1. क़सम है तारों की जब वे अस्त होते हैं!
2. तुम्हारा साथी न तो गुमराह हुआ है और न ही भटका है।
3. और न ही वह अपनी ख़्वाहिश से बोलता है।
4. यह तो बस एक वह्यी है जो अवतरित की गई है।
5. उसे प्रबल शक्ति वाले (देवदूत) ने सिखाया है।
6. और महान पूर्णता वाला, जो एक बार अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुआ।
7. जब वह क्षितिज के ऊपर अपने उच्चतम बिंदु पर था,
8. फिर वह (नबी के) निकट आया, इतना करीब आ गया
9. कि वह केवल दो हाथ की दूरी पर था या उससे भी कम।
10. फिर अल्लाह ने अपने बंदे पर वह्यी की जो कुछ उसने वह्यी की।
11. नबी के दिल ने शक नहीं किया जो कुछ उसने देखा।
12. ऐ मुशरिको, फिर तुम उससे उस चीज़ पर कैसे झगड़ते हो जो उसने देखी?
13. और उसने उसे (देवदूत को) दूसरी बार अवश्य देखा।
14. सिद्रतुल् मुंतहा पर (सातवें आसमान में)।
15. जिसके पास जन्नतुल मावा है।
16. जब सिद्रह को (दिव्य) शोभाओं ने आच्छादित कर लिया था!
17. दृष्टि न तो भटकी और न ही उसने सीमा लाँघी।
18. उसने निश्चित रूप से अपने रब की महानतम निशानियों में से कुछ देखा।