This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 3 - آلِ عِمْرَان

Âli-’Imran (Surah 3)

آلِ عِمْرَان (The Family of 'Imran)

Madni SurahMadni Surah

Introduction

इस मदनी सूरह का नाम आयत 33 में वर्णित आले-इमरान के नाम पर रखा गया है। पिछली सूरह

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

ईश्वरीय ग्रंथ मार्गदर्शन के स्रोत के रूप में

1. अलिफ़-लाम-मीम 2. अल्लाह! उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह सदा जीवित, सब को संभालने वाला है। 3. उसने आप पर (ऐ पैगंबर!) सत्य के साथ किताब उतारी है, जो उससे पहले की किताबों की पुष्टि करती है, जैसे उसने तौरात और इंजील उतारी थी। 4. इससे पहले, लोगों के लिए मार्गदर्शन के तौर पर, और (भी) फ़ुरक़ान (सत्य और असत्य में भेद करने वाला) उतारा। निःसंदेह, जो लोग अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं, उनके लिए कठोर यातना है। क्योंकि अल्लाह सर्वशक्तिमान है, दंड देने में सक्षम है।

الٓمٓ
١
ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْحَىُّ ٱلْقَيُّومُ
٢
نَزَّلَ عَلَيْكَ ٱلْكِتَـٰبَ بِٱلْحَقِّ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَأَنزَلَ ٱلتَّوْرَىٰةَ وَٱلْإِنجِيلَ
٣
مِن قَبْلُ هُدًى لِّلنَّاسِ وَأَنزَلَ ٱلْفُرْقَانَ ۗ إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ ذُو ٱنتِقَامٍ
٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 1-4


अल्लाह ता'आला

5. निःसंदेह, धरती में और न आकाशों में कोई भी चीज़ अल्लाह से छिपी हुई नहीं है। 6. वही है जो तुम्हें तुम्हारी माताओं के गर्भाशयों में जैसा वह चाहता है, आकार देता है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, वह सर्वशक्तिमान, महाज्ञानी है।

إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَخْفَىٰ عَلَيْهِ شَىْءٌ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا فِى ٱلسَّمَآءِ
٥
هُوَ ٱلَّذِى يُصَوِّرُكُمْ فِى ٱلْأَرْحَامِ كَيْفَ يَشَآءُ ۚ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
٦

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 5-6


स्पष्ट और गूढ़ आयतें

7. वही है जिसने तुम पर (ऐ पैगंबर) किताब नाज़िल की है। उसमें से कुछ आयतें मुहकम (स्पष्ट) हैं, वही किताब की असल बुनियाद हैं, और कुछ मुतशाबिह (अस्पष्ट) हैं। जिनके दिलों में टेढ़ है, वे फ़ित्ना पैदा करने और अपनी मनमानी व्याख्या करने के लिए मुतशाबिह आयतों के पीछे पड़ते हैं—जबकि उनका सही अर्थ अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। और जो ज्ञान में गहरे हैं, वे कहते हैं, “हम इस पर ईमान लाए हैं, यह सब हमारे रब की ओर से है।” और नसीहत तो अक्ल वाले ही कबूल करते हैं। 8. (वे कहते हैं,) “हमारे रब! हमारे दिलों को टेढ़ा न कर, जब तू हमें हिदायत दे चुका है। हमें अपनी रहमत अता फरमा। बेशक तू ही बड़ा देने वाला है।” 9. हमारे रब! तू यकीनन तमाम इंसानों को उस (वादे के) दिन जमा करेगा—जिसमें कोई शक नहीं। बेशक अल्लाह अपना वादा नहीं तोड़ता।”

هُوَ ٱلَّذِىٓ أَنزَلَ عَلَيْكَ ٱلْكِتَـٰبَ مِنْهُ ءَايَـٰتٌ مُّحْكَمَـٰتٌ هُنَّ أُمُّ ٱلْكِتَـٰبِ وَأُخَرُ مُتَشَـٰبِهَـٰتٌ ۖ فَأَمَّا ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِمْ زَيْغٌ فَيَتَّبِعُونَ مَا تَشَـٰبَهَ مِنْهُ ٱبْتِغَآءَ ٱلْفِتْنَةِ وَٱبْتِغَآءَ تَأْوِيلِهِۦ ۗ وَمَا يَعْلَمُ تَأْوِيلَهُۥٓ إِلَّا ٱللَّهُ ۗ وَٱلرَّٰسِخُونَ فِى ٱلْعِلْمِ يَقُولُونَ ءَامَنَّا بِهِۦ كُلٌّ مِّنْ عِندِ رَبِّنَا ۗ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّآ أُولُوا ٱلْأَلْبَـٰبِ
٧
رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً ۚ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْوَهَّابُ
٨
رَبَّنَآ إِنَّكَ جَامِعُ ٱلنَّاسِ لِيَوْمٍ لَّا رَيْبَ فِيهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُخْلِفُ ٱلْمِيعَادَ
٩

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 7-9


काफ़िरों का अज़ाब

10. बेशक, काफ़िरों का न तो माल और न ही उनकी औलाद अल्लाह के मुक़ाबले में उनके कुछ काम आएगी—और वे आग का ईंधन बनेंगे। 11. उनका हश्र फ़िरऔन के लोगों और उनसे पहले वालों जैसा ही होगा—उन सब ने हमारी निशानियों को झुठलाया, तो अल्लाह ने उनके गुनाहों के कारण उन्हें पकड़ लिया। और अल्लाह सज़ा देने में बहुत कठोर है। 12. (ऐ पैग़म्बर!) काफ़िरों से कह दो, “जल्द ही तुम पर ग़लबा पा लिया जाएगा और तुम्हें जहन्नम की ओर हाँका जाएगा—वह क्या ही बुरा ठिकाना है!”

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا لَن تُغْنِىَ عَنْهُمْ أَمْوَٰلُهُمْ وَلَآ أَوْلَـٰدُهُم مِّنَ ٱللَّهِ شَيْـًٔا ۖ وَأُولَـٰٓئِكَ هُمْ وَقُودُ ٱلنَّارِ
١٠
كَدَأْبِ ءَالِ فِرْعَوْنَ وَٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا بِـَٔايَـٰتِنَا فَأَخَذَهُمُ ٱللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ ۗ وَٱللَّهُ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
١١
قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا سَتُغْلَبُونَ وَتُحْشَرُونَ إِلَىٰ جَهَنَّمَ ۚ وَبِئْسَ ٱلْمِهَادُ
١٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 10-12


बद्र की जंग में अल्लाह की नुसरत

13. निश्चय ही तुम्हारे लिए उन दो दलों में एक निशानी थी जो युद्ध में एक-दूसरे से भिड़े—एक अल्लाह के मार्ग में लड़ रहा था और दूसरा इनकार करने वाला था। ईमान वालों ने अपने शत्रु को अपनी संख्या से दुगुना देखा। परन्तु अल्लाह अपनी सहायता से जिसे चाहता है, समर्थन देता है। निश्चय ही इसमें अंतर्दृष्टि रखने वालों के लिए एक शिक्षा है।

قَدْ كَانَ لَكُمْ ءَايَةٌ فِى فِئَتَيْنِ ٱلْتَقَتَا ۖ فِئَةٌ تُقَـٰتِلُ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَأُخْرَىٰ كَافِرَةٌ يَرَوْنَهُم مِّثْلَيْهِمْ رَأْىَ ٱلْعَيْنِ ۚ وَٱللَّهُ يُؤَيِّدُ بِنَصْرِهِۦ مَن يَشَآءُ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّأُولِى ٱلْأَبْصَـٰرِ
١٣

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 13-13


क्षणभंगुर सुख

14. लोगों के लिए स्त्रियों, बच्चों, सोने-चाँदी के ढेर, उत्तम घोड़ों, पशुओं और उपजाऊ भूमि जैसी सांसारिक इच्छाओं का उपभोग आकर्षक बना दिया गया है। ये इस दुनियावी जीवन के भोग हैं, परन्तु अल्लाह के पास ही सबसे उत्तम ठिकाना है।

زُيِّنَ لِلنَّاسِ حُبُّ ٱلشَّهَوَٰتِ مِنَ ٱلنِّسَآءِ وَٱلْبَنِينَ وَٱلْقَنَـٰطِيرِ ٱلْمُقَنطَرَةِ مِنَ ٱلذَّهَبِ وَٱلْفِضَّةِ وَٱلْخَيْلِ ٱلْمُسَوَّمَةِ وَٱلْأَنْعَـٰمِ وَٱلْحَرْثِ ۗ ذَٰلِكَ مَتَـٰعُ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۖ وَٱللَّهُ عِندَهُۥ حُسْنُ ٱلْمَـَٔابِ
١٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 14-14


शाश्वत परमानंद

15. कहो, (ऐ पैगंबर,) "क्या मैं तुम्हें इससे उत्तम चीज़ की ख़बर दूँ? जो अल्लाह का तक़वा रखते हैं, उनके लिए उनके रब के पास ऐसे बाग़ होंगे जिनके नीचे नहरें बहती होंगी, जहाँ वे हमेशा रहेंगे, और पवित्र पत्नियाँ होंगी, साथ ही अल्लाह की प्रसन्नता भी।" और अल्लाह अपने बंदों को भली-भाँति देखने वाला है। 16. जो कहते हैं, "ऐ हमारे रब! हम ईमान लाए हैं, तो हमारे गुनाहों को बख़्श दे और हमें आग के अज़ाब से बचा ले।" 17. वे जो सब्र करने वाले, सच्चे, फरमाबरदार और (अल्लाह की राह में) खर्च करने वाले हैं, और जो भोर से पहले (अल्लाह से) माफी मांगते हैं।

۞ قُلْ أَؤُنَبِّئُكُم بِخَيْرٍ مِّن ذَٰلِكُمْ ۚ لِلَّذِينَ ٱتَّقَوْا عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّـٰتٌ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَا وَأَزْوَٰجٌ مُّطَهَّرَةٌ وَرِضْوَٰنٌ مِّنَ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ بَصِيرٌۢ بِٱلْعِبَادِ
١٥
ٱلَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَآ إِنَّنَآ ءَامَنَّا فَٱغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ
١٦
ٱلصَّـٰبِرِينَ وَٱلصَّـٰدِقِينَ وَٱلْقَـٰنِتِينَ وَٱلْمُنفِقِينَ وَٱلْمُسْتَغْفِرِينَ بِٱلْأَسْحَارِ
١٧

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 15-17


एक अल्लाह

18. अल्लाह स्वयं गवाह है कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं—और फ़रिश्ते और इल्म वाले भी। वह इंसाफ़ क़ायम रखने वाला है। उसके सिवा कोई माबूद नहीं—ज़बरदस्त, हिकमत वाला।

شَهِدَ ٱللَّهُ أَنَّهُۥ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَأُولُوا ٱلْعِلْمِ قَآئِمًۢا بِٱلْقِسْطِ ۚ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
١٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 18-18


एक ही मार्ग

19. निसंदेह, अल्लाह का एकमात्र धर्म इस्लाम ही है। जिन्हें किताब दी गई थी, उन्होंने आपस में ईर्ष्या के कारण मतभेद नहीं किया, जब तक कि उनके पास ज्ञान नहीं आ गया। और जो कोई अल्लाह की आयतों का इनकार करता है, तो निसंदेह अल्लाह हिसाब लेने में बहुत तेज़ है। 20. अतः यदि वे तुमसे (हे पैगंबर) बहस करें, तो कहो, “मैंने अपने आपको अल्लाह के सुपुर्द कर दिया है, और मेरे अनुयायियों ने भी।” और उनसे पूछो जिन्हें किताब दी गई थी और उन अनपढ़ों (लोगों) से भी, “क्या तुमने अपने आपको (अल्लाह के) सुपुर्द कर दिया है?” यदि वे सुपुर्द कर दें, तो वे सही राह पर आ जाएँगे। और यदि वे मुँह मोड़ें, तो तुम्हारा कर्तव्य केवल (संदेश) पहुँचाना है। और अल्लाह अपने बंदों को खूब देखने वाला है।

إِنَّ ٱلدِّينَ عِندَ ٱللَّهِ ٱلْإِسْلَـٰمُ ۗ وَمَا ٱخْتَلَفَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا ٱلْكِتَـٰبَ إِلَّا مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَهُمُ ٱلْعِلْمُ بَغْيًۢا بَيْنَهُمْ ۗ وَمَن يَكْفُرْ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ فَإِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ
١٩
فَإِنْ حَآجُّوكَ فَقُلْ أَسْلَمْتُ وَجْهِىَ لِلَّهِ وَمَنِ ٱتَّبَعَنِ ۗ وَقُل لِّلَّذِينَ أُوتُوا ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْأُمِّيِّـۧنَ ءَأَسْلَمْتُمْ ۚ فَإِنْ أَسْلَمُوا فَقَدِ ٱهْتَدَوا ۖ وَّإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْكَ ٱلْبَلَـٰغُ ۗ وَٱللَّهُ بَصِيرٌۢ بِٱلْعِبَادِ
٢٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 19-20


सरकशों का प्रतिफल

21. निसंदेह, जो लोग अल्लाह की आयतों का इनकार करते हैं, और नबियों को नाहक क़त्ल करते हैं, और उन लोगों को भी क़त्ल करते हैं जो न्याय के लिए खड़े होते हैं—उन्हें एक दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी दो। 22. वे ही हैं जिनके कर्म इस दुनिया और आख़िरत में व्यर्थ हो गए। और उनके कोई सहायक नहीं होंगे।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَكْفُرُونَ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ وَيَقْتُلُونَ ٱلنَّبِيِّـۧنَ بِغَيْرِ حَقٍّ وَيَقْتُلُونَ ٱلَّذِينَ يَأْمُرُونَ بِٱلْقِسْطِ مِنَ ٱلنَّاسِ فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
٢١
أُولَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ حَبِطَتْ أَعْمَـٰلُهُمْ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّـٰصِرِينَ
٢٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 21-22


सरकशों का प्रतिफल

23. क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्हें किताब का एक हिस्सा दिया गया था? फिर जब उन्हें अल्लाह की किताब की ओर बुलाया जाता है ताकि उनके विवादों का निपटारा हो, तो उनमें से कुछ बेपरवाही से मुँह मोड़ लेते हैं। 24. यह इसलिए है क्योंकि वे कहते हैं, "आग हमें कुछ गिने-चुने दिनों के अलावा नहीं छुएगी।" उन्हें उनके दीन में उनकी मनगढ़ंत झूठ ने धोखे में डाल दिया है। 25. तो क्या होगा जब हम उन्हें उस दिन इकट्ठा करेंगे जिसके आने में कोई संदेह नहीं, और हर जान को उसके किए का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा, और किसी पर कोई ज़ुल्म नहीं होगा!

أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ أُوتُوا نَصِيبًا مِّنَ ٱلْكِتَـٰبِ يُدْعَوْنَ إِلَىٰ كِتَـٰبِ ٱللَّهِ لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ ثُمَّ يَتَوَلَّىٰ فَرِيقٌ مِّنْهُمْ وَهُم مُّعْرِضُونَ
٢٣
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوا لَن تَمَسَّنَا ٱلنَّارُ إِلَّآ أَيَّامًا مَّعْدُودَٰتٍ ۖ وَغَرَّهُمْ فِى دِينِهِم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
٢٤
فَكَيْفَ إِذَا جَمَعْنَـٰهُمْ لِيَوْمٍ لَّا رَيْبَ فِيهِ وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
٢٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 23-25


अल्लाह की अनंत शक्ति

26. कहो, "ऐ अल्लाह! सभी बादशाहतों के मालिक! तू जिसे चाहे बादशाहत देता है और जिससे चाहे बादशाहत छीन लेता है; तू जिसे चाहे इज़्ज़त देता है और जिसे चाहे ज़लील करता है—सारी भलाई तेरे ही हाथ में है। बेशक तू हर चीज़ पर पूरी तरह से क़ादिर है।" 27. तू रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है। तू मुर्दे से ज़िंदा को निकालता है और ज़िंदा से मुर्दे को निकालता है। और तू जिसे चाहे बेहिसाब रोज़ी देता है।”

قُلِ ٱللَّهُمَّ مَـٰلِكَ ٱلْمُلْكِ تُؤْتِى ٱلْمُلْكَ مَن تَشَآءُ وَتَنزِعُ ٱلْمُلْكَ مِمَّن تَشَآءُ وَتُعِزُّ مَن تَشَآءُ وَتُذِلُّ مَن تَشَآءُ ۖ بِيَدِكَ ٱلْخَيْرُ ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
٢٦
تُولِجُ ٱلَّيْلَ فِى ٱلنَّهَارِ وَتُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِى ٱلَّيْلِ ۖ وَتُخْرِجُ ٱلْحَىَّ مِنَ ٱلْمَيِّتِ وَتُخْرِجُ ٱلْمَيِّتَ مِنَ ٱلْحَىِّ ۖ وَتَرْزُقُ مَن تَشَآءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ
٢٧

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 26-27


काफ़िरों को वली बनाना

28. ईमान वालों को चाहिए कि वे मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को अपना संरक्षक न बनाएँ। और जो ऐसा करेगा, उसका अल्लाह से कोई वास्ता नहीं रहेगा, सिवाय इसके कि तुम उनके ज़ुल्म से बचने के लिए एहतियात के तौर पर ऐसा करो। और अल्लाह तुम्हें अपनी ज़ात से डराता है। और अल्लाह ही की ओर अंतिम वापसी है।

لَّا يَتَّخِذِ ٱلْمُؤْمِنُونَ ٱلْكَـٰفِرِينَ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِ ٱلْمُؤْمِنِينَ ۖ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ فَلَيْسَ مِنَ ٱللَّهِ فِى شَىْءٍ إِلَّآ أَن تَتَّقُوا مِنْهُمْ تُقَىٰةً ۗ وَيُحَذِّرُكُمُ ٱللَّهُ نَفْسَهُۥ ۗ وَإِلَى ٱللَّهِ ٱلْمَصِيرُ
٢٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 28-28


अल्लाह का असीम ज्ञान

29. कहो, (ऐ पैगंबर,) “तुम अपने दिलों में जो कुछ छिपाओ या उसे ज़ाहिर करो, अल्लाह उसे जानता है। बेशक वह जानता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है। और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी तरह क़ादिर है।”

قُلْ إِن تُخْفُوا مَا فِى صُدُورِكُمْ أَوْ تُبْدُوهُ يَعْلَمْهُ ٱللَّهُ ۗ وَيَعْلَمُ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
٢٩

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 29-29


नेकी और बदी का हिसाब

30. उस दिन को याद करो जब हर जान को उसके किए हुए अच्छे काम सामने मिलेंगे। और वह चाहेगी कि उसके बुरे काम उससे बहुत दूर होते। और अल्लाह तुम्हें अपनी ज़ात से डराता है। और अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है।

يَوْمَ تَجِدُ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ مِنْ خَيْرٍ مُّحْضَرًا وَمَا عَمِلَتْ مِن سُوٓءٍ تَوَدُّ لَوْ أَنَّ بَيْنَهَا وَبَيْنَهُۥٓ أَمَدًۢا بَعِيدًا ۗ وَيُحَذِّرُكُمُ ٱللَّهُ نَفْسَهُۥ ۗ وَٱللَّهُ رَءُوفٌۢ بِٱلْعِبَادِ
٣٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 30-30


अल्लाह और उसके रसूल की फ़रमाबरदारी

31. कह दीजिए, (ऐ पैगंबर,) “यदि तुम अल्लाह से मोहब्बत करते हो, तो मेरी पैरवी करो; अल्लाह तुमसे मोहब्बत करेगा और तुम्हारे गुनाहों को बख्श देगा। बेशक अल्लाह बड़ा बख्शने वाला, निहायत मेहरबान है।” 32. कह दीजिए, (ऐ पैगंबर,) “अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा मानो।” फिर यदि वे मुँह मोड़ते हैं, तो बेशक अल्लाह काफ़िरों को पसंद नहीं करता।

قُلْ إِن كُنتُمْ تُحِبُّونَ ٱللَّهَ فَٱتَّبِعُونِى يُحْبِبْكُمُ ٱللَّهُ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ ۗ وَٱللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
٣١
قُلْ أَطِيعُوا ٱللَّهَ وَٱلرَّسُولَ ۖ فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلْكَـٰفِرِينَ
٣٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 31-32


मुबारक लोग

33. बेशक अल्लाह ने आदम को, नूह को, आले इब्राहीम को और आले इमरान को सारे संसार के लोगों पर चुना। 34. वे एक-दूसरे की संतति हैं। और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।

۞ إِنَّ ٱللَّهَ ٱصْطَفَىٰٓ ءَادَمَ وَنُوحًا وَءَالَ إِبْرَٰهِيمَ وَءَالَ عِمْرَٰنَ عَلَى ٱلْعَـٰلَمِينَ
٣٣
ذُرِّيَّةًۢ بَعْضُهَا مِنۢ بَعْضٍ ۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
٣٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 33-34


मरियम का जन्म

35. जब इमरान की पत्नी ने कहा, “ऐ मेरे रब! मैं अपने गर्भ में जो कुछ है उसे तेरी सेवा के लिए नज़्र करती हूँ, तो इसे मुझसे क़बूल कर। बेशक तू ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।” 36. जब उसने प्रसव किया, तो उसने कहा, “ऐ मेरे रब! मैंने एक लड़की को जन्म दिया है,”—और अल्लाह भली-भाँति जानता था कि उसने क्या जन्म दिया था—“और नर, मादा जैसा नहीं होता। मैंने उसका नाम मरयम रखा है, और मैं उसकी और उसकी औलाद की शैतान, जो धिक्कारा हुआ है, से तेरी पनाह माँगती हूँ।” 37. तो उसके रब ने उसे सहर्ष स्वीकार किया और उसे एक उत्तम पालन-पोषण से नवाज़ा—उसे ज़करिया की देखरेख में सौंपा। जब भी ज़करिया उसके पास उपासना-स्थल में आते, वे उसके पास भोजन-सामग्री पाते। उन्होंने कहा, "ऐ मरियम! यह तुम्हारे पास कहाँ से आया?" उसने उत्तर दिया, "यह अल्लाह की ओर से है। निःसंदेह अल्लाह जिसे चाहता है, उसे बेहिसाब रोज़ी देता है।"

إِذْ قَالَتِ ٱمْرَأَتُ عِمْرَٰنَ رَبِّ إِنِّى نَذَرْتُ لَكَ مَا فِى بَطْنِى مُحَرَّرًا فَتَقَبَّلْ مِنِّىٓ ۖ إِنَّكَ أَنتَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ
٣٥
فَلَمَّا وَضَعَتْهَا قَالَتْ رَبِّ إِنِّى وَضَعْتُهَآ أُنثَىٰ وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا وَضَعَتْ وَلَيْسَ ٱلذَّكَرُ كَٱلْأُنثَىٰ ۖ وَإِنِّى سَمَّيْتُهَا مَرْيَمَ وَإِنِّىٓ أُعِيذُهَا بِكَ وَذُرِّيَّتَهَا مِنَ ٱلشَّيْطَـٰنِ ٱلرَّجِيمِ
٣٦
فَتَقَبَّلَهَا رَبُّهَا بِقَبُولٍ حَسَنٍ وَأَنۢبَتَهَا نَبَاتًا حَسَنًا وَكَفَّلَهَا زَكَرِيَّا ۖ كُلَّمَا دَخَلَ عَلَيْهَا زَكَرِيَّا ٱلْمِحْرَابَ وَجَدَ عِندَهَا رِزْقًا ۖ قَالَ يَـٰمَرْيَمُ أَنَّىٰ لَكِ هَـٰذَا ۖ قَالَتْ هُوَ مِنْ عِندِ ٱللَّهِ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ يَرْزُقُ مَن يَشَآءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ
٣٧

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 35-37


याह्या का जन्म

38. तभी ज़करिया ने अपने रब से दुआ की, कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे अपनी कृपा से नेक संतान प्रदान कर। निःसंदेह तू ही दुआओं को सुनने वाला है।" 39. तो फ़रिश्तों ने उसे पुकारा जबकि वह उपासना-स्थल में खड़ा नमाज़ पढ़ रहा था, "अल्लाह तुम्हें यह्या (जॉन) की खुशखबरी देता है, जो अल्लाह के 'कलिमा' की पुष्टि करेगा और एक सरदार, पाक-दामन (पवित्र), और नेक लोगों में से एक नबी होगा।" 40. ज़करियाह ने कहा, "मेरे रब! मुझे बेटा कैसे होगा जबकि मैं बहुत बूढ़ा हूँ और मेरी पत्नी बांझ है?" उसने कहा, "ऐसा ही होगा। अल्लाह जो चाहता है, करता है।" 41. ज़करियाह ने कहा, "मेरे रब! मुझे कोई निशानी दे।" उसने कहा, "तेरी निशानी यह है कि तू तीन दिन तक लोगों से इशारों के सिवा बात नहीं कर पाएगा। अपने रब को बहुत याद करना और सुबह-शाम उसकी तस्बीह करना।"

هُنَالِكَ دَعَا زَكَرِيَّا رَبَّهُۥ ۖ قَالَ رَبِّ هَبْ لِى مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَمِيعُ ٱلدُّعَآءِ
٣٨
فَنَادَتْهُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَهُوَ قَآئِمٌ يُصَلِّى فِى ٱلْمِحْرَابِ أَنَّ ٱللَّهَ يُبَشِّرُكَ بِيَحْيَىٰ مُصَدِّقًۢا بِكَلِمَةٍ مِّنَ ٱللَّهِ وَسَيِّدًا وَحَصُورًا وَنَبِيًّا مِّنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ
٣٩
قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِى غُلَـٰمٌ وَقَدْ بَلَغَنِىَ ٱلْكِبَرُ وَٱمْرَأَتِى عَاقِرٌ ۖ قَالَ كَذَٰلِكَ ٱللَّهُ يَفْعَلُ مَا يَشَآءُ
٤٠
قَالَ رَبِّ ٱجْعَل لِّىٓ ءَايَةً ۖ قَالَ ءَايَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ ٱلنَّاسَ ثَلَـٰثَةَ أَيَّامٍ إِلَّا رَمْزًا ۗ وَٱذْكُر رَّبَّكَ كَثِيرًا وَسَبِّحْ بِٱلْعَشِىِّ وَٱلْإِبْكَـٰرِ
٤١

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 38-41


मरियम, समस्त स्त्रियों पर चुनी गईं

42. और जब फ़रिश्तों ने कहा, "ऐ मरियम! बेशक अल्लाह ने तुम्हें चुन लिया है, तुम्हें पाक कर दिया है और तुम्हें दुनिया की सभी औरतों पर श्रेष्ठता दी है।" 43. ऐ मरियम! अपने रब की आज्ञाकारी बनो, सजदा करो और रुकूअ करने वालों के साथ रुकूअ करो। 44. यह ग़ैब की ख़बर है जो हम तुम्हें (ऐ पैग़म्बर) वह्यी करते हैं। तुम उनके पास नहीं थे जब उन्होंने पर्चियाँ डाली थीं कि मरियम का संरक्षक कौन होगा, और न तुम वहाँ थे जब वे झगड़ रहे थे।

وَإِذْ قَالَتِ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ يَـٰمَرْيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ ٱصْطَفَىٰكِ وَطَهَّرَكِ وَٱصْطَفَىٰكِ عَلَىٰ نِسَآءِ ٱلْعَـٰلَمِينَ
٤٢
يَـٰمَرْيَمُ ٱقْنُتِى لِرَبِّكِ وَٱسْجُدِى وَٱرْكَعِى مَعَ ٱلرَّٰكِعِينَ
٤٣
ذَٰلِكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ ۚ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يُلْقُونَ أَقْلَـٰمَهُمْ أَيُّهُمْ يَكْفُلُ مَرْيَمَ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يَخْتَصِمُونَ
٤٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 42-44


ईसा अल-मसीह का जन्म

45. (याद करो) जब फ़रिश्तों ने कहा, “ऐ मरियम! अल्लाह तुम्हें अपने पास से एक 'कलिमा' की ख़ुशख़बरी देता है, उसका नाम मसीह, ईसा इब्न-ए-मरियम होगा; वह इस दुनिया और आख़िरत में प्रतिष्ठित होगा और वह मुक़र्रबीन में से होगा।” 46. और वह लोगों से पालने में और पूरी उम्र में बात करेगा और नेक लोगों में से होगा। 47. मरियम ने हैरत से पूछा, “ऐ मेरे रब! मुझे बच्चा कैसे होगा जबकि मुझे किसी इंसान ने छुआ तक नहीं?” एक फ़रिश्ते ने जवाब दिया, “ऐसा ही होगा। अल्लाह जो चाहता है, पैदा करता है। जब वह किसी काम का फैसला करता है, तो उसे बस कहता है, ‘हो जा!’ और वह हो जाता है!”

إِذْ قَالَتِ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ يَـٰمَرْيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ يُبَشِّرُكِ بِكَلِمَةٍ مِّنْهُ ٱسْمُهُ ٱلْمَسِيحُ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ وَجِيهًا فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ وَمِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ
٤٥
وَيُكَلِّمُ ٱلنَّاسَ فِى ٱلْمَهْدِ وَكَهْلًا وَمِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ
٤٦
قَالَتْ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِى وَلَدٌ وَلَمْ يَمْسَسْنِى بَشَرٌ ۖ قَالَ كَذَٰلِكِ ٱللَّهُ يَخْلُقُ مَا يَشَآءُ ۚ إِذَا قَضَىٰٓ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ
٤٧

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 45-47


ईसा की रिसालत और मोजिज़ात

48. “और अल्लाह उसे किताबत और हिकमत, तौरात और इंजील सिखाएगा, 49. और (उसे) बनी इसराइल की ओर एक रसूल (बनाया जाएगा, जो कहेगा,) ‘मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक निशानी लेकर आया हूँ: मैं तुम्हारे लिए मिट्टी से पक्षी की आकृति बनाऊँगा, फिर उसमें फूँक मारूँगा, तो वह अल्लाह की अनुमति से (वास्तविक) पक्षी बन जाएगा। मैं जन्म से अंधे और कोढ़ी को ठीक करूँगा और अल्लाह की अनुमति से मुर्दों को जीवित करूँगा। और मैं तुम्हें बताऊँगा कि तुम क्या खाते हो और अपने घरों में क्या जमा करते हो। निश्चय ही इसमें तुम्हारे लिए एक निशानी है, यदि तुम (वास्तव में) ईमान रखते हो। 50. और मैं अपने से पहले अवतरित हुई तौरात की पुष्टि करूँगा और तुम्हारे लिए कुछ उन चीज़ों को वैध करूँगा जो तुम पर हराम की गई थीं। मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक निशानी लेकर आया हूँ, अतः अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा मानो। 51. निश्चय ही अल्लाह मेरा रब है और तुम्हारा भी रब है। अतः उसी की इबादत करो। यही सीधा मार्ग है।'"

وَيُعَلِّمُهُ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحِكْمَةَ وَٱلتَّوْرَىٰةَ وَٱلْإِنجِيلَ
٤٨
وَرَسُولًا إِلَىٰ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ أَنِّى قَدْ جِئْتُكُم بِـَٔايَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ ۖ أَنِّىٓ أَخْلُقُ لَكُم مِّنَ ٱلطِّينِ كَهَيْـَٔةِ ٱلطَّيْرِ فَأَنفُخُ فِيهِ فَيَكُونُ طَيْرًۢا بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۖ وَأُبْرِئُ ٱلْأَكْمَهَ وَٱلْأَبْرَصَ وَأُحْىِ ٱلْمَوْتَىٰ بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۖ وَأُنَبِّئُكُم بِمَا تَأْكُلُونَ وَمَا تَدَّخِرُونَ فِى بُيُوتِكُمْ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
٤٩
وَمُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَىَّ مِنَ ٱلتَّوْرَىٰةِ وَلِأُحِلَّ لَكُم بَعْضَ ٱلَّذِى حُرِّمَ عَلَيْكُمْ ۚ وَجِئْتُكُم بِـَٔايَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَٱتَّقُوا ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ
٥٠
إِنَّ ٱللَّهَ رَبِّى وَرَبُّكُمْ فَٱعْبُدُوهُ ۗ هَـٰذَا صِرَٰطٌ مُّسْتَقِيمٌ
٥١

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 48-51


हवारी

52. जब ईसा ने अपने लोगों से कुफ्र (अविश्वास) महसूस किया, तो उन्होंने पूछा, “अल्लाह के लिए मेरे सहायक कौन होंगे?” शिष्यों ने उत्तर दिया, “हम अल्लाह के सहायक होंगे। हम अल्लाह पर ईमान लाए हैं, तो गवाह रहिए कि हम मुस्लिम हैं।” 53. “ऐ हमारे रब! हम तेरी आयतों पर ईमान लाए हैं और रसूल का अनुसरण करते हैं, तो हमें गवाहों में शामिल कर ले।”

۞ فَلَمَّآ أَحَسَّ عِيسَىٰ مِنْهُمُ ٱلْكُفْرَ قَالَ مَنْ أَنصَارِىٓ إِلَى ٱللَّهِ ۖ قَالَ ٱلْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ ٱللَّهِ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَٱشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ
٥٢
رَبَّنَآ ءَامَنَّا بِمَآ أَنزَلْتَ وَٱتَّبَعْنَا ٱلرَّسُولَ فَٱكْتُبْنَا مَعَ ٱلشَّـٰهِدِينَ
٥٣

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 52-53


ईसा के विरुद्ध षड्यंत्र

54. और काफ़िरों ने एक योजना बनाई, लेकिन अल्लाह ने भी योजना बनाई—और अल्लाह सबसे अच्छा योजना बनाने वाला है। 55. (याद करो) जब अल्लाह ने कहा, "हे ईसा! मैं तुम्हें पूरा करूँगा और तुम्हें अपनी ओर उठा लूँगा। मैं तुम्हें उन लोगों से बचाऊँगा जो इनकार करते हैं, और तुम्हारे अनुयायियों को क़यामत के दिन तक इनकार करने वालों से ऊपर रखूँगा। फिर तुम सब मेरी ही ओर लौटोगे, और मैं तुम्हारे सभी विवादों का निपटारा करूँगा।"

وَمَكَرُوا وَمَكَرَ ٱللَّهُ ۖ وَٱللَّهُ خَيْرُ ٱلْمَـٰكِرِينَ
٥٤
إِذْ قَالَ ٱللَّهُ يَـٰعِيسَىٰٓ إِنِّى مُتَوَفِّيكَ وَرَافِعُكَ إِلَىَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا وَجَاعِلُ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوكَ فَوْقَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۖ ثُمَّ إِلَىَّ مَرْجِعُكُمْ فَأَحْكُمُ بَيْنَكُمْ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
٥٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 54-55


न्यायसंगत अजर

56. "और जो लोग इनकार करते हैं, मैं उन्हें इस दुनिया और आख़िरत में कठोर दंड दूँगा, और उनके लिए कोई सहायक नहीं होगा।" 57. "और जो लोग ईमान लाते हैं और अच्छे कर्म करते हैं, उन्हें उनका पूरा प्रतिफल दिया जाएगा। और अल्लाह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता।" 58. यह सब हम आपको (ऐ पैगंबर) आयतों में से एक के रूप में और एक हिकमत भरी नसीहत के तौर पर सुनाते हैं।

فَأَمَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُوا فَأُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا شَدِيدًا فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّـٰصِرِينَ
٥٦
وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا وَعَمِلُوا ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ ٱلظَّـٰلِمِينَ
٥٧
ذَٰلِكَ نَتْلُوهُ عَلَيْكَ مِنَ ٱلْـَٔايَـٰتِ وَٱلذِّكْرِ ٱلْحَكِيمِ
٥٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 56-58


ईसा और आदम

59. बेशक, अल्लाह के निकट ईसा की मिसाल आदम की सी है। उसने उसे मिट्टी से बनाया, फिर उससे कहा, "हो जा!" और वह हो गया! 60. यह तुम्हारे रब की ओर से हक़ है, तो शक करने वालों में से मत हो।

إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ ٱللَّهِ كَمَثَلِ ءَادَمَ ۖ خَلَقَهُۥ مِن تُرَابٍ ثُمَّ قَالَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ
٥٩
ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلْمُمْتَرِينَ
٦٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 59-60


ईसा पर विवाद

61. अब, जो कोई तुमसे ईसा के विषय में विवाद करे, जबकि तुम्हारे पास सत्य ज्ञान आ चुका है, तो कहो, "आओ! हम अपने बच्चों को और तुम्हारे बच्चों को, अपनी स्त्रियों को और तुम्हारी स्त्रियों को, अपने आप को और तुम्हें इकट्ठा करें—फिर हम सच्चे दिल से अल्लाह की लानत उन पर भेजें जो झूठे हैं।" 62. निःसंदेह, यह सच्चा बयान है, और अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है। और निश्चय ही, अल्लाह ही सर्वशक्तिमान, तत्वदर्शी है। 63. यदि वे मुँह मोड़ें, तो निश्चय ही अल्लाह बिगाड़ पैदा करने वालों को भली-भाँति जानता है।

فَمَنْ حَآجَّكَ فِيهِ مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَكَ مِنَ ٱلْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَآءَنَا وَأَبْنَآءَكُمْ وَنِسَآءَنَا وَنِسَآءَكُمْ وَأَنفُسَنَا وَأَنفُسَكُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَتَ ٱللَّهِ عَلَى ٱلْكَـٰذِبِينَ
٦١
إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ ٱلْقَصَصُ ٱلْحَقُّ ۚ وَمَا مِنْ إِلَـٰهٍ إِلَّا ٱللَّهُ ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
٦٢
فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌۢ بِٱلْمُفْسِدِينَ
٦٣

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 61-63


अल्लाह की ही इबादत

64. कहो, "ऐ अहले किताब! आओ एक ऐसी बात पर आ जाएँ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यकसाँ है: कि हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें, और न उसके साथ किसी को शरीक ठहराएँ, और न अल्लाह के सिवा एक-दूसरे को रब बनाएँ।" फिर अगर वे मुँह फेरें, तो कहो, "गवाह रहो कि हम मुस्लिम हैं।"

قُلْ يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ تَعَالَوْا إِلَىٰ كَلِمَةٍ سَوَآءٍۭ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَلَّا نَعْبُدَ إِلَّا ٱللَّهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهِۦ شَيْـًٔا وَلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا أَرْبَابًا مِّن دُونِ ٱللَّهِ ۚ فَإِن تَوَلَّوْا فَقُولُوا ٱشْهَدُوا بِأَنَّا مُسْلِمُونَ
٦٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 64-64


इब्राहीम की हक़ीक़त

65. ऐ अहले किताब! तुम इब्राहीम के बारे में क्यों झगड़ते हो, जबकि तौरात और इंजील तो उसके बहुत बाद ही नाज़िल की गईं? क्या तुम अक्ल नहीं रखते? 66. देखो, तुम लोग! तुम उस चीज़ के बारे में झगड़ चुके हो जिसका तुम्हें कुछ इल्म था, तो अब उस चीज़ के बारे में क्यों झगड़ते हो जिसका तुम्हें कोई इल्म नहीं? अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते। 67. इब्राहीम न तो यहूदी था और न ईसाई, बल्कि वह एकनिष्ठ होकर समर्पित था और मुशरिक नहीं था। 68. वास्तव में, इब्राहीम के सबसे अधिक हक़दार उसके अनुयायी, यह नबी और ईमान वाले हैं। और अल्लाह ईमान वालों का संरक्षक है।

يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لِمَ تُحَآجُّونَ فِىٓ إِبْرَٰهِيمَ وَمَآ أُنزِلَتِ ٱلتَّوْرَىٰةُ وَٱلْإِنجِيلُ إِلَّا مِنۢ بَعْدِهِۦٓ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
٦٥
هَـٰٓأَنتُمْ هَـٰٓؤُلَآءِ حَـٰجَجْتُمْ فِيمَا لَكُم بِهِۦ عِلْمٌ فَلِمَ تُحَآجُّونَ فِيمَا لَيْسَ لَكُم بِهِۦ عِلْمٌ ۚ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
٦٦
مَا كَانَ إِبْرَٰهِيمُ يَهُودِيًّا وَلَا نَصْرَانِيًّا وَلَـٰكِن كَانَ حَنِيفًا مُّسْلِمًا وَمَا كَانَ مِنَ ٱلْمُشْرِكِينَ
٦٧
إِنَّ أَوْلَى ٱلنَّاسِ بِإِبْرَٰهِيمَ لَلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُ وَهَـٰذَا ٱلنَّبِىُّ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا ۗ وَٱللَّهُ وَلِىُّ ٱلْمُؤْمِنِينَ
٦٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 65-68


सत्य को विकृत करना

69. अहले किताब में से कुछ लोग तुम्हें (ईमान वालों को) गुमराह करना चाहते हैं। वे स्वयं के सिवा किसी को गुमराह नहीं करते, फिर भी वे इसे समझते नहीं। 70. ऐ अहले किताब! तुम अल्लाह की आयतों का क्यों इनकार करते हो, जबकि तुम (उनकी सच्चाई की) गवाही देते हो? 71. ऐ अहले किताब! तुम हक़ को बातिल के साथ क्यों मिलाते हो और हक़ को जानते हुए क्यों छुपाते हो?

وَدَّت طَّآئِفَةٌ مِّنْ أَهْلِ ٱلْكِتَـٰبِ لَوْ يُضِلُّونَكُمْ وَمَا يُضِلُّونَ إِلَّآ أَنفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَ
٦٩
يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لِمَ تَكْفُرُونَ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ وَأَنتُمْ تَشْهَدُونَ
٧٠
يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لِمَ تَلْبِسُونَ ٱلْحَقَّ بِٱلْبَـٰطِلِ وَتَكْتُمُونَ ٱلْحَقَّ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
٧١

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 69-71


फ़रेब बेनकाब

72. अहले किताब में से एक गिरोह ने कहा, "जो कुछ ईमान वालों पर नाज़िल किया गया है उस पर सुबह को ईमान लाओ और शाम को उसका इनकार कर दो, ताकि वे (अपने दीन से) फिर जाएँ।" 73. और केवल उन्हीं पर विश्वास करो जो तुम्हारे धर्म का पालन करते हैं।" कहो, (ऐ पैगंबर,) "निश्चित रूप से, (एकमात्र) सच्चा मार्गदर्शन अल्लाह का मार्गदर्शन है।" (उन्होंने यह भी कहा,) "यह मत मानो कि किसी को तुम्हारे जैसा (प्रकाशित) ज्ञान मिलेगा या तुम्हारे रब के सामने तुम्हारे विरुद्ध तर्क करेगा।" कहो, (ऐ पैगंबर,) "वास्तव में, सारी कृपा अल्लाह के हाथों में है—वह जिसे चाहता है उसे प्रदान करता है। और अल्लाह बड़ा कृपालु, सब कुछ जानने वाला है।" 74. वह जिसे चाहता है अपनी दया के लिए चुनता है। और अल्लाह असीम अनुग्रह का स्वामी है।

وَقَالَت طَّآئِفَةٌ مِّنْ أَهْلِ ٱلْكِتَـٰبِ ءَامِنُوا بِٱلَّذِىٓ أُنزِلَ عَلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا وَجْهَ ٱلنَّهَارِ وَٱكْفُرُوٓا ءَاخِرَهُۥ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
٧٢
وَلَا تُؤْمِنُوٓا إِلَّا لِمَن تَبِعَ دِينَكُمْ قُلْ إِنَّ ٱلْهُدَىٰ هُدَى ٱللَّهِ أَن يُؤْتَىٰٓ أَحَدٌ مِّثْلَ مَآ أُوتِيتُمْ أَوْ يُحَآجُّوكُمْ عِندَ رَبِّكُمْ ۗ قُلْ إِنَّ ٱلْفَضْلَ بِيَدِ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَآءُ ۗ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌ
٧٣
يَخْتَصُّ بِرَحْمَتِهِۦ مَن يَشَآءُ ۗ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ
٧٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 72-74


अमानतें निभाना

75. अहले किताब (ग्रंथ वाले) में से कुछ ऐसे हैं जो, यदि उन्हें सोने का ढेर भी सौंपा जाए, तो वे उसे सहर्ष लौटा देंगे। फिर भी कुछ ऐसे भी हैं जो, यदि उन्हें एक सिक्का भी सौंपा जाए, तो वे उसे तब तक नहीं लौटाएंगे जब तक तुम लगातार उसकी मांग न करो। यह इसलिए है क्योंकि वे कहते हैं, "हम गैर-यहूदियों के (शोषण के) लिए जवाबदेह नहीं हैं।" और (इस प्रकार) वे जानबूझकर अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं। 76. बेशक! जो अपनी अमानतों को पूरा करते हैं और बुराई से बचते हैं—निश्चित रूप से अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है जो तक़वा रखते हैं।

۞ وَمِنْ أَهْلِ ٱلْكِتَـٰبِ مَنْ إِن تَأْمَنْهُ بِقِنطَارٍ يُؤَدِّهِۦٓ إِلَيْكَ وَمِنْهُم مَّنْ إِن تَأْمَنْهُ بِدِينَارٍ لَّا يُؤَدِّهِۦٓ إِلَيْكَ إِلَّا مَا دُمْتَ عَلَيْهِ قَآئِمًا ۗ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوا لَيْسَ عَلَيْنَا فِى ٱلْأُمِّيِّـۧنَ سَبِيلٌ وَيَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلْكَذِبَ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
٧٥
بَلَىٰ مَنْ أَوْفَىٰ بِعَهْدِهِۦ وَٱتَّقَىٰ فَإِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُتَّقِينَ
٧٦

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 75-76


अल्लाह का अहद तोड़ना

77. निःसंदेह, जो अल्लाह के अहद और अपनी क़समों को फ़ानी लाभ के बदले बेचते हैं, उनका आख़िरत में कोई हिस्सा नहीं होगा। अल्लाह न तो उनसे बात करेगा, न उनकी ओर देखेगा, और न ही उन्हें क़यामत के दिन पाक करेगा। और उन्हें दर्दनाक अज़ाब होगा।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَشْتَرُونَ بِعَهْدِ ٱللَّهِ وَأَيْمَـٰنِهِمْ ثَمَنًا قَلِيلًا أُولَـٰٓئِكَ لَا خَلَـٰقَ لَهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ وَلَا يُكَلِّمُهُمُ ٱللَّهُ وَلَا يَنظُرُ إِلَيْهِمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
٧٧

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 77-77


धर्मग्रंथ का विकृतीकरण

78. उनमें से कुछ ऐसे हैं जो अपनी ज़बानों से किताब को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं ताकि तुम समझो कि यह किताब में से है—जबकि वह किताब में से नहीं है। वे कहते हैं, “यह अल्लाह की ओर से है”—जबकि वह अल्लाह की ओर से नहीं है। और वे जान-बूझकर अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं।

وَإِنَّ مِنْهُمْ لَفَرِيقًا يَلْوُۥنَ أَلْسِنَتَهُم بِٱلْكِتَـٰبِ لِتَحْسَبُوهُ مِنَ ٱلْكِتَـٰبِ وَمَا هُوَ مِنَ ٱلْكِتَـٰبِ وَيَقُولُونَ هُوَ مِنْ عِندِ ٱللَّهِ وَمَا هُوَ مِنْ عِندِ ٱللَّهِ وَيَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلْكَذِبَ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
٧٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 78-78


नबी कभी ईश्वरीयता का दावा नहीं करते

79. यह किसी ऐसे व्यक्ति के लिए उचित नहीं है जिसे अल्लाह ने किताब (धर्मग्रंथ), हिकमत (ज्ञान) और नुबुव्वत (पैगम्बरी) से नवाज़ा हो कि वह लोगों से कहे, "अल्लाह के बजाय मेरी इबादत करो।" बल्कि वह तो यही कहेगा, "अपने रब के ही बंदे बनो"—उस शिक्षा के अनुसार जो ये पैगंबर धर्मग्रंथ में पढ़ते थे और जो वे सिखाते थे। 80. और वह तुमसे कभी नहीं कहेगा कि तुम फ़रिश्तों और पैगंबरों को रब (माबूद) बना लो। क्या वह तुमसे कुफ़्र (नाफ़रमानी) करने को कहेगा जबकि तुम इस्लाम ला चुके हो?

مَا كَانَ لِبَشَرٍ أَن يُؤْتِيَهُ ٱللَّهُ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحُكْمَ وَٱلنُّبُوَّةَ ثُمَّ يَقُولَ لِلنَّاسِ كُونُوا عِبَادًا لِّى مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلَـٰكِن كُونُوا رَبَّـٰنِيِّـۧنَ بِمَا كُنتُمْ تُعَلِّمُونَ ٱلْكِتَـٰبَ وَبِمَا كُنتُمْ تَدْرُسُونَ
٧٩
وَلَا يَأْمُرَكُمْ أَن تَتَّخِذُوا ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ وَٱلنَّبِيِّـۧنَ أَرْبَابًا ۗ أَيَأْمُرُكُم بِٱلْكُفْرِ بَعْدَ إِذْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ
٨٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 79-80


अल्लाह का नबियों के साथ अहद

81. (याद करो) जब अल्लाह ने पैगंबरों से अहद (वचन) लिया था, (यह कहते हुए,) "अब जबकि मैंने तुम्हें किताब (धर्मग्रंथ) और हिकमत (ज्ञान) दी है, अगर तुम्हारे पास कोई ऐसा रसूल (संदेशवाहक) आए जो तुम्हारे पास मौजूद चीज़ की तस्दीक़ (पुष्टि) करे, तो तुम्हें उस पर ईमान लाना होगा और उसकी मदद करनी होगी।" उसने आगे कहा, "क्या तुम इस अहद का इक़रार करते हो और इस पर कायम रहने की ज़िम्मेदारी क़बूल करते हो?" उन्होंने कहा, "हाँ, हम करते हैं।" अल्लाह ने कहा, "तो गवाह बनो, और मैं भी गवाह हूँ।" 82. इसके बाद जो कोई भी मुकर जाए, वही विद्रोही होंगे।

وَإِذْ أَخَذَ ٱللَّهُ مِيثَـٰقَ ٱلنَّبِيِّـۧنَ لَمَآ ءَاتَيْتُكُم مِّن كِتَـٰبٍ وَحِكْمَةٍ ثُمَّ جَآءَكُمْ رَسُولٌ مُّصَدِّقٌ لِّمَا مَعَكُمْ لَتُؤْمِنُنَّ بِهِۦ وَلَتَنصُرُنَّهُۥ ۚ قَالَ ءَأَقْرَرْتُمْ وَأَخَذْتُمْ عَلَىٰ ذَٰلِكُمْ إِصْرِى ۖ قَالُوٓا أَقْرَرْنَا ۚ قَالَ فَٱشْهَدُوا وَأَنَا۠ مَعَكُم مِّنَ ٱلشَّـٰهِدِينَ
٨١
فَمَن تَوَلَّىٰ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَأُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْفَـٰسِقُونَ
٨٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 81-82


पूर्ण समर्पण

83. क्या वे अल्लाह के दीन के सिवा कोई और मार्ग चाहते हैं—जबकि आकाशों और धरती में जो कुछ भी है, स्वेच्छा से या अनिच्छा से, उसी की इच्छा के अधीन है, और उसी की ओर वे (सब) लौटाए जाएँगे?

أَفَغَيْرَ دِينِ ٱللَّهِ يَبْغُونَ وَلَهُۥٓ أَسْلَمَ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ طَوْعًا وَكَرْهًا وَإِلَيْهِ يُرْجَعُونَ
٨٣

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 83-83


इस्लाम के पैगंबर

84. कहो, “हम अल्लाह पर और उस पर ईमान रखते हैं जो हम पर उतारा गया और जो इब्राहीम, इस्माईल, इसहाक, याकूब और उनकी औलाद पर उतारा गया था; और जो मूसा, ईसा और अन्य नबियों को उनके रब की ओर से दिया गया था—हम उनमें से किसी के बीच कोई भेद नहीं करते, और उसी के हम (पूरी तरह से) मुस्लिम हैं।”

قُلْ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَمَآ أُنزِلَ عَلَيْنَا وَمَآ أُنزِلَ عَلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْمَـٰعِيلَ وَإِسْحَـٰقَ وَيَعْقُوبَ وَٱلْأَسْبَاطِ وَمَآ أُوتِىَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَٱلنَّبِيُّونَ مِن رَّبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُۥ مُسْلِمُونَ
٨٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 84-84


एकमात्र मार्ग

85. जो इस्लाम के सिवा किसी और दीन (मार्ग) को चाहेगा, तो वह उससे हरगिज़ क़बूल नहीं किया जाएगा, और आख़िरत में वह घाटा उठाने वालों में से होगा।

وَمَن يَبْتَغِ غَيْرَ ٱلْإِسْلَـٰمِ دِينًا فَلَن يُقْبَلَ مِنْهُ وَهُوَ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ مِنَ ٱلْخَـٰسِرِينَ
٨٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 85-85


सीधे मार्ग से गुमराह होना

86. अल्लाह ऐसी क़ौम को कैसे हिदायत देगा जिन्होंने ईमान लाने के बाद कुफ़्र किया, और रसूल की सच्चाई को स्वीकार किया, और उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ चुके थे? और अल्लाह ज़ालिम लोगों को हिदायत नहीं देता। 87. उनका बदला यह है कि उन पर अल्लाह की, फ़रिश्तों की और तमाम इंसानों की लानत होगी। 88. वे हमेशा जहन्नम में रहेंगे। उनकी सज़ा हल्की नहीं की जाएगी, और न ही उन्हें मोहलत दी जाएगी। 89. सिवाय उन लोगों के जो उसके बाद तौबा करें और अपनी इस्लाह कर लें, तो बेशक अल्लाह बड़ा बख्शने वाला, निहायत मेहरबान है।

كَيْفَ يَهْدِى ٱللَّهُ قَوْمًا كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَـٰنِهِمْ وَشَهِدُوٓا أَنَّ ٱلرَّسُولَ حَقٌّ وَجَآءَهُمُ ٱلْبَيِّنَـٰتُ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
٨٦
أُولَـٰٓئِكَ جَزَآؤُهُمْ أَنَّ عَلَيْهِمْ لَعْنَةَ ٱللَّهِ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ وَٱلنَّاسِ أَجْمَعِينَ
٨٧
خَـٰلِدِينَ فِيهَا لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ ٱلْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
٨٨
إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُوا مِنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
٨٩

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 86-89


कुफ़्र पर मौत

90. बेशक जिन लोगों ने ईमान लाने के बाद कुफ्र किया फिर कुफ्र में बढ़ते चले गए, उनकी तौबा हरगिज़ कुबूल नहीं की जाएगी। और वही गुमराह हैं। 91. निःसंदेह, जो लोग कुफ्र करते हैं और कुफ्र की हालत में मर जाते हैं, यदि वे पूरी दुनिया भर का सोना फ़िदिया (मुक्ति-धन) के रूप में दें, तो वह उनसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है और उनका कोई मददगार नहीं होगा।

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَـٰنِهِمْ ثُمَّ ٱزْدَادُوا كُفْرًا لَّن تُقْبَلَ تَوْبَتُهُمْ وَأُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلضَّآلُّونَ
٩٠
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يُقْبَلَ مِنْ أَحَدِهِم مِّلْءُ ٱلْأَرْضِ ذَهَبًا وَلَوِ ٱفْتَدَىٰ بِهِۦٓ ۗ أُولَـٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ وَمَا لَهُم مِّن نَّـٰصِرِينَ
٩١

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 90-91


पुण्य दान

92. तुम कभी नेकी को नहीं पहुँचोगे जब तक तुम अपनी प्रिय चीज़ों में से कुछ (अल्लाह की राह में) खर्च न करो। और तुम जो कुछ भी खर्च करते हो, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है।

لَن تَنَالُوا ٱلْبِرَّ حَتَّىٰ تُنفِقُوا مِمَّا تُحِبُّونَ ۚ وَمَا تُنفِقُوا مِن شَىْءٍ فَإِنَّ ٱللَّهَ بِهِۦ عَلِيمٌ
٩٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 92-92


याकूब की आहार संबंधी पाबंदी

93. बनी इस्राईल के लिए सभी खाने की चीज़ें हलाल थीं, सिवाय उन चीज़ों के जिन्हें इस्राईल (याकूब) ने तौरात के उतरने से पहले खुद पर हराम कर लिया था। कहो, (ऐ पैगंबर,) "तौरात लाओ और उसे पढ़ो, यदि तुम सच्चे हो।" 94. फिर जो कोई भी अल्लाह पर झूठ बांधता है, तो वही ज़ालिम होंगे। 95. कहो, “अल्लाह ने सत्य फ़रमाया है। तो इब्राहीम के मार्ग का अनुसरण करो, जो एकाग्रचित्त था और मुश्रिकों में से नहीं था।”

۞ كُلُّ ٱلطَّعَامِ كَانَ حِلًّا لِّبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ إِلَّا مَا حَرَّمَ إِسْرَٰٓءِيلُ عَلَىٰ نَفْسِهِۦ مِن قَبْلِ أَن تُنَزَّلَ ٱلتَّوْرَىٰةُ ۗ قُلْ فَأْتُوا بِٱلتَّوْرَىٰةِ فَٱتْلُوهَآ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
٩٣
فَمَنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ ٱلْكَذِبَ مِنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ فَأُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّـٰلِمُونَ
٩٤
قُلْ صَدَقَ ٱللَّهُ ۗ فَٱتَّبِعُوا مِلَّةَ إِبْرَٰهِيمَ حَنِيفًا وَمَا كَانَ مِنَ ٱلْمُشْرِكِينَ
٩٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 93-95


मक्का में पवित्र काबा की हज

96. बेशक, लोगों के लिए जो पहला घर (इबादत के लिए) बनाया गया, वह बक्का में है—जो बरकत वाला है और तमाम इंसानों के लिए मार्गदर्शन है। 97. इसमें खुली निशानियाँ हैं और इब्राहीम का मक़ाम है। जो कोई इसमें दाखिल हो, उसे अमन मिल जाए। और इस घर का हज करना लोगों पर अल्लाह का फ़र्ज़ है, उन पर जो इसकी राह पा सकें। और जो कोई कुफ़्र करे, तो यक़ीनन अल्लाह दुनिया वालों से बेनियाज़ है।

إِنَّ أَوَّلَ بَيْتٍ وُضِعَ لِلنَّاسِ لَلَّذِى بِبَكَّةَ مُبَارَكًا وَهُدًى لِّلْعَـٰلَمِينَ
٩٦
فِيهِ ءَايَـٰتٌۢ بَيِّنَـٰتٌ مَّقَامُ إِبْرَٰهِيمَ ۖ وَمَن دَخَلَهُۥ كَانَ ءَامِنًا ۗ وَلِلَّهِ عَلَى ٱلنَّاسِ حِجُّ ٱلْبَيْتِ مَنِ ٱسْتَطَاعَ إِلَيْهِ سَبِيلًا ۚ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَنِىٌّ عَنِ ٱلْعَـٰلَمِينَ
٩٧

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 96-97


हक़ का इनकार

98. कहो, "ऐ अहले किताब! तुम अल्लाह की आयतों का इंकार क्यों करते हो, जबकि अल्लाह तुम्हारे आमाल का गवाह है?" 99. कहो, "ऐ अहले किताब! तुम ईमान वालों को अल्लाह की राह से क्यों रोकते हो, उसे टेढ़ा करने की कोशिश करते हुए, जबकि तुम खुद गवाह हो? और अल्लाह तुम्हारे आमाल से बेख़बर नहीं है।"

قُلْ يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لِمَ تَكْفُرُونَ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ وَٱللَّهُ شَهِيدٌ عَلَىٰ مَا تَعْمَلُونَ
٩٨
قُلْ يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لِمَ تَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ مَنْ ءَامَنَ تَبْغُونَهَا عِوَجًا وَأَنتُمْ شُهَدَآءُ ۗ وَمَا ٱللَّهُ بِغَـٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ
٩٩

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 98-99


शैतानी प्रभाव के विरुद्ध चेतावनी

100. ऐ ईमान वालो! यदि तुम अहले-किताब के किसी गिरोह की बात मानोगे, तो वे तुम्हें ईमान से कुफ्र की ओर लौटा देंगे। 101. तुम कैसे कुफ्र कर सकते हो, जबकि अल्लाह की आयतें तुम्हें सुनाई जाती हैं और उसका रसूल तुम्हारे बीच मौजूद है? जो कोई अल्लाह को मज़बूती से थाम लेता है, उसे सीधे मार्ग पर हिदायत दी जाती है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا إِن تُطِيعُوا فَرِيقًا مِّنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا ٱلْكِتَـٰبَ يَرُدُّوكُم بَعْدَ إِيمَـٰنِكُمْ كَـٰفِرِينَ
١٠٠
وَكَيْفَ تَكْفُرُونَ وَأَنتُمْ تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ ءَايَـٰتُ ٱللَّهِ وَفِيكُمْ رَسُولُهُۥ ۗ وَمَن يَعْتَصِم بِٱللَّهِ فَقَدْ هُدِىَ إِلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ
١٠١

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 100-101


फूट के विरुद्ध चेतावनी

102. ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो जैसा कि उससे डरने का हक़ है, और तुम्हें मौत न आए मगर इस हाल में कि तुम मुस्लिम हो। 103. अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थामे रहो और आपस में फूट न डालो। अल्लाह के उस एहसान को याद करो जो उसने तुम पर किया, जब तुम एक-दूसरे के दुश्मन थे, तो उसने तुम्हारे दिलों को जोड़ दिया और तुम उसकी कृपा से भाई-भाई बन गए। और तुम आग के एक दहकते गढ़े के किनारे पर थे तो उसने तुम्हें उससे बचा लिया। इस तरह अल्लाह अपनी आयतें तुम्हारे लिए स्पष्ट करता है, ताकि तुम हिदायत पा सको। 104. तुम में से एक ऐसा गिरोह होना चाहिए जो नेकी की ओर बुलाए, भली बात का आदेश दे और बुरी बात से मना करे। यही लोग कामयाब होंगे। 105. और उन लोगों जैसे न हो जाओ जो फिरकों में बँट गए और आपस में मतभेद करने लगे, जबकि उनके पास खुली निशानियाँ आ चुकी थीं। इन्हीं लोगों के लिए कठोर अज़ाब है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا ٱتَّقُوا ٱللَّهَ حَقَّ تُقَاتِهِۦ وَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسْلِمُونَ
١٠٢
وَٱعْتَصِمُوا بِحَبْلِ ٱللَّهِ جَمِيعًا وَلَا تَفَرَّقُوا ۚ وَٱذْكُرُوا نِعْمَتَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ كُنتُمْ أَعْدَآءً فَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِكُمْ فَأَصْبَحْتُم بِنِعْمَتِهِۦٓ إِخْوَٰنًا وَكُنتُمْ عَلَىٰ شَفَا حُفْرَةٍ مِّنَ ٱلنَّارِ فَأَنقَذَكُم مِّنْهَا ۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمْ ءَايَـٰتِهِۦ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
١٠٣
وَلْتَكُن مِّنكُمْ أُمَّةٌ يَدْعُونَ إِلَى ٱلْخَيْرِ وَيَأْمُرُونَ بِٱلْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ ٱلْمُنكَرِ ۚ وَأُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ
١٠٤
وَلَا تَكُونُوا كَٱلَّذِينَ تَفَرَّقُوا وَٱخْتَلَفُوا مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَهُمُ ٱلْبَيِّنَـٰتُ ۚ وَأُولَـٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
١٠٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 102-105


खुशहाल और बदहाल

106. उस दिन कुछ चेहरे चमकते होंगे जबकि कुछ काले। काले चेहरों वालों से कहा जाएगा, “क्या तुमने ईमान लाने के बाद कुफ्र किया? तो अपने कुफ्र के बदले अज़ाब चखो।” 107. और जो चमकते चेहरों वाले होंगे, वे अल्लाह की रहमत में होंगे, जहाँ वे हमेशा रहेंगे। 108. ये अल्लाह की आयतें हैं जो हम आपको (ऐ नबी) हक़ के साथ सुनाते हैं। और अल्लाह अपनी मखलूक पर कोई ज़ुल्म नहीं चाहता। 109. अल्लाह ही का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है। और अल्लाह ही की तरफ़ सब मामले लौटाए जाएँगे।

يَوْمَ تَبْيَضُّ وُجُوهٌ وَتَسْوَدُّ وُجُوهٌ ۚ فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ٱسْوَدَّتْ وُجُوهُهُمْ أَكَفَرْتُم بَعْدَ إِيمَـٰنِكُمْ فَذُوقُوا ٱلْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
١٠٦
وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ٱبْيَضَّتْ وُجُوهُهُمْ فَفِى رَحْمَةِ ٱللَّهِ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ
١٠٧
تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِٱلْحَقِّ ۗ وَمَا ٱللَّهُ يُرِيدُ ظُلْمًا لِّلْعَـٰلَمِينَ
١٠٨
وَلِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۚ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرْجَعُ ٱلْأُمُورُ
١٠٩

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 106-109


मुस्लिम उम्मत की फ़ज़ीलत

110. तुम बेहतरीन उम्मत हो जो लोगों (इंसानियत) के लिए पैदा की गई है—तुम नेकी का हुक्म देते हो, बुराई से रोकते हो और अल्लाह पर ईमान रखते हो। अगर अहले किताब ईमान लाते तो उनके लिए बेहतर होता। उनमें से कुछ ईमान वाले हैं, लेकिन उनमें से ज़्यादातर नाफ़रमान हैं।

كُنتُمْ خَيْرَ أُمَّةٍ أُخْرِجَتْ لِلنَّاسِ تَأْمُرُونَ بِٱلْمَعْرُوفِ وَتَنْهَوْنَ عَنِ ٱلْمُنكَرِ وَتُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ ۗ وَلَوْ ءَامَنَ أَهْلُ ٱلْكِتَـٰبِ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُم ۚ مِّنْهُمُ ٱلْمُؤْمِنُونَ وَأَكْثَرُهُمُ ٱلْفَـٰسِقُونَ
١١٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 110-110


अवज्ञाकारियों का प्रतिफल

111. वे तुम्हें कभी कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकते, सिवाय थोड़ी सी तकलीफ़ के। लेकिन अगर वे तुमसे लड़ाई में मिलें, तो वे पीठ फेर लेंगे और उनका कोई मददगार नहीं होगा। 112. उन पर हर जगह अपमान थोपा जाएगा, सिवाय इसके कि उन्हें अल्लाह की ओर से किसी वाचा (अहद) या लोगों के साथ किसी संधि (समझौते) द्वारा सुरक्षा प्राप्त हो। उन्होंने अल्लाह के क्रोध को आमंत्रित किया है और उन पर दरिद्रता की मुहर लगा दी गई है, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया और उसके नबियों को अन्यायपूर्वक कत्ल किया। यह उनकी अवज्ञा और सीमा-उल्लंघन का परिणाम है।

لَن يَضُرُّوكُمْ إِلَّآ أَذًى ۖ وَإِن يُقَـٰتِلُوكُمْ يُوَلُّوكُمُ ٱلْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ
١١١
ضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ ٱلذِّلَّةُ أَيْنَ مَا ثُقِفُوٓا إِلَّا بِحَبْلٍ مِّنَ ٱللَّهِ وَحَبْلٍ مِّنَ ٱلنَّاسِ وَبَآءُو بِغَضَبٍ مِّنَ ٱللَّهِ وَضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ ٱلْمَسْكَنَةُ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَانُوا يَكْفُرُونَ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ وَيَقْتُلُونَ ٱلْأَنۢبِيَآءَ بِغَيْرِ حَقٍّ ۚ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَوا وَّكَانُوا يَعْتَدُونَ
١١٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 111-112


नेक अहले किताब

113. फिर भी वे सब एक जैसे नहीं हैं: अहले किताब में से कुछ ऐसे भी हैं जो नेक हैं, जो रात भर अल्लाह की आयतों का पाठ करते हैं, सजदा करते हुए। 114. वे अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास रखते हैं, भलाई का आदेश देते हैं और बुराई से रोकते हैं, और नेकी के कामों में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। वे (वास्तव में) नेक लोगों में से हैं। 115. उन्हें उनके किसी भी अच्छे काम के प्रतिफल से कभी वंचित नहीं किया जाएगा। और अल्लाह उन लोगों को भली-भाँति जानता है जो उससे डरते हैं।

۞ لَيْسُوا سَوَآءً ۗ مِّنْ أَهْلِ ٱلْكِتَـٰبِ أُمَّةٌ قَآئِمَةٌ يَتْلُونَ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ ءَانَآءَ ٱلَّيْلِ وَهُمْ يَسْجُدُونَ
١١٣
يُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ وَيَأْمُرُونَ بِٱلْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ ٱلْمُنكَرِ وَيُسَـٰرِعُونَ فِى ٱلْخَيْرَٰتِ وَأُولَـٰٓئِكَ مِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ
١١٤
وَمَا يَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ فَلَن يُكْفَرُوهُ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِٱلْمُتَّقِينَ
١١٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 113-115


मुनाफ़िक़ीन के विरुद्ध चेतावनी

116. बेशक, काफ़िरों का न तो माल और न ही उनकी औलाद अल्लाह के मुक़ाबले में उनके किसी काम आएगी। वही लोग जहन्नम वाले होंगे। वे उसमें हमेशा रहेंगे। 117. इस दुनिया में जो भलाई वे करते हैं, वह एक दुष्ट क़ौम की उस फसल की तरह है जिसे एक सर्द हवा ने मारा और उसे (पूरी तरह) तबाह कर दिया। अल्लाह ने उन पर कभी ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि उन्होंने खुद अपने आप पर ज़ुल्म किया।

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا لَن تُغْنِىَ عَنْهُمْ أَمْوَٰلُهُمْ وَلَآ أَوْلَـٰدُهُم مِّنَ ٱللَّهِ شَيْـًٔا ۖ وَأُولَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ ۚ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ
١١٦
مَثَلُ مَا يُنفِقُونَ فِى هَـٰذِهِ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا كَمَثَلِ رِيحٍ فِيهَا صِرٌّ أَصَابَتْ حَرْثَ قَوْمٍ ظَلَمُوٓا أَنفُسَهُمْ فَأَهْلَكَتْهُ ۚ وَمَا ظَلَمَهُمُ ٱللَّهُ وَلَـٰكِنْ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
١١٧

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 116-117


मुनाफ़िक़ों के साथ संगति

118. ऐ ईमान वालो! ऐसे लोगों को अपना अंतरंग मित्र न बनाओ जो तुम्हें हानि पहुँचाने का कोई अवसर नहीं छोड़ेंगे। उनकी एकमात्र कामना तुम्हें कष्ट में देखना है। उनकी घृणा उनके मुँह से प्रकट हो चुकी है—और जो उनके दिल छिपाते हैं वह कहीं अधिक बुरा है। हमने अपनी आयतें तुम्हारे लिए स्पष्ट कर दी हैं, यदि तुम समझते हो। 119. तुम तो ऐसे हो! तुम उनसे प्रेम करते हो लेकिन वे तुमसे प्रेम नहीं करते, और तुम सभी धर्मग्रंथों पर विश्वास रखते हो। जब वे तुमसे मिलते हैं तो कहते हैं, “हम ईमान लाए।” लेकिन जब अकेले होते हैं, तो वे क्रोध में अपनी उँगलियाँ चबाते हैं। कहो, (ऐ पैगंबर,) “अपने क्रोध में मर जाओ!” निश्चित रूप से अल्लाह सबसे बेहतर जानता है जो दिलों में (छिपा) है। 120. जब तुम्हें (ईमान वालों को) कोई भलाई पहुँचती है, तो वे दुःखी होते हैं; लेकिन जब तुम्हें कोई बुराई पहुँचती है, तो वे प्रसन्न होते हैं। (फिर भी,) यदि तुम धैर्यवान और अल्लाह के प्रति सचेत रहते हो, तो उनकी चालें तुम्हें ज़रा भी हानि नहीं पहुँचाएँगी। निश्चित रूप से अल्लाह उनके सभी कर्मों से पूरी तरह अवगत है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا لَا تَتَّخِذُوا بِطَانَةً مِّن دُونِكُمْ لَا يَأْلُونَكُمْ خَبَالًا وَدُّوا مَا عَنِتُّمْ قَدْ بَدَتِ ٱلْبَغْضَآءُ مِنْ أَفْوَٰهِهِمْ وَمَا تُخْفِى صُدُورُهُمْ أَكْبَرُ ۚ قَدْ بَيَّنَّا لَكُمُ ٱلْـَٔايَـٰتِ ۖ إِن كُنتُمْ تَعْقِلُونَ
١١٨
هَـٰٓأَنتُمْ أُولَآءِ تُحِبُّونَهُمْ وَلَا يُحِبُّونَكُمْ وَتُؤْمِنُونَ بِٱلْكِتَـٰبِ كُلِّهِۦ وَإِذَا لَقُوكُمْ قَالُوٓا ءَامَنَّا وَإِذَا خَلَوْا عَضُّوا عَلَيْكُمُ ٱلْأَنَامِلَ مِنَ ٱلْغَيْظِ ۚ قُلْ مُوتُوا بِغَيْظِكُمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
١١٩
إِن تَمْسَسْكُمْ حَسَنَةٌ تَسُؤْهُمْ وَإِن تُصِبْكُمْ سَيِّئَةٌ يَفْرَحُوا بِهَا ۖ وَإِن تَصْبِرُوا وَتَتَّقُوا لَا يَضُرُّكُمْ كَيْدُهُمْ شَيْـًٔا ۗ إِنَّ ٱللَّهَ بِمَا يَعْمَلُونَ مُحِيطٌ
١٢٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 118-120


उहुद का युद्ध

121. और (ऐ पैगंबर) याद करो, जब तुम सुबह सवेरे अपने घर से निकले थे, मोमिनों को युद्ध के मैदान में व्यवस्थित करने के लिए। और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। 122. और (याद करो) जब तुम (मोमिनों) में से दो गिरोह हिम्मत हारने वाले थे, तब अल्लाह ने उन्हें ढाढ़स बंधाया। तो मोमिनों को अल्लाह पर ही भरोसा रखना चाहिए।

وَإِذْ غَدَوْتَ مِنْ أَهْلِكَ تُبَوِّئُ ٱلْمُؤْمِنِينَ مَقَـٰعِدَ لِلْقِتَالِ ۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
١٢١
إِذْ هَمَّت طَّآئِفَتَانِ مِنكُمْ أَن تَفْشَلَا وَٱللَّهُ وَلِيُّهُمَا ۗ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ
١٢٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 121-122


जंग-ए-बद्र

123. बेशक, अल्लाह ने तुम्हें बद्र में विजयी बनाया, जबकि तुम गिनती में बहुत कम थे। तो अल्लाह से डरो, ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो। 124. जब आपने मोमिनों से कहा, “क्या यह तुम्हारे लिए काफी नहीं कि तुम्हारा रब तुम्हारी मदद के लिए तीन हज़ार फ़रिश्ते उतारेगा?” 125. बेशक, अगर तुम (मोमिनो) सब्र करो और तक़वा इख्तियार करो और दुश्मन अचानक तुम पर हमला कर दे, तो अल्लाह तुम्हें पाँच हज़ार निशानज़दा फ़रिश्तों से मदद देगा। 126. अल्लाह ने यह (कुमक) सिर्फ़ तुम्हारे लिए खुशखबरी और तुम्हारे दिलों को इत्मीनान देने के लिए बनाई। और जीत तो सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से है—जो ग़ालिब, हिकमतवाला है। 127. काफ़िरों के एक गिरोह को तबाह करने और बाक़ी को नीचा दिखाने के लिए, ताकि वे निराशा में पीछे हट जाएँ।

وَلَقَدْ نَصَرَكُمُ ٱللَّهُ بِبَدْرٍ وَأَنتُمْ أَذِلَّةٌ ۖ فَٱتَّقُوا ٱللَّهَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
١٢٣
إِذْ تَقُولُ لِلْمُؤْمِنِينَ أَلَن يَكْفِيَكُمْ أَن يُمِدَّكُمْ رَبُّكُم بِثَلَـٰثَةِ ءَالَـٰفٍ مِّنَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ مُنزَلِينَ
١٢٤
بَلَىٰٓ ۚ إِن تَصْبِرُوا وَتَتَّقُوا وَيَأْتُوكُم مِّن فَوْرِهِمْ هَـٰذَا يُمْدِدْكُمْ رَبُّكُم بِخَمْسَةِ ءَالَـٰفٍ مِّنَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ مُسَوِّمِينَ
١٢٥
وَمَا جَعَلَهُ ٱللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰ لَكُمْ وَلِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُكُم بِهِۦ ۗ وَمَا ٱلنَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِندِ ٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ
١٢٦
لِيَقْطَعَ طَرَفًا مِّنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا أَوْ يَكْبِتَهُمْ فَيَنقَلِبُوا خَآئِبِينَ
١٢٧

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 123-127


अल्लाह ही फैसला करने वाला है।

128. आपको (ऐ पैग़म्बर) इस मामले में कोई दख़ल नहीं है। यह अल्लाह पर है कि वह उन पर दया करे या उन्हें सज़ा दे, क्योंकि वे वास्तव में ज़ालिम हैं। 129. अल्लाह ही का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है। वह जिसे चाहता है माफ़ करता है, और जिसे चाहता है सज़ा देता है। और अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, निहायत मेहरबान है।

لَيْسَ لَكَ مِنَ ٱلْأَمْرِ شَىْءٌ أَوْ يَتُوبَ عَلَيْهِمْ أَوْ يُعَذِّبَهُمْ فَإِنَّهُمْ ظَـٰلِمُونَ
١٢٨
وَلِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۚ يَغْفِرُ لِمَن يَشَآءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
١٢٩

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 128-129


सूद के विरुद्ध चेतावनी

130. ऐ ईमान लाने वालो! सूद (ब्याज) मत खाओ, उसे दुगुना-तिगुना करके। और अल्लाह से डरो, ताकि तुम कामयाब हो। 131. और उस आग से बचो जो काफ़िरों के लिए तैयार की गई है। 132. और अल्लाह और रसूल की आज्ञा मानो, ताकि तुम पर रहम किया जाए।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا لَا تَأْكُلُوا ٱلرِّبَوٰٓا أَضْعَـٰفًا مُّضَـٰعَفَةً ۖ وَٱتَّقُوا ٱللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
١٣٠
وَٱتَّقُوا ٱلنَّارَ ٱلَّتِىٓ أُعِدَّتْ لِلْكَـٰفِرِينَ
١٣١
وَأَطِيعُوا ٱللَّهَ وَٱلرَّسُولَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
١٣٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 130-132


नेक लोगों का अज्र

133. और अपने रब की क्षमा की ओर और उस जन्नत (स्वर्ग) की ओर दौड़ो जिसकी चौड़ाई आकाशों और पृथ्वी जितनी है, जो परहेज़गारों के लिए तैयार की गई है। 134. (वे) जो खुशहाली और तंगी में (अल्लाह की राह में) ख़र्च करते हैं, अपने क्रोध को काबू में रखते हैं, और लोगों को माफ़ करते हैं। और अल्लाह एहसान करने वालों को पसंद करता है। 135. (वे) जो जब कोई बुरा काम कर बैठते हैं या अपनी जानों पर ज़ुल्म करते हैं, तो अल्लाह को याद करते हैं और अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं, और जान-बूझकर अपने गुनाहों पर अड़े नहीं रहते—और अल्लाह के सिवा गुनाहों को कौन माफ़ कर सकता है? 136. उनका प्रतिफल उनके रब की ओर से क्षमा है और ऐसे बाग़ हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं, वे उनमें सदैव रहेंगे। क्या ही उत्तम प्रतिफल है नेक काम करने वालों के लिए!

۞ وَسَارِعُوٓا إِلَىٰ مَغْفِرَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا ٱلسَّمَـٰوَٰتُ وَٱلْأَرْضُ أُعِدَّتْ لِلْمُتَّقِينَ
١٣٣
ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ فِى ٱلسَّرَّآءِ وَٱلضَّرَّآءِ وَٱلْكَـٰظِمِينَ ٱلْغَيْظَ وَٱلْعَافِينَ عَنِ ٱلنَّاسِ ۗ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلْمُحْسِنِينَ
١٣٤
وَٱلَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَـٰحِشَةً أَوْ ظَلَمُوٓا أَنفُسَهُمْ ذَكَرُوا ٱللَّهَ فَٱسْتَغْفَرُوا لِذُنُوبِهِمْ وَمَن يَغْفِرُ ٱلذُّنُوبَ إِلَّا ٱللَّهُ وَلَمْ يُصِرُّوا عَلَىٰ مَا فَعَلُوا وَهُمْ يَعْلَمُونَ
١٣٥
أُولَـٰٓئِكَ جَزَآؤُهُم مَّغْفِرَةٌ مِّن رَّبِّهِمْ وَجَنَّـٰتٌ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۚ وَنِعْمَ أَجْرُ ٱلْعَـٰمِلِينَ
١٣٦

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 133-136


हक़ और बातिल के बीच जंग

137. तुमसे पहले भी ऐसी मिसालें गुज़र चुकी हैं, तो ज़मीन में चलो फिरो और देखो झुठलाने वालों का क्या अंजाम हुआ। 138. यह लोगों के लिए एक सूझबूझ है—और मुत्तक़ियों के लिए एक मार्गदर्शन और नसीहत है।

قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِكُمْ سُنَنٌ فَسِيرُوا فِى ٱلْأَرْضِ فَٱنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلْمُكَذِّبِينَ
١٣٧
هَـٰذَا بَيَانٌ لِّلنَّاسِ وَهُدًى وَمَوْعِظَةٌ لِّلْمُتَّقِينَ
١٣٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 137-138


मोमिनों को आश्वस्त करना

139. न हिम्मत हारो और न ग़म करो, तुम ही ग़ालिब रहोगे, यदि तुम (सच्चे) मोमिन हो। 140. यदि तुम्हें (उहुद में) चोटें पहुँची हैं, तो उन्हें भी (बद्र में) वैसी ही चोटें पहुँची थीं। हम इन दिनों (विजय और पराजय के) को लोगों के बीच बदलते रहते हैं ताकि अल्लाह (सच्चे) मोमिनों को ज़ाहिर करे, और तुम में से शहीदों को चुने—और अल्लाह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता— 141. और (सच्चे) मोमिनों को अलग करे और काफ़िरों को नष्ट कर दे।

وَلَا تَهِنُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَنتُمُ ٱلْأَعْلَوْنَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
١٣٩
إِن يَمْسَسْكُمْ قَرْحٌ فَقَدْ مَسَّ ٱلْقَوْمَ قَرْحٌ مِّثْلُهُۥ ۚ وَتِلْكَ ٱلْأَيَّامُ نُدَاوِلُهَا بَيْنَ ٱلنَّاسِ وَلِيَعْلَمَ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا وَيَتَّخِذَ مِنكُمْ شُهَدَآءَ ۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ ٱلظَّـٰلِمِينَ
١٤٠
وَلِيُمَحِّصَ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا وَيَمْحَقَ ٱلْكَـٰفِرِينَ
١٤١

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 139-141


मोमिनों की आजमाइश

142. क्या तुम यह समझते हो कि तुम जन्नत में प्रवेश कर जाओगे, जबकि अल्लाह ने अभी तक यह सिद्ध नहीं किया कि तुम में से किसने (उसके मार्ग में) संघर्ष किया और धैर्य रखा? 143. तुमने निश्चित रूप से शहादत की कामना की थी, उसका सामना करने से पहले। अब तुमने उसे अपनी आँखों से देख लिया है।

أَمْ حَسِبْتُمْ أَن تَدْخُلُوا ٱلْجَنَّةَ وَلَمَّا يَعْلَمِ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ جَـٰهَدُوا مِنكُمْ وَيَعْلَمَ ٱلصَّـٰبِرِينَ
١٤٢
وَلَقَدْ كُنتُمْ تَمَنَّوْنَ ٱلْمَوْتَ مِن قَبْلِ أَن تَلْقَوْهُ فَقَدْ رَأَيْتُمُوهُ وَأَنتُمْ تَنظُرُونَ
١٤٣

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 142-143


मोमिनों का हतोत्साहित होना

144. मुहम्मद केवल एक रसूल हैं; उनसे पहले भी कई रसूल गुज़र चुके हैं। यदि वे मर जाएँ या क़त्ल कर दिए जाएँ, तो क्या तुम अपनी एड़ी के बल (कुफ़्र की ओर) फिर जाओगे? जो ऐसा करेगा, वह अल्लाह को ज़रा भी नुक़सान नहीं पहुँचाएगा। और अल्लाह कृतज्ञों को प्रतिफल देगा। 145. कोई जान अल्लाह की मर्ज़ी के बिना अपने निर्धारित समय पर नहीं मर सकती। जो दुनियावी लाभ चाहते हैं, हम उन्हें वह प्रदान करेंगे, और जो आखिरत का सवाब चाहते हैं, हम उन्हें वह प्रदान करेंगे। और हम शुक्रगुज़ार लोगों को इनाम देंगे।

وَمَا مُحَمَّدٌ إِلَّا رَسُولٌ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ ٱلرُّسُلُ ۚ أَفَإِين مَّاتَ أَوْ قُتِلَ ٱنقَلَبْتُمْ عَلَىٰٓ أَعْقَـٰبِكُمْ ۚ وَمَن يَنقَلِبْ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ فَلَن يَضُرَّ ٱللَّهَ شَيْـًٔا ۗ وَسَيَجْزِى ٱللَّهُ ٱلشَّـٰكِرِينَ
١٤٤
وَمَا كَانَ لِنَفْسٍ أَن تَمُوتَ إِلَّا بِإِذْنِ ٱللَّهِ كِتَـٰبًا مُّؤَجَّلًا ۗ وَمَن يُرِدْ ثَوَابَ ٱلدُّنْيَا نُؤْتِهِۦ مِنْهَا وَمَن يُرِدْ ثَوَابَ ٱلْـَٔاخِرَةِ نُؤْتِهِۦ مِنْهَا ۚ وَسَنَجْزِى ٱلشَّـٰكِرِينَ
١٤٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 144-145


साबिरों का अजर

146. कितने ही अल्लाह वाले अपने नबियों के साथ लड़े और अल्लाह की राह में जो कुछ भी उन्हें सहना पड़ा, उसके बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी, न वे कमज़ोर पड़े और न ही उन्होंने हार मानी! अल्लाह सब्र करने वालों को पसंद करता है। 147. और उन्होंने बस यही कहा, “ऐ हमारे रब! हमारे गुनाहों और हमारी ज्यादतियों को माफ़ कर दे, हमारे कदमों को जमा दे, और हमें काफ़िर कौम पर जीत अता फरमा।” 148. तो अल्लाह ने उन्हें इस दुनिया का प्रतिफल और आख़िरत का उत्तम प्रतिफल दिया। और अल्लाह एहसान करने वालों से प्रेम करता है।

وَكَأَيِّن مِّن نَّبِىٍّ قَـٰتَلَ مَعَهُۥ رِبِّيُّونَ كَثِيرٌ فَمَا وَهَنُوا لِمَآ أَصَابَهُمْ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَمَا ضَعُفُوا وَمَا ٱسْتَكَانُوا ۗ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلصَّـٰبِرِينَ
١٤٦
وَمَا كَانَ قَوْلَهُمْ إِلَّآ أَن قَالُوا رَبَّنَا ٱغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِىٓ أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَٱنصُرْنَا عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَـٰفِرِينَ
١٤٧
فَـَٔاتَىٰهُمُ ٱللَّهُ ثَوَابَ ٱلدُّنْيَا وَحُسْنَ ثَوَابِ ٱلْـَٔاخِرَةِ ۗ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلْمُحْسِنِينَ
١٤٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 146-148


काफ़िरों के आगे झुकना

149. ऐ ईमान वालो! यदि तुम इनकार करने वालों की बात मानोगे, तो वे तुम्हें फिर से कुफ़्र की ओर लौटा देंगे—और तुम घाटे में पड़ जाओगे। 150. बल्कि नहीं! अल्लाह ही तुम्हारा संरक्षक है, और वही सबसे बेहतरीन मददगार है। 151. हम काफ़िरों के दिलों में दहशत डाल देंगे, क्योंकि उन्होंने अल्लाह के साथ ऐसी चीज़ों को शरीक ठहराया है जिनके लिए उसने कोई प्रमाण नहीं उतारा। आग उनका ठिकाना होगी, और ज़ालिमों का क्या ही बुरा ठिकाना है!

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا إِن تُطِيعُوا ٱلَّذِينَ كَفَرُوا يَرُدُّوكُمْ عَلَىٰٓ أَعْقَـٰبِكُمْ فَتَنقَلِبُوا خَـٰسِرِينَ
١٤٩
بَلِ ٱللَّهُ مَوْلَىٰكُمْ ۖ وَهُوَ خَيْرُ ٱلنَّـٰصِرِينَ
١٥٠
سَنُلْقِى فِى قُلُوبِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا ٱلرُّعْبَ بِمَآ أَشْرَكُوا بِٱللَّهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِۦ سُلْطَـٰنًا ۖ وَمَأْوَىٰهُمُ ٱلنَّارُ ۚ وَبِئْسَ مَثْوَى ٱلظَّـٰلِمِينَ
١٥١

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 149-151


उहुद में फ़तह से वंचित

152. निश्चित रूप से अल्लाह ने तुमसे अपना वादा पूरा किया, जब तुम उसकी अनुमति से उन्हें (शुरुआत में) मार भगा रहे थे। फिर तुम्हारी हिम्मत पस्त हो गई और तुम हुक्म के बारे में झगड़ने लगे और नाफ़रमानी की, जबकि अल्लाह ने तुम्हें जीत के करीब ला दिया था। तुममें से कुछ दुनियावी लाभ चाहते थे जबकि कुछ आख़िरत का सवाब चाहते थे। उसने तुम्हें उन पर विजय से वंचित कर दिया, एक परीक्षा के तौर पर, फिर भी उसने तुम्हें माफ़ कर दिया है। और अल्लाह मोमिनों पर बड़ा कृपालु है।

وَلَقَدْ صَدَقَكُمُ ٱللَّهُ وَعْدَهُۥٓ إِذْ تَحُسُّونَهُم بِإِذْنِهِۦ ۖ حَتَّىٰٓ إِذَا فَشِلْتُمْ وَتَنَـٰزَعْتُمْ فِى ٱلْأَمْرِ وَعَصَيْتُم مِّنۢ بَعْدِ مَآ أَرَىٰكُم مَّا تُحِبُّونَ ۚ مِنكُم مَّن يُرِيدُ ٱلدُّنْيَا وَمِنكُم مَّن يُرِيدُ ٱلْـَٔاخِرَةَ ۚ ثُمَّ صَرَفَكُمْ عَنْهُمْ لِيَبْتَلِيَكُمْ ۖ وَلَقَدْ عَفَا عَنكُمْ ۗ وَٱللَّهُ ذُو فَضْلٍ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ
١٥٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 152-152


सेना की वापसी

153. (याद करो) जब तुम दूर भागते चले जा रहे थे—किसी की ओर मुड़कर भी नहीं देख रहे थे—जबकि रसूल तुम्हें पीछे से पुकार रहे थे! तो अल्लाह ने तुम्हारी नाफ़रमानी का बदला तुम्हें एक के बाद एक दुख देकर दिया। अब उस विजय पर दुख मत करो जिससे तुम्हें वंचित किया गया या उस क्षति पर जो तुम्हें पहुँची। और अल्लाह तुम्हारे हर काम से भली-भाँति अवगत है। 154. फिर उस दुख के बाद, उसने तुम पर ऊँघ के रूप में शांति/सुकून उतारा जिसने तुम में से कुछ को घेर लिया, जबकि दूसरों को अल्लाह के बारे में बुरे विचारों ने परेशान किया—जाहीलियत (अज्ञानता) के विचार। वे पूछते हैं, "क्या इस मामले में हमारा कोई अधिकार है?" कहो, (ऐ पैगंबर,) "सभी मामले अल्लाह के हाथ में हैं।" वे अपने दिलों में वह छिपाते हैं जो वे तुमसे ज़ाहिर नहीं करते। वे (आपस में) कहते हैं, "अगर इस मामले में हमारी चलती, तो हम में से कोई भी यहाँ मरने नहीं आता।" कहो, (ऐ पैगंबर,) "अगर तुम अपने घरों में भी रहते, तो भी तुम में से जिन्हें मारा जाना था, वे अपनी मौत से मिलते।" इसके ज़रिए, अल्लाह तुम्हारे अंदर की चीज़ों को आज़माता है और तुम्हारे दिलों को पाक करता है। और अल्लाह दिलों के भेदों को खूब जानता है।

۞ إِذْ تُصْعِدُونَ وَلَا تَلْوُۥنَ عَلَىٰٓ أَحَدٍ وَٱلرَّسُولُ يَدْعُوكُمْ فِىٓ أُخْرَىٰكُمْ فَأَثَـٰبَكُمْ غَمًّۢا بِغَمٍّ لِّكَيْلَا تَحْزَنُوا عَلَىٰ مَا فَاتَكُمْ وَلَا مَآ أَصَـٰبَكُمْ ۗ وَٱللَّهُ خَبِيرٌۢ بِمَا تَعْمَلُونَ
١٥٣
ثُمَّ أَنزَلَ عَلَيْكُم مِّنۢ بَعْدِ ٱلْغَمِّ أَمَنَةً نُّعَاسًا يَغْشَىٰ طَآئِفَةً مِّنكُمْ ۖ وَطَآئِفَةٌ قَدْ أَهَمَّتْهُمْ أَنفُسُهُمْ يَظُنُّونَ بِٱللَّهِ غَيْرَ ٱلْحَقِّ ظَنَّ ٱلْجَـٰهِلِيَّةِ ۖ يَقُولُونَ هَل لَّنَا مِنَ ٱلْأَمْرِ مِن شَىْءٍ ۗ قُلْ إِنَّ ٱلْأَمْرَ كُلَّهُۥ لِلَّهِ ۗ يُخْفُونَ فِىٓ أَنفُسِهِم مَّا لَا يُبْدُونَ لَكَ ۖ يَقُولُونَ لَوْ كَانَ لَنَا مِنَ ٱلْأَمْرِ شَىْءٌ مَّا قُتِلْنَا هَـٰهُنَا ۗ قُل لَّوْ كُنتُمْ فِى بُيُوتِكُمْ لَبَرَزَ ٱلَّذِينَ كُتِبَ عَلَيْهِمُ ٱلْقَتْلُ إِلَىٰ مَضَاجِعِهِمْ ۖ وَلِيَبْتَلِىَ ٱللَّهُ مَا فِى صُدُورِكُمْ وَلِيُمَحِّصَ مَا فِى قُلُوبِكُمْ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
١٥٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 153-154


भगोड़े

155. निश्चित रूप से, वे (ईमान वाले) जो उस दिन पीठ फेर कर भागे जब दोनों सेनाएँ आमने-सामने हुईं, शैतान ने उन्हें उनके कुछ कर्मों के कारण बहका दिया था। लेकिन अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया है। बेशक अल्लाह बड़ा बख्शने वाला, बड़ा सहनशील (हलीम) है।

إِنَّ ٱلَّذِينَ تَوَلَّوْا مِنكُمْ يَوْمَ ٱلْتَقَى ٱلْجَمْعَانِ إِنَّمَا ٱسْتَزَلَّهُمُ ٱلشَّيْطَـٰنُ بِبَعْضِ مَا كَسَبُوا ۖ وَلَقَدْ عَفَا ٱللَّهُ عَنْهُمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ حَلِيمٌ
١٥٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 155-155


सब कुछ तक़दीर है।

156. ऐ ईमान वालो! उन काफ़िरों जैसे मत बनो जो अपने उन भाइयों के बारे में कहते हैं जो ज़मीन में सफर करते हैं या जिहाद में लगे होते हैं, "अगर वे हमारे पास रहते, तो न मरते और न मारे जाते।" अल्लाह ऐसी सोच को उनके दिलों में पछतावे का कारण बनाता है। अल्लाह ही जीवन देता है और मृत्यु देता है। और अल्लाह तुम्हारे सभी कर्मों को देखने वाला है। 157. यदि तुम अल्लाह के मार्ग में शहीद हो जाओ या मर जाओ, तो उसकी क्षमा और दया उन सब चीज़ों से कहीं बेहतर है जो वे (पीछे रहने वाले) जमा करते हैं। 158. चाहे तुम मर जाओ या शहीद हो जाओ—तुम सब अल्लाह के सामने इकट्ठा किए जाओगे।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا لَا تَكُونُوا كَٱلَّذِينَ كَفَرُوا وَقَالُوا لِإِخْوَٰنِهِمْ إِذَا ضَرَبُوا فِى ٱلْأَرْضِ أَوْ كَانُوا غُزًّى لَّوْ كَانُوا عِندَنَا مَا مَاتُوا وَمَا قُتِلُوا لِيَجْعَلَ ٱللَّهُ ذَٰلِكَ حَسْرَةً فِى قُلُوبِهِمْ ۗ وَٱللَّهُ يُحْىِۦ وَيُمِيتُ ۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
١٥٦
وَلَئِن قُتِلْتُمْ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ أَوْ مُتُّمْ لَمَغْفِرَةٌ مِّنَ ٱللَّهِ وَرَحْمَةٌ خَيْرٌ مِّمَّا يَجْمَعُونَ
١٥٧
وَلَئِن مُّتُّمْ أَوْ قُتِلْتُمْ لَإِلَى ٱللَّهِ تُحْشَرُونَ
١٥٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 156-158


पैगंबर की मोमिनों पर दयालुता

159. यह अल्लाह की दया के कारण ही है कि तुम (हे पैगंबर) उनके प्रति नरम दिल रहे हो। यदि तुम कठोर या सख्त दिल होते, तो वे निश्चित रूप से तुम्हारे पास से बिखर जाते। तो उन्हें माफ़ करो, उनके लिए अल्लाह से माफ़ी माँगो, और मामलों में उनसे सलाह-मशवरा करो। जब तुम कोई इरादा कर लो, तो अल्लाह पर भरोसा रखो। निश्चित रूप से अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो उस पर भरोसा करते हैं।

فَبِمَا رَحْمَةٍ مِّنَ ٱللَّهِ لِنتَ لَهُمْ ۖ وَلَوْ كُنتَ فَظًّا غَلِيظَ ٱلْقَلْبِ لَٱنفَضُّوا مِنْ حَوْلِكَ ۖ فَٱعْفُ عَنْهُمْ وَٱسْتَغْفِرْ لَهُمْ وَشَاوِرْهُمْ فِى ٱلْأَمْرِ ۖ فَإِذَا عَزَمْتَ فَتَوَكَّلْ عَلَى ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُتَوَكِّلِينَ
١٥٩

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 159-159


विजय अल्लाह की ओर से है

160. यदि अल्लाह तुम्हारी मदद करे, तो कोई तुम्हें हरा नहीं सकता। और यदि वह तुम्हें मदद से वंचित कर दे, तो फिर कौन है जो तुम्हारी मदद कर सकता है? अतः ईमानवालों को अल्लाह पर ही भरोसा रखना चाहिए।

إِن يَنصُرْكُمُ ٱللَّهُ فَلَا غَالِبَ لَكُمْ ۖ وَإِن يَخْذُلْكُمْ فَمَن ذَا ٱلَّذِى يَنصُرُكُم مِّنۢ بَعْدِهِۦ ۗ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ
١٦٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 160-160


माल-ए-ग़नीमत

161. किसी नबी के लिए यह उचित नहीं कि वह ग़नीमत में से कुछ ग़बन करे। और जो कोई ऐसा करेगा, उसे क़यामत के दिन उसके साथ लाया जाएगा। फिर हर जान को उसके किए का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा, और उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा।

وَمَا كَانَ لِنَبِىٍّ أَن يَغُلَّ ۚ وَمَن يَغْلُلْ يَأْتِ بِمَا غَلَّ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ ثُمَّ تُوَفَّىٰ كُلُّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
١٦١

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 161-161


सदाचारी और दुराचारी

162. क्या वे लोग जो अल्लाह की ख़ुशी चाहते हैं, उन लोगों जैसे हो सकते हैं जो अल्लाह के ग़ज़ब के हक़दार हैं? जहन्नम उनका ठिकाना है, और वह कितना बुरा ठिकाना है! 163. उनके लिए अल्लाह के पास अलग-अलग दर्जे हैं। और अल्लाह उनके सब कामों को भली-भाँति देखने वाला है।

أَفَمَنِ ٱتَّبَعَ رِضْوَٰنَ ٱللَّهِ كَمَنۢ بَآءَ بِسَخَطٍ مِّنَ ٱللَّهِ وَمَأْوَىٰهُ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
١٦٢
هُمْ دَرَجَـٰتٌ عِندَ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ بَصِيرٌۢ بِمَا يَعْمَلُونَ
١٦٣

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 162-163


पैगंबर एक रहमत के रूप में

164. बेशक अल्लाह ने ईमानवालों पर बड़ा एहसान किया, जब उसने उन्हीं में से एक रसूल भेजा, जो उन्हें उसकी आयतें सुनाता है, उन्हें पाक करता है और उन्हें किताब और हिकमत सिखाता है। जबकि वे इससे पहले खुली गुमराही में थे।

لَقَدْ مَنَّ ٱللَّهُ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ إِذْ بَعَثَ فِيهِمْ رَسُولًا مِّنْ أَنفُسِهِمْ يَتْلُوا عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتِهِۦ وَيُزَكِّيهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحِكْمَةَ وَإِن كَانُوا مِن قَبْلُ لَفِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ
١٦٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 164-164


उहुद के युद्ध से सबक

165. तुम्हें जब कोई मुसीबत पहुँची (उहुद में), जबकि तुम अपने दुश्मनों को उससे दुगनी मुसीबत पहुँचा चुके थे (बद्र में), तो तुमने कहा, “यह कहाँ से आ गई?” कहो, “यह तुम्हारी अपनी तरफ़ से है।” बेशक अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। 166. तो जिस दिन दोनों सेनाएँ मिलीं, उस दिन तुम्हें जो कुछ पहुँचा, वह अल्लाह की अनुमति से था, ताकि वह ईमानवालों को पहचान ले। 167. और मुनाफ़िक़ों को उजागर करे। जब उनसे कहा गया, “आओ, अल्लाह के मार्ग में युद्ध करो या (कम से कम) अपना बचाव करो,” तो उन्होंने उत्तर दिया, “यदि हमें पता होता कि लड़ाई होगी, तो हम अवश्य तुम्हारे साथ चलते।” उस दिन वे ईमान की अपेक्षा कुफ़्र के अधिक निकट थे—क्योंकि वे अपने मुँह से वह कहते थे जो उनके दिलों में न था। अल्लाह भली-भाँति जानता है जो वे छिपाते हैं। 168. जो लोग घर पर बैठे रहे, अपने भाइयों के बारे में कहते हुए, “यदि वे हमारी बात मानते, तो मारे न जाते।” कहो, (ऐ पैग़म्बर,) “तुम मौत को टाल कर देख लो, यदि तुम सच्चे हो!”

أَوَلَمَّآ أَصَـٰبَتْكُم مُّصِيبَةٌ قَدْ أَصَبْتُم مِّثْلَيْهَا قُلْتُمْ أَنَّىٰ هَـٰذَا ۖ قُلْ هُوَ مِنْ عِندِ أَنفُسِكُمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
١٦٥
وَمَآ أَصَـٰبَكُمْ يَوْمَ ٱلْتَقَى ٱلْجَمْعَانِ فَبِإِذْنِ ٱللَّهِ وَلِيَعْلَمَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
١٦٦
وَلِيَعْلَمَ ٱلَّذِينَ نَافَقُوا ۚ وَقِيلَ لَهُمْ تَعَالَوْا قَـٰتِلُوا فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ أَوِ ٱدْفَعُوا ۖ قَالُوا لَوْ نَعْلَمُ قِتَالًا لَّٱتَّبَعْنَـٰكُمْ ۗ هُمْ لِلْكُفْرِ يَوْمَئِذٍ أَقْرَبُ مِنْهُمْ لِلْإِيمَـٰنِ ۚ يَقُولُونَ بِأَفْوَٰهِهِم مَّا لَيْسَ فِى قُلُوبِهِمْ ۗ وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يَكْتُمُونَ
١٦٧
ٱلَّذِينَ قَالُوا لِإِخْوَٰنِهِمْ وَقَعَدُوا لَوْ أَطَاعُونَا مَا قُتِلُوا ۗ قُلْ فَٱدْرَءُوا عَنْ أَنفُسِكُمُ ٱلْمَوْتَ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
١٦٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 165-168


शहीद सम्मानित

169. अल्लाह की राह में शहीद हुए लोगों को कभी मृत मत समझो। बल्कि वे अपने रब के पास जीवित हैं, और उन्हें भरपूर रिज़्क़ दिया जा रहा है— 170. अल्लाह के अनुग्रहों पर प्रसन्न होते हुए और उन लोगों के लिए भी हर्षित होते हुए जो अभी उनसे नहीं मिले हैं। उन्हें न कोई भय होगा और न वे दुखी होंगे। 171. वे अल्लाह के अनुग्रह और उसकी कृपा पाकर हर्षित हैं, और इस बात पर भी कि अल्लाह ईमान वालों के प्रतिफल को व्यर्थ नहीं करता।

وَلَا تَحْسَبَنَّ ٱلَّذِينَ قُتِلُوا فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ أَمْوَٰتًۢا ۚ بَلْ أَحْيَآءٌ عِندَ رَبِّهِمْ يُرْزَقُونَ
١٦٩
فَرِحِينَ بِمَآ ءَاتَىٰهُمُ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ وَيَسْتَبْشِرُونَ بِٱلَّذِينَ لَمْ يَلْحَقُوا بِهِم مِّنْ خَلْفِهِمْ أَلَّا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
١٧٠
۞ يَسْتَبْشِرُونَ بِنِعْمَةٍ مِّنَ ٱللَّهِ وَفَضْلٍ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
١٧١

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 169-171


सब्र करने वालों का अज्र

172. जिन्होंने अपनी चोट लगने के बाद भी अल्लाह और उसके रसूल की पुकार का जवाब दिया, उनमें से जिन्होंने नेक अमल किए और परहेज़गार रहे, उनके लिए बहुत बड़ा अज्र है। 173. जिन लोगों से कहा गया कि "तुम्हारे दुश्मन तुम्हारे ख़िलाफ़ फ़ौजें जमा कर चुके हैं, सो उनसे डरो," तो इस बात ने उनके ईमान को और बढ़ा दिया और उन्होंने जवाब दिया, "हमारे लिए अल्लाह ही काफ़ी है और वह बेहतरीन कारसाज़ है।" 174. तो वे अल्लाह के फ़ज़ल और इनाम के साथ लौटे, उन्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचा। क्योंकि उन्होंने अल्लाह की रज़ा चाही थी। और यक़ीनन अल्लाह बड़े फ़ज़ल वाला है। 175. वह (भय) तो केवल शैतान की ओर से था, जो तुम्हें अपने अनुयायियों से डराना चाहता था। अतः तुम उनसे न डरो, बल्कि मुझसे डरो यदि तुम (वास्तविक) मोमिन हो।

ٱلَّذِينَ ٱسْتَجَابُوا لِلَّهِ وَٱلرَّسُولِ مِنۢ بَعْدِ مَآ أَصَابَهُمُ ٱلْقَرْحُ ۚ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا مِنْهُمْ وَٱتَّقَوْا أَجْرٌ عَظِيمٌ
١٧٢
ٱلَّذِينَ قَالَ لَهُمُ ٱلنَّاسُ إِنَّ ٱلنَّاسَ قَدْ جَمَعُوا لَكُمْ فَٱخْشَوْهُمْ فَزَادَهُمْ إِيمَـٰنًا وَقَالُوا حَسْبُنَا ٱللَّهُ وَنِعْمَ ٱلْوَكِيلُ
١٧٣
فَٱنقَلَبُوا بِنِعْمَةٍ مِّنَ ٱللَّهِ وَفَضْلٍ لَّمْ يَمْسَسْهُمْ سُوٓءٌ وَٱتَّبَعُوا رِضْوَٰنَ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ ذُو فَضْلٍ عَظِيمٍ
١٧٤
إِنَّمَا ذَٰلِكُمُ ٱلشَّيْطَـٰنُ يُخَوِّفُ أَوْلِيَآءَهُۥ فَلَا تَخَافُوهُمْ وَخَافُونِ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
١٧٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 172-175


काफ़िरों का भ्रम

176. (ऐ पैगंबर!) उन लोगों के लिए दुखी न हो जो कुफ्र की ओर तेज़ी से बढ़ते हैं। निश्चय ही वे अल्लाह को ज़रा भी हानि नहीं पहुँचा सकेंगे। यह अल्लाह की इच्छा है कि उन्हें आख़िरत में कोई हिस्सा न दे, और उन्हें एक बड़ी यातना मिलेगी। 177. जो लोग ईमान के बदले कुफ्र खरीदते हैं, वे अल्लाह को ज़रा भी हानि नहीं पहुँचा सकेंगे, और उन्हें एक दर्दनाक यातना मिलेगी। 178. जो लोग कुफ़्र करते हैं, वे यह हरगिज़ न समझें कि उन्हें मोहलत मिलना उनके लिए अच्छा है। उन्हें तो बस इसलिए मोहलत दी जाती है ताकि वे गुनाहों में और बढ़ें, और उनके लिए अपमानजनक अज़ाब है।

وَلَا يَحْزُنكَ ٱلَّذِينَ يُسَـٰرِعُونَ فِى ٱلْكُفْرِ ۚ إِنَّهُمْ لَن يَضُرُّوا ٱللَّهَ شَيْـًٔا ۗ يُرِيدُ ٱللَّهُ أَلَّا يَجْعَلَ لَهُمْ حَظًّا فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
١٧٦
إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱشْتَرَوُا ٱلْكُفْرَ بِٱلْإِيمَـٰنِ لَن يَضُرُّوا ٱللَّهَ شَيْـًٔا وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
١٧٧
وَلَا يَحْسَبَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا أَنَّمَا نُمْلِى لَهُمْ خَيْرٌ لِّأَنفُسِهِمْ ۚ إِنَّمَا نُمْلِى لَهُمْ لِيَزْدَادُوٓا إِثْمًا ۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
١٧٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 176-178


निष्ठा की परीक्षा

179. अल्लाह मोमिनों को उस हालत में नहीं छोड़ेगा जिसमें तुम थे, जब तक वह पाक को नापाक से अलग न कर दे। और न ही अल्लाह तुम्हें (सीधे) ग़ैब की ख़बर देता है, बल्कि वह अपने रसूलों में से जिसे चाहता है चुन लेता है। तो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ। और यदि तुम ईमान लाओ और परहेज़गारी करो, तो तुम्हें बहुत बड़ा अज्र मिलेगा।

مَّا كَانَ ٱللَّهُ لِيَذَرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ عَلَىٰ مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ حَتَّىٰ يَمِيزَ ٱلْخَبِيثَ مِنَ ٱلطَّيِّبِ ۗ وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُطْلِعَكُمْ عَلَى ٱلْغَيْبِ وَلَـٰكِنَّ ٱللَّهَ يَجْتَبِى مِن رُّسُلِهِۦ مَن يَشَآءُ ۖ فَـَٔامِنُوا بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦ ۚ وَإِن تُؤْمِنُوا وَتَتَّقُوا فَلَكُمْ أَجْرٌ عَظِيمٌ
١٧٩

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 179-179


कंजूसों का प्रतिफल

180. और जो लोग अल्लाह की दी हुई चीज़ों में बख़ीली करते हैं, वे हरगिज़ यह न समझें कि यह उनके लिए अच्छा है, बल्कि यह उनके लिए बुरा है! जिस चीज़ में उन्होंने बख़ीली की थी, क़यामत के दिन उसे उनके गले का तौक़ बनाया जाएगा। और अल्लाह ही आसमानों और ज़मीन का वारिस है। और अल्लाह तुम्हारे हर अमल से ख़ूब वाक़िफ़ है।

وَلَا يَحْسَبَنَّ ٱلَّذِينَ يَبْخَلُونَ بِمَآ ءَاتَىٰهُمُ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ هُوَ خَيْرًا لَّهُم ۖ بَلْ هُوَ شَرٌّ لَّهُمْ ۖ سَيُطَوَّقُونَ مَا بَخِلُوا بِهِۦ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۗ وَلِلَّهِ مِيرَٰثُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
١٨٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 180-180


ईशनिंदा उजागर

181. निःसंदेह, अल्लाह ने उन (यहूदियों में से) लोगों की बात सुनी जिन्होंने कहा, "अल्लाह गरीब है; हम अमीर हैं!" हमने निश्चित रूप से उनकी बदनामी और नबियों को अन्यायपूर्वक कत्ल करने को दर्ज कर लिया है। फिर हम कहेंगे, "जलन के अज़ाब का स्वाद चखो!" 182. यह उसका प्रतिफल है जो तुम्हारे हाथों ने किया है। और अल्लाह अपने बंदों पर कभी ज़ुल्म नहीं करता।"

لَّقَدْ سَمِعَ ٱللَّهُ قَوْلَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا إِنَّ ٱللَّهَ فَقِيرٌ وَنَحْنُ أَغْنِيَآءُ ۘ سَنَكْتُبُ مَا قَالُوا وَقَتْلَهُمُ ٱلْأَنۢبِيَآءَ بِغَيْرِ حَقٍّ وَنَقُولُ ذُوقُوا عَذَابَ ٱلْحَرِيقِ
١٨١
ذَٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيكُمْ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَيْسَ بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِيدِ
١٨٢

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 181-182


अल्लाह के रसूलों को ठुकराना

183. वे (वही लोग हैं) जो कहते हैं, "अल्लाह ने हमें हुक्म दिया है कि हम किसी रसूल पर ईमान न लाएँ जब तक कि वह हमारे पास ऐसी क़ुर्बानी न लाए जिसे आग (आसमान से) खा जाए।" कहो, (ऐ पैगंबर,) "मुझसे पहले भी दूसरे पैगंबर तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ और (यहाँ तक कि) जो तुमने माँगा था, वह लेकर आए थे—तो फिर तुमने उन्हें क्यों मार डाला, यदि तुम्हारी बात सच है?" 184. यदि वे तुम्हें झुठलाते हैं, तो तुमसे पहले भी रसूल झुठलाए गए थे जो स्पष्ट प्रमाणों, आसमानी किताबों और प्रकाशमान धर्मग्रंथों के साथ आए थे।

ٱلَّذِينَ قَالُوٓا إِنَّ ٱللَّهَ عَهِدَ إِلَيْنَآ أَلَّا نُؤْمِنَ لِرَسُولٍ حَتَّىٰ يَأْتِيَنَا بِقُرْبَانٍ تَأْكُلُهُ ٱلنَّارُ ۗ قُلْ قَدْ جَآءَكُمْ رُسُلٌ مِّن قَبْلِى بِٱلْبَيِّنَـٰتِ وَبِٱلَّذِى قُلْتُمْ فَلِمَ قَتَلْتُمُوهُمْ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
١٨٣
فَإِن كَذَّبُوكَ فَقَدْ كُذِّبَ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ جَآءُو بِٱلْبَيِّنَـٰتِ وَٱلزُّبُرِ وَٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُنِيرِ
١٨٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 183-184


मृत्यु अटल है

185. हर जान मौत का मज़ा चखेगी। और तुम्हें तुम्हारा पूरा प्रतिफल क़यामत के दिन ही मिलेगा। तो जो कोई आग से बचा लिया गया और जन्नत में दाख़िल कर दिया गया, वह सफल हो गया, जबकि यह सांसारिक जीवन धोखे के सामान के सिवा कुछ नहीं है।

كُلُّ نَفْسٍ ذَآئِقَةُ ٱلْمَوْتِ ۗ وَإِنَّمَا تُوَفَّوْنَ أُجُورَكُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۖ فَمَن زُحْزِحَ عَنِ ٱلنَّارِ وَأُدْخِلَ ٱلْجَنَّةَ فَقَدْ فَازَ ۗ وَمَا ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَآ إِلَّا مَتَـٰعُ ٱلْغُرُورِ
١٨٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 185-185


धैर्य की परीक्षा

186. तुम्हें अवश्य ही तुम्हारे माल और तुम्हारी जानों में आज़माया जाएगा, और तुम अवश्य ही बहुत-सी कष्टदायक बातें सुनोगे उनसे जिन्हें तुमसे पहले किताब दी गई थी और मुशरिकों से। लेकिन यदि तुम धैर्य रखो और अल्लाह से डरते रहो, तो निःसंदेह यह बड़े दृढ़ संकल्प के कामों में से है।

۞ لَتُبْلَوُنَّ فِىٓ أَمْوَٰلِكُمْ وَأَنفُسِكُمْ وَلَتَسْمَعُنَّ مِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا ٱلْكِتَـٰبَ مِن قَبْلِكُمْ وَمِنَ ٱلَّذِينَ أَشْرَكُوٓا أَذًى كَثِيرًا ۚ وَإِن تَصْبِرُوا وَتَتَّقُوا فَإِنَّ ذَٰلِكَ مِنْ عَزْمِ ٱلْأُمُورِ
١٨٦

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 186-186


अल्लाह का अहद तोड़ना

187. जब अल्लाह ने उन लोगों से प्रतिज्ञा ली जिन्हें ग्रन्थ दिया गया था कि वे उसे लोगों पर प्रकट करें और उसे छिपाएँ नहीं, फिर भी उन्होंने उसे अपनी पीठ पीछे डाल दिया और उसके बदले क्षणिक लाभ प्राप्त किया। कितना बुरा सौदा! 188. जो लोग अपने कुकर्मों पर प्रसन्न होते हैं और जो काम उन्होंने नहीं किए, उनका श्रेय लेना पसंद करते हैं, वे यह न समझें कि वे अज़ाब से बच जाएँगे। उन्हें दर्दनाक अज़ाब मिलेगा।

وَإِذْ أَخَذَ ٱللَّهُ مِيثَـٰقَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا ٱلْكِتَـٰبَ لَتُبَيِّنُنَّهُۥ لِلنَّاسِ وَلَا تَكْتُمُونَهُۥ فَنَبَذُوهُ وَرَآءَ ظُهُورِهِمْ وَٱشْتَرَوْا بِهِۦ ثَمَنًا قَلِيلًا ۖ فَبِئْسَ مَا يَشْتَرُونَ
١٨٧
لَا تَحْسَبَنَّ ٱلَّذِينَ يَفْرَحُونَ بِمَآ أَتَوا وَّيُحِبُّونَ أَن يُحْمَدُوا بِمَا لَمْ يَفْعَلُوا فَلَا تَحْسَبَنَّهُم بِمَفَازَةٍ مِّنَ ٱلْعَذَابِ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
١٨٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 187-188


अल्लाह की निशानियाँ

189. आकाशों और धरती का राज्य अल्लाह ही का है। और अल्लाह हर चीज़ पर सामर्थ्यवान है। 190. बेशक, आसमानों और ज़मीन की पैदाइश में और दिन और रात के बदलने में अक़्ल वालों के लिए निशानियाँ हैं।

وَلِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
١٨٩
إِنَّ فِى خَلْقِ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَٱخْتِلَـٰفِ ٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ لَـَٔايَـٰتٍ لِّأُولِى ٱلْأَلْبَـٰبِ
١٩٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 189-190


नेक लोगों की दुआ

191. (वे) वे लोग हैं जो अल्लाह का ज़िक्र करते हैं खड़े हुए, बैठे हुए और अपनी करवटों पर लेटे हुए, और आसमानों और ज़मीन की पैदाइश पर ग़ौर करते हैं (और कहते हैं), "ऐ हमारे परवरदिगार! तूने यह सब बेमक़सद नहीं बनाया है। तू पाक है! हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।" 192. ऐ हमारे परवरदिगार! बेशक, जिन्हें तू जहन्नम में डालेगा, वे रुसवा होंगे! और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं होगा। 193. ऐ हमारे परवरदिगार! हमने पुकारने वाले को सुना जो ईमान की तरफ़ बुला रहा था कि अपने रब पर ईमान लाओ, तो हम ईमान ले आए। ऐ हमारे परवरदिगार! हमारे गुनाहों को बख़्श दे, और हमारी ख़ताओं को हमसे दूर कर दे, और हमें नेक लोगों के साथ मौत दे। 194. ऐ हमारे परवरदिगार! हमें वह अता फ़रमा जिसका तूने हमसे अपने रसूलों के ज़रिए वादा किया है, और हमें क़यामत के दिन रुसवा न कर। यकीनन तू अपने वादे का ख़िलाफ़ नहीं करता।

ٱلَّذِينَ يَذْكُرُونَ ٱللَّهَ قِيَـٰمًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِى خَلْقِ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَـٰذَا بَـٰطِلًا سُبْحَـٰنَكَ فَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ
١٩١
رَبَّنَآ إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ ٱلنَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُۥ ۖ وَمَا لِلظَّـٰلِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
١٩٢
رَّبَّنَآ إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِى لِلْإِيمَـٰنِ أَنْ ءَامِنُوا بِرَبِّكُمْ فَـَٔامَنَّا ۚ رَبَّنَا فَٱغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّـَٔاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ ٱلْأَبْرَارِ
١٩٣
رَبَّنَا وَءَاتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۗ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ ٱلْمِيعَادَ
١٩٤

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 191-194


दुआएँ क़बूल हुईं

195. तो उनके रब ने उनकी दुआ क़बूल फ़रमाई: "मैं तुम में से किसी भी अमल करने वाले के अमल का सवाब ज़ाया नहीं करूँगा, चाहे वह मर्द हो या औरत। तुम सब एक दूसरे के हमजिंस हो। जिन लोगों ने हिजरत की या अपने घरों से निकाले गए, और मेरी राह में सताए गए, और लड़े और शहीद हुए—मैं यकीनन उनके गुनाहों को बख़्श दूँगा और उन्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल करूँगा जिनके नीचे नहरें बहती होंगी, यह अल्लाह की तरफ़ से सवाब होगा। और अल्लाह ही के पास बेहतरीन सवाब है!"

فَٱسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّى لَآ أُضِيعُ عَمَلَ عَـٰمِلٍ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ ۖ بَعْضُكُم مِّنۢ بَعْضٍ ۖ فَٱلَّذِينَ هَاجَرُوا وَأُخْرِجُوا مِن دِيَـٰرِهِمْ وَأُوذُوا فِى سَبِيلِى وَقَـٰتَلُوا وَقُتِلُوا لَأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّـَٔاتِهِمْ وَلَأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّـٰتٍ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ ثَوَابًا مِّنْ عِندِ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ عِندَهُۥ حُسْنُ ٱلثَّوَابِ
١٩٥

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 195-195


काफ़िरों का क्षणिक सुख

196. काफ़िरों की ज़मीन में फैली खुशहाली से धोखे में न पड़ो। 197. यह तो बस थोड़ा सा क्षणिक भोग है। फिर जहन्नम ही उनका ठिकाना होगा—और वह कितना बुरा ठिकाना है!

لَا يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا فِى ٱلْبِلَـٰدِ
١٩٦
مَتَـٰعٌ قَلِيلٌ ثُمَّ مَأْوَىٰهُمْ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ ٱلْمِهَادُ
١٩٧

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 196-197


मोमिनों का शाश्वत आनंद

198. लेकिन जो अपने रब से डरते हैं, वे ऐसे बाग़ों में होंगे जिनके नीचे नहरें बहती होंगी, जहाँ वे हमेशा रहेंगे—अल्लाह की ओर से एक ठिकाने के तौर पर। और जो अल्लाह के पास है, वह नेक लोगों के लिए सबसे उत्तम है।

لَـٰكِنِ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوْا رَبَّهُمْ لَهُمْ جَنَّـٰتٌ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَا نُزُلًا مِّنْ عِندِ ٱللَّهِ ۗ وَمَا عِندَ ٱللَّهِ خَيْرٌ لِّلْأَبْرَارِ
١٩٨

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 198-198


अहले किताब में से मोमिन

199. निश्चय ही अहले किताब (ग्रंथ वाले) में से कुछ ऐसे भी हैं जो अल्लाह पर और उस पर जो तुम्हें (मोमिनों को) अवतरित किया गया है और उस पर जो उन पर अवतरित किया गया था, सच्चा ईमान रखते हैं। वे अल्लाह के सामने विनम्र रहते हैं—अल्लाह की आयतों को तुच्छ लाभ के लिए कभी नहीं बेचते। उनका प्रतिफल उनके रब के पास है। निःसंदेह, अल्लाह हिसाब लेने में बहुत तेज़ है।

وَإِنَّ مِنْ أَهْلِ ٱلْكِتَـٰبِ لَمَن يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْكُمْ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِمْ خَـٰشِعِينَ لِلَّهِ لَا يَشْتَرُونَ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ ثَمَنًا قَلِيلًا ۗ أُولَـٰٓئِكَ لَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ
١٩٩

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 199-199


कामयाबी के लिए नसीहत

200. ऐ मोमिनो! सब्र करो, डटे रहो, मोर्चाबंदी करो और अल्लाह से डरो, ताकि तुम सफल हो जाओ।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا ٱصْبِرُوا وَصَابِرُوا وَرَابِطُوا وَٱتَّقُوا ٱللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
٢٠٠

Surah 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - Verses 200-200


Âli-'Imran () - अध्याय 3 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा