This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 74 - المُدَّثِّر

Al-Muddaththir (Surah 74)

المُدَّثِّر (The One Covered up)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

मक्का के बाहरी इलाके में एक गुफा में फ़रिश्ते जिब्राइल (अलैहिस्सलाम) के साथ अपनी पहली मुलाक़ात के बाद, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पूरी तरह सदमे में अपने घर लौटे और अपनी पत्नी से उन्हें अपनी चादर से ढकने के लिए कहा। बाद में, यह मक्की सूरह अवतरित हुई, जिसमें उन्हें (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) संदेश पहुँचाने की ज़िम्मेदारी उठाने का आग्रह किया गया। अल्लाह ने उन मूर्तिपूजक अत्याचारियों से निपटने का वादा किया है जो सत्य का विरोध करते हैं, क़ुरआन को बदनाम करते हैं और जहन्नम की चेतावनियों का उपहास करते हैं। परलोक (आख़िरत) के बारे में मूर्तिपूजकों के इनकार पर अगली सूरह में चर्चा की गई है। अल्लाह के नाम पर, जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

पैग़म्बर को एक संदेश

1. हे मुदस्सिर! 2. उठो और डराओ। 3. अपने रब की बड़ाई करो। 4. अपने वस्त्रों को शुद्ध करो। 5. बुतों से दूर रहो। 6. अधिक पाने की आशा में एहसान न करो। 7. और अपने रब की खातिर सब्र करो। 8. जब सूर फूंका जाएगा, 9. वह तो एक कठिन दिन होगा— 10. काफ़िरों के लिए बिल्कुल आसान नहीं।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُدَّثِّرُ
١
قُمْ فَأَنذِرْ
٢
وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ
٣
وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ
٤
وَٱلرُّجْزَ فَٱهْجُرْ
٥
وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُ
٦
وَلِرَبِّكَ فَٱصْبِرْ
٧
فَإِذَا نُقِرَ فِى ٱلنَّاقُورِ
٨
فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍ يَوْمٌ عَسِيرٌ
٩
عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍ
١٠

Surah 74 - المُدَّثِّر (लपेटने वाला) - Verses 1-10


एक काफ़िर का अंजाम

11. और मुझ पर छोड़ दो उसे जिसे मैंने अकेला पैदा किया, 12. और उसे भरपूर दौलत दी, 13. और बच्चे हमेशा उसके पास, 14. और उसके जीवन को बहुत आसान बना दिया। 15. फिर भी वह और अधिक के लिए भूखा है। 16. हरगिज़ नहीं! बल्कि वह हमारी आयतों के प्रति सचमुच अड़ियल रहा है। 17. मैं उसके अंजाम को असहनीय बना दूँगा, 18. क्योंकि उसने विचार किया और निश्चय किया। 19. लानत हो उस पर! कितना बुरा था उसका निर्धारण! 20. उस पर फिर से लानत हो! कितना बुरा था उसका निर्धारण! 21. फिर उसने हताशा में पुनर्विचार किया, 22. फिर उसने तेवर चढ़ाए और मुंह बिगाड़ा, 23. फिर उसने पीठ फेरी और अहंकार किया, 24. कहने लगा, “यह तो बस अगलों का जादू है।" 25. यह तो बस एक मनुष्य का कथन है। 26. शीघ्र ही मैं उसे जहन्नम में जलाऊँगा! 27. और तुम्हें क्या पता कि जहन्नम क्या है? 28. यह न किसी को जीने देती है और न मरने देती है। 29. त्वचा को झुलसाती हुई। 30. इस पर उन्नीस (रक्षक) नियुक्त हैं।

ذَرْنِى وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًا
١١
وَجَعَلْتُ لَهُۥ مَالًا مَّمْدُودًا
١٢
وَبَنِينَ شُهُودًا
١٣
وَمَهَّدتُّ لَهُۥ تَمْهِيدًا
١٤
ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ
١٥
كَلَّآ ۖ إِنَّهُۥ كَانَ لِـَٔايَـٰتِنَا عَنِيدًا
١٦
سَأُرْهِقُهُۥ صَعُودًا
١٧
إِنَّهُۥ فَكَّرَ وَقَدَّرَ
١٨
فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ
١٩
ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ
٢٠
ثُمَّ نَظَرَ
٢١
ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ
٢٢
ثُمَّ أَدْبَرَ وَٱسْتَكْبَرَ
٢٣
فَقَالَ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌ يُؤْثَرُ
٢٤
إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا قَوْلُ ٱلْبَشَرِ
٢٥
سَأُصْلِيهِ سَقَرَ
٢٦
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سَقَرُ
٢٧
لَا تُبْقِى وَلَا تَذَرُ
٢٨
لَوَّاحَةٌ لِّلْبَشَرِ
٢٩
عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَ
٣٠

Surah 74 - المُدَّثِّر (लपेटने वाला) - Verses 11-30


जहन्नम के उन्नीस निगहबान

31. हमने आग (जहन्नम) के रखवाले केवल (कठोर) फ़रिश्ते ही नियुक्त किए हैं। और हमने उनकी संख्या को केवल काफ़िरों के लिए एक परीक्षा बनाया है, ताकि अहले किताब (ग्रंथ वाले) निश्चित हो जाएँ, और ईमान वालों का ईमान बढ़े, और न तो अहले किताब को और न ही ईमान वालों को कोई संदेह रहे, और ताकि वे (मुनाफ़िक़) जिनके दिलों में बीमारी है और काफ़िर यह बहस करें, "अल्लाह का ऐसे नंबर से क्या मतलब है?" इस तरह अल्लाह जिसे चाहता है भटकने देता है और जिसे चाहता है मार्गदर्शन देता है। और तुम्हारे रब की सेनाओं को उसके सिवा कोई नहीं जानता। और यह (जहन्नम का वर्णन) तो बस मानवजाति के लिए एक नसीहत है। जहन्नम की चेतावनी।

وَمَا جَعَلْنَآ أَصْحَـٰبَ ٱلنَّارِ إِلَّا مَلَـٰٓئِكَةً ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا لِيَسْتَيْقِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا ٱلْكِتَـٰبَ وَيَزْدَادَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا إِيمَـٰنًا ۙ وَلَا يَرْتَابَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَٱلْكَـٰفِرُونَ مَاذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَـٰذَا مَثَلًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِىَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ
٣١

Surah 74 - المُدَّثِّر (लपेटने वाला) - Verses 31-31


जहन्नम की चेतावनी

32. हरगिज़ नहीं! चाँद की क़सम! 33. और रात की, जब वह पीछे हटती है, 34. और सुबह जब वह फूटती है! 35. निःसंदेह जहन्नम सबसे बड़ी महाविपत्तियों में से एक है— 36. इन्सानों के लिए एक चेतावनी, 37. तुम में से जो कोई भी आगे बढ़ना चाहे या पीछे रहना चाहे।

كَلَّا وَٱلْقَمَرِ
٣٢
وَٱلَّيْلِ إِذْ أَدْبَرَ
٣٣
وَٱلصُّبْحِ إِذَآ أَسْفَرَ
٣٤
إِنَّهَا لَإِحْدَى ٱلْكُبَرِ
٣٥
نَذِيرًا لِّلْبَشَرِ
٣٦
لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ
٣٧

Surah 74 - المُدَّثِّر (लपेटने वाला) - Verses 32-37


दुष्टों को जहन्नम तक क्या ले जाता है?

38. हर जान अपने किए के बदले गिरवी होगी, 39. सिवाय दाहिने हाथ वालों के, 40. जो बागों में होंगे, एक-दूसरे से पूछते हुए 41. मुजरिमों के बारे में (फिर उनसे पूछा जाएगा): 42. "तुम्हें किस चीज़ ने जहन्नम में ला पटका?" 43. वे कहेंगे, "हम उन लोगों में से नहीं थे जो नमाज़ पढ़ते थे, 44. और न ही हम गरीबों को खाना खिलाते थे। 45. हम दूसरों के साथ व्यर्थ की बातों में उलझे रहते थे, 46. और क़यामत के दिन को झुठलाते हैं, 47. जब तक कि अटल हम पर आ गया।” 48. अतः सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिशें उन्हें कोई लाभ नहीं पहुँचाएँगी।

كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ
٣٨
إِلَّآ أَصْحَـٰبَ ٱلْيَمِينِ
٣٩
فِى جَنَّـٰتٍ يَتَسَآءَلُونَ
٤٠
عَنِ ٱلْمُجْرِمِينَ
٤١
مَا سَلَكَكُمْ فِى سَقَرَ
٤٢
قَالُوا لَمْ نَكُ مِنَ ٱلْمُصَلِّينَ
٤٣
وَلَمْ نَكُ نُطْعِمُ ٱلْمِسْكِينَ
٤٤
وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ ٱلْخَآئِضِينَ
٤٥
وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ
٤٦
حَتَّىٰٓ أَتَىٰنَا ٱلْيَقِينُ
٤٧
فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَـٰعَةُ ٱلشَّـٰفِعِينَ
٤٨

Surah 74 - المُدَّثِّر (लपेटने वाला) - Verses 38-48


मूर्तिपूजक काफ़िरों को चेतावनी

49. तो उन्हें क्या हो गया है कि वे ज़िक्र से मुँह मोड़ रहे हैं, 50. मानो वे बिदके हुए ज़ेबरे हों 51 51. जो शेर से भाग रहे हों? 52. बल्कि उनमें से हर एक चाहता है कि उसे एक (व्यक्तिगत) पत्र दिया जाए (जो सबके पढ़ने के लिए हो)। 53. हरगिज़ नहीं! बल्कि वे आखिरत से नहीं डरते। 54. हरगिज़ नहीं! निःसंदेह यह (कुरान) एक नसीहत है। 55. अतः जो चाहे इसे स्मरण रखे। 56. किन्तु वे ऐसा नहीं कर सकते जब तक अल्लाह न चाहे। वही (अकेला) भय के योग्य है और क्षमा करने का अधिकारी है।

فَمَا لَهُمْ عَنِ ٱلتَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ
٤٩
كَأَنَّهُمْ حُمُرٌ مُّسْتَنفِرَةٌ
٥٠
فَرَّتْ مِن قَسْوَرَةٍۭ
٥١
بَلْ يُرِيدُ كُلُّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُّنَشَّرَةً
٥٢
كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ ٱلْـَٔاخِرَةَ
٥٣
كَلَّآ إِنَّهُۥ تَذْكِرَةٌ
٥٤
فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ
٥٥
وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ ٱلتَّقْوَىٰ وَأَهْلُ ٱلْمَغْفِرَةِ
٥٦

Surah 74 - المُدَّثِّر (लपेटने वाला) - Verses 49-56


Al-Muddaththir () - अध्याय 74 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा