यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 90 - البَلَد

Al-Balad (सूरह 90)

البَلَد (The City)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

इस मक्की सूरह का मूल विषय यह है कि मनुष्य को सही और गलत के बीच चुनाव करने के लिए आवश्यक क्षमताएँ प्रदान की गई हैं। नेक काम करने वालों को जन्नत का वादा किया गया है और बुरे काम करने वालों को जहन्नम का। इस विषय पर अगली सूरह में भी ज़ोर दिया गया है। अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान, रहम करने वाला है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

नाशुक्रे काफ़िर

1. क़सम है इस शहर की— 2. जबकि आप इस शहर में सताए जाते हैं— 3. और क़सम है हर वालिद और औलाद की! 4. निःसंदेह, हमने मनुष्य को निरंतर संघर्ष में पैदा किया है। 5. क्या वे सोचते हैं कि उन पर किसी का वश नहीं चलता, 6. शेखी बघारते हुए कहता है, "मैंने अपार धन लुटा दिया है!" 7. क्या वे सोचते हैं कि उन्हें कोई नहीं देखता? 8. क्या हमने उन्हें दो आँखें नहीं दीं, 9. एक ज़बान और दो होंठ? 10. और उन्हें दो मार्ग नहीं दिखाए?

لَآ أُقْسِمُ بِهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ
١
وَأَنتَ حِلٌّۢ بِهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ
٢
وَوَالِدٍ وَمَا وَلَدَ
٣
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِى كَبَدٍ
٤
أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌ
٥
يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًا لُّبَدًا
٦
أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُۥٓ أَحَدٌ
٧
أَلَمْ نَجْعَل لَّهُۥ عَيْنَيْنِ
٨
وَلِسَانًا وَشَفَتَيْنِ
٩
وَهَدَيْنَـٰهُ ٱلنَّجْدَيْنِ
١٠

सूरह 90 - البَلَد (शहर) - आयतें 1-10


नेकी का कठिन मार्ग

11. काश उन्होंने दुर्गम मार्ग पर चलने का प्रयास किया होता! 12. और तुम्हें क्या पता कि दुर्गम मार्ग क्या है? 13. एक दास को मुक्त करना है; 14. या अकाल के समय में भोजन देना 15. एक अनाथ रिश्तेदार को 16. या किसी संकटग्रस्त निर्धन को। 17. और, इन सबसे बढ़कर, उन लोगों में से होना जो ईमान लाए हैं और एक-दूसरे को सब्र की ताकीद करते हैं और एक-दूसरे को रहमत की ताकीद करते हैं। 18. यही लोग दाहिने हाथ वाले हैं। 19. और जो हमारी आयतों का इनकार करते हैं, वे बाईं ओर वाले हैं। 20. आग उन पर मुहर लगा दी जाएगी।

فَلَا ٱقْتَحَمَ ٱلْعَقَبَةَ
١١
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْعَقَبَةُ
١٢
فَكُّ رَقَبَةٍ
١٣
أَوْ إِطْعَـٰمٌ فِى يَوْمٍ ذِى مَسْغَبَةٍ
١٤
يَتِيمًا ذَا مَقْرَبَةٍ
١٥
أَوْ مِسْكِينًا ذَا مَتْرَبَةٍ
١٦
ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا وَتَوَاصَوْا بِٱلصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا بِٱلْمَرْحَمَةِ
١٧
أُولَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ
١٨
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا بِـَٔايَـٰتِنَا هُمْ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ
١٩
عَلَيْهِمْ نَارٌ مُّؤْصَدَةٌۢ
٢٠

सूरह 90 - البَلَد (शहर) - आयतें 11-20