This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Ash-Shams (Surah 91)
الشَّمْس (The Sun)
Introduction
यह मक्की सूरह बताती है कि लोगों के पास अपनी आत्माओं को शुद्ध करने या भ्रष्ट करने का स्वतंत्र चुनाव है। जो शुद्धता चुनते हैं, वे सफल होंगे, और जो भ्रष्टता चुनते हैं, वे समूद के लोगों की तरह नष्ट कर दिए जाएँगे। स्वतंत्र चुनाव अगली सूरह का भी मुख्य बिंदु है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.
आत्मा का शुद्धिकरण और भ्रष्टीकरण
1. सूर्य और उसकी प्रभा की क़सम, 2. और चाँद की क़सम, जब वह उसका अनुसरण करता है, 3. और दिन की क़सम, जब वह उसे प्रकट करता है, 4. और रात जब वह उसे ढक लेती है! 5. और आकाश की क़सम और जिसने उसे बनाया, 6. और ज़मीन की क़सम और जिसने उसे फैलाया! 7. और नफ़्स की क़सम और उसकी जिसने उसे संवारा, 8. फिर उसे उसकी बुराई और उसकी भलाई का इल्हाम किया! 9. निश्चित रूप से सफल हुआ वह जिसने अपने नफ़्स को पाक किया, 10. और बर्बाद हुआ वह जिसने उसे भ्रष्ट किया!
Surah 91 - الشَّمْس (सूरज) - Verses 1-10
आत्मा का शुद्धिकरण और भ्रष्टीकरण
11. समूद ने अपनी सरकशी के कारण (सत्य को) झुठलाया, 12. जब उनमें का सबसे अभागा उठ खड़ा हुआ। 13. लेकिन अल्लाह के रसूल ने उन्हें आगाह किया, "अल्लाह की ऊँटनी और उसके पानी पीने की बारी को मत छेड़ना!" 14. फिर भी उन्होंने उसकी अवज्ञा की और उसे ज़बह कर दिया। तो उनके रब ने उन्हें उनके अपराध के लिए कुचल दिया, सबको ज़मीनदोज़ कर दिया। 15. उसे अंजाम का कोई ख़ौफ़ नहीं है।