This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 75 - القِيَامَة

Al-Qiyamah (Surah 75)

القِيَامَة (The ˹Rising for˺ Judgment)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह पुनरुत्थान और न्याय के मूर्तिपूजकों के इनकार का खंडन करती है। सूरह स्पष्ट करती है कि मृत्यु और न्याय अपरिहार्य हैं। यह तथ्य कि अल्लाह ने मनुष्यों को तुच्छ द्रव से बनाया और वह सभी का हिसाब लेने में सक्षम है, अगली सूरह में विस्तार से बताया गया है। अल्लाह के नाम पर—जो अत्यंत कृपाशील, परम दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

क़यामत के इनकार करने वालों को चेतावनी

1. क़सम है क़यामत के दिन की! 2. और क़सम है मलामत करने वाले नफ़्स की! 3. क्या इंसान यह गुमान करता है कि हम उसकी हड्डियों को दोबारा जमा नहीं कर सकते? 4. बल्कि! हम उनकी उंगलियों के पोरों को भी ठीक करने पर पूरी तरह सक्षम हैं। 5. फिर भी लोग उस चीज़ को झुठलाना चाहते हैं जो अभी आना बाकी है, 6. उपहासपूर्वक पूछते हैं, "यह क़यामत का दिन कब है?" 7. लेकिन जब नज़र चौंधिया जाए, 8. और चाँद मंद पड़ जाए, 9. और सूरज और चाँद एकत्र कर दिए जाएँ, 10. उस दिन कोई पुकारेगा, “भागने की जगह कहाँ है?” 11. हरगिज़ नहीं! कोई पनाह नहीं होगी। 12. उस दिन सब अपने रब के सामने लौटेंगे। 13. तब सभी को बताया जाएगा कि उन्होंने क्या आगे भेजा और क्या पीछे छोड़ा। 14. बल्कि, मनुष्य अपनी ही जानों के विरुद्ध गवाही देंगे, 15. चाहे वे कितने भी बहाने गढ़ें।

لَآ أُقْسِمُ بِيَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ
١
وَلَآ أُقْسِمُ بِٱلنَّفْسِ ٱللَّوَّامَةِ
٢
أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَـٰنُ أَلَّن نَّجْمَعَ عِظَامَهُۥ
٣
بَلَىٰ قَـٰدِرِينَ عَلَىٰٓ أَن نُّسَوِّىَ بَنَانَهُۥ
٤
بَلْ يُرِيدُ ٱلْإِنسَـٰنُ لِيَفْجُرَ أَمَامَهُۥ
٥
يَسْـَٔلُ أَيَّانَ يَوْمُ ٱلْقِيَـٰمَةِ
٦
فَإِذَا بَرِقَ ٱلْبَصَرُ
٧
وَخَسَفَ ٱلْقَمَرُ
٨
وَجُمِعَ ٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ
٩
يَقُولُ ٱلْإِنسَـٰنُ يَوْمَئِذٍ أَيْنَ ٱلْمَفَرُّ
١٠
كَلَّا لَا وَزَرَ
١١
إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ ٱلْمُسْتَقَرُّ
١٢
يُنَبَّؤُا ٱلْإِنسَـٰنُ يَوْمَئِذٍۭ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ
١٣
بَلِ ٱلْإِنسَـٰنُ عَلَىٰ نَفْسِهِۦ بَصِيرَةٌ
١٤
وَلَوْ أَلْقَىٰ مَعَاذِيرَهُۥ
١٥

Surah 75 - القِيَامَة (क़यामत) - Verses 1-15


पैगंबर का क़ुरान हिफ़्ज़ करने की शीघ्रता

16. क़ुरआन को याद करने की कोशिश में अपनी ज़बान को जल्दी-जल्दी न हिलाओ। 17. बेशक उसे (क़ुरआन को) याद कराना और पढ़वाना हमारी ज़िम्मेदारी है। 18. तो जब हम उसे (वही को) पढ़ लें, तो उसकी क़िराअत की पैरवी करो। 19. फिर निश्चय ही उसे स्पष्ट करना हम पर है।

لَا تُحَرِّكْ بِهِۦ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِۦٓ
١٦
إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُۥ وَقُرْءَانَهُۥ
١٧
فَإِذَا قَرَأْنَـٰهُ فَٱتَّبِعْ قُرْءَانَهُۥ
١٨
ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا بَيَانَهُۥ
١٩

Surah 75 - القِيَامَة (क़यामत) - Verses 16-19


इनकार करने वालों को एक और चेतावनी

20. हरगिज़ नहीं! बल्कि तुम इस क्षणभंगुर दुनिया से प्रेम करते हो, 21. और आख़िरत को छोड़ देते हो। 22. उस दिन कुछ चेहरे उज्ज्वल होंगे, 23. अपने रब को निहार रहे होंगे। 24. और कुछ दूसरे चेहरे मलिन होंगे, 25. उन्हें किसी विनाशकारी चीज़ के उन पर आ पड़ने की आशंका है।

كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ
٢٠
وَتَذَرُونَ ٱلْـَٔاخِرَةَ
٢١
وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَّاضِرَةٌ
٢٢
إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٌ
٢٣
وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍۭ بَاسِرَةٌ
٢٤
تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌ
٢٥

Surah 75 - القِيَامَة (क़यामत) - Verses 20-25


एक इनकार करने वाले की मौत

26. हरगिज़ नहीं! (उस दिन से सावधान रहो) जब रूह हलक तक आ पहुँचे, 27. और कहा जाएगा, “क्या कोई शिफ़ा देने वाला है?” 28. और जब जान निकलने लगती है, तो वह समझ जाता है कि यह कूच का समय है, 29. और (फिर) उसके पैर एक साथ बाँध दिए जाते हैं। 30. उस दिन उन्हें तुम्हारे रब की ओर ही हाँका जाएगा। 31. इस काफ़िर ने न तो ईमान लाया और न नमाज़ पढ़ी, 32. बल्कि झुठलाता रहा और मुँह मोड़ा, 33. फिर अपने लोगों के पास अकड़ता हुआ चला गया। 34. तुम्हारे लिए तबाही है, और फिर तबाही! 35. फिर से, तुम्हारे लिए तबाही है, और उससे भी अधिक तबाही!

كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِىَ
٢٦
وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍ
٢٧
وَظَنَّ أَنَّهُ ٱلْفِرَاقُ
٢٨
وَٱلْتَفَّتِ ٱلسَّاقُ بِٱلسَّاقِ
٢٩
إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ ٱلْمَسَاقُ
٣٠
فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ
٣١
وَلَـٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ
٣٢
ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ يَتَمَطَّىٰٓ
٣٣
أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ
٣٤
ثُمَّ أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰٓ
٣٥

Surah 75 - القِيَامَة (क़यामत) - Verses 26-35


अल्लाह की पैदा करने और दोबारा ज़िंदा करने की कुदरत

36. क्या मनुष्य सोचता है कि उसे यूँ ही छोड़ दिया जाएगा? 37. क्या वे एक टपकाई गई वीर्य-बिंदु नहीं थे? 38. फिर वे रक्त का एक जमा हुआ लोथड़ा बन गए, फिर उसने उनकी आकृति को संवारा और सुडौल बनाया, 39. उससे दोनों लिंगों को उत्पन्न किया, नर और मादा। 40. क्या ऐसा (सृष्टिकर्ता) मुर्दों को पुनर्जीवित करने में असमर्थ है?

أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَـٰنُ أَن يُتْرَكَ سُدًى
٣٦
أَلَمْ يَكُ نُطْفَةً مِّن مَّنِىٍّ يُمْنَىٰ
٣٧
ثُمَّ كَانَ عَلَقَةً فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ
٣٨
فَجَعَلَ مِنْهُ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ
٣٩
أَلَيْسَ ذَٰلِكَ بِقَـٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحْـِۧىَ ٱلْمَوْتَىٰ
٤٠

Surah 75 - القِيَامَة (क़यामत) - Verses 36-40


Al-Qiyamah () - अध्याय 75 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा