This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 64 - التَّغَابُن

At-Taghâbun (Surah 64)

التَّغَابُن (Mutual Loss and Gain)

Madni SurahMadni Surah

Introduction

यह मदनी सूरह आयत 9 में क़यामत के दिन के उल्लेख से अपना नाम लेती है, जहाँ लोगों को सफल और असफल में बाँटा जाता है। चूँकि पिछली सूरह ईमान वालों को मौत से पहले दान करने का आग्रह करके समाप्त होती है, यह सूरह अल्लाह की सृजन शक्ति और मृतकों को न्याय के लिए पुनः जीवित करने की उसकी क्षमता पर ज़ोर देकर शुरू होती है। यह सूरह ईमान वालों को अल्लाह की राह में खर्च करने का आह्वान करके समाप्त होती है, और उन्हें अपने जीवनसाथियों और बच्चों की चिंताओं से निराश न होने का संदेश देती है। तलाक़ के बाद जीवनसाथियों और बच्चों के अधिकार अगली सूरह में बताए गए हैं। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, परम दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

अल्लाह की अनंत शक्ति और ज्ञान

1. जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, वह अल्लाह की तस्बीह करता है। उसी का राज्य है और उसी के लिए सारी प्रशंसा है। और वह हर चीज़ पर पूर्णतः सक्षम है। 2. वही है जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुम में से कुछ काफ़िर हैं और कुछ मोमिन हैं। और अल्लाह तुम्हारे सभी कर्मों को भली-भाँति देखने वाला है। 3. उसने आकाशों और धरती को एक उद्देश्य के साथ पैदा किया। उसने तुम्हें आकृति दी, तुम्हारी सूरत को उत्तम बनाया। और उसी की ओर अंतिम वापसी है। 4. वह जानता है जो कुछ आकाशों और धरती में है। और वह जानता है जो कुछ तुम छिपाते हो और जो कुछ तुम प्रकट करते हो। निःसंदेह अल्लाह दिलों में छिपी बातों को भली-भाँति जानता है।

يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۖ لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
١
هُوَ ٱلَّذِى خَلَقَكُمْ فَمِنكُمْ كَافِرٌ وَمِنكُم مُّؤْمِنٌ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
٢
خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِٱلْحَقِّ وَصَوَّرَكُمْ فَأَحْسَنَ صُوَرَكُمْ ۖ وَإِلَيْهِ ٱلْمَصِيرُ
٣
يَعْلَمُ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَ ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
٤

Surah 64 - التَّغَابُن (पारस्परिक धोखा) - Verses 1-4


पूर्व के झुठलाने वाले

5. क्या तुम्हें उन लोगों की ख़बरें नहीं पहुँचीं जिन्होंने तुमसे पहले कुफ़्र किया था? उन्होंने अपने कर्मों का बुरा परिणाम चखा, और उनके लिए एक दर्दनाक अज़ाब होगा। 6. यह इसलिए था कि उनके रसूल उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आते थे, तो उन्होंने कहा, "क्या मनुष्य हमें मार्ग दिखाएँगे?" तो उन्होंने कुफ़्र किया और मुँह फेर लिया। और अल्लाह को उनकी कोई ज़रूरत नहीं थी। निःसंदेह अल्लाह बेनियाज़, प्रशंसनीय है।

أَلَمْ يَأْتِكُمْ نَبَؤُا ٱلَّذِينَ كَفَرُوا مِن قَبْلُ فَذَاقُوا وَبَالَ أَمْرِهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
٥
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُۥ كَانَت تَّأْتِيهِمْ رُسُلُهُم بِٱلْبَيِّنَـٰتِ فَقَالُوٓا أَبَشَرٌ يَهْدُونَنَا فَكَفَرُوا وَتَوَلَّوا ۚ وَّٱسْتَغْنَى ٱللَّهُ ۚ وَٱللَّهُ غَنِىٌّ حَمِيدٌ
٦

Surah 64 - التَّغَابُن (पारस्परिक धोखा) - Verses 5-6


वर्तमान झुठलाने वालों को एक संदेश

7. काफ़िर दावा करते हैं कि उन्हें दोबारा नहीं उठाया जाएगा। कहो, (हे पैगंबर,) "हाँ, मेरे रब की क़सम, तुम्हें ज़रूर दोबारा उठाया जाएगा, फिर तुम्हें ज़रूर बताया जाएगा कि तुमने क्या किया है। और यह अल्लाह के लिए बहुत आसान है।" 8. तो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उस नूर (प्रकाश) पर जो हमने उतारा है। और अल्लाह तुम्हारे हर काम से पूरी तरह वाकिफ़ है। 9. उस दिन को याद करो जब वह तुम्हें (सबको) जमा करेगा, जमा होने के दिन के लिए—वह आपसी घाटे और मुनाफ़े का दिन होगा। तो जो कोई अल्लाह पर ईमान लाएगा और नेक अमल करेगा, वह उसके गुनाहों को मिटा देगा और उसे ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बहती होंगी, जहाँ वे हमेशा-हमेशा रहेंगे। यही सबसे बड़ी कामयाबी है। 10. और जो लोग कुफ़्र करते हैं और हमारी आयतों को झुठलाते हैं, वही आग वाले होंगे, वे उसमें हमेशा रहेंगे। और वह क्या ही बुरा ठिकाना है!

زَعَمَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا أَن لَّن يُبْعَثُوا ۚ قُلْ بَلَىٰ وَرَبِّى لَتُبْعَثُنَّ ثُمَّ لَتُنَبَّؤُنَّ بِمَا عَمِلْتُمْ ۚ وَذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌ
٧
فَـَٔامِنُوا بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَٱلنُّورِ ٱلَّذِىٓ أَنزَلْنَا ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
٨
يَوْمَ يَجْمَعُكُمْ لِيَوْمِ ٱلْجَمْعِ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ ٱلتَّغَابُنِ ۗ وَمَن يُؤْمِنۢ بِٱللَّهِ وَيَعْمَلْ صَـٰلِحًا يُكَفِّرْ عَنْهُ سَيِّـَٔاتِهِۦ وَيُدْخِلْهُ جَنَّـٰتٍ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًا ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
٩
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِـَٔايَـٰتِنَآ أُولَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۖ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
١٠

Surah 64 - التَّغَابُن (पारस्परिक धोखा) - Verses 7-10


ईमान वालों को आश्वस्त करना

11. कोई भी मुसीबत नहीं आती मगर अल्लाह की मर्ज़ी से। और जो कोई अल्लाह पर ईमान लाता है, अल्लाह उसके दिल को हिदायत देता है। और अल्लाह हर चीज़ का जानने वाला है। 12. अल्लाह की इताअत करो और रसूल की इताअत करो! लेकिन अगर तुम मुँह मोड़ते हो, तो हमारे रसूल पर तो बस यही ज़िम्मेदारी है कि वह साफ़-साफ़ पहुँचा दे। 13. अल्लाह—उसके सिवा कोई माबूद नहीं। अतः ईमानवालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।

مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۗ وَمَن يُؤْمِنۢ بِٱللَّهِ يَهْدِ قَلْبَهُۥ ۚ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌ
١١
وَأَطِيعُوا ٱللَّهَ وَأَطِيعُوا ٱلرَّسُولَ ۚ فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَإِنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا ٱلْبَلَـٰغُ ٱلْمُبِينُ
١٢
ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ
١٣

Surah 64 - التَّغَابُن (पारस्परिक धोखा) - Verses 11-13


परिवार और धन की आज़माइश

14. ऐ ईमानवालो! निःसंदेह, तुम्हारे जीवनसाथियों और बच्चों में से कुछ तुम्हारे दुश्मन हैं, अतः उनसे सावधान रहो। लेकिन यदि तुम माफ़ कर दो, दरगुज़र कर दो, और क्षमा कर दो, तो अल्लाह निःसंदेह बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है। 15. तुम्हारी दौलत और औलाद तो बस एक आज़माइश हैं, और अल्लाह ही के पास बड़ा अज्र है। 16. तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार अल्लाह का तक़वा इख़्तियार करो, सुनो और आज्ञापालन करो, और (अल्लाह की राह में) ख़र्च करो—यही तुम्हारे लिए उत्तम है। और जो कोई अपने नफ़्स की कंजूसी से बच गया, वही सफल हैं। 17. यदि तुम अल्लाह को नेक क़र्ज़ दोगे, तो वह उसे तुम्हारे लिए कई गुना बढ़ा देगा और तुम्हें माफ़ कर देगा। बेशक अल्लाह बड़ा क़द्रदान, बड़ा सहनशील है। 18. वह अदृश्य और दृश्य का जानने वाला है—अति-प्रभुत्वशाली, महा-तत्वज्ञानी।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا إِنَّ مِنْ أَزْوَٰجِكُمْ وَأَوْلَـٰدِكُمْ عَدُوًّا لَّكُمْ فَٱحْذَرُوهُمْ ۚ وَإِن تَعْفُوا وَتَصْفَحُوا وَتَغْفِرُوا فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
١٤
إِنَّمَآ أَمْوَٰلُكُمْ وَأَوْلَـٰدُكُمْ فِتْنَةٌ ۚ وَٱللَّهُ عِندَهُۥٓ أَجْرٌ عَظِيمٌ
١٥
فَٱتَّقُوا ٱللَّهَ مَا ٱسْتَطَعْتُمْ وَٱسْمَعُوا وَأَطِيعُوا وَأَنفِقُوا خَيْرًا لِّأَنفُسِكُمْ ۗ وَمَن يُوقَ شُحَّ نَفْسِهِۦ فَأُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ
١٦
إِن تُقْرِضُوا ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا يُضَـٰعِفْهُ لَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۚ وَٱللَّهُ شَكُورٌ حَلِيمٌ
١٧
عَـٰلِمُ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
١٨

Surah 64 - التَّغَابُن (पारस्परिक धोखा) - Verses 14-18


At-Taghâbun () - अध्याय 64 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा