This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 92 - اللَّيْل

Al-Layl (Surah 92)

اللَّيْل (The Night)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह अल्लाह की सृजन शक्ति और सही मार्ग दिखाने की क्षमता पर, लोगों की नेकी और बदी में से चुनने की योग्यता पर, और हर मार्ग के परिणामों पर बल देती है। इस सूरह (आयतः 21) और अगली सूरह (93:5) में इस बात पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है कि ईमान वालों को उनकी पूरी संतुष्टि के साथ प्रतिफल दिया जाएगा। अल्लाह के नाम से जो परम दयालु, अत्यंत कृपाशील है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

मोमिन और काफ़िर

1. रात की क़सम जब वह छा जाए। 2. और दिन की क़सम जब वह चमक उठे। 3. और उसकी क़सम जिसने नर और मादा को पैदा किया। 4. निश्चय ही तुम्हारे प्रयास विविध हैं। 5. और जिसने दान दिया और परहेज़गारी की, 6. और जिसने उत्तम प्रतिफल को सच्चा माना, 7. हम उनके लिए आसानी का मार्ग सुगम बना देंगे। 8. और जो कंजूसी करता है और (अल्लाह से) ग़ाफ़िल रहता है, 9. और जो (दृढ़ता से) सबसे उत्तम प्रतिफल को झुठलाता है, 10. हम उनके लिए दुश्वारी का मार्ग सुगम कर देंगे। 11. और उनका माल उनके कुछ काम न आएगा जब वे (जहन्नम में) गिरेंगे।

وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰ
١
وَٱلنَّهَارِ إِذَا تَجَلَّىٰ
٢
وَمَا خَلَقَ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ
٣
إِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتَّىٰ
٤
فَأَمَّا مَنْ أَعْطَىٰ وَٱتَّقَىٰ
٥
وَصَدَّقَ بِٱلْحُسْنَىٰ
٦
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْيُسْرَىٰ
٧
وَأَمَّا مَنۢ بَخِلَ وَٱسْتَغْنَىٰ
٨
وَكَذَّبَ بِٱلْحُسْنَىٰ
٩
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْعُسْرَىٰ
١٠
وَمَا يُغْنِى عَنْهُ مَالُهُۥٓ إِذَا تَرَدَّىٰٓ
١١

Surah 92 - اللَّيْل (रात) - Verses 1-11


सदाचारियों और दुराचारियों का प्रतिफल

12. बेशक हमीं पर है हिदायत दिखाना। 13. और निश्चित रूप से यह दुनिया और आख़िरत हमारे ही हैं। 14. और इसलिए मैंने तुम्हें एक धधकती हुई आग से आगाह किया है, 15. जिसमें सबसे अभागे के सिवाय कोई नहीं जलेगा— 16. जो झुठलाते हैं और मुँह मोड़ते हैं। 17. लेकिन मुत्तक़ी इससे बचाए जाएँगे— 18. जो अपना माल देते हैं केवल अपने आप को पाक करने के लिए, 19. किसी के एहसान के बदले में नहीं, 20. बल्कि अपने रब, सर्वोच्च की रज़ा चाहते हुए। 21. वे अवश्य ही प्रसन्न होंगे।

إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَىٰ
١٢
وَإِنَّ لَنَا لَلْـَٔاخِرَةَ وَٱلْأُولَىٰ
١٣
فَأَنذَرْتُكُمْ نَارًا تَلَظَّىٰ
١٤
لَا يَصْلَىٰهَآ إِلَّا ٱلْأَشْقَى
١٥
ٱلَّذِى كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ
١٦
وَسَيُجَنَّبُهَا ٱلْأَتْقَى
١٧
ٱلَّذِى يُؤْتِى مَالَهُۥ يَتَزَكَّىٰ
١٨
وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعْمَةٍ تُجْزَىٰٓ
١٩
إِلَّا ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِ ٱلْأَعْلَىٰ
٢٠
وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ
٢١

Surah 92 - اللَّيْل (रात) - Verses 12-21


Al-Layl () - अध्याय 92 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा