यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 69 - الحَاقَّة

Al-Ḥâqqah (सूरह 69)

الحَاقَّة (The Inevitable Hour)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

यह मक्की सूरह आद, समूद, फ़िरऔन और लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौमों के विनाश का उल्लेख करती है, जिन्होंने आख़िरत (परलोक) का इनकार किया था। इसमें प्रलय (क़यामत) का भी ज़िक्र किया गया है, जिसके बाद ईमानवालों (मोमिनों) के प्रतिफल और काफ़िरों (इनकार करनेवालों) की सज़ा का एक मार्मिक वर्णन है (आयतों 18-37 में)। पैग़म्बर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और क़ुरआन के विरुद्ध मुशरिकों (मूर्तिपूजकों) के तर्कों का पूरी तरह खंडन किया गया है (आयतों 38-52 में)। प्रलय (क़यामत) की भयावहताओं का आगे अगली सूरह में वर्णन किया गया है। अल्लाह के नाम से जो परम कृपालु, अत्यंत दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

अंतिम घड़ी

1. क़यामत की घड़ी! 2. क़यामत की घड़ी क्या है? 3. और तुम्हें क्या ज्ञात कराएगा कि क़यामत की घड़ी क्या है?

ٱلْحَآقَّةُ
١
مَا ٱلْحَآقَّةُ
٢
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْحَآقَّةُ
٣

सूरह 69 - الحَاقَّة (अवश्यंभावी घड़ी) - आयतें 1-3


तबाहशुदा कौमों के उदाहरण

4. समूद और आद दोनों ने महाविपदा को झुठलाया। 5. समूद को तो एक प्रचंड गर्जना से नष्ट कर दिया गया। 6. और आद को तो एक प्रचंड, कष्टदायक आँधी से नष्ट कर दिया गया। 7. जिसे अल्लाह ने उन पर लगातार सात रातें और आठ दिन तक जारी रखा, ताकि तुम देखते कि उसके लोग उखड़े हुए खजूर के तनों की तरह मरे हुए पड़े थे। 8. क्या तुम्हें उनमें से कोई बचा हुआ नज़र आता है? 9. और फ़िरऔन और उससे पहले के लोग, और उलट दी गई बस्तियों (लूत की क़ौम) ने गुनाह किए, 10. प्रत्येक ने अपने रब के रसूल की अवज्ञा की, तो उसने उन्हें एक अत्यंत कठोर पकड़ से धर दबोचा। 11. बेशक, जब जलप्रलय उमड़ पड़ा था, तो हमने तुम्हें चलती हुई नौका (नूह के साथ) में सवार किया था। 12. ताकि हम इसे तुम्हारे लिए एक नसीहत बना दें, और ताकि ध्यान से सुनने वाले कान इसे ग्रहण करें।

كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌۢ بِٱلْقَارِعَةِ
٤
فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا بِٱلطَّاغِيَةِ
٥
وَأَمَّا عَادٌ فَأُهْلِكُوا بِرِيحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍ
٦
سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَـٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى ٱلْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ
٧
فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّنۢ بَاقِيَةٍ
٨
وَجَآءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُۥ وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ بِٱلْخَاطِئَةِ
٩
فَعَصَوْا رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةً رَّابِيَةً
١٠
إِنَّا لَمَّا طَغَا ٱلْمَآءُ حَمَلْنَـٰكُمْ فِى ٱلْجَارِيَةِ
١١
لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَآ أُذُنٌ وَٰعِيَةٌ
١٢

सूरह 69 - الحَاقَّة (अवश्यंभावी घड़ी) - आयतें 4-12


क़यामत के दिन की भयावहता

13. अंततः, जब सूर एक ही फूंक से फूंका जाएगा, 14. और धरती और पहाड़ उठा लिए जाएँगे और एक ही झटके से चूर-चूर कर दिए जाएँगे, 15. उस दिन वह अवश्यंभावी घटना घटित हो चुकी होगी। 16. तब आसमान इतना फट जाएगा कि वह कमज़ोर हो जाएगा। 17. उसके किनारों पर फ़रिश्ते होंगे। उस दिन आठ (महान फ़रिश्ते) तुम्हारे रब का अर्श अपने ऊपर उठाएँगे। 18. तब तुम्हें (उसके सामने न्याय के लिए) पेश किया जाएगा, और तुम्हारा कोई रहस्य छिपा नहीं रहेगा।

فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ نَفْخَةٌ وَٰحِدَةٌ
١٣
وَحُمِلَتِ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةً وَٰحِدَةً
١٤
فَيَوْمَئِذٍ وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ
١٥
وَٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَهِىَ يَوْمَئِذٍ وَاهِيَةٌ
١٦
وَٱلْمَلَكُ عَلَىٰٓ أَرْجَآئِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍ ثَمَـٰنِيَةٌ
١٧
يَوْمَئِذٍ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌ
١٨

सूरह 69 - الحَاقَّة (अवश्यंभावी घड़ी) - आयतें 13-18


कामयाब लोग

19. जिनको उनका आमालनामा उनके दाहिने हाथ में दिया जाएगा, वे खुशी से पुकारेंगे, “लो! मेरा आमालनामा पढ़ो!” 20. मुझे यकीन था कि मुझे अपने हिसाब का सामना करना पड़ेगा।” 21. वे आनंदमय जीवन में होंगे, 22. एक ऊँचे बाग में, 23. जिसके फल पहुँच में लटक रहे होंगे। 24. खाओ और पियो आनंद से, उन कर्मों के बदले जो तुमने गुज़रे हुए दिनों में किए थे।

فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقْرَءُوا كِتَـٰبِيَهْ
١٩
إِنِّى ظَنَنتُ أَنِّى مُلَـٰقٍ حِسَابِيَهْ
٢٠
فَهُوَ فِى عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ
٢١
فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍ
٢٢
قُطُوفُهَا دَانِيَةٌ
٢٣
كُلُوا وَٱشْرَبُوا هَنِيٓـًٔۢا بِمَآ أَسْلَفْتُمْ فِى ٱلْأَيَّامِ ٱلْخَالِيَةِ
٢٤

सूरह 69 - الحَاقَّة (अवश्यंभावी घड़ी) - आयतें 19-24