने पहले के समुदायों के साथ किया था, ताकि आप उन्हें वह सुना
सकें जो हमने आप पर प्रकट किया है।
फिर भी वे 'मक्कावासी' अत्यंत कृपालु (अल्लाह) का इनकार करते हैं।
कहो, 'वही मेरा रब है!
उसके सिवा कोई पूज्य नहीं है।
उसी पर मैंने भरोसा किया है और उसी की ओर मैं रुजू करता हूँ।
'
كَذَٰلِكَ أَرۡسَلۡنَٰكَ فِيٓ أُمَّةٖ قَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِهَآ أُمَمٞ لِّتَتۡلُوَاْ عَلَيۡهِمُ ٱلَّذِيٓ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ وَهُمۡ يَكۡفُرُونَ بِٱلرَّحۡمَٰنِۚ قُلۡ هُوَ رَبِّي لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ عَلَيۡهِ تَوَكَّلۡتُ وَإِلَيۡهِ مَتَابِ30
झुठलाने वाले हमेशा झुठलाते रहेंगे।
31यदि कोई ऐसी तिलावत होती जिससे पहाड़ अपनी जगह से हट जाते, या ज़मीन फट जाती, या मुर्दे बोलने लगते, तो वह यही क़ुरान होता।
बल्कि यह सब अल्लाह के अधिकार में है।
क्या ईमानवालों को अभी तक यह एहसास नहीं हुआ कि यदि अल्लाह चाहता तो वह सारी इंसानियत को हिदायत दे देता?
और काफ़िरों को उनकी करतूतों के कारण लगातार आपदाएँ घेरती रहेंगी या उनके घरों के क़रीब आती रहेंगी, जब तक अल्लाह का वादा पूरा नहीं हो जाता।
निश्चित रूप से अल्लाह अपने वादे का उल्लंघन नहीं करता।
32तुमसे पहले भी दूसरे रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया जा चुका है, लेकिन मैंने काफ़िरों को थोड़ी देर के लिए मोहलत दी, फिर उन्हें पकड़ लिया।
और मेरी सज़ा कितनी भयानक थी!
وَلَوۡ أَنَّ قُرۡءَانٗا سُيِّرَتۡ بِهِ ٱلۡجِبَالُ أَوۡ قُطِّعَتۡ بِهِ ٱلۡأَرۡضُ أَوۡ كُلِّمَ بِهِ ٱلۡمَوۡتَىٰۗ بَل لِّلَّهِ ٱلۡأَمۡرُ جَمِيعًاۗ أَفَلَمۡ يَاْيَۡٔسِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَن لَّوۡ يَشَآءُ ٱللَّهُ لَهَدَى ٱلنَّاسَ جَمِيعٗاۗ وَلَا يَزَالُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ تُصِيبُهُم بِمَا صَنَعُواْ قَارِعَةٌ أَوۡ تَحُلُّ قَرِيبٗا مِّن دَارِهِمۡ حَتَّىٰ يَأۡتِيَ وَعۡدُ ٱللَّهِۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُخۡلِفُ ٱلۡمِيعَادَ31
وَلَقَدِ ٱسۡتُهۡزِئَ بِرُسُلٖ مِّن قَبۡلِكَ فَأَمۡلَيۡتُ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ ثُمَّ أَخَذۡتُهُمۡۖ فَكَيۡفَ كَانَ عِقَابِ32

मूर्तिपूजकों से प्रश्न
33क्या वह रब जो हर एक के कर्मों को देखता है, बुतों के बराबर हो सकता है?
फिर भी उन मक्कावासियों ने अपने बुतों को अल्लाह का साझीदार बना लिया है।
कहो, 'ऐ नबी, उनका नाम बताओ!
या तुम उसे किसी ऐसी चीज़ के बारे में सूचित करने का ढोंग कर रहे हो जिसकी ज़मीन पर मौजूदगी का उसे इल्म नहीं?
या क्या ये 'माबूद' सिर्फ़ खोखली बातें हैं?
' दरअसल, काफ़िरों का झूठ उनके लिए इतना आकर्षक बना दिया गया है कि वे 'सीधे' रास्ते से भटक गए हैं।
और जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, उसके लिए कोई हिदायत देने वाला नहीं होगा।
34उन्हें इस दुनिया में सज़ा दी जाएगी, लेकिन आख़िरत की सज़ा यक़ीनन बहुत ज़्यादा सख़्त है।
और उनके लिए अल्लाह से बचाने वाला कोई नहीं होगा।
أَفَمَنۡ هُوَ قَآئِمٌ عَلَىٰ كُلِّ نَفۡسِۢ بِمَا كَسَبَتۡۗ وَجَعَلُواْ لِلَّهِ شُرَكَآءَ قُلۡ سَمُّوهُمۡۚ أَمۡ تُنَبُِّٔونَهُۥ بِمَا لَا يَعۡلَمُ فِي ٱلۡأَرۡضِ أَم بِظَٰهِرٖ مِّنَ ٱلۡقَوۡلِۗ بَلۡ زُيِّنَ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ مَكۡرُهُمۡ وَصُدُّواْ عَنِ ٱلسَّبِيلِۗ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَاد33
لَّهُمۡ عَذَابٞ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ وَلَعَذَابُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَشَقُّۖ وَمَا لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مِن وَاق34
जन्नत का वर्णन
35यह उस जन्नत का वर्णन है जिसका वादा ईमान वालों से किया गया है: उसके नीचे से नदियाँ बहती हैं, उसके फल शाश्वत हैं, और उसकी छाया भी।
यही ईमान वालों का अंतिम ठिकाना है।
लेकिन काफ़िरों का ठिकाना आग है!
مَّثَلُ ٱلۡجَنَّةِ ٱلَّتِي وُعِدَ ٱلۡمُتَّقُونَۖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ أُكُلُهَا دَآئِمٞ وَظِلُّهَاۚ تِلۡكَ عُقۡبَى ٱلَّذِينَ ٱتَّقَواْۚ وَّعُقۡبَى ٱلۡكَٰفِرِينَ ٱلنَّارُ35
हिन्दी बच्चों की अध्ययन मार्गदर्शिका
हिन्दी बच्चों के लिए कुरान अध्ययन: यह पृष्ठ हिन्दी परिवारों को सरल व्याख्या, अरबी आयत, हिन्दी अर्थ, तिलावत और दैनिक अभ्यास के साथ कुरान सीखने में मदद करता
है।
सूरह और आयत के नाम अरबी हो सकते हैं, लेकिन मुख्य सीखने की दिशा, दोहराव, पारिवारिक चर्चा और बच्चों की समझ हिन्दी संदर्भ में दी गई है।
हिन्दी पाठ मार्गदर्शन: हर भाग में अरबी आयत के साथ हिन्दी अर्थ, बच्चों के लिए सरल शिक्षा, छोटे प्रश्न, दोहराव और परिवार में चर्चा का रास्ता दिया गया
है।
यदि किसी क्रॉलर को कई अरबी शब्द दिखें, तो ये हिन्दी अनुच्छेद पृष्ठ की मुख्य भाषा स्पष्ट करते हैं: हिन्दी कुरान अध्ययन, हिन्दी अनुवाद, बच्चों का पाठ, तिलावत
और दैनिक अभ्यास।
How to study Surah Ar-Ra'd with children
इस बच्चों के कुरान पाठ को चरणबद्ध तरीके से पढ़ें: पहले सरल व्याख्या पढ़ें, फिर अरबी आयत देखें, ज़रूरत हो तो तिलावत सुनें, और अंत में बच्चे से
मुख्य शिक्षा अपने शब्दों में दोहराने को कहें।
माता-पिता हर बार एक छोटा भाग चुन सकते हैं।
बच्चे से एक आसान प्रश्न पूछें, आयत का अर्थ फिर पढ़ें, और फिर उसी सूरह के पूरे पाठ या पास की दूसरी बच्चों की पाठ सामग्री की ओर
बढ़ें।
हिन्दी अध्ययन संदर्भ में यह पृष्ठ कुरान, सूरह, आयत, सरल व्याख्या, तिलावत, पारिवारिक चर्चा और दैनिक अभ्यास को जोड़ता है।
अरबी पाठ के साथ हिन्दी व्याख्या पढ़ने से बच्चों को अर्थ याद रखने में सहायता मिलती है।
हिन्दी बच्चों के कुरान पाठ में हिन्दी प्रश्न, हिन्दी व्याख्या, हिन्दी अनुवाद, परिवार में चर्चा, छोटी पुनरावृत्ति और तिलावत सुनने के चरण रखे गए हैं ताकि पृष्ठ का
मुख्य भाषा संकेत स्पष्ट रहे।
सूरह नाम या आयत अरबी में हो सकते हैं, लेकिन सीखने की दिशा हिन्दी है।
हिन्दी परिवार इस पृष्ठ से बच्चे को कुरान का अर्थ, आचरण, दुआ, दोहराव और दैनिक अभ्यास सिखा सकते हैं।