यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 86 - الطَّارِق

Aṭ-Ṭâriq (सूरह 86)

الطَّارِق (The Nightly Star)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

इस मक्की सूरह में, शपथ ली गई है कि व्यक्ति जो कुछ भी करता है, उसे चौकस फ़रिश्ते दर्ज करते हैं और यह कि क़यामत अल्लाह के लिए उतनी ही आसान है जितनी पहली रचना। एक और शपथ ली गई है कि क़ुरआन एक निर्णायक संदेश है, और उन लोगों को चेतावनी दी गई है जो अल्लाह के विरुद्ध षड्यंत्र रचते हैं। अल्लाह के नाम से—जो अत्यंत कृपाशील, परम दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

अल्लाह की सृजन और पुनर्जीवित करने की शक्ति

1. आसमान की क़सम और रात में आने वाले तारे की क़सम! 2. और तुम्हें क्या पता कि रात में आने वाला तारा क्या है? 3. वह भेदने वाला तारा है। 4. कोई जान ऐसी नहीं जिस पर एक निगराँ फ़रिश्ता न हो। 5. तो इंसान को चाहिए कि वह गौर करे कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है! 6. (वह) एक उछलते हुए पानी से पैदा किया गया है। 7. जो पीठ और पसलियों के बीच से निकलता है। 8. निःसंदेह वह उन्हें वापस लाने में पूरी तरह सक्षम है। 9. जिस दिन सारे भेद खुल जाएँगे। 10. तब न उसके पास कोई शक्ति होगी और न कोई सहायक।

وَٱلسَّمَآءِ وَٱلطَّارِقِ
١
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلطَّارِقُ
٢
ٱلنَّجْمُ ٱلثَّاقِبُ
٣
إِن كُلُّ نَفْسٍ لَّمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌ
٤
فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ مِمَّ خُلِقَ
٥
خُلِقَ مِن مَّآءٍ دَافِقٍ
٦
يَخْرُجُ مِنۢ بَيْنِ ٱلصُّلْبِ وَٱلتَّرَآئِبِ
٧
إِنَّهُۥ عَلَىٰ رَجْعِهِۦ لَقَادِرٌ
٨
يَوْمَ تُبْلَى ٱلسَّرَآئِرُ
٩
فَمَا لَهُۥ مِن قُوَّةٍ وَلَا نَاصِرٍ
١٠

सूरह 86 - الطَّارِق (रात का तारा) - आयतें 1-10


अरब मूर्तिपूजकों को चेतावनी

11. लौटते हुए चक्रों वाले आकाश की क़सम, 12. और फूटने वाले पौधों वाली धरती की क़सम! 13. निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक निर्णायक वचन है, 14. और यह कोई हँसी-मज़ाक नहीं है। 15. वे निश्चय ही चालें चल रहे हैं, 16. और मैं भी تدبیر کر رہا हूँ। 17. अतः काफ़िरों पर सब्र करो (ऐ पैग़म्बर)। उन्हें थोड़ी देर के लिए ढील दो।

وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجْعِ
١١
وَٱلْأَرْضِ ذَاتِ ٱلصَّدْعِ
١٢
إِنَّهُۥ لَقَوْلٌ فَصْلٌ
١٣
وَمَا هُوَ بِٱلْهَزْلِ
١٤
إِنَّهُمْ يَكِيدُونَ كَيْدًا
١٥
وَأَكِيدُ كَيْدًا
١٦
فَمَهِّلِ ٱلْكَـٰفِرِينَ أَمْهِلْهُمْ رُوَيْدًۢا
١٧

सूरह 86 - الطَّارِق (रात का तारा) - आयतें 11-17