This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 8 - الأنْفَال

Al-Anfâl (Surah 8)

الأنْفَال (Spoils of War)

Madni SurahMadni Surah

Introduction

यह सूरह मदीना में अवतरित हुई थी ताकि यह समझाया जा सके कि 2 हिजरी/624 ईस्वी में बद्र में मक्का के मूर्तिपूजकों पर ईमान वालों की विजय के बाद युद्ध की लूट को कैसे वितरित किया जाना चाहिए। यह सूरह ईमान वालों को अल्लाह और उसके रसूल के प्रति सच्चे रहने का आग्रह करती है, उन्हें याद दिलाते हुए कि कैसे वे संख्या में कम थे, लेकिन अल्लाह ने उनकी सहायता के लिए फ़रिश्ते भेजे। यह स्पष्ट किया गया है कि यद्यपि विजय केवल अल्लाह की ओर से आती है, फिर भी ईमान वालों को हमेशा अपनी रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए और शांति के लिए तत्पर रहना चाहिए। मूर्तिपूजकों को चेतावनी दी गई है कि दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोकने और सत्य का विरोध करने की उनकी साज़िशें केवल विफलता में समाप्त होंगी—एक ऐसा विषय जिस पर पिछली और अगली दोनों सूरहों में बल दिया गया है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

ग़नीमत का बँटवारा

1. वे आपसे गनीमत के बारे में पूछते हैं (ऐ पैगंबर)। कहो, "उनका बँटवारा अल्लाह और उसके रसूल का है।" तो अल्लाह से डरो, अपने आपसी संबंध सुधारो, और अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करो यदि तुम (सच्चे) मोमिन हो।

يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلْأَنفَالِ ۖ قُلِ ٱلْأَنفَالُ لِلَّهِ وَٱلرَّسُولِ ۖ فَٱتَّقُوا ٱللَّهَ وَأَصْلِحُوا ذَاتَ بَيْنِكُمْ ۖ وَأَطِيعُوا ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
١

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 1-1


सच्चे ईमान वालों के गुण

2. (सच्चे) मोमिन तो बस वही हैं जिनके दिल अल्लाह के ज़िक्र पर काँप उठते हैं, और जब उन पर उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनका ईमान बढ़ जाता है, और जो अपने रब पर भरोसा रखते हैं। 3. (वे) वे हैं जो नमाज़ क़ायम करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें रिज़्क़ दिया है उसमें से खर्च करते हैं। 4. यही हैं सच्चे मोमिन। उनके लिए उनके रब के पास ऊँचे दर्जे हैं, मग़फ़िरत है और इज़्ज़तदार रिज़्क़ है।

إِنَّمَا ٱلْمُؤْمِنُونَ ٱلَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَإِذَا تُلِيَتْ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتُهُۥ زَادَتْهُمْ إِيمَـٰنًا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
٢
ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ يُنفِقُونَ
٣
أُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُمْ دَرَجَـٰتٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَمَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
٤

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 2-4


लड़ाई का विरोध

5. इसी तरह, जब तुम्हारे रब ने तुम्हें (ऐ पैग़म्बर) तुम्हारे घर से हक़ के साथ निकाला, तो ईमान वालों का एक गिरोह इसे बिल्कुल नापसंद कर रहा था। 6. वे तुमसे हक़ के बारे में झगड़ रहे थे, जबकि वह वाज़ेह हो चुका था, मानो उन्हें मौत की तरफ़ धकेला जा रहा हो और वे आँखों से देख रहे हों।

كَمَآ أَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِنۢ بَيْتِكَ بِٱلْحَقِّ وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ لَكَـٰرِهُونَ
٥
يُجَـٰدِلُونَكَ فِى ٱلْحَقِّ بَعْدَ مَا تَبَيَّنَ كَأَنَّمَا يُسَاقُونَ إِلَى ٱلْمَوْتِ وَهُمْ يَنظُرُونَ
٦

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 5-6


सत्य की स्थापना

7. (याद करो, ऐ ईमानवालो,) जब अल्लाह ने तुमसे वादा किया कि तुम्हें दोनों में से किसी एक पर विजय दिलाएगा, तो तुम चाहते थे कि तुम्हें निहत्था दल मिल जाए। लेकिन अल्लाह का इरादा था कि वह अपने वचनों से सत्य को स्थापित करे और काफ़िरों को जड़ से उखाड़ दे; 8. ताकि सत्य को दृढ़ता से स्थापित करे और असत्य को मिटा दे—भले ही दुष्टों को यह नागवार गुज़रे।

وَإِذْ يَعِدُكُمُ ٱللَّهُ إِحْدَى ٱلطَّآئِفَتَيْنِ أَنَّهَا لَكُمْ وَتَوَدُّونَ أَنَّ غَيْرَ ذَاتِ ٱلشَّوْكَةِ تَكُونُ لَكُمْ وَيُرِيدُ ٱللَّهُ أَن يُحِقَّ ٱلْحَقَّ بِكَلِمَـٰتِهِۦ وَيَقْطَعَ دَابِرَ ٱلْكَـٰفِرِينَ
٧
لِيُحِقَّ ٱلْحَقَّ وَيُبْطِلَ ٱلْبَـٰطِلَ وَلَوْ كَرِهَ ٱلْمُجْرِمُونَ
٨

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 7-8


ईश्वरीय सहायता

9. (याद करो) जब तुमने अपने रब से मदद के लिए पुकारा, तो उसने जवाब दिया, “मैं तुम्हें एक हज़ार फ़रिश्तों से मदद दूँगा—जिनके पीछे और भी होंगे।” 10. और अल्लाह ने इसे तुम्हारी जीत का निशान और तुम्हारे दिलों के लिए तसल्ली बनाया। और जीत तो बस अल्लाह ही की तरफ से है। बेशक अल्लाह ज़बरदस्त हिकमत वाला है।

