This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 106 - قُرَيْش

Quraysh (Surah 106)

قُرَيْش (The People of Quraysh)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह पिछली सूरह की निरंतरता मानी जाती है। इसका सामान्य विचार यह है कि मक्का के मुशरिकों को काबा को हाथी वालों की सेना से बचाने के लिए केवल अल्लाह ही के प्रति कृतज्ञ और समर्पित होना चाहिए। जो अल्लाह के प्रति अविश्वासी हैं और असहायों के प्रति निर्दयी हैं, उनकी निंदा अगली सूरह में की जाती है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, परम दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

अल्लाह की मक्कावासियों पर बड़ी कृपा।

1. क़ुरैश को अभ्यस्त रूप से सुरक्षित रखने के लिए— 2. उनके व्यापारिक कारवाँ में सुरक्षित, सर्दियों में (यमन की ओर) और गर्मियों में (सीरिया की ओर)— 3. उन्हें इस (पवित्र) घर के रब की इबादत करनी चाहिए, 4. जिसने उन्हें भूख में खाना खिलाया और उन्हें डर से अमन दिया।

لِإِيلَـٰفِ قُرَيْشٍ
١
إِۦلَـٰفِهِمْ رِحْلَةَ ٱلشِّتَآءِ وَٱلصَّيْفِ
٢
فَلْيَعْبُدُوا رَبَّ هَـٰذَا ٱلْبَيْتِ
٣
ٱلَّذِىٓ أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍ وَءَامَنَهُم مِّنْ خَوْفٍۭ
٤

Surah 106 - قُرَيْش (कुरैश के लोग) - Verses 1-4


Quraysh () - अध्याय 106 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा