यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 11 - Hûd

Hûd (सूरह 11)

Hûd (Hûd)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचयStoriesUnseen

यह मक्की सूरह पैगंबर हूद (ﷺ) के नाम पर है, जिनकी कहानी आयतों 50-60 में वर्णित है। पिछली सूरह और सूरह 7 की तुलना में इस सूरह में नूह (ﷺ) का अधिक विस्तृत वर्णन मिलता है। पिछली सूरह की तरह ही, नष्ट किए गए काफ़िरों की कहानियाँ अरब के मूर्तिपूजकों को चेतावनी देने और पैगंबर (ﷺ) को उनकी अंतिम विजय का आश्वासन देने के लिए हैं, और इसमें परलोक में मोमिनों (विश्वासियों) के प्रतिफल और काफ़िरों (अविश्वासियों) के दंड का भी उल्लेख है। अल्लाह के नाम पर—जो अत्यंत दयावान, परम कृपालु है।

Hûd - Hûd

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अलिफ़-लाम-रा। यह एक ऐसी किताब है जिसकी आयतें सुदृढ़ की गई हैं और फिर भली-भाँति स्पष्ट की गई हैं। यह उस (सत्ता) की ओर से है जो हिकमत वाला, ख़बर रखने वाला है। "अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो। बेशक मैं उसकी ओर से तुम्हें चेतावनी देने वाला और खुशखबरी देने वाला हूँ।" और अपने रब से क्षमा माँगो और उसकी ओर तौबा करो। वह तुम्हें एक निश्चित अवधि तक उत्तम जीविका प्रदान करेगा और हर नेकी करने वाले को उसका प्रतिफल देगा। लेकिन यदि तुम मुँह मोड़ते हो, तो मैं तुम्हारे लिए एक भयानक दिन के अज़ाब से डरता हूँ।