This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Al-Kâfirûn (Surah 109)
الكَافِرُون (The Disbelievers)
Introduction
ऐसी सूचना मिलती है कि मुशरिकों ने एक साल के लिए अकेले अल्लाह की इबादत करने की पेशकश की, इस शर्त पर कि पैगंबर (ﷺ) एक साल तक उनके कई देवताओं की पूजा करें। तो यह मक्की सूरह नाज़िल हुई, उन्हें यह बताते हुए कि वे (ﷺ) अपने जीवन की अंतिम साँस तक केवल अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित रहेंगे, जो अगली सूरह का मुख्य बिंदु है। अल्लाह के नाम से जो परम कृपालु, अत्यंत दयावान है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.
अल्लाह की इबादत में कोई समझौता नहीं
1. कहो, ऐ काफ़िरो! 2. मैं उसकी इबादत नहीं करता जिसकी तुम इबादत करते हो, 3. और न तुम उसकी इबादत करते हो जिसकी मैं इबादत करता हूँ। 4. मैं हरगिज़ उसकी इबादत नहीं करूँगा जिसकी तुम इबादत करते हो, 5. और न तुम कभी उसकी इबादत करोगे जिसकी मैं इबादत करता हूँ। 6. तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है और मेरे लिए मेरा दीन।