This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 89 - الفَجْر

Al-Fajr (Surah 89)

الفَجْر (Dawn)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

इस मक्की सूरह में पैगंबर (ﷺ) को आश्वस्त किया गया है कि अरब के मूर्तिपूजक उन यातनाओं से अछूते नहीं हैं जो आद, समूद और फ़िरौन पर आई थीं। इसमें उन दुष्टों का उल्लेख किया गया है जो समृद्धि में शुक्रगुज़ार नहीं होते और विपत्ति में सब्र नहीं करते। क़यामत के दिन कुकर्मी पछताएंगे, जबकि नेक लोगों को सम्मानित किया जाएगा। इस सूरह (आयतों 17-20) और अगली सूरह (90:11-16) में उन लोगों की आलोचना की गई है जो अल्लाह की नेमतों को रोकते हैं। अल्लाह के नाम पर, जो अत्यंत कृपालु, परम दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

इन्कार करने वालों का अंजाम

1. फज्र की क़सम, 2. और दस रातों की क़सम, 3. और जुफ़्त (सम) और ताक़ (विषम) की क़सम, 4. और रात जब वह गुज़रती है! 5. क्या यह सब अक्लमंदों के लिए पर्याप्त क़सम नहीं है? 6. क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे रब ने आद के साथ क्या किया— 7. इरम वाले—ऊँचे क़द वाले, 8. जिसकी मिसाल किसी और शहर में न थी; 9. और समूद जिन्होंने वादी में चट्टानों को तराशा; 10. और मज़बूत इमारतों वाला फ़िरौन? 11. उन सब ने धरती पर अत्याचार किया, 12. वहाँ बहुत फ़साद फैलाया। 13. अतः आपके रब ने उन पर अज़ाब का कोड़ा उतारा। 14. निश्चय ही आपका रब निगरां है।

وَٱلْفَجْرِ
١
وَلَيَالٍ عَشْرٍ
٢
وَٱلشَّفْعِ وَٱلْوَتْرِ
٣
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَسْرِ
٤
هَلْ فِى ذَٰلِكَ قَسَمٌ لِّذِى حِجْرٍ
٥
أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ
٦
إِرَمَ ذَاتِ ٱلْعِمَادِ
٧
ٱلَّتِى لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِى ٱلْبِلَـٰدِ
٨
وَثَمُودَ ٱلَّذِينَ جَابُوا ٱلصَّخْرَ بِٱلْوَادِ
٩
وَفِرْعَوْنَ ذِى ٱلْأَوْتَادِ
١٠
ٱلَّذِينَ طَغَوْا فِى ٱلْبِلَـٰدِ
١١
فَأَكْثَرُوا فِيهَا ٱلْفَسَادَ
١٢
فَصَبَّ عَلَيْهِمْ رَبُّكَ سَوْطَ عَذَابٍ
١٣
إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلْمِرْصَادِ
١٤

Surah 89 - الفَجْر (भोर) - Verses 1-14


इन्कार करने वालों के लिए बुरी खबर

15. अब, जब कभी इंसान को उसका रब अपनी उदारता और नेमतों से आज़माता है, तो वह इतराता है, “मेरे रब ने मुझे इज़्ज़त बख्शी है!” 16. लेकिन जब वह उन्हें उनकी रोज़ी तंग करके आज़माता है, तो वे एतराज़ करते हैं, “मेरे रब ने मुझे ज़लील किया है!” 17. हरगिज़ नहीं! बल्कि तुम यतीम का सम्मान नहीं करते, 18. और न तुम एक-दूसरे को मिसकीनों को खाना खिलाने पर उभारते हो। 19. और तुम मीरास को लालच से खाते हो, 20. और माल से बेपनाह मुहब्बत करते हो। 21. हरगिज़ नहीं! जब ज़मीन को कूट कूट कर रेज़ा रेज़ा कर दिया जाएगा, 22. और आपका रब फ़रिश्तों के साथ, कतार-दर-कतार आता है। 23. और उस दिन जहन्नम को सामने लाया जाएगा—यह वह समय होगा जब हर (काफ़िर) व्यक्ति को (अपनी करनी) याद आएगी। लेकिन तब याद करने का क्या फ़ायदा? 24. वे चिल्लाएँगे, “काश मैंने अपनी (असली) ज़िंदगी के लिए कुछ (भला) आगे भेजा होता।” 25. उस दिन वह उन्हें ऐसी कठोर सज़ा देगा जैसी कोई और नहीं। 26. और उन्हें ऐसी मज़बूती से बांधेगा जैसी कोई और नहीं।

فَأَمَّا ٱلْإِنسَـٰنُ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ رَبُّهُۥ فَأَكْرَمَهُۥ وَنَعَّمَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَكْرَمَنِ
١٥
وَأَمَّآ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ فَقَدَرَ عَلَيْهِ رِزْقَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَهَـٰنَنِ
١٦
كَلَّا ۖ بَل لَّا تُكْرِمُونَ ٱلْيَتِيمَ
١٧
وَلَا تَحَـٰٓضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
١٨
وَتَأْكُلُونَ ٱلتُّرَاثَ أَكْلًا لَّمًّا
١٩
وَتُحِبُّونَ ٱلْمَالَ حُبًّا جَمًّا
٢٠
كَلَّآ إِذَا دُكَّتِ ٱلْأَرْضُ دَكًّا دَكًّا
٢١
وَجَآءَ رَبُّكَ وَٱلْمَلَكُ صَفًّا صَفًّا
٢٢
وَجِاىٓءَ يَوْمَئِذٍۭ بِجَهَنَّمَ ۚ يَوْمَئِذٍ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ وَأَنَّىٰ لَهُ ٱلذِّكْرَىٰ
٢٣
يَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى قَدَّمْتُ لِحَيَاتِى
٢٤
فَيَوْمَئِذٍ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُۥٓ أَحَدٌ
٢٥
وَلَا يُوثِقُ وَثَاقَهُۥٓ أَحَدٌ
٢٦

Surah 89 - الفَجْر (भोर) - Verses 15-26


ईमान वालों के लिए खुशखबरी

27. हे शांत आत्मा! 28. अपने रब की ओर लौट आओ, तुम उससे राज़ी और वह तुमसे राज़ी। 29. तो मेरे बंदों में शामिल हो जाओ, 30. और मेरी जन्नत में दाख़िल हो जाओ।

يَـٰٓأَيَّتُهَا ٱلنَّفْسُ ٱلْمُطْمَئِنَّةُ
٢٧
ٱرْجِعِىٓ إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِيَةً مَّرْضِيَّةً
٢٨
فَٱدْخُلِى فِى عِبَـٰدِى
٢٩
وَٱدْخُلِى جَنَّتِى
٣٠

Surah 89 - الفَجْر (भोर) - Verses 27-30


Al-Fajr () - अध्याय 89 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा