This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Al-Qadr (Surah 97)
القَدْر (The Night of Glory)
Introduction
चूँकि पिछली सूरह पहली वह्यी का स्मरण कराती है, यह मक्की सूरह उस गौरवशाली रात का जश्न मनाती है जब क़ुरआन नाज़िल हुआ, जिसे रमज़ान की 27वीं रात, 610 ईस्वी को माना जाता है। नबी (ﷺ) को क़ुरआन के साथ क्यों भेजा गया, इसका कारण अगली सूरह में स्पष्ट किया गया है। अल्लाह के नाम से—जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.
जिस रात कुरान नाज़िल हुई
1. निस्संदेह, हमने ही इस (क़ुरआन) को क़द्र की रात में उतारा। 2. और तुम्हें क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है? 3. क़द्र की रात हज़ार महीनों से बेहतर है। 4. उस रात फ़रिश्ते और रूह अपने रब की अनुमति से हर मामले के लिए उतरते हैं। 5. यह शांति ही शांति है भोर होने तक।