This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 73 - المُزَّمِّل

Al-Muzzammil (Surah 73)

المُزَّمِّل (The Wrapped One)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह प्रारंभिक मक्की सूरह पैगंबर (ﷺ) को उन आदेशों के लिए तैयार करती है जिनकी अभी वह्य होनी है और आने वाली चुनौतियों के लिए। पैगंबर (ﷺ) को इस सूरह और अगली सूरह दोनों में धैर्य और नमाज़ में सुकून पाने की सलाह दी जाती है, जबकि अहंकारी काफ़िरों को जहन्नम में एक भयानक सज़ा की चेतावनी दी जाती है। अल्लाह के नाम से—जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

नमाज़ के माध्यम से पैगंबर को सशक्त करना

1. ऐ चादर ओढ़ने वाले! 2. रात भर खड़े रहो, सिवाय थोड़े से— 3. आधी रात, या उससे थोड़ा कम, 4. या थोड़ा और—और कुरान को ठहर-ठहर कर सलीके से पढ़ें। 5. हम जल्द ही आप पर एक भारी वही नाज़िल करेंगे। 6. निःसंदेह, रात की इबादत अधिक असरदार और पाठ के लिए अधिक अनुकूल है। 7. क्योंकि दिन में तो तुम्हें बहुत काम रहता है। 8. अपने रब के नाम का ज़िक्र करो और पूरी तरह से उसी के हो जाओ। 9. वह पूरब और पश्चिम का रब है। उसके सिवा कोई माबूद नहीं, तो उसी को अपना वकील बनाओ।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُزَّمِّلُ
١
قُمِ ٱلَّيْلَ إِلَّا قَلِيلًا
٢
نِّصْفَهُۥٓ أَوِ ٱنقُصْ مِنْهُ قَلِيلًا
٣
أَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ ٱلْقُرْءَانَ تَرْتِيلًا
٤
إِنَّا سَنُلْقِى عَلَيْكَ قَوْلًا ثَقِيلًا
٥
إِنَّ نَاشِئَةَ ٱلَّيْلِ هِىَ أَشَدُّ وَطْـًٔا وَأَقْوَمُ قِيلًا
٦
إِنَّ لَكَ فِى ٱلنَّهَارِ سَبْحًا طَوِيلًا
٧
وَٱذْكُرِ ٱسْمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلْ إِلَيْهِ تَبْتِيلًا
٨
رَّبُّ ٱلْمَشْرِقِ وَٱلْمَغْرِبِ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ فَٱتَّخِذْهُ وَكِيلًا
٩

Surah 73 - المُزَّمِّل (चादर ओढ़ने वाला) - Verses 1-9


पैगंबर को आश्वस्त करना

10. जो वे कहते हैं उस पर सब्र करें, और उनसे भद्रतापूर्वक अलग हो जाएँ। 11. और झुठलाने वालों को—विलासिता में डूबे लोगों को—मुझ पर छोड़ दें, और उन्हें थोड़ी देर के लिए मोहलत दें। 12. बेशक हमारे पास बेड़ियाँ हैं, और एक (भड़कती हुई) आग है, 13. गले में अटकने वाला भोजन, और एक दर्दनाक अज़ाब। 14. जिस दिन धरती और पहाड़ ज़ोर से काँप उठेंगे, और पहाड़ रेत के ढेर बन जाएँगे जो बहने लगेंगे।

وَٱصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَٱهْجُرْهُمْ هَجْرًا جَمِيلًا
١٠
وَذَرْنِى وَٱلْمُكَذِّبِينَ أُولِى ٱلنَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا
١١
إِنَّ لَدَيْنَآ أَنكَالًا وَجَحِيمًا
١٢
وَطَعَامًا ذَا غُصَّةٍ وَعَذَابًا أَلِيمًا
١٣
يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ وَكَانَتِ ٱلْجِبَالُ كَثِيبًا مَّهِيلًا
١٤

Surah 73 - المُزَّمِّل (चादर ओढ़ने वाला) - Verses 10-14


मुशरिकों को चेतावनी

15. यक़ीनन हमने तुम्हारी ओर एक रसूल भेजा है जो तुम पर गवाह होगा, जैसा कि हमने फ़िरऔन के पास एक रसूल भेजा था। 16. लेकिन फ़िरऔन ने रसूल की नाफ़रमानी की, तो हमने उसे सख़्त पकड़ से धर दबोचा। 17. अगर तुम (काफ़िरों) कुफ़्र पर अड़े रहे, तो तुम अपने आप को उस दिन की भयानकताओं से कैसे बचाओगे जो बच्चों के बाल सफ़ेद कर देगा? 18. वह (दिन) आसमान को भी फाड़ डालेगा। उसका वादा (क़यामत का) पूरा होकर रहेगा। 19. निश्चित रूप से यह एक नसीहत है। तो जो कोई चाहे, वह अपने रब की ओर (सही) मार्ग अपनाए।

إِنَّآ أَرْسَلْنَآ إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَـٰهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَآ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًا
١٥
فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ ٱلرَّسُولَ فَأَخَذْنَـٰهُ أَخْذًا وَبِيلًا
١٦
فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ ٱلْوِلْدَٰنَ شِيبًا
١٧
ٱلسَّمَآءُ مُنفَطِرٌۢ بِهِۦ ۚ كَانَ وَعْدُهُۥ مَفْعُولًا
١٨
إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًا
١٩

Surah 73 - المُزَّمِّل (चादर ओढ़ने वाला) - Verses 15-19


रात की नमाज़ को आसान किया गया

20. निश्चित रूप से तुम्हारा रब जानता है कि तुम (हे नबी) रात के लगभग दो-तिहाई हिस्से के लिए, या (कभी-कभी) उसके आधे हिस्से के लिए, या एक-तिहाई के लिए (नमाज़ में) खड़े रहते हो, जैसा कि तुम्हारे साथ के कुछ लोग भी करते हैं। अल्लाह ही दिन और रात का ठीक-ठीक हिसाब रखता है। वह जानता है कि तुम (ईमान वाले) इसे निभा नहीं पाओगे, और उसने तुम पर दया की है। तो कुरान में से जितना तुम से हो सके, उतना पाठ करो। वह जानता है कि तुम में से कुछ बीमार होंगे, कुछ अल्लाह की कृपा की तलाश में ज़मीन में यात्रा कर रहे होंगे, और कुछ अल्लाह के मार्ग में लड़ रहे होंगे। तो उसमें से जितना तुम से हो सके, उतना पाठ करो। और नमाज़ क़ायम करो, ज़कात अदा करो, और अल्लाह को अच्छा ऋण दो। जो कुछ भी भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे, तुम उसे अल्लाह के पास कहीं बेहतर और अधिक सवाब वाला पाओगे। और अल्लाह से क्षमा माँगो। निश्चित रूप से अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।

۞ إِنَّ رَبَّكَ يَعْلَمُ أَنَّكَ تَقُومُ أَدْنَىٰ مِن ثُلُثَىِ ٱلَّيْلِ وَنِصْفَهُۥ وَثُلُثَهُۥ وَطَآئِفَةٌ مِّنَ ٱلَّذِينَ مَعَكَ ۚ وَٱللَّهُ يُقَدِّرُ ٱلَّيْلَ وَٱلنَّهَارَ ۚ عَلِمَ أَن لَّن تُحْصُوهُ فَتَابَ عَلَيْكُمْ ۖ فَٱقْرَءُوا مَا تَيَسَّرَ مِنَ ٱلْقُرْءَانِ ۚ عَلِمَ أَن سَيَكُونُ مِنكُم مَّرْضَىٰ ۙ وَءَاخَرُونَ يَضْرِبُونَ فِى ٱلْأَرْضِ يَبْتَغُونَ مِن فَضْلِ ٱللَّهِ ۙ وَءَاخَرُونَ يُقَـٰتِلُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ فَٱقْرَءُوا مَا تَيَسَّرَ مِنْهُ ۚ وَأَقِيمُوا ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا ٱلزَّكَوٰةَ وَأَقْرِضُوا ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا ۚ وَمَا تُقَدِّمُوا لِأَنفُسِكُم مِّنْ خَيْرٍ تَجِدُوهُ عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيْرًا وَأَعْظَمَ أَجْرًا ۚ وَٱسْتَغْفِرُوا ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌۢ
٢٠

Surah 73 - المُزَّمِّل (चादर ओढ़ने वाला) - Verses 20-20


Al-Muzzammil () - अध्याय 73 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा