यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 45 - الجَاثِيَة

Al-Jâthiyah (सूरह 45)

الجَاثِيَة (The Kneeling)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

यह मक्की सूरह, जिसका नाम आयत 28 में वर्णित क़यामत के दिन हर धर्म-समुदाय के घुटने टेकने से लिया गया है, उन लोगों की आलोचना करती है जो अल्लाह की आयतों से मुँह मोड़ते हैं, क़यामत का इनकार करते हैं, सत्य का उपहास करते हैं, और अल्लाह के अनगिनत एहसानों तथा सृष्टि के चमत्कारों की क़द्र नहीं करते। इन इनकार करने वालों का भयानक अंजाम सूरह के अंतिम भाग में दर्शाया गया है। इन सभी विषयों पर अगली सूरह में भी ज़ोर दिया गया है। अल्लाह के नाम से, जो परम दयालु, अत्यंत कृपावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

अल्लाह की निशानियाँ

1. हा-मीम। 2. इस किताब का अवतरण अल्लाह की ओर से है, जो सर्वशक्तिमान, महाज्ञानी है। 3. निःसंदेह आकाशों और धरती की रचना में ईमान वालों के लिए निशानियाँ हैं। 4. और तुम्हारी अपनी रचना में, और जो भी जीव उसने फैलाए हैं, दृढ़ विश्वास रखने वाले लोगों के लिए निशानियाँ हैं। 5. और दिन और रात के हेरफेर में, अल्लाह द्वारा आकाश से उतारे गए रिज़क़ में—जिससे धरती उसकी मृत्यु के बाद जीवित होती है—और हवाओं के रुख बदलने में, अक्ल वालों के लिए निशानियाँ हैं। 6. ये अल्लाह की आयतें हैं जिन्हें हम तुम्हें (ऐ पैगंबर) हक़ के साथ सुनाते हैं। तो अल्लाह और उसकी आयतों को झुठलाने के बाद वे किस बात पर ईमान लाएँगे?

حمٓ
١
تَنزِيلُ ٱلْكِتَـٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ
٢
إِنَّ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ لَـَٔايَـٰتٍ لِّلْمُؤْمِنِينَ
٣
وَفِى خَلْقِكُمْ وَمَا يَبُثُّ مِن دَآبَّةٍ ءَايَـٰتٌ لِّقَوْمٍ يُوقِنُونَ
٤
وَٱخْتِلَـٰفِ ٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ وَمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مِن رِّزْقٍ فَأَحْيَا بِهِ ٱلْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا وَتَصْرِيفِ ٱلرِّيَـٰحِ ءَايَـٰتٌ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
٥
تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِٱلْحَقِّ ۖ فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَ ٱللَّهِ وَءَايَـٰتِهِۦ يُؤْمِنُونَ
٦

सूरह 45 - الجَاثِيَة (घुटने टेकना) - आयतें 1-6


इनकार करने वालों को चेतावनी

7. हर गुनाहगार झूठे पर हलाकत हो। 8. जब उनके सामने अल्लाह की आयतें पढ़ी जाती हैं, तो वे तकब्बुर करते हुए ऐसे डटे रहते हैं गोया कि उन्होंने उन्हें सुना ही नहीं। तो उन्हें दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी दो। 9. और जब भी उन्हें हमारी आयतों में से कुछ इल्म होता है, तो वे उसका मज़ाक उड़ाते हैं। उन्हीं के लिए रुसवा करने वाला अज़ाब है। 10. उनके लिए जहन्नम है। उनके (दुनियावी) लाभ उन्हें ज़रा भी फ़ायदा नहीं पहुँचाएँगे और न ही वे संरक्षक जो उन्होंने अल्लाह के सिवा बनाए हैं। और उन्हें एक भयानक अज़ाब भुगतना पड़ेगा। 11. यह (क़ुरआन) हिदायत है। और जो लोग अपने रब की आयतों को झुठलाते हैं, उन्हें दर्दनाक अज़ाब भुगतना पड़ेगा।

وَيْلٌ لِّكُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ
٧
يَسْمَعُ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ثُمَّ يُصِرُّ مُسْتَكْبِرًا كَأَن لَّمْ يَسْمَعْهَا ۖ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
٨
وَإِذَا عَلِمَ مِنْ ءَايَـٰتِنَا شَيْـًٔا ٱتَّخَذَهَا هُزُوًا ۚ أُولَـٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
٩
مِّن وَرَآئِهِمْ جَهَنَّمُ ۖ وَلَا يُغْنِى عَنْهُم مَّا كَسَبُوا شَيْـًٔا وَلَا مَا ٱتَّخَذُوا مِن دُونِ ٱللَّهِ أَوْلِيَآءَ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
١٠
هَـٰذَا هُدًى ۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا بِـَٔايَـٰتِ رَبِّهِمْ لَهُمْ عَذَابٌ مِّن رِّجْزٍ أَلِيمٌ
١١

सूरह 45 - الجَاثِيَة (घुटने टेकना) - आयतें 7-11


अल्लाह की इंसानियत पर नेमतें

12. अल्लाह ही वह है जिसने तुम्हारे लिए समुद्र को वश में किया है ताकि उस पर उसके हुक्म से जहाज़ चलें, और ताकि तुम उसका फ़ज़ल तलाश करो, और ताकि तुम शायद शुक्रगुज़ार बनो। 13. उसने तुम्हारे लिए वह सब कुछ वश में कर दिया जो आकाशों में है और जो धरती में है—सब अपनी कृपा से। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं जो चिंतन करते हैं।

۞ ٱللَّهُ ٱلَّذِى سَخَّرَ لَكُمُ ٱلْبَحْرَ لِتَجْرِىَ ٱلْفُلْكُ فِيهِ بِأَمْرِهِۦ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِۦ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
١٢
وَسَخَّرَ لَكُم مَّا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًا مِّنْهُ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
١٣

सूरह 45 - الجَاثِيَة (घुटने टेकना) - आयतें 12-13


ईमान वालों को नसीहत

14. (ऐ पैगंबर!) ईमानवालों से कह दो कि वे उन लोगों को माफ़ कर दें जो अल्लाह के दिनों से नहीं डरते, ताकि वह हर गिरोह को उसके किए का बदला दे। 15. जो कोई भलाई करेगा, वह उसी के अपने लाभ के लिए है। और जो कोई बुराई करेगा, वह उसी के अपने नुकसान के लिए है। फिर तुम सब अपने रब की ओर लौटाए जाओगे।

قُل لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا يَغْفِرُوا لِلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ أَيَّامَ ٱللَّهِ لِيَجْزِىَ قَوْمًۢا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
١٤
مَنْ عَمِلَ صَـٰلِحًا فَلِنَفْسِهِۦ ۖ وَمَنْ أَسَآءَ فَعَلَيْهَا ۖ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
١٥

सूरह 45 - الجَاثِيَة (घुटने टेकना) - आयतें 14-15