إِذْ تَسْتَغِيثُونَ رَبَّكُمْ فَٱسْتَجَابَ لَكُمْ أَنِّى مُمِدُّكُم بِأَلْفٍ مِّنَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ مُرْدِفِينَ
٩
وَمَا جَعَلَهُ ٱللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰ وَلِتَطْمَئِنَّ بِهِۦ قُلُوبُكُمْ ۚ وَمَا ٱلنَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِندِ ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
١٠

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 9-10


सुकून का एहसास

11. (याद करो) जब उसने तुम पर ऊँघ तारी कर दी थी, तुम्हें सुकून देते हुए। और उसने आसमान से पानी बरसाया ताकि तुम्हें पाक करे, तुम्हें शैतान के वसवसों से आज़ाद करे, तुम्हारे दिलों को मज़बूत करे और तुम्हारे क़दमों को जमाए रखे।

إِذْ يُغَشِّيكُمُ ٱلنُّعَاسَ أَمَنَةً مِّنْهُ وَيُنَزِّلُ عَلَيْكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً لِّيُطَهِّرَكُم بِهِۦ وَيُذْهِبَ عَنكُمْ رِجْزَ ٱلشَّيْطَـٰنِ وَلِيَرْبِطَ عَلَىٰ قُلُوبِكُمْ وَيُثَبِّتَ بِهِ ٱلْأَقْدَامَ
١١

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 11-11


मक्का के मूर्तिपूजकों को चेतावनी

12. (याद करो, ऐ पैग़म्बर,) जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों पर वह्यी की, “मैं तुम्हारे साथ हूँ। तो ईमान वालों को जमाए रखो। मैं काफ़िरों के दिलों में ख़ौफ़ डाल दूँगा। तो उनकी गर्दनों पर मारो और उनकी पोरों पर मारो।” 13. यह इसलिए है कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा की। और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा करता है, तो (जान लो कि) अल्लाह निश्चय ही कठोर दंड देने वाला है। 14. यह (दुनियावी सज़ा) तुम्हारी है, तो इसे चखो! फिर काफ़िरों को आग का अज़ाब सहना पड़ेगा।

إِذْ يُوحِى رَبُّكَ إِلَى ٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ أَنِّى مَعَكُمْ فَثَبِّتُوا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا ۚ سَأُلْقِى فِى قُلُوبِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا ٱلرُّعْبَ فَٱضْرِبُوا فَوْقَ ٱلْأَعْنَاقِ وَٱضْرِبُوا مِنْهُمْ كُلَّ بَنَانٍ
١٢
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَآقُّوا ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ ۚ وَمَن يُشَاقِقِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَإِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
١٣
ذَٰلِكُمْ فَذُوقُوهُ وَأَنَّ لِلْكَـٰفِرِينَ عَذَابَ ٱلنَّارِ
١٤

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 12-14


भागो मत

15. ऐ ईमानवालो! जब तुम युद्ध में काफ़िरों का सामना करो, तो कभी भी उनसे पीठ मत फेरना। 16. और जो कोई उस दिन ऐसा करेगा—सिवाय इसके कि वह किसी चाल के लिए हो या अपनी सेना से जा मिलने के लिए हो—वह अल्लाह के क्रोध का पात्र बनेगा, और उसका ठिकाना जहन्नम होगा। क्या ही बुरा ठिकाना है!

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا إِذَا لَقِيتُمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا زَحْفًا فَلَا تُوَلُّوهُمُ ٱلْأَدْبَارَ
١٥
وَمَن يُوَلِّهِمْ يَوْمَئِذٍ دُبُرَهُۥٓ إِلَّا مُتَحَرِّفًا لِّقِتَالٍ أَوْ مُتَحَيِّزًا إِلَىٰ فِئَةٍ فَقَدْ بَآءَ بِغَضَبٍ مِّنَ ٱللَّهِ وَمَأْوَىٰهُ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ
١٦

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 15-16


अल्लाह की ओर से विजय

17. तुमने (ऐ ईमानवालो) उन्हें नहीं मारा, बल्कि अल्लाह ने ही उन्हें मारा। और न तुमने (ऐ पैग़म्बर) फेंका, बल्कि अल्लाह ने ही फेंका, ताकि ईमानवालों पर अपनी ओर से एक बड़ा एहसान करे। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। 18. इसी प्रकार, अल्लाह इनकार करने वालों की कुटिल चालों को विफल कर देता है।

فَلَمْ تَقْتُلُوهُمْ وَلَـٰكِنَّ ٱللَّهَ قَتَلَهُمْ ۚ وَمَا رَمَيْتَ إِذْ رَمَيْتَ وَلَـٰكِنَّ ٱللَّهَ رَمَىٰ ۚ وَلِيُبْلِىَ ٱلْمُؤْمِنِينَ مِنْهُ بَلَآءً حَسَنًا ۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
١٧
ذَٰلِكُمْ وَأَنَّ ٱللَّهَ مُوهِنُ كَيْدِ ٱلْكَـٰفِرِينَ
١٨

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 17-18


मूर्तिपूजकों के साथ तर्क करना

19. यदि तुम (मक्कावासियों) फैसला चाहते थे, तो वह अब तुम्हारे पास आ गया है। और यदि तुम बाज़ आ जाते हो, तो यह तुम्हारे अपने भले के लिए होगा। लेकिन यदि तुम डटे रहते हो, तो हम भी डटे रहेंगे। और तुम्हारी सेनाएँ—चाहे वे कितनी भी अधिक क्यों न हों—तुम्हें ज़रा भी लाभ नहीं पहुँचाएँगी। क्योंकि अल्लाह निश्चित रूप से ईमानवालों के साथ है।

إِن تَسْتَفْتِحُوا فَقَدْ جَآءَكُمُ ٱلْفَتْحُ ۖ وَإِن تَنتَهُوا فَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۖ وَإِن تَعُودُوا نَعُدْ وَلَن تُغْنِىَ عَنكُمْ فِئَتُكُمْ شَيْـًٔا وَلَوْ كَثُرَتْ وَأَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
١٩

