This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".
An-Najm (सूरह 53)
النَّجْم (The Stars)
मक्की सूरह
परिचय
इस मक्की सूरह का नाम इसकी पहली आयत में (और साथ ही पिछली सूरह की अंतिम आयत में भी) सितारों के अस्त होने के उल्लेख से पड़ा है। पैगंबर के संदेश के ईश्वरीय स्रोत पर जोर दिया गया है, जिसके बाद शब-ए-मेराज के दौरान उनके स्वर्गारोहण का उल्लेख है (सूरह 17 की प्रस्तावना देखें)। बहुदेववादियों को अल्लाह की इबादत में मूर्तियों को शरीक करने और फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहने के लिए धिक्कारा गया है। अल्लाह की असीम शक्ति के प्रमाण उनकी पुनरुत्थान की क्षमता को सिद्ध करने के लिए उद्धृत किए गए हैं। इस सूरह का अंत और अगली सूरह का आरंभ दोनों क़यामत के करीब होने पर जोर देते हैं।
अल्लाह के नाम पर—जो परम दयालु, अत्यंत मेहरबान है।
An-Najm - The Stars
इस पेज पर अरबी पाठ पढ़ें, हिंदी अनुवाद समझें, पाठ सुनें और आयत दर आयत अध्ययन को स्पष्ट क्रम में जारी रखें। क़सम है तारों की जब वे अस्त होते हैं! तुम्हारा साथी न तो गुमराह हुआ है और न ही भटका है। और न ही वह अपनी ख़्वाहिश से बोलता है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.
पैगंबर की जिब्राइल से मुलाकात
1. क़सम है तारों की जब वे अस्त होते हैं!2. तुम्हारा साथी न तो गुमराह हुआ है और न ही भटका है।3. और न ही वह अपनी ख़्वाहिश से बोलता है।4. यह तो बस एक वह्यी है जो अवतरित की गई है।5. उसे प्रबल शक्ति वाले (देवदूत) ने सिखाया है।6. और महान पूर्णता वाला, जो एक बार अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुआ।7. जब वह क्षितिज के ऊपर अपने उच्चतम बिंदु पर था,8. फिर वह (नबी के) निकट आया, इतना करीब आ गया9. कि वह केवल दो हाथ की दूरी पर था या उससे भी कम।10. फिर अल्लाह ने अपने बंदे पर वह्यी की जो कुछ उसने वह्यी की।11. नबी के दिल ने शक नहीं किया जो कुछ उसने देखा।12. ऐ मुशरिको, फिर तुम उससे उस चीज़ पर कैसे झगड़ते हो जो उसने देखी?13. और उसने उसे (देवदूत को) दूसरी बार अवश्य देखा।14. सिद्रतुल् मुंतहा पर (सातवें आसमान में)।15. जिसके पास जन्नतुल मावा है।16. जब सिद्रह को (दिव्य) शोभाओं ने आच्छादित कर लिया था!17. दृष्टि न तो भटकी और न ही उसने सीमा लाँघी।18. उसने निश्चित रूप से अपने रब की महानतम निशानियों में से कुछ देखा।
وَٱلنَّجْمِ إِذَا هَوَىٰ
١
مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمْ وَمَا غَوَىٰ
٢
وَمَا يَنطِقُ عَنِ ٱلْهَوَىٰٓ
٣
إِنْ هُوَ إِلَّا وَحْىٌ يُوحَىٰ
٤
عَلَّمَهُۥ شَدِيدُ ٱلْقُوَىٰ
٥
ذُو مِرَّةٍ فَٱسْتَوَىٰ
٦
وَهُوَ بِٱلْأُفُقِ ٱلْأَعْلَىٰ
٧
ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ
٨
فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰ
٩
فَأَوْحَىٰٓ إِلَىٰ عَبْدِهِۦ مَآ أَوْحَىٰ
١٠
مَا كَذَبَ ٱلْفُؤَادُ مَا رَأَىٰٓ
١١
أَفَتُمَـٰرُونَهُۥ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ
١٢
وَلَقَدْ رَءَاهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ
١٣
عِندَ سِدْرَةِ ٱلْمُنتَهَىٰ
١٤
عِندَهَا جَنَّةُ ٱلْمَأْوَىٰٓ
١٥
إِذْ يَغْشَى ٱلسِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ
١٦
مَا زَاغَ ٱلْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ
١٧
لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ ءَايَـٰتِ رَبِّهِ ٱلْكُبْرَىٰٓ
١٨
Surah 53 - النَّجْم (तारे) - Verses 1-18
मूर्तिपूजकों के लिए जागरण का आह्वान
19. अब, क्या तुमने लात और उज़्ज़ा पर विचार किया है?20. और तीसरी मनात को भी?21. क्या तुम्हारे लिए बेटे हैं और उसके लिए बेटियाँ?22. तो यह एक अनुचित बँटवारा है!23. ये तो बस नाम ही नाम हैं जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादाओं ने गढ़ लिए हैं, जिनके लिए अल्लाह ने कोई प्रमाण नहीं उतारा। वे केवल गुमानों और जो उनके मन चाहते हैं, उसी का अनुसरण करते हैं, जबकि उनके रब की ओर से उनके पास मार्गदर्शन आ चुका है।24. या क्या हर व्यक्ति को जो कुछ वह चाहे, मिल जाए?25. वास्तव में, अल्लाह ही का है यह दुनिया और आख़िरत।26. आसमानों में कितने ही फ़रिश्ते हैं! उनकी सिफ़ारिश बिल्कुल भी काम नहीं आएगी, जब तक अल्लाह जिसे चाहे और जिसके लिए राज़ी हो, इजाज़त न दे।
27. निःसंदेह, वे लोग जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, फ़रिश्तों को स्त्रियाँ कहते हैं,28. हालाँकि उनके पास इसका कोई ज्ञान नहीं है। वे तो बस गुमान पर चलते हैं। और निश्चित रूप से गुमान सत्य का स्थान नहीं ले सकता।29. अतः आप उससे मुँह मोड़ लें जिसने हमारे ज़िक्र से मुँह मोड़ा है और केवल इस दुनिया के जीवन को चाहता है।30. यह उनके ज्ञान की सीमा है। निश्चित रूप से आपका रब सबसे बेहतर जानता है कि कौन उसके मार्ग से भटक गया है और कौन हिदायत पर है।
31. अल्लाह ही का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके कर्मों का प्रतिफल दे और भलाई करने वालों को उत्तम प्रतिफल दे।32. वे जो बड़े गुनाहों और अश्लील कर्मों से बचते हैं, सिवाय छोटे-मोटे गुनाहों के। निःसंदेह तुम्हारा रब क्षमा करने में असीम है। उसने तुम्हें भली-भाँति जाना जब उसने तुम्हें धरती से पैदा किया और जब तुम अपनी माताओं के गर्भ में भ्रूण थे। अतः स्वयं को पवित्र न ठहराओ। वह भली-भाँति जानता है कि कौन वास्तव में परहेज़गार है।