This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 61 - الصَّفّ

Aṣ-Ṣaff (Surah 61)

الصَّفّ (The ˹Solid˺ Ranks)

Madni SurahMadni Surah

Introduction

ईमान वालों को अल्लाह के मार्ग में सुदृढ़ युद्ध-पंक्तियों में संघर्ष करने का निर्देश दिया गया है (आयतः 4), अतः इस मदनी सूरह का यही नाम पड़ा है। हज़रत ईसा के हवारी, जो अल्लाह के लिए डटे रहे, ईमान वालों के लिए अनुकरण हेतु एक मिसाल के तौर पर प्रस्तुत किए गए हैं। ईमान वालों को आश्वस्त किया गया है कि काफ़िरों की इसके विरुद्ध निरंतर साज़िशों के बावजूद सत्य की विजय होगी। जो अल्लाह के लिए डटे रहते हैं, उनसे दोनों जहानों में महान सवाब का वादा किया गया है। अगली सूरह ईमान वालों को और अधिक हिदायतें प्रदान करती है। अल्लाह के नाम से—जो अत्यंत दयालु, परम कृपालु है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

अल्लाह की तस्बीह सब करते हैं।

1. जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, अल्लाह की तस्बीह करता है। वही ज़बरदस्त, हिकमत वाला है।

سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۖ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
١

Surah 61 - الصَّفّ (पंक्ति) - Verses 1-1


जो तुम कहते हो, वही करो।

2. ऐ ईमान वालो! तुम ऐसी बात क्यों कहते हो जो तुम करते नहीं? 3. अल्लाह के नज़दीक यह कितनी सख़्त नापसंदीदा बात है कि तुम वह बात कहो जो तुम करते नहीं! 4. निःसंदेह अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है जो उसके मार्ग में पंक्तिबद्ध होकर इस प्रकार लड़ते हैं मानो वे सीसा पिलाई हुई दीवार हों।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا لِمَ تَقُولُونَ مَا لَا تَفْعَلُونَ
٢
كَبُرَ مَقْتًا عِندَ ٱللَّهِ أَن تَقُولُوا مَا لَا تَفْعَلُونَ
٣
إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلَّذِينَ يُقَـٰتِلُونَ فِى سَبِيلِهِۦ صَفًّا كَأَنَّهُم بُنْيَـٰنٌ مَّرْصُوصٌ
٤

Surah 61 - الصَّفّ (पंक्ति) - Verses 2-4


मूसा और उनकी क़ौम।

5. (और याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा, "ऐ मेरी क़ौम! तुम मुझे क्यों सताते हो जबकि तुम जानते हो कि मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ?" तो जब वे टेढ़े हुए, अल्लाह ने उनके दिलों को टेढ़ा कर दिया। और अल्लाह अवज्ञाकारी लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَـٰقَوْمِ لِمَ تُؤْذُونَنِى وَقَد تَّعْلَمُونَ أَنِّى رَسُولُ ٱللَّهِ إِلَيْكُمْ ۖ فَلَمَّا زَاغُوٓا أَزَاغَ ٱللَّهُ قُلُوبَهُمْ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلْفَـٰسِقِينَ
٥

Surah 61 - الصَّفّ (पंक्ति) - Verses 5-5


ईसा और बनी इसराइल।

6. और (याद करो) जब मरयम के बेटे ईसा ने कहा, "ऐ बनी इस्राईल! मैं निश्चित रूप से तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ, जो मुझसे पहले आई हुई तौरात की पुष्टि करने वाला हूँ और एक ऐसे रसूल की शुभ सूचना देने वाला हूँ जो मेरे बाद आएगा जिसका नाम अहमद होगा।" फिर जब वह (रसूल) उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आया, तो उन्होंने कहा, "यह तो खुला जादू है।"

وَإِذْ قَالَ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ يَـٰبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ إِنِّى رَسُولُ ٱللَّهِ إِلَيْكُم مُّصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَىَّ مِنَ ٱلتَّوْرَىٰةِ وَمُبَشِّرًۢا بِرَسُولٍ يَأْتِى مِنۢ بَعْدِى ٱسْمُهُۥٓ أَحْمَدُ ۖ فَلَمَّا جَآءَهُم بِٱلْبَيِّنَـٰتِ قَالُوا هَـٰذَا سِحْرٌ مُّبِينٌ
٦

Surah 61 - الصَّفّ (पंक्ति) - Verses 6-6


इस्लाम का इनकार।

7. उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ गढ़ता है जबकि उसे इस्लाम की दावत दी जाती है? और अल्लाह ज़ालिम लोगों को हिदायत नहीं देता। 8. वे अपने मुँह से अल्लाह के नूर को बुझाना चाहते हैं, लेकिन अल्लाह अपने नूर को पूरा करके ही रहेगा, चाहे काफ़िरों को यह कितना ही नागवार गुज़रे। 9. वही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा है, ताकि उसे तमाम दीनों पर ग़ालिब कर दे, चाहे मुशरिकों को कितना ही नागवार क्यों न हो।

وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ ٱلْكَذِبَ وَهُوَ يُدْعَىٰٓ إِلَى ٱلْإِسْلَـٰمِ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
٧
يُرِيدُونَ لِيُطْفِـُٔوا نُورَ ٱللَّهِ بِأَفْوَٰهِهِمْ وَٱللَّهُ مُتِمُّ نُورِهِۦ وَلَوْ كَرِهَ ٱلْكَـٰفِرُونَ
٨
هُوَ ٱلَّذِىٓ أَرْسَلَ رَسُولَهُۥ بِٱلْهُدَىٰ وَدِينِ ٱلْحَقِّ لِيُظْهِرَهُۥ عَلَى ٱلدِّينِ كُلِّهِۦ وَلَوْ كَرِهَ ٱلْمُشْرِكُونَ
٩

Surah 61 - الصَّفّ (पंक्ति) - Verses 7-9


एक फ़ायदेमंद सौदा।

10. ऐ ईमान वालो! क्या मैं तुम्हें एक ऐसे सौदे की तरफ़ रहनुमाई करूँ जो तुम्हें दर्दनाक अज़ाब से बचा ले? 11. अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ, और अल्लाह की राह में अपने माल और अपनी जान से जिहाद करो। यही तुम्हारे लिए बेहतर है, अगर तुम जानो। 12. वह तुम्हारे गुनाहों को बख्श देगा, और तुम्हें ऐसे बागों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरें बहती होंगी, और सदाबहार जन्नतों में बेहतरीन घरों में (तुम्हें ठहराएगा)। यही सबसे बड़ी कामयाबी है। 13. और एक और चीज़ जिसकी तुम्हें चाहत है: अल्लाह की मदद और एक निकटवर्ती फतह। (ऐ पैगंबर) ईमान वालों को खुशखबरी सुना दो।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ تِجَـٰرَةٍ تُنجِيكُم مِّنْ عَذَابٍ أَلِيمٍ
١٠
تُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَتُجَـٰهِدُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ بِأَمْوَٰلِكُمْ وَأَنفُسِكُمْ ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
١١
يَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ وَيُدْخِلْكُمْ جَنَّـٰتٍ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ وَمَسَـٰكِنَ طَيِّبَةً فِى جَنَّـٰتِ عَدْنٍ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
١٢
وَأُخْرَىٰ تُحِبُّونَهَا ۖ نَصْرٌ مِّنَ ٱللَّهِ وَفَتْحٌ قَرِيبٌ ۗ وَبَشِّرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ
١٣

Surah 61 - الصَّفّ (पंक्ति) - Verses 10-13


ईसा और हवारी।

14. ऐ ईमान वालो! अल्लाह के सहायक बनो, जैसे ईसा, मरियम के बेटे ने हवारियों से पूछा था, “अल्लाह के लिए मेरे साथ कौन खड़ा होगा?” हवारियों ने उत्तर दिया, “हम अल्लाह के सहायक होंगे।” फिर बनी इसराइल के एक गिरोह ने ईमान लाया जबकि दूसरे ने कुफ्र किया। तो हमने ईमान लाने वालों को उनके दुश्मनों के खिलाफ मदद दी, और वे प्रबल हुए।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا كُونُوٓا أَنصَارَ ٱللَّهِ كَمَا قَالَ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ لِلْحَوَارِيِّـۧنَ مَنْ أَنصَارِىٓ إِلَى ٱللَّهِ ۖ قَالَ ٱلْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ ٱللَّهِ ۖ فَـَٔامَنَت طَّآئِفَةٌ مِّنۢ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَكَفَرَت طَّآئِفَةٌ ۖ فَأَيَّدْنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا عَلَىٰ عَدُوِّهِمْ فَأَصْبَحُوا ظَـٰهِرِينَ
١٤

Surah 61 - الصَّفّ (पंक्ति) - Verses 14-14


Aṣ-Ṣaff () - अध्याय 61 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा