यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 77 - المُرْسَلَات

Al-Mursalât (सूरह 77)

المُرْسَلَات (Those ˹Winds˺ Sent Forth)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

पिछली दो सूरहों और अगली दो सूरहों की तरह, यह मक्की सूरह स्पष्ट करती है कि अल्लाह की सृजन शक्ति को मृतकों को न्याय के लिए पुनः जीवित करने की उसकी क्षमता का प्रमाण माना जाना चाहिए। क़यामत की भयावहता और दुष्टों का दंड कड़े शब्दों में वर्णित है। अल्लाह के नाम से—जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

क़यामत का दिन अवश्यंभावी है।

1. उन (हवाओं) की क़सम जो एक के बाद एक भेजी जाती हैं, 2. और उन (हवाओं) की क़सम जो ज़ोर से चलती हैं, 3. और उन (हवाओं) की क़सम जो (बादलों को) फैला देती हैं! 4. और उन (फ़रिश्तों) की क़सम जो (हक़ और बातिल में) पूरी तरह से फ़र्क़ करने वाले, 5. और वह्य (प्रकाशना) उतारने वाले, 6. उज़्र (बहाने) समाप्त करने वाले और चेतावनी देने वाले। 7. निःसंदेह, जिसका तुमसे वादा किया गया है, वह अवश्य आएगा।
وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًا
١
فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ عَصْفًا
٢
وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًا
٣
فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًا
٤
فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا
٥
عُذْرًا أَوْ نُذْرًا
٦
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌ
٧

सूरह 77 - المُرْسَلَات (भेजे गए) - आयतें 1-7


क़यामत के दिन की भयावहता।

8. तो जब तारे बुझा दिए जाएँगे, 9. और आकाश विदीर्ण कर दिया जाएगा, 10. और पहाड़ उड़ा दिए जाएँगे, 11. और रसूलों की गवाही का समय आ पहुँचेगा— 12. यह सब किस दिन के लिए मुकर्रर किया गया है? 13. निर्णय के दिन के लिए! 14. और तुम्हें क्या पता कि निर्णय का दिन क्या है? 15. उस दिन झुठलाने वालों के लिए तबाही है!
فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ
٨
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ
٩
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ
١٠
وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ
١١
لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ
١٢
لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ
١٣
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ
١٤
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
١٥

सूरह 77 - المُرْسَلَات (भेजे गए) - आयतें 8-15


अल्लाह की असीम शक्ति।

16. क्या हमने पहले के काफ़िरों को नष्ट नहीं किया? 17. और हम बाद के काफ़िरों को भी उनके पीछे लगा देंगे। 18. इसी तरह हम मुजरिमों के साथ करते हैं। 19. उस दिन झुठलाने वालों पर धिक्कार है! 20. क्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से पैदा नहीं किया? 21. उसे एक महफूज़ जगह में ठहराकर। 22. एक मुकर्रर वक़्त तक? 23. हमने इसका उत्तम विधान किया। हम कितने श्रेष्ठ हैं! 24. उस दिन झुठलाने वालों को धिक्कार है! 25. क्या हमने ज़मीन को एक ठिकाना नहीं बनाया? 26. जीवितों और मृतकों के लिए, 27. और उस पर ऊँचे, दृढ़ पर्वत स्थापित किए, और तुम्हें पीने के लिए मीठा पानी दिया? 28. धिक्कार है उस दिन झुठलाने वालों को!
أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ
١٦
ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ
١٧
كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ
١٨
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
١٩
أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍ مَّهِينٍ
٢٠
فَجَعَلْنَـٰهُ فِى قَرَارٍ مَّكِينٍ
٢١
إِلَىٰ قَدَرٍ مَّعْلُومٍ
٢٢
فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ
٢٣
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
٢٤
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا
٢٥
أَحْيَآءً وَأَمْوَٰتًا
٢٦
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءً فُرَاتًا
٢٧
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
٢٨

सूरह 77 - المُرْسَلَات (भेजे गए) - आयतें 16-28


जहन्नम का इनकार करने वालों के लिए बुरी खबर।

29. जाओ उसमें, जिसे तुम झुठलाया करते थे! 30. जाओ उस धुएँ के साए में, जो तीन शाखों में उठता है, 31. न ठंडक देगा और न लपटों से कोई आश्रय। 32. निश्चय ही, वह (अग्नि) ऐसे अंगारे फेंकेगी जो बड़े-बड़े महलों के समान होंगे, 33. और (वे अंगारे) काले ऊँटों जैसे (काले) होंगे। 34. उस दिन झुठलाने वालों पर धिक्कार है! 35. उस दिन झुठलाने वालों पर धिक्कार है! 36. और न ही उन्हें कोई बहाना पेश करने की इजाज़त होगी। 37. वैल है उस दिन झुठलाने वालों के लिए! 38. यह फ़ैसले का दिन है: हमने तुम्हें पहले के काफ़िरों के साथ इकट्ठा किया है। 39. तो अगर तुम्हारे पास कोई تدبیر है, तो उसे मेरे ख़िलाफ़ इस्तेमाल करो। 40. उस दिन झुठलाने वालों के लिए धिक्कार है!
ٱنطَلِقُوٓا إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ
٢٩
ٱنطَلِقُوٓا إِلَىٰ ظِلٍّ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍ
٣٠
لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ
٣١
إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍ كَٱلْقَصْرِ
٣٢
كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتٌ صُفْرٌ
٣٣
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
٣٤
هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ
٣٥
وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ
٣٦
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
٣٧
هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ
٣٨
فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌ فَكِيدُونِ
٣٩
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
٤٠

सूरह 77 - المُرْسَلَات (भेजे गए) - आयतें 29-40


Full text of Surah Al-Mursalât with translation

Surah Al-Mursalât, verse 1

وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًا
उन (हवाओं) की क़सम जो एक के बाद एक भेजी जाती हैं,

Surah Al-Mursalât, verse 2

فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ عَصْفًا
और उन (हवाओं) की क़सम जो ज़ोर से चलती हैं,

Surah Al-Mursalât, verse 3

وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًا
और उन (हवाओं) की क़सम जो (बादलों को) फैला देती हैं!

Surah Al-Mursalât, verse 4

فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًا
और उन (फ़रिश्तों) की क़सम जो (हक़ और बातिल में) पूरी तरह से फ़र्क़ करने वाले,

Surah Al-Mursalât, verse 5

فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا
और वह्य (प्रकाशना) उतारने वाले,

Surah Al-Mursalât, verse 6

عُذْرًا أَوْ نُذْرًا
उज़्र (बहाने) समाप्त करने वाले और चेतावनी देने वाले।

Surah Al-Mursalât, verse 7

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌ
निःसंदेह, जिसका तुमसे वादा किया गया है, वह अवश्य आएगा।

Surah Al-Mursalât, verse 8

فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ
तो जब तारे बुझा दिए जाएँगे,

Surah Al-Mursalât, verse 9

وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ
और आकाश विदीर्ण कर दिया जाएगा,

Surah Al-Mursalât, verse 10

وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ
और पहाड़ उड़ा दिए जाएँगे,

Surah Al-Mursalât, verse 11

وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ
और रसूलों की गवाही का समय आ पहुँचेगा—

Surah Al-Mursalât, verse 12

لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ
यह सब किस दिन के लिए मुकर्रर किया गया है?

Surah Al-Mursalât, verse 13

لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ
निर्णय के दिन के लिए!

Surah Al-Mursalât, verse 14

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ
और तुम्हें क्या पता कि निर्णय का दिन क्या है?

Surah Al-Mursalât, verse 15

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए तबाही है!

Surah Al-Mursalât, verse 16

أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ
क्या हमने पहले के काफ़िरों को नष्ट नहीं किया?

Surah Al-Mursalât, verse 17

ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ
और हम बाद के काफ़िरों को भी उनके पीछे लगा देंगे।

Surah Al-Mursalât, verse 18

كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ
इसी तरह हम मुजरिमों के साथ करते हैं।

Surah Al-Mursalât, verse 19

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों पर धिक्कार है!

Surah Al-Mursalât, verse 20

أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍ مَّهِينٍ
क्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से पैदा नहीं किया?

Surah Al-Mursalât, verse 21

فَجَعَلْنَـٰهُ فِى قَرَارٍ مَّكِينٍ
उसे एक महफूज़ जगह में ठहराकर।

Surah Al-Mursalât, verse 22

إِلَىٰ قَدَرٍ مَّعْلُومٍ
एक मुकर्रर वक़्त तक?

Surah Al-Mursalât, verse 23

فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ
हमने इसका उत्तम विधान किया। हम कितने श्रेष्ठ हैं!

Surah Al-Mursalât, verse 24

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों को धिक्कार है!

Surah Al-Mursalât, verse 25

أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا
क्या हमने ज़मीन को एक ठिकाना नहीं बनाया?

Surah Al-Mursalât, verse 26

أَحْيَآءً وَأَمْوَٰتًا
जीवितों और मृतकों के लिए,

Surah Al-Mursalât, verse 27

وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءً فُرَاتًا
और उस पर ऊँचे, दृढ़ पर्वत स्थापित किए, और तुम्हें पीने के लिए मीठा पानी दिया?

Surah Al-Mursalât, verse 28

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
धिक्कार है उस दिन झुठलाने वालों को!

Surah Al-Mursalât, verse 29

ٱنطَلِقُوٓا إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ
जाओ उसमें, जिसे तुम झुठलाया करते थे!

Surah Al-Mursalât, verse 30

ٱنطَلِقُوٓا إِلَىٰ ظِلٍّ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍ
जाओ उस धुएँ के साए में, जो तीन शाखों में उठता है,

Surah Al-Mursalât, verse 31

لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ
न ठंडक देगा और न लपटों से कोई आश्रय।

Surah Al-Mursalât, verse 32

إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍ كَٱلْقَصْرِ
निश्चय ही, वह (अग्नि) ऐसे अंगारे फेंकेगी जो बड़े-बड़े महलों के समान होंगे,

Surah Al-Mursalât, verse 33

كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتٌ صُفْرٌ
और (वे अंगारे) काले ऊँटों जैसे (काले) होंगे।

Surah Al-Mursalât, verse 34

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों पर धिक्कार है!

Surah Al-Mursalât, verse 35

هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ
उस दिन झुठलाने वालों पर धिक्कार है!

Surah Al-Mursalât, verse 36

وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ
और न ही उन्हें कोई बहाना पेश करने की इजाज़त होगी।

Surah Al-Mursalât, verse 37

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
वैल है उस दिन झुठलाने वालों के लिए!

Surah Al-Mursalât, verse 38

هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ
यह फ़ैसले का दिन है: हमने तुम्हें पहले के काफ़िरों के साथ इकट्ठा किया है।

Surah Al-Mursalât, verse 39

فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌ فَكِيدُونِ
तो अगर तुम्हारे पास कोई تدبیر है, तो उसे मेरे ख़िलाफ़ इस्तेमाल करो।

Surah Al-Mursalât, verse 40

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए धिक्कार है!

Surah Al-Mursalât, verse 41

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَـٰلٍ وَعُيُونٍ
बेशक, नेक लोग घनी छाँव और चश्मों में होंगे

Surah Al-Mursalât, verse 42

وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ
और जो भी फल वे चाहेंगे।

Surah Al-Mursalât, verse 43

كُلُوا وَٱشْرَبُوا هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
उन्हें कहा जाएगा, "खाओ और पियो आनंदपूर्वक, उन कर्मों के कारण जो तुम करते थे।"

Surah Al-Mursalât, verse 44

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ
बेशक, हम इसी प्रकार सदाचारियों को प्रतिफल देते हैं।

Surah Al-Mursalât, verse 45

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों पर धिक्कार है!

Surah Al-Mursalât, verse 46

كُلُوا وَتَمَتَّعُوا قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ
खाओ और थोड़ी देर के लिए लाभ उठाओ, (क्योंकि) तुम निश्चित रूप से दुष्ट हो।

Surah Al-Mursalât, verse 47

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों पर धिक्कार है!

Surah Al-Mursalât, verse 48

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا لَا يَرْكَعُونَ
जब उनसे कहा जाता है, "सजदा करो," तो वे सजदा नहीं करते।

Surah Al-Mursalât, verse 49

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए वैल है!

Surah Al-Mursalât, verse 50

فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ
तो इस (कुरआन) के बाद वे किस बात पर ईमान लाएँगे?