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 19-19


सुनना और आज्ञापालन करना

20. ऐ ईमानवालो! अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करो और उससे मुँह न फेरो जबकि तुम (उसकी पुकार) सुन रहे हो। 21. उन लोगों जैसे न बनो जो कहते हैं, "हम सुनते हैं," लेकिन वास्तव में वे सुन नहीं रहे होते। 22. निःसंदेह, अल्लाह की निगाह में सबसे बुरे जीव वे बहरे और गूंगे हैं जो समझते नहीं। 23. यदि अल्लाह उनमें कोई भलाई जानता, तो वह उन्हें अवश्य सुनाता। और अगर वह उन्हें सुना भी देता, तो वे अवश्य ही बेपरवाही से मुंह मोड़ लेते।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا أَطِيعُوا ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَلَا تَوَلَّوْا عَنْهُ وَأَنتُمْ تَسْمَعُونَ
٢٠
وَلَا تَكُونُوا كَٱلَّذِينَ قَالُوا سَمِعْنَا وَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ
٢١
۞ إِنَّ شَرَّ ٱلدَّوَآبِّ عِندَ ٱللَّهِ ٱلصُّمُّ ٱلْبُكْمُ ٱلَّذِينَ لَا يَعْقِلُونَ
٢٢
وَلَوْ عَلِمَ ٱللَّهُ فِيهِمْ خَيْرًا لَّأَسْمَعَهُمْ ۖ وَلَوْ أَسْمَعَهُمْ لَتَوَلَّوا وَّهُم مُّعْرِضُونَ
٢٣

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 20-23


ईमान वालों को अनुस्मारक

24. ऐ ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूल की पुकार पर लब्बैक कहो जब वह तुम्हें उस चीज़ की तरफ बुलाए जो तुम्हें जीवन देती है। और जान लो कि अल्लाह आदमी और उसके दिल के दरमियान है, और यह कि उसी की तरफ तुम सब जमा किए जाओगे। 25. और उस फितने से डरो जो तुम में से सिर्फ ज़ालिमों को ही नहीं पकड़ेगा, और जान लो कि अल्लाह सज़ा देने में बहुत सख्त है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا ٱسْتَجِيبُوا لِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ إِذَا دَعَاكُمْ لِمَا يُحْيِيكُمْ ۖ وَٱعْلَمُوٓا أَنَّ ٱللَّهَ يَحُولُ بَيْنَ ٱلْمَرْءِ وَقَلْبِهِۦ وَأَنَّهُۥٓ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
٢٤
وَٱتَّقُوا فِتْنَةً لَّا تُصِيبَنَّ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا مِنكُمْ خَآصَّةً ۖ وَٱعْلَمُوٓا أَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
٢٥

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 24-25


अल्लाह की मदद

26. याद करो जब तुम ज़मीन में बहुत कम थे और कमज़ोर समझे जाते थे, इस डर में रहते थे कि लोग तुम्हें उचक ले जाएँगे, फिर उसने तुम्हें पनाह दी, और अपनी मदद से तुम्हें ताक़त बख़्शी, और तुम्हें पाकीज़ा चीज़ें अता कीं ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो।

وَٱذْكُرُوٓا إِذْ أَنتُمْ قَلِيلٌ مُّسْتَضْعَفُونَ فِى ٱلْأَرْضِ تَخَافُونَ أَن يَتَخَطَّفَكُمُ ٱلنَّاسُ فَـَٔاوَىٰكُمْ وَأَيَّدَكُم بِنَصْرِهِۦ وَرَزَقَكُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَـٰتِ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
٢٦

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 26-26


ईमान वालों को चेतावनी

27. ऐ ईमान वालो! अल्लाह और रसूल से ख़ियानत न करो, और न अपनी अमानतों में जान-बूझकर ख़ियानत करो। 28. और जान लो कि तुम्हारा माल और तुम्हारी औलाद बस एक आज़माइश है, और अल्लाह ही के पास बड़ा प्रतिफल है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا لَا تَخُونُوا ٱللَّهَ وَٱلرَّسُولَ وَتَخُونُوٓا أَمَـٰنَـٰتِكُمْ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
٢٧
وَٱعْلَمُوٓا أَنَّمَآ أَمْوَٰلُكُمْ وَأَوْلَـٰدُكُمْ فِتْنَةٌ وَأَنَّ ٱللَّهَ عِندَهُۥٓ أَجْرٌ عَظِيمٌ
٢٨

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 27-28


ईमान वालों का इनाम

29. ऐ ईमान वालो! यदि तुम अल्लाह का तक़वा इख़्तियार करोगे, तो वह तुम्हें एक फ़ुरक़ान देगा, और तुम्हारे गुनाहों को तुमसे मिटा देगा और तुम्हें बख़्श देगा। और अल्लाह बड़े फ़ज़्ल वाला है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا إِن تَتَّقُوا ٱللَّهَ يَجْعَل لَّكُمْ فُرْقَانًا وَيُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ
٢٩

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 29-29


मूर्तिपूजकों का षड्यंत्र

30. और जब काफ़िरों ने तुम्हारे बारे में साज़िश की कि तुम्हें क़ैद कर लें या तुम्हें क़त्ल कर दें या तुम्हें निकाल दें। और उन्होंने चाल चली, और अल्लाह ने भी चाल चली। और अल्लाह सबसे अच्छा चाल चलने वाला है।

وَإِذْ يَمْكُرُ بِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا لِيُثْبِتُوكَ أَوْ يَقْتُلُوكَ أَوْ يُخْرِجُوكَ ۚ وَيَمْكُرُونَ وَيَمْكُرُ ٱللَّهُ ۖ وَٱللَّهُ خَيْرُ ٱلْمَـٰكِرِينَ
٣٠

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 30-30


मूर्तिपूजकों की चुनौती

31. जब उन्हें हमारी आयतें सुनाई जाती हैं, तो वे (आपसे) कहते हैं, "हमने तो पहले ही सुन रखा है। अगर हम चाहते, तो आसानी से ऐसा ही कुछ बना लेते। यह (कुरान) तो बस अगलों की कहानियाँ हैं!"

وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتُنَا قَالُوا قَدْ سَمِعْنَا لَوْ نَشَآءُ لَقُلْنَا مِثْلَ هَـٰذَآ ۙ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّآ أَسَـٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ
٣١

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 31-31


मूर्तिपूजकों का इनकार

32. और जब उन्होंने दुआ की, "ऐ अल्लाह! अगर यह वाकई तेरी तरफ से हक़ है, तो हम पर आसमान से पत्थर बरसा दे या हमें किसी दर्दनाक अज़ाब में पकड़ ले।" 33. लेकिन अल्लाह उन्हें कभी अज़ाब नहीं देगा जब तक आप (ऐ नबी) उनके दरमियान थे। और न ही वह उन्हें कभी अज़ाब देगा अगर वे इस्तग़फ़ार करते।

وَإِذْ قَالُوا ٱللَّهُمَّ إِن كَانَ هَـٰذَا هُوَ ٱلْحَقَّ مِنْ عِندِكَ فَأَمْطِرْ عَلَيْنَا حِجَارَةً مِّنَ ٱلسَّمَآءِ أَوِ ٱئْتِنَا بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
٣٢
وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُعَذِّبَهُمْ وَأَنتَ فِيهِمْ ۚ وَمَا كَانَ ٱللَّهُ مُعَذِّبَهُمْ وَهُمْ يَسْتَغْفِرُونَ
٣٣

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 32-33


योग्य दंड

34. और अल्लाह उन्हें क्यों न अज़ाब दे, जबकि वे लोगों को मस्जिदे हराम से रोकते हैं और खुद को उसके संरक्षक होने का दावा करते हैं? उसकी सरपरस्ती का अधिकार किसी को नहीं सिवाय परहेज़गारों के, लेकिन अधिकतर मुशरिक नहीं जानते। 35. मस्जिदे हराम में उनकी नमाज़ सीटी बजाने और ताली बजाने के सिवा कुछ न थी। तो अपने कुफ़्र के बदले अज़ाब चखो।

وَمَا لَهُمْ أَلَّا يُعَذِّبَهُمُ ٱللَّهُ وَهُمْ يَصُدُّونَ عَنِ ٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ وَمَا كَانُوٓا أَوْلِيَآءَهُۥٓ ۚ إِنْ أَوْلِيَآؤُهُۥٓ إِلَّا ٱلْمُتَّقُونَ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
٣٤
وَمَا كَانَ صَلَاتُهُمْ عِندَ ٱلْبَيْتِ إِلَّا مُكَآءً وَتَصْدِيَةً ۚ فَذُوقُوا ٱلْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
٣٥

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 34-35


मूर्तिपूजकों के व्यर्थ प्रयास

36. बेशक काफ़िर अपना माल खर्च करते हैं ताकि (लोगों को) अल्लाह के रास्ते से रोकें। वे खर्च करते रहेंगे यहाँ तक कि उन्हें पछतावा होगा। फिर वे पराजित होंगे और काफ़िरों को जहन्नम की तरफ़ धकेल दिया जाएगा। 37. ताकि अल्लाह खबीस (बुरे) को तय्यिब (अच्छे) से अलग कर दे। वह खबीसों को एक दूसरे पर ढेर कर देगा और फिर उन्हें जहन्नम में डाल देगा। वही घाटे में रहने वाले हैं।

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا يُنفِقُونَ أَمْوَٰلَهُمْ لِيَصُدُّوا عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ۚ فَسَيُنفِقُونَهَا ثُمَّ تَكُونُ عَلَيْهِمْ حَسْرَةً ثُمَّ يُغْلَبُونَ ۗ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا إِلَىٰ جَهَنَّمَ يُحْشَرُونَ
٣٦
لِيَمِيزَ ٱللَّهُ ٱلْخَبِيثَ مِنَ ٱلطَّيِّبِ وَيَجْعَلَ ٱلْخَبِيثَ بَعْضَهُۥ عَلَىٰ بَعْضٍ فَيَرْكُمَهُۥ جَمِيعًا فَيَجْعَلَهُۥ فِى جَهَنَّمَ ۚ أُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْخَـٰسِرُونَ
٣٧

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 36-37


शांति प्रस्ताव

38. काफ़िरों से कहो कि यदि वे बाज़ आ जाएँ, तो उनका पिछला माफ़ कर दिया जाएगा। लेकिन यदि वे फिर वही करें, तो उनके लिए उन लोगों का उदाहरण है जो उनसे पहले तबाह किए गए। 39. उनसे लड़ो जब तक कि फ़ितना (उत्पीड़न) बाक़ी न रहे और दीन (भक्ति) पूरी तरह अल्लाह के लिए हो जाए। लेकिन यदि वे बाज़ आ जाएँ, तो निश्चित रूप से अल्लाह उनके कामों को खूब देखने वाला है। 40. और यदि वे अनुपालन नहीं करते, तो जान लो कि अल्लाह तुम्हारा संरक्षक है। वह कितना अच्छा संरक्षक है और कितना अच्छा सहायक है!

قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوٓا إِن يَنتَهُوا يُغْفَرْ لَهُم مَّا قَدْ سَلَفَ وَإِن يَعُودُوا فَقَدْ مَضَتْ سُنَّتُ ٱلْأَوَّلِينَ
٣٨
وَقَـٰتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ ٱلدِّينُ كُلُّهُۥ لِلَّهِ ۚ فَإِنِ ٱنتَهَوْا فَإِنَّ ٱللَّهَ بِمَا يَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
٣٩
وَإِن تَوَلَّوْا فَٱعْلَمُوٓا أَنَّ ٱللَّهَ مَوْلَىٰكُمْ ۚ نِعْمَ ٱلْمَوْلَىٰ وَنِعْمَ ٱلنَّصِيرُ
٤٠

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 38-40


ग़नीमत का बँटवारा

41. जान लो कि जो कुछ भी तुम ग़नीमत में लेते हो, उसका पाँचवाँ हिस्सा अल्लाह और रसूल के लिए है, उसके निकट संबंधियों, अनाथों, गरीबों और (ज़रूरतमंद) यात्रियों के लिए है, यदि तुम अल्लाह पर और उस पर विश्वास रखते हो जो हमने अपने बंदे पर उस निर्णायक दिन उतारा था जब दोनों सेनाएँ मिली थीं (बद्र में)। और अल्लाह हर चीज़ पर अत्यंत सामर्थ्यवान है। 42. (याद करो) जब तुम घाटी के इस पार थे, तुम्हारे दुश्मन उस पार थे, और काफ़िला तुम्हारे नीचे था। यदि दोनों सेनाओं ने (मिलने का) वादा भी किया होता, तो भी वे निश्चित रूप से चूक जातीं। फिर भी ऐसा हुआ ताकि अल्लाह उस बात को पूरा करे जो उसने निर्धारित की थी—कि जो नष्ट होने वाले थे वे स्पष्ट प्रमाण के साथ नष्ट हों और जो जीवित रहने वाले थे वे स्पष्ट प्रमाण के साथ जीवित रहें। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।

۞ وَٱعْلَمُوٓا أَنَّمَا غَنِمْتُم مِّن شَىْءٍ فَأَنَّ لِلَّهِ خُمُسَهُۥ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِى ٱلْقُرْبَىٰ وَٱلْيَتَـٰمَىٰ وَٱلْمَسَـٰكِينِ وَٱبْنِ ٱلسَّبِيلِ إِن كُنتُمْ ءَامَنتُم بِٱللَّهِ وَمَآ أَنزَلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا يَوْمَ ٱلْفُرْقَانِ يَوْمَ ٱلْتَقَى ٱلْجَمْعَانِ ۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
٤١
إِذْ أَنتُم بِٱلْعُدْوَةِ ٱلدُّنْيَا وَهُم بِٱلْعُدْوَةِ ٱلْقُصْوَىٰ وَٱلرَّكْبُ أَسْفَلَ مِنكُمْ ۚ وَلَوْ تَوَاعَدتُّمْ لَٱخْتَلَفْتُمْ فِى ٱلْمِيعَـٰدِ ۙ وَلَـٰكِن لِّيَقْضِىَ ٱللَّهُ أَمْرًا كَانَ مَفْعُولًا لِّيَهْلِكَ مَنْ هَلَكَ عَنۢ بَيِّنَةٍ وَيَحْيَىٰ مَنْ حَىَّ عَنۢ بَيِّنَةٍ ۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَسَمِيعٌ عَلِيمٌ
٤٢

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 41-42


शत्रु सेना का दर्शन

43. (और याद करो, ऐ नबी,) जब अल्लाह ने तुम्हें तुम्हारे सपने में उन्हें कम संख्या में दिखाया था। और अगर वह तुम्हें उन्हें ज़्यादा संख्या में दिखाता, तो तुम (मोमिन) ज़रूर हिम्मत हार जाते और इस मामले में झगड़ा करते। लेकिन अल्लाह ने तुम्हें बचा लिया। बेशक वह जानता है जो दिलों में है। 44. फिर जब तुम्हारी सेनाएँ आमने-सामने हुईं, तो अल्लाह ने उन्हें तुम्हारी नज़रों में कम दिखाया, और तुम्हें उनकी नज़रों में कम दिखाया, ताकि अल्लाह उस काम को पूरा कर दे जो उसने तय किया था। और अल्लाह ही की ओर सभी मामले लौटाए जाते हैं।

إِذْ يُرِيكَهُمُ ٱللَّهُ فِى مَنَامِكَ قَلِيلًا ۖ وَلَوْ أَرَىٰكَهُمْ كَثِيرًا لَّفَشِلْتُمْ وَلَتَنَـٰزَعْتُمْ فِى ٱلْأَمْرِ وَلَـٰكِنَّ ٱللَّهَ سَلَّمَ ۗ إِنَّهُۥ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
٤٣
وَإِذْ يُرِيكُمُوهُمْ إِذِ ٱلْتَقَيْتُمْ فِىٓ أَعْيُنِكُمْ قَلِيلًا وَيُقَلِّلُكُمْ فِىٓ أَعْيُنِهِمْ لِيَقْضِىَ ٱللَّهُ أَمْرًا كَانَ مَفْعُولًا ۗ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرْجَعُ ٱلْأُمُورُ
٤٤

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 43-44


एक सलाह

45. ऐ ईमान वालो! जब तुम्हारा किसी दुश्मन से सामना हो, तो डटे रहो और अल्लाह को बहुत याद करो ताकि तुम कामयाब हो सको। 46. अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करो और आपस में झगड़ा न करो, वरना तुम हिम्मत हार बैठोगे और कमज़ोर पड़ जाओगे। सब्र करो! बेशक अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है। 47. उन (मुशरिकों) जैसे न बनो जो अपने घरों से घमंड करते हुए निकले थे, केवल लोगों को दिखाने के लिए और दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोकने के लिए। और अल्लाह उनके सभी कामों से पूरी तरह वाक़िफ़ है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا إِذَا لَقِيتُمْ فِئَةً فَٱثْبُتُوا وَٱذْكُرُوا ٱللَّهَ كَثِيرًا لَّعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
٤٥
وَأَطِيعُوا ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَلَا تَنَـٰزَعُوا فَتَفْشَلُوا وَتَذْهَبَ رِيحُكُمْ ۖ وَٱصْبِرُوٓا ۚ إِنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلصَّـٰبِرِينَ
٤٦
وَلَا تَكُونُوا كَٱلَّذِينَ خَرَجُوا مِن دِيَـٰرِهِم بَطَرًا وَرِئَآءَ ٱلنَّاسِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ مُحِيطٌ
٤٧

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 45-47


शैतान मक्का के मूर्तिपूजकों को बहकाता है

48. और (याद करो) जब शैतान ने उनके (बुरे) कामों को उनके लिए आकर्षक बना दिया था, और कहा, “आज कोई तुम पर ग़ालिब नहीं आ सकता। मैं ज़रूर तुम्हारे साथ हूँ।” लेकिन जब दोनों सेनाएँ आमने-सामने हुईं, तो वह डरकर पीछे हट गया और कहा, “मेरा तुमसे बिल्कुल कोई वास्ता नहीं है। मैं निश्चित रूप से वह देखता हूँ जो तुम नहीं देखते। मैं सचमुच अल्लाह से डरता हूँ, क्योंकि अल्लाह सज़ा देने में बहुत कठोर है।”

وَإِذْ زَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيْطَـٰنُ أَعْمَـٰلَهُمْ وَقَالَ لَا غَالِبَ لَكُمُ ٱلْيَوْمَ مِنَ ٱلنَّاسِ وَإِنِّى جَارٌ لَّكُمْ ۖ فَلَمَّا تَرَآءَتِ ٱلْفِئَتَانِ نَكَصَ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ وَقَالَ إِنِّى بَرِىٓءٌ مِّنكُمْ إِنِّىٓ أَرَىٰ مَا لَا تَرَوْنَ إِنِّىٓ أَخَافُ ٱللَّهَ ۚ وَٱللَّهُ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
٤٨

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 48-48


अल्लाह पर भरोसा

49. जब मुनाफ़िक़ों और जिनके दिलों में बीमारी थी, उन्होंने कहा, "इन (ईमान वालों) को इनके दीन ने गुमराह कर दिया है।" और जो कोई अल्लाह पर भरोसा करता है, तो निश्चय ही अल्लाह ज़बरदस्त, हिकमत वाला है।

إِذْ يَقُولُ ٱلْمُنَـٰفِقُونَ وَٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ غَرَّ هَـٰٓؤُلَآءِ دِينُهُمْ ۗ وَمَن يَتَوَكَّلْ عَلَى ٱللَّهِ فَإِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
٤٩

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 49-49


बुरा अंत

50. और काश तुम देखते जब फ़रिश्ते काफ़िरों की रूहें क़ब्ज़ करते हैं, उनके मुँहों और पीठों पर मारते हुए, (और कहते हैं,) "जलाने वाले अज़ाब का मज़ा चखो! 51. यह उस (कर्म) का बदला है जो तुम्हारे हाथों ने आगे भेजा है। और अल्लाह अपने बंदों पर कभी ज़ुल्म नहीं करता।

وَلَوْ تَرَىٰٓ إِذْ يَتَوَفَّى ٱلَّذِينَ كَفَرُوا ۙ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَـٰرَهُمْ وَذُوقُوا عَذَابَ ٱلْحَرِيقِ
٥٠
ذَٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيكُمْ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَيْسَ بِظَلَّـٰمٍ لِّلْعَبِيدِ
٥١

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 50-51


दुष्टों का भाग्य

52. उनका अंजाम फ़िरऔन के लोगों और उनसे पहले वालों जैसा है। उन सबने अल्लाह की आयतों को झुठलाया, तो अल्लाह ने उन्हें उनके गुनाहों के कारण पकड़ लिया। बेशक, अल्लाह ज़बरदस्त कुव्वत वाला, सख़्त अज़ाब देने वाला है। 53. यह इसलिए है कि अल्लाह किसी क़ौम पर अपनी नेमत को तब तक नहीं बदलता जब तक वे स्वयं अपनी स्थिति न बदल दें। बेशक अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। 54. फ़िरऔन के लोगों और उनसे पहले वालों का भी यही हाल था। उन सबने अपने रब की आयतों को झुठलाया, तो हमने उन्हें उनके गुनाहों के बदले में तबाह कर दिया और फ़िरऔन के लोगों को डुबो दिया। वे सब ज़ालिम थे।

كَدَأْبِ ءَالِ فِرْعَوْنَ ۙ وَٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَفَرُوا بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ فَأَخَذَهُمُ ٱللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ قَوِىٌّ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
٥٢
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ لَمْ يَكُ مُغَيِّرًا نِّعْمَةً أَنْعَمَهَا عَلَىٰ قَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ ۙ وَأَنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
٥٣
كَدَأْبِ ءَالِ فِرْعَوْنَ ۙ وَٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا بِـَٔايَـٰتِ رَبِّهِمْ فَأَهْلَكْنَـٰهُم بِذُنُوبِهِمْ وَأَغْرَقْنَآ ءَالَ فِرْعَوْنَ ۚ وَكُلٌّ كَانُوا ظَـٰلِمِينَ
٥٤

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 52-54


वे जो शांति संधियों का उल्लंघन करते हैं

55. निःसंदेह, अल्लाह की नज़र में सबसे बुरे प्राणी वे हैं जो कुफ्र पर अड़े रहते हैं, कभी ईमान नहीं लाते। 56. (अर्थात्) वे लोग जिनसे आपने (ऐ पैगंबर) संधि की है, फिर भी वे हर बार उसे तोड़ देते हैं और नहीं डरते। 57. यदि तुम उन्हें युद्ध में पाओ, तो उन्हें ऐसा भयानक उदाहरण बना दो ताकि शायद उनके पीछे आने वाले रुक जाएँ।

إِنَّ شَرَّ ٱلدَّوَآبِّ عِندَ ٱللَّهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
٥٥
ٱلَّذِينَ عَـٰهَدتَّ مِنْهُمْ ثُمَّ يَنقُضُونَ عَهْدَهُمْ فِى كُلِّ مَرَّةٍ وَهُمْ لَا يَتَّقُونَ
٥٦
فَإِمَّا تَثْقَفَنَّهُمْ فِى ٱلْحَرْبِ فَشَرِّدْ بِهِم مَّنْ خَلْفَهُمْ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَ
٥٧

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 55-57


संधियों में कोई विश्वासघात नहीं

58. और यदि आप (हे पैगंबर) किसी क़ौम से विश्वासघात के लक्षण देखें, तो उनके साथ अपनी संधि को खुले तौर पर समाप्त कर दें। निःसंदेह अल्लाह विश्वासघात करने वालों को पसंद नहीं करता।

وَإِمَّا تَخَافَنَّ مِن قَوْمٍ خِيَانَةً فَٱنۢبِذْ إِلَيْهِمْ عَلَىٰ سَوَآءٍ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلْخَآئِنِينَ
٥٨

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 58-58


सैन्य निवारण

59. उन काफ़िरों को यह गुमान न हो कि वे हमारी पकड़ से बाहर हैं। वे बच नहीं सकेंगे। 60. और उनके मुक़ाबले में जितनी शक्ति और घुड़सवार सेना तुम तैयार कर सको, तैयार रखो, ताकि तुम उससे अल्लाह के शत्रुओं और अपने शत्रुओं को भयभीत कर सको, और उनके अतिरिक्त अन्य शत्रुओं को भी, जिन्हें तुम नहीं जानते, परन्तु अल्लाह जानता है। और तुम अल्लाह के मार्ग में जो कुछ भी खर्च करोगे, वह तुम्हें पूरा-पूरा वापस मिलेगा और तुम्हारे साथ कोई ज़्यादती नहीं की जाएगी।

وَلَا يَحْسَبَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا سَبَقُوٓا ۚ إِنَّهُمْ لَا يُعْجِزُونَ
٥٩
وَأَعِدُّوا لَهُم مَّا ٱسْتَطَعْتُم مِّن قُوَّةٍ وَمِن رِّبَاطِ ٱلْخَيْلِ تُرْهِبُونَ بِهِۦ عَدُوَّ ٱللَّهِ وَعَدُوَّكُمْ وَءَاخَرِينَ مِن دُونِهِمْ لَا تَعْلَمُونَهُمُ ٱللَّهُ يَعْلَمُهُمْ ۚ وَمَا تُنفِقُوا مِن شَىْءٍ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ يُوَفَّ إِلَيْكُمْ وَأَنتُمْ لَا تُظْلَمُونَ
٦٠

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 59-60


पैगंबर को सलाह: शांति का चुनाव करें

61. यदि शत्रु शांति की ओर प्रवृत्त हो, तो उनसे सुलह कर लो। और अल्लाह पर भरोसा रखो। निःसंदेह, वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। 62. लेकिन यदि उनका इरादा तुम्हें धोखा देने का ही हो, तो निःसंदेह अल्लाह तुम्हारे लिए पर्याप्त है। वही है जिसने अपनी सहायता से और मोमिनों के साथ तुम्हारी मदद की है। 63. उसने उनके दिलों को आपस में जोड़ दिया। यदि तुम धरती के सारे धन भी खर्च कर देते, तो भी तुम उनके दिलों को एकजुट नहीं कर सकते थे। लेकिन अल्लाह ने उन्हें एकजुट कर दिया है। निःसंदेह, वह सर्वशक्तिमान, महाज्ञानी है। 64. ऐ नबी! अल्लाह तुम्हारे लिए और उन मोमिनों के लिए काफी है जो तुम्हारी पैरवी करते हैं।

۞ وَإِن جَنَحُوا لِلسَّلْمِ فَٱجْنَحْ لَهَا وَتَوَكَّلْ عَلَى ٱللَّهِ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ
٦١
وَإِن يُرِيدُوٓا أَن يَخْدَعُوكَ فَإِنَّ حَسْبَكَ ٱللَّهُ ۚ هُوَ ٱلَّذِىٓ أَيَّدَكَ بِنَصْرِهِۦ وَبِٱلْمُؤْمِنِينَ
٦٢
وَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ ۚ لَوْ أَنفَقْتَ مَا فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًا مَّآ أَلَّفْتَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ وَلَـٰكِنَّ ٱللَّهَ أَلَّفَ بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّهُۥ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
٦٣
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ حَسْبُكَ ٱللَّهُ وَمَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
٦٤

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 61-64


लड़ने की तैयारी

65. ऐ नबी! मोमिनों को लड़ने के लिए उभारो। अगर तुममें से बीस सब्र करने वाले हों, तो वे दो सौ पर ग़ालिब आएँगे। और अगर तुममें से सौ हों, तो वे एक हज़ार काफ़िरों पर ग़ालिब आएँगे, क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो समझते नहीं। 66. अब अल्लाह ने तुम्हारा बोझ हल्का कर दिया है, क्योंकि वह जानता है कि तुममें कमज़ोरी है। तो अगर तुममें से सौ सब्र करने वाले हों, तो वे दो सौ पर ग़ालिब आएँगे। और अगर एक हज़ार हों, तो वे दो हज़ार पर ग़ालिब आएँगे, अल्लाह की मर्ज़ी से। और अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ حَرِّضِ ٱلْمُؤْمِنِينَ عَلَى ٱلْقِتَالِ ۚ إِن يَكُن مِّنكُمْ عِشْرُونَ صَـٰبِرُونَ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ يَغْلِبُوٓا أَلْفًا مِّنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ
٦٥
ٱلْـَٔـٰنَ خَفَّفَ ٱللَّهُ عَنكُمْ وَعَلِمَ أَنَّ فِيكُمْ ضَعْفًا ۚ فَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ صَابِرَةٌ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُمْ أَلْفٌ يَغْلِبُوٓا أَلْفَيْنِ بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ مَعَ ٱلصَّـٰبِرِينَ
٦٦

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 65-66


बंदियों पर निर्णय

67. किसी नबी के लिए यह उचित नहीं कि वह बंदी बनाए, जब तक कि वह ज़मीन में पूरी तरह से स्थापित न हो जाए। तुम (ईमानवालो) ने इस दुनिया के क्षणिक लाभों पर संतुष्ट हो गए, जबकि अल्लाह का लक्ष्य (तुम्हारे लिए) आख़िरत है। अल्लाह सर्वशक्तिमान, महाज्ञानी है। 68. यदि अल्लाह का पहले से कोई फ़ैसला न होता, तो जो कुछ तुमने लिया है उसके लिए तुम्हें निश्चित रूप से एक भयानक अज़ाब दिया जाता। 69. अब जो कुछ तुमने लिया है उसका उपभोग करो, क्योंकि वह हलाल और पाक है। और अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।

مَا كَانَ لِنَبِىٍّ أَن يَكُونَ لَهُۥٓ أَسْرَىٰ حَتَّىٰ يُثْخِنَ فِى ٱلْأَرْضِ ۚ تُرِيدُونَ عَرَضَ ٱلدُّنْيَا وَٱللَّهُ يُرِيدُ ٱلْـَٔاخِرَةَ ۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
٦٧
لَّوْلَا كِتَـٰبٌ مِّنَ ٱللَّهِ سَبَقَ لَمَسَّكُمْ فِيمَآ أَخَذْتُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
٦٨
فَكُلُوا مِمَّا غَنِمْتُمْ حَلَـٰلًا طَيِّبًا ۚ وَٱتَّقُوا ٱللَّهَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
٦٩

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 67-69


फिरौती दिए गए बंदी

70. ऐ पैगंबर! अपने क़ब्ज़े में मौजूद क़ैदियों से कहो, “अगर अल्लाह तुम्हारे दिलों में भलाई पाएगा, तो वह तुम्हें उससे बेहतर देगा जो तुमसे लिया गया है, और तुम्हें माफ़ कर देगा। बेशक अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, निहायत मेहरबान है।” 71. और अगर वे तुमसे दगा करना चाहते हैं (ऐ पैगंबर), तो उन्होंने इससे पहले अल्लाह से दगा की थी। मगर उसने तुम्हें उन पर क़ाबू दिया। और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हिकमत वाला है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ قُل لِّمَن فِىٓ أَيْدِيكُم مِّنَ ٱلْأَسْرَىٰٓ إِن يَعْلَمِ ٱللَّهُ فِى قُلُوبِكُمْ خَيْرًا يُؤْتِكُمْ خَيْرًا مِّمَّآ أُخِذَ مِنكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَٱللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
٧٠
وَإِن يُرِيدُوا خِيَانَتَكَ فَقَدْ خَانُوا ٱللَّهَ مِن قَبْلُ فَأَمْكَنَ مِنْهُمْ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
٧١

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 70-71


ईमान वालों के बीच संरक्षकता

72. जिन लोगों ने ईमान लाया, हिजरत की, और अपने माल और अपनी जान से अल्लाह की राह में जिहाद किया, और जिन्होंने उन्हें पनाह दी और मदद की—वे आपस में एक-दूसरे के वली हैं। और जिन लोगों ने ईमान तो लाया लेकिन हिजरत नहीं की, उनसे तुम्हारा कोई संबंध नहीं जब तक वे हिजरत न करें। लेकिन अगर वे दीन के मामले में तुमसे मदद मांगें, तो उनकी मदद करना तुम पर फ़र्ज़ है, सिवाय उन लोगों के जिनके साथ तुम्हारी संधि है। और अल्लाह तुम्हारे हर अमल को देख रहा है।

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا وَهَاجَرُوا وَجَـٰهَدُوا بِأَمْوَٰلِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱلَّذِينَ ءَاوَوا وَّنَصَرُوٓا أُولَـٰٓئِكَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَآءُ بَعْضٍ ۚ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا وَلَمْ يُهَاجِرُوا مَا لَكُم مِّن وَلَـٰيَتِهِم مِّن شَىْءٍ حَتَّىٰ يُهَاجِرُوا ۚ وَإِنِ ٱسْتَنصَرُوكُمْ فِى ٱلدِّينِ فَعَلَيْكُمُ ٱلنَّصْرُ إِلَّا عَلَىٰ قَوْمٍۭ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُم مِّيثَـٰقٌ ۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
٧٢

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 72-72


काफ़िरों के बीच संरक्षकता

73. और जो काफ़िर हैं, वे एक-दूसरे के संरक्षक हैं। और यदि तुम (ऐ ईमानवालो) ऐसा नहीं करोगे, तो ज़मीन में बड़ा फ़ितना और फ़साद होगा।

وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا بَعْضُهُمْ أَوْلِيَآءُ بَعْضٍ ۚ إِلَّا تَفْعَلُوهُ تَكُن فِتْنَةٌ فِى ٱلْأَرْضِ وَفَسَادٌ كَبِيرٌ
٧٣

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 73-73


सच्चे ईमान वाले

74. जो ईमान लाए, हिजरत की और अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया, और जिन्होंने (उन्हें) पनाह दी और मदद की, वही सच्चे मोमिन हैं। उनके लिए माफ़ी और इज़्ज़तदार रोज़ी है।

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا وَهَاجَرُوا وَجَـٰهَدُوا فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱلَّذِينَ ءَاوَوا وَّنَصَرُوٓا أُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
٧٤

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 74-74


रिश्तेदार एक-दूसरे के वारिस होते हैं

75. और जो बाद में ईमान लाए, हिजरत की और तुम्हारे साथ मिलकर जिहाद किया, वे भी तुम्हारे साथ हैं। लेकिन अब केवल ख़ून के रिश्तेदार ही एक-दूसरे से विरासत पाने के हक़दार हैं, जैसा कि अल्लाह ने निर्धारित किया है। बेशक अल्लाह हर चीज़ का पूरा इल्म रखता है।

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا مِنۢ بَعْدُ وَهَاجَرُوا وَجَـٰهَدُوا مَعَكُمْ فَأُولَـٰٓئِكَ مِنكُمْ ۚ وَأُولُوا ٱلْأَرْحَامِ بَعْضُهُمْ أَوْلَىٰ بِبَعْضٍ فِى كِتَـٰبِ ٱللَّهِ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌۢ
٧٥

Surah 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - Verses 75-75


Al-Anfâl () - अध्याय 8 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा