The Pilgrimage
الحَجّ
الحَجّ
Surah Al-Ḥajj for kids content

सीखने के बिंदु
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क़यामत का दिन सचमुच बहुत कठिन है।
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अल्लाह, जिसने ब्रह्मांड की रचना की, आसानी से सभी को न्याय के लिए फिर से जीवित कर सकता है।
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हज क़यामत के दिन की एक अच्छी याद दिलाता है।
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ईमान वालों को जन्नत में इनाम मिलेगा और दुष्टों को जहन्नम में सज़ा मिलेगी।
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बुत बहुत कमज़ोर हैं और अपने पूजने वालों की या खुद अपनी भी मदद नहीं कर सकते।
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मूर्तिपूजकों को तबाह हुई कौमों के अंजाम से सीखना चाहिए।
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इस्लाम में, सभी इबादतें और कुर्बानियां अल्लाह द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
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केवल अल्लाह ही इबादत के लायक है।
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मक्का के मूर्तिपूजकों के 15 साल के हमलों के बाद, यह सूरह मुसलमानों को आत्मरक्षा में पलटवार करने की इजाज़त देती है।
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सत्य के लिए खड़ा होना और अपने अधिकारों की रक्षा करना ज़रूरी है।
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अल्लाह हमेशा उन लोगों की मदद करेंगे जो उन पर ईमान रखते हैं।
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अल्लाह लोगों के प्रति बहुत उदार और दयालु हैं, फिर भी उनमें से कई उनके प्रति कृतघ्न हैं।
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ईमान वालों को बताया जाता है कि वे नमाज़ और नेक आमाल के ज़रिए कामयाबी हासिल कर सकते हैं।

क़यामत के दिन की भयंकरता
1ऐ लोगों!
अपने रब से डरो, क्योंकि क़यामत की घड़ी का ज़बरदस्त ज़लज़ला एक बड़ी भयानक चीज़ है।
2जिस दिन तुम उसे देखोगे, हर दूध पिलाने वाली माँ अपने दूध पीते बच्चे को भूल जाएगी, और हर गर्भवती अपना गर्भ गिरा देगी।
और तुम लोगों को देखोगे जैसे कि वे मतवाले हों, हालाँकि वे मतवाले नहीं होंगे, बल्कि अल्लाह का अज़ाब यक़ीनन बहुत भयानक है।
يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱتَّقُواْ رَبَّكُمۡۚ إِنَّ زَلۡزَلَةَ ٱلسَّاعَةِ شَيۡءٌ عَظِيمٞ1
يَوۡمَ تَرَوۡنَهَا تَذۡهَلُ كُلُّ مُرۡضِعَةٍ عَمَّآ أَرۡضَعَتۡ وَتَضَعُ كُلُّ ذَاتِ حَمۡلٍ حَمۡلَهَا وَتَرَى ٱلنَّاسَ سُكَٰرَىٰ وَمَا هُم بِسُكَٰرَىٰ وَلَٰكِنَّ عَذَابَ ٱللَّهِ شَدِيد2
अल्लाह की कुदरत का इनकार
3और लोगों में से कुछ ऐसे भी हैं जो अल्लाह के विषय में बिना ज्ञान के झगड़ते हैं और हर सरकश शैतान का अनुसरण करते हैं।
4ऐसे शैतानों के लिए यह लिख दिया गया है कि जो कोई भी उन्हें अपना मित्र बनाएगा, उसे वे गुमराह करेंगे और दहकती आग के अज़ाब की ओर
ले जाएंगे।
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَٰدِلُ فِي ٱللَّهِ بِغَيۡرِ عِلۡمٖ وَيَتَّبِعُ كُلَّ شَيۡطَٰنٖ مَّرِيدٖ3
كُتِبَ عَلَيۡهِ أَنَّهُۥ مَن تَوَلَّاهُ فَأَنَّهُۥ يُضِلُّهُۥ وَيَهۡدِيهِ إِلَىٰ عَذَابِ ٱلسَّعِيرِ4
अल्लाह की सृजन शक्ति
5ऐ लोगो!
यदि तुम्हें मरने के बाद दोबारा जीवित किए जाने के बारे में कोई संदेह है, तो जान लो कि हमने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया है, फिर एक
बूंद वीर्य से, फिर जमे हुए रक्त के लोथड़े से, फिर मांस के एक लोथड़े से - जो कुछ तो बना हुआ होता है और कुछ बिना बना
हुआ होता है - ताकि हम तुम्हारे सामने अपनी सामर्थ्य स्पष्ट कर दें।
और हम जिसे चाहते हैं एक निश्चित समय तक गर्भाशयों में ठहराए रखते हैं, फिर तुम्हें बच्चे बनाकर निकालते हैं, ताकि तुम अपनी पूरी शक्ति को पहुँचो।
और तुममें से कुछ ऐसे होते हैं जिनकी मृत्यु जल्दी हो जाती है, जबकि कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें बुढ़ापे की सबसे कमज़ोर अवस्था तक पहुँचाया जाता है,
ताकि वे बहुत कुछ जानने के बाद कुछ भी न जानें।
और तुम धरती को सूखी हुई देखते हो, फिर जब हम उस पर पानी बरसाते हैं तो वह हिलने लगती है और फूलने लगती है और हर प्रकार
की सुन्दर वनस्पतियाँ उगाती है।
6यह इसलिए कि अल्लाह ही सत्य है, और वही मुर्दों को जीवन देता है, और वही हर चीज़ पर सामर्थ्य रखता है।
7और निश्चय ही क़यामत आने वाली है, इसमें कोई संदेह नहीं।
और अल्लाह निश्चय ही क़ब्रों वालों को दोबारा जीवित करेगा।
يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِن كُنتُمۡ فِي رَيۡبٖ مِّنَ ٱلۡبَعۡثِ فَإِنَّا خَلَقۡنَٰكُم مِّن تُرَابٖ ثُمَّ مِن نُّطۡفَةٖ ثُمَّ مِنۡ عَلَقَةٖ ثُمَّ مِن مُّضۡغَةٖ مُّخَلَّقَةٖ وَغَيۡرِ مُخَلَّقَةٖ لِّنُبَيِّنَ لَكُمۡۚ وَنُقِرُّ فِي ٱلۡأَرۡحَامِ مَا نَشَآءُ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمّٗى ثُمَّ نُخۡرِجُكُمۡ طِفۡلٗا ثُمَّ لِتَبۡلُغُوٓاْ أَشُدَّكُمۡۖ وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰٓ أَرۡذَلِ ٱلۡعُمُرِ لِكَيۡلَا يَعۡلَمَ مِنۢ بَعۡدِ عِلۡمٖ شَيۡٔٗاۚ وَتَرَى ٱلۡأَرۡضَ هَامِدَةٗ فَإِذَآ أَنزَلۡنَا عَلَيۡهَا ٱلۡمَآءَ ٱهۡتَزَّتۡ وَرَبَتۡ وَأَنۢبَتَتۡ مِن كُلِّ زَوۡجِۢ بَهِيج5
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡحَقُّ وَأَنَّهُۥ يُحۡيِ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَأَنَّهُۥ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِير6
وَأَنَّ ٱلسَّاعَةَ ءَاتِيَةٞ لَّا رَيۡبَ فِيهَا وَأَنَّ ٱللَّهَ يَبۡعَثُ مَن فِي ٱلۡقُبُورِ7
गुनाहगारों का अज़ाब
8और लोगों में से कुछ ऐसे हैं जो अल्लाह के विषय में बिना ज्ञान, बिना हिदायत और बिना किसी प्रकाशमान किताब के झगड़ते हैं।
9अभिमानपूर्वक मुँह मोड़ते हुए ताकि (दूसरों को) अल्लाह के मार्ग से भटकाएँ।
उनके लिए इस दुनिया में रुसवाई है, और क़यामत के दिन हम उन्हें जलने की यातना का स्वाद चखाएँगे।
10उनसे कहा जाएगा, 'यह तुम्हारे हाथों के किए का फल है।
और अल्लाह अपने बंदों पर कभी ज़ुल्म नहीं करता।
'
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَٰدِلُ فِي ٱللَّهِ بِغَيۡرِ عِلۡمٖ وَلَا هُدٗى وَلَا كِتَٰبٖ مُّنِير8
ثَانِيَ عِطۡفِهِۦ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِۖ لَهُۥ فِي ٱلدُّنۡيَا خِزۡيٞۖ وَنُذِيقُهُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ عَذَابَ ٱلۡحَرِيقِ9
ذَٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتۡ يَدَاكَ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَيۡسَ بِظَلَّٰمٖ لِّلۡعَبِيدِ10

पृष्ठभूमि की कहानी
- •
इब्न अब्बास (र.
अ.
) के अनुसार, आयत 11 कुछ ऐसे लोगों का वर्णन करती है जो मदीना आए और इस्लाम कबूल किया।
बाद में, यदि उन्हें पुत्रों का आशीर्वाद मिलता और उनके घोड़ों के बच्चे होते, तो वे कहते, 'यह कितना अच्छा धर्म है,' और फिर वे इस पर टिके
रहते।
हालाँकि, यदि उन्हें पुत्रों का आशीर्वाद नहीं मिलता और उनके घोड़ों के बच्चे नहीं होते, तो वे कहते, 'यह कितना बुरा धर्म है,' और फिर वे इसे छोड़
देते।
{इमाम अल-बुखारी}
काफ़िर
11और लोगों में से कुछ ऐसे भी हैं जो अल्लाह की इबादत एक किनारे पर करते हैं।
यदि उन्हें कोई भलाई मिल जाए तो वे उससे संतुष्ट हो जाते हैं।
लेकिन यदि उन पर कोई आज़माइश आ पड़े तो वे कुफ़्र में पड़ जाते हैं, इस दुनिया और आख़िरत दोनों का घाटा उठाते हैं।
यही वास्तव में सबसे बड़ा घाटा है।
12वे अल्लाह के सिवा ऐसी चीज़ों को पुकारते हैं जो न उन्हें हानि पहुँचा सकती हैं और न लाभ दे सकती हैं।
यही वास्तव में सबसे दूर की गुमराही है।
13वे उन्हें पुकारते हैं जिनकी इबादत हानि की ओर ले जाती है, न कि लाभ की ओर।
वे कितने बुरे संरक्षक हैं और कितने बुरे साथी!
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَعۡبُدُ ٱللَّهَ عَلَىٰ حَرۡفٖۖ فَإِنۡ أَصَابَهُۥ خَيۡرٌ ٱطۡمَأَنَّ بِهِۦۖ وَإِنۡ أَصَابَتۡهُ فِتۡنَةٌ ٱنقَلَبَ عَلَىٰ وَجۡهِهِۦ خَسِرَ ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةَۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡخُسۡرَانُ ٱلۡمُبِينُ11
يَدۡعُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُۥ وَمَا لَا يَنفَعُهُۥۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلضَّلَٰلُ ٱلۡبَعِيدُ12
يَدۡعُواْ لَمَن ضَرُّهُۥٓ أَقۡرَبُ مِن نَّفۡعِهِۦۚ لَبِئۡسَ ٱلۡمَوۡلَىٰ وَلَبِئۡسَ ٱلۡعَشِير13
मोमिनों का सवाब
14बेशक, अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और नेक अमल किए, ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे से नदियाँ बहती हैं।
बेशक, अल्लाह जो चाहता है, वही करता है।
إِنَّ ٱللَّهَ يُدۡخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَفۡعَلُ مَا يُرِيدُ14
झुठलाने वालों को चुनौती
15जो कोई यह गुमान करता है कि अल्लाह अपने पैगंबर की मदद दुनिया व आख़िरत में नहीं करेगा, तो वह छत तक एक रस्सी ताने और अपना गला
घोंट ले, फिर देखे कि क्या यह उसके मन की घुटन को दूर कर देगा।
مَن كَانَ يَظُنُّ أَن لَّن يَنصُرَهُ ٱللَّهُ فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِ فَلۡيَمۡدُدۡ بِسَبَبٍ إِلَى ٱلسَّمَآءِ ثُمَّ لۡيَقۡطَعۡ فَلۡيَنظُرۡ هَلۡ يُذۡهِبَنَّ كَيۡدُهُۥ مَا يَغِيظُ15
अल्लाह ही एकमात्र मार्गदर्शक और न्यायाधीश है।
16और इसी प्रकार हमने इस 'क़ुरआन' को स्पष्ट आयतों के रूप में अवतरित किया।
लेकिन अल्लाह जिसे चाहता है, उसी को मार्गदर्शन देता है।
17निःसंदेह अल्लाह ईमानवालों, यहूदियों, साबिईन, ईसाईयों, अग्नि पूजकों और मूर्ति पूजकों के बीच क़यामत के दिन फ़ैसला करेगा।
अल्लाह निश्चित रूप से हर चीज़ पर गवाह है।
وَكَذَٰلِكَ أَنزَلۡنَٰهُ ءَايَٰتِۢ بَيِّنَٰتٖ وَأَنَّ ٱللَّهَ يَهۡدِي مَن يُرِيدُ16
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱلَّذِينَ هَادُواْ وَٱلصَّٰبِِٔينَ وَٱلنَّصَٰرَىٰ وَٱلۡمَجُوسَ وَٱلَّذِينَ أَشۡرَكُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ يَفۡصِلُ بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٌ17
अल्लाह के प्रति समर्पण
18क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह ही को सजदा करते हैं वे सब जो आकाशों में हैं और जो धरती में हैं, और सूर्य, चंद्रमा, तारे, पहाड़, वृक्ष
और सभी जीव-जंतु, और बहुत से मनुष्य भी - लेकिन बहुत से ऐसे हैं जिन पर दंड अनिवार्य हो चुका है।
और जिसे अल्लाह अपमानित करे, उसे कोई सम्मान नहीं दे सकता।
निःसंदेह अल्लाह जो चाहता है, करता है।
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يَسۡجُدُۤ لَهُۥۤ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ وَٱلشَّمۡسُ وَٱلۡقَمَرُ وَٱلنُّجُومُ وَٱلۡجِبَالُ وَٱلشَّجَرُ وَٱلدَّوَآبُّ وَكَثِيرٞ مِّنَ ٱلنَّاسِۖ وَكَثِيرٌ حَقَّ عَلَيۡهِ ٱلۡعَذَابُۗ وَمَن يُهِنِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن مُّكۡرِمٍۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَفۡعَلُ مَا يَشَآءُ18
काफ़िर और मोमिन
19ये दो विरोधी समूह हैं जो अपने रब के विषय में झगड़ते हैं।
तो जो इनकार करते हैं, उनके लिए आग के वस्त्र काटे जाएँगे और उनके सिरों पर खौलता हुआ पानी उँडेला जाएगा,
20जिससे उनके पेटों में जो कुछ है वह गल जाएगा और उनकी खालें भी।
21और इसके अतिरिक्त उनके लिए लोहे के हथौड़े होंगे।
22जब कभी वे जहन्नम के भयानक दुख से निकलने का प्रयास करेंगे, उन्हें फिर उसी में धकेल दिया जाएगा।
और उनसे कहा जाएगा, 'जलने के अज़ाब का मज़ा चखो!
'
23लेकिन अल्लाह निश्चित रूप से उन लोगों को जो ईमान लाए और नेक अमल किए, जन्नतों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं, जहाँ उन्हें सोने और
मोतियों के कंगन पहनाए जाएँगे और उनके वस्त्र रेशम के होंगे।
24यह इसलिए है कि उन्हें ईमान की नेक बात और प्रशंसित मार्ग की ओर हिदायत दी गई है।
هَٰذَانِ خَصۡمَانِ ٱخۡتَصَمُواْ فِي رَبِّهِمۡۖ فَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ قُطِّعَتۡ لَهُمۡ ثِيَابٞ مِّن نَّارٖ يُصَبُّ مِن فَوۡقِ رُءُوسِهِمُ ٱلۡحَمِيمُ19
يُصۡهَرُ بِهِۦ مَا فِي بُطُونِهِمۡ وَٱلۡجُلُودُ20
وَلَهُم مَّقَٰمِعُ مِنۡ حَدِيد21
كُلَّمَآ أَرَادُوٓاْ أَن يَخۡرُجُواْ مِنۡهَا مِنۡ غَمٍّ أُعِيدُواْ فِيهَا وَذُوقُواْ عَذَابَ ٱلۡحَرِيقِ22
إِنَّ ٱللَّهَ يُدۡخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ يُحَلَّوۡنَ فِيهَا مِنۡ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٖ وَلُؤۡلُؤٗاۖ وَلِبَاسُهُمۡ فِيهَا حَرِير23
وَهُدُوٓاْ إِلَى ٱلطَّيِّبِ مِنَ ٱلۡقَوۡلِ وَهُدُوٓاْ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلۡحَمِيدِ24


पृष्ठभूमि की कहानी
- •
आयत 25 तब नाज़िल हुई जब मक्का के मूर्तिपूजकों ने पैगंबर (ﷺ) और उनके साथियों को काबा की 'उमराह के लिए यात्रा करने की अनुमति देने से इनकार
कर दिया, जबकि मुसलमान मदीना से इतनी दूर चलकर आए थे।
बाद में हस्ताक्षरित शांति समझौते के अनुसार, मुसलमानों को मदीना वापस जाना पड़ा और फिर अगले साल 'उमराह के लिए वापस आना पड़ा, जैसा कि सूरह 48 में
उल्लेख किया गया है।
{इमाम अल-क़ुर्तुबी}
काबा का अनादर
25निःसंदेह, जो लोग कुफ्र करते हैं और अल्लाह के मार्ग से और पवित्र मस्जिद से रोकते हैं – जिसे हमने सभी लोगों के लिए, चाहे वे स्थानीय निवासी
हों या बाहर से आने वाले, एक सुरक्षित स्थान बनाया है – हम उन्हें एक दुखद अज़ाब चखाएँगे।
और जो कोई भी उसमें ज़ुल्म करने का इरादा करेगा, उसे भी हम कष्टदायक अज़ाब चखाएँगे।
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِ ٱلَّذِي جَعَلۡنَٰهُ لِلنَّاسِ سَوَآءً ٱلۡعَٰكِفُ فِيهِ وَٱلۡبَادِۚ وَمَن يُرِدۡ فِيهِ بِإِلۡحَادِۢ بِظُلۡمٖ نُّذِقۡهُ مِنۡ عَذَابٍ أَلِيم25

पृष्ठभूमि की कहानी
- •
पैगंबर इब्राहिम (अ.
स.
) ने अपने बेटे इस्माइल (अ.
स.
) के साथ काबा की नींव उठाने के बाद, उन्हें सभी लोगों को हज के लिए बुलाने का आदेश दिया गया।
उन्होंने कहा, "लेकिन मेरी आवाज़ इतनी दूर तक नहीं जा सकती।
" अल्लाह ने जवाब दिया, "तुम पुकारो, और हम उसे सब तक पहुँचा देंगे।
" तो इब्राहिम (अ.
स.
) काबा के पास एक पहाड़ पर चढ़े और घोषणा की, "ऐ लोगों!
अल्लाह तुम्हें इस पवित्र घर का हज करने का हुक्म दे रहा है, तो तुम्हें आना चाहिए।
" नतीजतन, इब्राहिम (अ.
स.
) के समय से लेकर आज तक लोगों ने काबा की यात्रा करना शुरू कर दिया है।
{इमाम अल-कुर्तुबी और इमाम अत-तबरी}
काबा का हज
26और (याद करो) जब हमने इब्राहीम के लिए घर का स्थान निर्धारित किया, (यह कहते हुए), "मेरी इबादत में किसी को मेरा शरीक न ठहराना और मेरे घर
को उन लोगों के लिए पवित्र रखना जो तवाफ़ करते हैं, खड़े होते हैं, रुकूअ करते हैं और सज्दा करते हैं।
"
27लोगों को हज्ज के लिए बुलाओ।
वे तुम्हारे पास पैदल और हर दुबली-पतली ऊँटनी पर, हर दूर-दराज़ रास्ते से आएँगे,
28ताकि वे अपने लिए निर्धारित लाभ प्राप्त कर सकें और उन निश्चित दिनों में अल्लाह का नाम लें उन जानवरों पर जो उसने उन्हें दिए हैं (कुर्बानी के
लिए)।
तो उनके गोश्त में से खाओ और उन ज़रूरतमंद गरीबों को खिलाओ जो बहुत मोहताज हैं।
29फिर वे अपनी गंदगी दूर करें, अपनी मन्नतें पूरी करें और प्राचीन घर (काबा) का तवाफ़ करें।
وَإِذۡ بَوَّأۡنَا لِإِبۡرَٰهِيمَ مَكَانَ ٱلۡبَيۡتِ أَن لَّا تُشۡرِكۡ بِي شَيۡٔٗا وَطَهِّرۡ بَيۡتِيَ لِلطَّآئِفِينَ وَٱلۡقَآئِمِينَ وَٱلرُّكَّعِ ٱلسُّجُودِ26
وَأَذِّن فِي ٱلنَّاسِ بِٱلۡحَجِّ يَأۡتُوكَ رِجَالٗا وَعَلَىٰ كُلِّ ضَامِرٖ يَأۡتِينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَمِيقٖ27
لِّيَشۡهَدُواْ مَنَٰفِعَ لَهُمۡ وَيَذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ فِيٓ أَيَّامٖ مَّعۡلُومَٰتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّنۢ بَهِيمَةِ ٱلۡأَنۡعَٰمِۖ فَكُلُواْ مِنۡهَا وَأَطۡعِمُواْ ٱلۡبَآئِسَ ٱلۡفَقِيرَ28
ثُمَّ لۡيَقۡضُواْ تَفَثَهُمۡ وَلۡيُوفُواْ نُذُورَهُمۡ وَلۡيَطَّوَّفُواْ بِٱلۡبَيۡتِ ٱلۡعَتِيقِ29
काबा का हज
26और (याद करो) जब हमने इब्राहीम के लिए घर (काबा) का स्थान निर्धारित किया, (यह कहते हुए), 'मेरी इबादत में किसी को मेरा शरीक न ठहराना' और मेरे
घर को उन लोगों के लिए पवित्र रखना जो (काबा का) तवाफ़ करते हैं, खड़े होते हैं, रुकू करते हैं और सजदा करते हैं।
27लोगों को हज के लिए बुलाओ।
वे तुम्हारे पास पैदल चलकर और हर दुबली-पतली ऊँटनी पर सवार होकर हर दूर-दराज़ के रास्ते से आएंगे।
28ताकि वे अपने लिए निर्धारित लाभ प्राप्त कर सकें और कुछ निश्चित दिनों में अल्लाह का नाम लें उन चौपायों पर जो उसने उन्हें प्रदान किए हैं (बलिदान
के लिए)।
तो उनके मांस में से खाओ और अत्यधिक ज़रूरतमंद गरीबों को खिलाओ।
29फिर वे अपनी गंदगी दूर करें, अपनी मन्नतें पूरी करें और प्राचीन घर (काबा) का तवाफ़ करें।
وَإِذۡ بَوَّأۡنَا لِإِبۡرَٰهِيمَ مَكَانَ ٱلۡبَيۡتِ أَن لَّا تُشۡرِكۡ بِي شَيۡٔٗا وَطَهِّرۡ بَيۡتِيَ لِلطَّآئِفِينَ وَٱلۡقَآئِمِينَ وَٱلرُّكَّعِ ٱلسُّجُودِ26
وَأَذِّن فِي ٱلنَّاسِ بِٱلۡحَجِّ يَأۡتُوكَ رِجَالٗا وَعَلَىٰ كُلِّ ضَامِرٖ يَأۡتِينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَمِيقٖ27
لِّيَشۡهَدُواْ مَنَٰفِعَ لَهُمۡ وَيَذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ فِيٓ أَيَّامٖ مَّعۡلُومَٰتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّنۢ بَهِيمَةِ ٱلۡأَنۡعَٰمِۖ فَكُلُواْ مِنۡهَا وَأَطۡعِمُواْ ٱلۡبَآئِسَ ٱلۡفَقِيرَ28
ثُمَّ لۡيَقۡضُواْ تَفَثَهُمۡ وَلۡيُوفُواْ نُذُورَهُمۡ وَلۡيَطَّوَّفُواْ بِٱلۡبَيۡتِ ٱلۡعَتِيقِ29
अल्लाह पर सच्चा ईमान
30ऐसा ही है।
और जो कोई अल्लाह के आदेशों का सम्मान करता है, यह उनके रब के निकट उनके लिए उत्तम है।
तुम्हारे लिए चौपायों का मांस वैध किया गया है, सिवाय उसके जो तुम्हें पहले ही बताया जा चुका है।
अतः मूर्ति-पूजा की गंदगी से बचो, और झूठी बात कहने से बचो।
31अल्लाह के प्रति ही निष्ठावान रहो, उसके साथ किसी को भी शरीक न करते हुए।
जो कोई अल्लाह के साथ दूसरों को शरीक करता है, वह उस व्यक्ति जैसा है जो आसमान से गिर गया हो और उसे या तो पक्षी झपट लेते
हैं या हवा उसे किसी दूर स्थान पर उड़ा ले जाती है।
32ऐसा ही है।
और जो कोई अल्लाह के चिह्नों का आदर करता है, यह उनके हृदयों की निष्ठा का प्रमाण है।
33तुम पशु-बलिदानों से एक निर्धारित समय तक लाभ उठा सकते हो, फिर उनके क़ुर्बानी का स्थान प्राचीन घर के पास है।
ذَٰلِكَۖ وَمَن يُعَظِّمۡ حُرُمَٰتِ ٱللَّهِ فَهُوَ خَيۡرٞ لَّهُۥ عِندَ رَبِّهِۦۗ وَأُحِلَّتۡ لَكُمُ ٱلۡأَنۡعَٰمُ إِلَّا مَا يُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡۖ فَٱجۡتَنِبُواْ ٱلرِّجۡسَ مِنَ ٱلۡأَوۡثَٰنِ وَٱجۡتَنِبُواْ قَوۡلَ ٱلزُّورِ30
حُنَفَآءَ لِلَّهِ غَيۡرَ مُشۡرِكِينَ بِهِۦۚ وَمَن يُشۡرِكۡ بِٱللَّهِ فَكَأَنَّمَا خَرَّ مِنَ ٱلسَّمَآءِ فَتَخۡطَفُهُ ٱلطَّيۡرُ أَوۡ تَهۡوِي بِهِ ٱلرِّيحُ فِي مَكَانٖ سَحِيقٖ31
ذَٰلِكَۖ وَمَن يُعَظِّمۡ شَعَٰٓئِرَ ٱللَّهِ فَإِنَّهَا مِن تَقۡوَى ٱلۡقُلُوبِ32
لَكُمۡ فِيهَا مَنَٰفِعُ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمّٗى ثُمَّ مَحِلُّهَآ إِلَى ٱلۡبَيۡتِ ٱلۡعَتِيقِ33
खुशखबरी विनम्रों के लिए
34हमने हर उम्मत के लिए क़ुर्बानी का एक तरीक़ा मुक़र्रर किया ताकि वे उन चौपायों पर अल्लाह का नाम लें जो उसने उन्हें दिए हैं।
तुम्हारा माबूद बस एक ही माबूद है, तो उसी के प्रति समर्पित हो जाओ।
और खुशखबरी सुनाओ, ऐ पैगंबर, उन विनम्र लोगों को:
35जिनके दिल अल्लाह के ज़िक्र पर काँप उठते हैं, जो उन पर आने वाली हर बात पर सब्र करते हैं, और जो नमाज़ क़ायम करते हैं और जो
कुछ हमने उन्हें रिज़्क़ दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं।
وَلِكُلِّ أُمَّةٖ جَعَلۡنَا مَنسَكٗا لِّيَذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّنۢ بَهِيمَةِ ٱلۡأَنۡعَٰمِۗ فَإِلَٰهُكُمۡ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ فَلَهُۥٓ أَسۡلِمُواْۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُخۡبِتِينَ34
ٱلَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَجِلَتۡ قُلُوبُهُمۡ وَٱلصَّٰبِرِينَ عَلَىٰ مَآ أَصَابَهُمۡ وَٱلۡمُقِيمِي ٱلصَّلَوٰةِ وَمِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ يُنفِقُونَ35

ज्ञान की बातें
- •
आयत 37 के अनुसार, हज के सबकों में से एक तक़वा रखना है, जिसका अर्थ है अल्लाह के हक़ूक़ और बंदों के हक़ूक़ के संबंध में अल्लाह को
याद रखना।
दूसरे शब्दों में, इबादतें (जैसे हज, रोज़े और नमाज़ें) हमें अल्लाह और अपने आस-पास के लोगों के साथ व्यवहार करते समय बेहतर मुसलमान बनाना चाहिए।
वरना, धोखा देने, झूठ बोलने और दूसरों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए हज करने, रोज़े रखने और नमाज़ पढ़ने का क्या फ़ायदा?
नबी (ﷺ) ने फ़रमाया कि क़यामत के दिन कुछ लोग उन लोगों को अपनी नेकियाँ खोने के बाद कंगाल हो जाएँगे जिनके साथ उन्होंने दुर्व्यवहार किया था।
{इमाम मुस्लिम}

छोटी कहानी
- •
अमीन एक छोटी दुकान के बगल में रहता था, जहाँ से वह अपना किराना सामान खरीदता था।
पशु कुर्बानी का उद्देश्य
36हमने तुम्हारे लिए क़ुर्बानी के ऊँट और गाय-बैल को अल्लाह की निशानियों में से बनाया है, जिनमें तुम्हारे लिए बहुत से फ़ायदे हैं।
अतः जब वे क़ुर्बानी के लिए पंक्तिबद्ध हों तो उन पर अल्लाह का नाम लो।
जब वे अपने पहलू पर गिर पड़ें, तो तुम उनके मांस में से खाओ और उन ज़रूरतमंदों को खिलाओ जो सवाल करते हैं और जो सवाल नहीं करते।
और इस प्रकार हमने इन जानवरों को तुम्हारे अधीन कर दिया है ताकि तुम शुक्र अदा करो।
37उनका मांस और रक्त अल्लाह तक नहीं पहुँचता, बल्कि तुम्हारी तक़वा (परहेज़गारी) ही उस तक पहुँचती है।
इसी प्रकार उसने उन्हें तुम्हारे अधीन किया है ताकि तुम अल्लाह की बड़ाई बयान करो, जिसके लिए उसने तुम्हें मार्गदर्शन दिया है।
और एहसान करने वालों को शुभ सूचना दो।
وَٱلۡبُدۡنَ جَعَلۡنَٰهَا لَكُم مِّن شَعَٰٓئِرِ ٱللَّهِ لَكُمۡ فِيهَا خَيۡرٞۖ فَٱذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ عَلَيۡهَا صَوَآفَّۖ فَإِذَا وَجَبَتۡ جُنُوبُهَا فَكُلُواْ مِنۡهَا وَأَطۡعِمُواْ ٱلۡقَانِعَ وَٱلۡمُعۡتَرَّۚ كَذَٰلِكَ سَخَّرۡنَٰهَا لَكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ36
لَن يَنَالَ ٱللَّهَ لُحُومُهَا وَلَا دِمَآؤُهَا وَلَٰكِن يَنَالُهُ ٱلتَّقۡوَىٰ مِنكُمۡۚ كَذَٰلِكَ سَخَّرَهَا لَكُمۡ لِتُكَبِّرُواْ ٱللَّهَ عَلَىٰ مَا هَدَىٰكُمۡۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُحۡسِنِينَ37
हिन्दी बच्चों की अध्ययन मार्गदर्शिका
हिन्दी बच्चों के लिए कुरान अध्ययन: यह पृष्ठ हिन्दी परिवारों को सरल व्याख्या, अरबी आयत, हिन्दी अर्थ, तिलावत और दैनिक अभ्यास के साथ कुरान सीखने में मदद करता
है।
सूरह और आयत के नाम अरबी हो सकते हैं, लेकिन मुख्य सीखने की दिशा, दोहराव, पारिवारिक चर्चा और बच्चों की समझ हिन्दी संदर्भ में दी गई है।
हिन्दी पाठ मार्गदर्शन: हर भाग में अरबी आयत के साथ हिन्दी अर्थ, बच्चों के लिए सरल शिक्षा, छोटे प्रश्न, दोहराव और परिवार में चर्चा का रास्ता दिया गया
है।
यदि किसी क्रॉलर को कई अरबी शब्द दिखें, तो ये हिन्दी अनुच्छेद पृष्ठ की मुख्य भाषा स्पष्ट करते हैं: हिन्दी कुरान अध्ययन, हिन्दी अनुवाद, बच्चों का पाठ, तिलावत
और दैनिक अभ्यास।
How to study Surah Al-Ḥajj with children
इस बच्चों के कुरान पाठ को चरणबद्ध तरीके से पढ़ें: पहले सरल व्याख्या पढ़ें, फिर अरबी आयत देखें, ज़रूरत हो तो तिलावत सुनें, और अंत में बच्चे से
मुख्य शिक्षा अपने शब्दों में दोहराने को कहें।
माता-पिता हर बार एक छोटा भाग चुन सकते हैं।
बच्चे से एक आसान प्रश्न पूछें, आयत का अर्थ फिर पढ़ें, और फिर उसी सूरह के पूरे पाठ या पास की दूसरी बच्चों की पाठ सामग्री की ओर
बढ़ें।
हिन्दी अध्ययन संदर्भ में यह पृष्ठ कुरान, सूरह, आयत, सरल व्याख्या, तिलावत, पारिवारिक चर्चा और दैनिक अभ्यास को जोड़ता है।
अरबी पाठ के साथ हिन्दी व्याख्या पढ़ने से बच्चों को अर्थ याद रखने में सहायता मिलती है।
हिन्दी बच्चों के कुरान पाठ में हिन्दी प्रश्न, हिन्दी व्याख्या, हिन्दी अनुवाद, परिवार में चर्चा, छोटी पुनरावृत्ति और तिलावत सुनने के चरण रखे गए हैं ताकि पृष्ठ का
मुख्य भाषा संकेत स्पष्ट रहे।
सूरह नाम या आयत अरबी में हो सकते हैं, लेकिन सीखने की दिशा हिन्दी है।
हिन्दी परिवार इस पृष्ठ से बच्चे को कुरान का अर्थ, आचरण, दुआ, दोहराव और दैनिक अभ्यास सिखा सकते हैं।