यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 81 - التَّكْوِير

At-Takwîr (सूरह 81)

التَّكْوِير (Putting out ˹the Sun˺)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

यह मक्की सूरह क़यामत के दिन से पहले होने वाली कुछ प्रलयकारी घटनाओं का वर्णन करती है, यह बताते हुए कि हर कोई अपने कर्मों का फल पाएगा। सूरह इस बात पर ज़ोर देते हुए समाप्त होती है कि क़ुरआन अल्लाह का अवतरित कलाम है और यह कि पैगंबर (ﷺ) पागल नहीं हैं, जैसा कि मूर्तिपूजक दावा करते हैं। अल्लाह के नाम से जो परम कृपालु, अत्यंत दयावान है

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

क़यामत की विभीषिकाएँ

1. जब सूरज लपेट दिया जाएगा, 2. और जब तारे गिर पड़ेंगे, 3. और जब पहाड़ उड़ा दिए जाएंगे, 4. और जब गाभिन ऊँटनियाँ यूँ ही छोड़ दी जाएँगी, 5. और जब जंगली जानवर इकट्ठे किए जाएँगे, 6. और जब समुद्र दहका दिए जाएँगे, 7. और जब आत्माएँ (शरीरों से) मिलाई जाएँगी, 8. और जब ज़िंदा गाड़ी गई बच्ची से पूछा जाएगा, 9. कि उसे किस अपराध में मारा गया, 10. और जब कर्मों के दफ्तर खोले जाएँगे, 11. और जब आकाश उधेड़ दिया जाएगा, 12. और जब जहन्नम भड़काई जाएगी, 13. और जब जन्नत करीब लाई जाएगी— 14. हर नफ़्स जान लेगी कि वह क्या लेकर आई है।

إِذَا ٱلشَّمْسُ كُوِّرَتْ
١
وَإِذَا ٱلنُّجُومُ ٱنكَدَرَتْ
٢
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ سُيِّرَتْ
٣
وَإِذَا ٱلْعِشَارُ عُطِّلَتْ
٤
وَإِذَا ٱلْوُحُوشُ حُشِرَتْ
٥
وَإِذَا ٱلْبِحَارُ سُجِّرَتْ
٦
وَإِذَا ٱلنُّفُوسُ زُوِّجَتْ
٧
وَإِذَا ٱلْمَوْءُۥدَةُ سُئِلَتْ
٨
بِأَىِّ ذَنۢبٍ قُتِلَتْ
٩
وَإِذَا ٱلصُّحُفُ نُشِرَتْ
١٠
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ كُشِطَتْ
١١
وَإِذَا ٱلْجَحِيمُ سُعِّرَتْ
١٢
وَإِذَا ٱلْجَنَّةُ أُزْلِفَتْ
١٣
عَلِمَتْ نَفْسٌ مَّآ أَحْضَرَتْ
١٤

सूरह 81 - التَّكْوِير (सूरज लपेटना) - आयतें 1-14


झुठलाने वालों के लिए एक संदेश

15. क़सम है पीछे हटने वाले सितारों की। 16. जो चलते और छिपते हैं, 17. और रात जब छा जाती है 18. और दिन जब निकलता है! 19. निःसंदेह, यह (क़ुरआन) एक प्रतिष्ठित दूत-फ़रिश्ते का वचन है, 20. जो शक्ति से परिपूर्ण है, अर्श के स्वामी के पास सम्मानित है, 21. वहाँ (स्वर्ग में) जिसकी आज्ञा मानी जाती है, और विश्वसनीय है। 22. और तुम्हारा साथी दीवाना नहीं है। 23. और उसने उसे स्पष्ट क्षितिज पर देखा, 24. और वह ग़ैब की बातों को छिपाता नहीं है। 25. और यह (कुरान) किसी शैतान मरदूद का कलाम नहीं है। 26. तो फिर तुम कौन सा मार्ग अपनाओगे? 27. बेशक यह (कुरान) सारे जहान के लिए बस एक नसीहत है— 28. तुममें से जो कोई भी सीधा रास्ता अपनाना चाहेगा। 29. लेकिन तुम चाह नहीं सकते, मगर अल्लाह के चाहने से ही, जो सारे जहानों का रब है।

فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلْخُنَّسِ
١٥
ٱلْجَوَارِ ٱلْكُنَّسِ
١٦
وَٱلَّيْلِ إِذَا عَسْعَسَ
١٧
وَٱلصُّبْحِ إِذَا تَنَفَّسَ
١٨
إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ
١٩
ذِى قُوَّةٍ عِندَ ذِى ٱلْعَرْشِ مَكِينٍ
٢٠
مُّطَاعٍ ثَمَّ أَمِينٍ
٢١
وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍ
٢٢
وَلَقَدْ رَءَاهُ بِٱلْأُفُقِ ٱلْمُبِينِ
٢٣
وَمَا هُوَ عَلَى ٱلْغَيْبِ بِضَنِينٍ
٢٤
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَـٰنٍ رَّجِيمٍ
٢٥
فَأَيْنَ تَذْهَبُونَ
٢٦
إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَـٰلَمِينَ
٢٧
لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَسْتَقِيمَ
٢٨
وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
٢٩

सूरह 81 - التَّكْوِير (सूरज लपेटना) - आयतें 15-29