This translation is done through Artificial Intelligence (AI) modern technology. Moreover, it is based on Dr. Mustafa Khattab's "The Clear Quran".

Surah 76 - الإِنْسَان

Al-Insân (Surah 76)

الإِنْسَان (Humans)

Makki SurahMakki Surah

Introduction

यह मक्की सूरह इंसानों को याद दिलाती है कि अल्लाह ने उन्हें कैसे पैदा किया, उन्हें विभिन्न क्षमताओं से सुसज्जित किया, उन्हें मार्ग दिखाया और उन्हें स्वतंत्र चुनाव का अधिकार दिया। उन लोगों का प्रतिफल जो ईमान लाना चुनते हैं, इस सूरह में विस्तार से वर्णित है, लेकिन अगली सूरह (77:41-44) में संक्षेप में; जबकि उन लोगों का प्रतिफल जो कुफ्र करना चुनते हैं, इस सूरह में संक्षेप में (आयतः 4) उल्लेख किया गया है, लेकिन अगली सूरह में बहुत विस्तार से। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दृढ़ रहने और क़यामत के दिन के इनकार करने वालों के आगे न झुकने की सलाह दी गई है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

In the Name of Allah—the Most Compassionate, Most Merciful.

स्वतंत्र इच्छा

1. क्या मनुष्य पर एक ऐसा समय नहीं आया था जब वह कोई उल्लेखनीय वस्तु नहीं था? 2. निःसंदेह हमने मनुष्य को मिश्रित वीर्य की एक बूँद से पैदा किया, ताकि हम उसे आज़माएँ, तो हमने उसे सुनने वाला और देखने वाला बनाया। 3. हमने उन्हें मार्ग दिखा दिया, चाहे वे कृतज्ञ हों या अकृतज्ञ।

هَلْ أَتَىٰ عَلَى ٱلْإِنسَـٰنِ حِينٌ مِّنَ ٱلدَّهْرِ لَمْ يَكُن شَيْـًٔا مَّذْكُورًا
١
إِنَّا خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن نُّطْفَةٍ أَمْشَاجٍ نَّبْتَلِيهِ فَجَعَلْنَـٰهُ سَمِيعًۢا بَصِيرًا
٢
إِنَّا هَدَيْنَـٰهُ ٱلسَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًا وَإِمَّا كَفُورًا
٣

Surah 76 - الإِنْسَان (इंसान) - Verses 1-3


कृतघ्नों का प्रतिफल

4. बेशक, हमने काफ़िरों के लिए ज़ंजीरें, तौक़ और एक दहकती आग तैयार कर रखी है।

إِنَّآ أَعْتَدْنَا لِلْكَـٰفِرِينَ سَلَـٰسِلَا وَأَغْلَـٰلًا وَسَعِيرًا
٤

Surah 76 - الإِنْسَان (इंसान) - Verses 4-4


कृतज्ञों का प्रतिफल

5. निःसंदेह, सदाचारी लोग एक काफ़ूर मिश्रित पेय पिएँगे— 6. (एक ऐसे) चश्मे से जहाँ अल्लाह के बंदे पिएँगे, जिसे वे अपनी इच्छानुसार प्रवाहित करेंगे। 7. वे अपनी मन्नतें पूरी करते हैं और उस दिन से डरते हैं जिसका आतंक छा जाने वाला है, 8. और वे अपनी चाहत के बावजूद भोजन देते हैं मिसकीन को, यतीम को और कैदी को, 9. और कहते हैं, “हम तुम्हें केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए खिलाते हैं, तुमसे न तो कोई बदला चाहते हैं और न कोई आभार।” 10. हमें अपने रब से एक भयानक कष्टदायक दिन का भय है। 11. तो अल्लाह उन्हें उस दिन की भयावहता से बचाएगा, और उन्हें नूर और प्रसन्नता प्रदान करेगा, 12. और उनके धैर्य के बदले उन्हें एक जन्नत और रेशम (के वस्त्र) प्रदान करेगा।

إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِن كَأْسٍ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا
٥
عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا عِبَادُ ٱللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًا
٦
يُوفُونَ بِٱلنَّذْرِ وَيَخَافُونَ يَوْمًا كَانَ شَرُّهُۥ مُسْتَطِيرًا
٧
وَيُطْعِمُونَ ٱلطَّعَامَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ مِسْكِينًا وَيَتِيمًا وَأَسِيرًا
٨
إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ ٱللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمْ جَزَآءً وَلَا شُكُورًا
٩
إِنَّا نَخَافُ مِن رَّبِّنَا يَوْمًا عَبُوسًا قَمْطَرِيرًا
١٠
فَوَقَىٰهُمُ ٱللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمِ وَلَقَّىٰهُمْ نَضْرَةً وَسُرُورًا
١١
وَجَزَىٰهُم بِمَا صَبَرُوا جَنَّةً وَحَرِيرًا
١٢

Surah 76 - الإِنْسَان (इंसान) - Verses 5-12


जन्नत की नेमतें

13. वहाँ वे पलंगों पर टेक लगाए हुए होंगे, न कभी झुलसाने वाली गर्मी देखेंगे और न ही कड़ाके की ठंड। 14. बाग़ की छाया उन पर झुकी हुई होगी, और उसके फल पहुँच में बहुत आसान कर दिए जाएँगे। 15. उनकी सेवा चाँदी के पात्रों और क्रिस्टल के प्यालों से की जाएगी— 16. स्फटिक चाँदी, इच्छानुसार ठीक-ठीक भरी हुई। 17. और उन्हें अदरक के स्वाद वाला (शुद्ध शराब का) एक पेय पिलाया जाएगा। 18. वहाँ के एक चश्मे से, जिसे सलसबील कहा जाता है। 19. उनकी सेवा में सदा युवा रहने वाले लड़के होंगे। यदि तुम उन्हें देखो, तो तुम्हें लगेगा कि वे बिखरे हुए मोती हैं। 20. और यदि तुम चारों ओर देखो, तो तुम्हें अकल्पनीय सुख और एक विशाल साम्राज्य दिखाई देगा। 21. पुण्यवान लोग हरे रंग के महीन रेशम और ज़रबफ़्त के वस्त्रों में होंगे, और उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे, और उनका रब उन्हें एक पवित्र पेय पिलाएगा। 22. और (उनसे कहा जाएगा,) "यह सब निश्चय ही तुम्हारे लिए एक प्रतिफल है, और तुम्हारा प्रयास स्वीकार किया गया है।"

مُّتَّكِـِٔينَ فِيهَا عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ ۖ لَا يَرَوْنَ فِيهَا شَمْسًا وَلَا زَمْهَرِيرًا
١٣
وَدَانِيَةً عَلَيْهِمْ ظِلَـٰلُهَا وَذُلِّلَتْ قُطُوفُهَا تَذْلِيلًا
١٤
وَيُطَافُ عَلَيْهِم بِـَٔانِيَةٍ مِّن فِضَّةٍ وَأَكْوَابٍ كَانَتْ قَوَارِيرَا۠
١٥
قَوَارِيرَا مِن فِضَّةٍ قَدَّرُوهَا تَقْدِيرًا
١٦
وَيُسْقَوْنَ فِيهَا كَأْسًا كَانَ مِزَاجُهَا زَنجَبِيلًا
١٧
عَيْنًا فِيهَا تُسَمَّىٰ سَلْسَبِيلًا
١٨
۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَٰنٌ مُّخَلَّدُونَ إِذَا رَأَيْتَهُمْ حَسِبْتَهُمْ لُؤْلُؤًا مَّنثُورًا
١٩
وَإِذَا رَأَيْتَ ثَمَّ رَأَيْتَ نَعِيمًا وَمُلْكًا كَبِيرًا
٢٠
عَـٰلِيَهُمْ ثِيَابُ سُندُسٍ خُضْرٌ وَإِسْتَبْرَقٌ ۖ وَحُلُّوٓا أَسَاوِرَ مِن فِضَّةٍ وَسَقَىٰهُمْ رَبُّهُمْ شَرَابًا طَهُورًا
٢١
إِنَّ هَـٰذَا كَانَ لَكُمْ جَزَآءً وَكَانَ سَعْيُكُم مَّشْكُورًا
٢٢

Surah 76 - الإِنْسَان (इंसान) - Verses 13-22


नबी को तसल्ली देना

23. निश्चय ही हमने ही तुम पर (ऐ पैगंबर) क़ुरआन को थोड़ा-थोड़ा करके अवतरित किया है। 24. अतः अपने रब के हुक्म पर धैर्य रखो, और उनमें से किसी दुराचारी या घोर अविश्वासी की बात मत मानो। 25. अपने रब के नाम का सुबह और शाम ज़िक्र करो। 26. और रात के कुछ हिस्से में उसके आगे सजदा करो, और रात को देर तक उसकी तस्बीह करो।

إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ ٱلْقُرْءَانَ تَنزِيلًا
٢٣
فَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعْ مِنْهُمْ ءَاثِمًا أَوْ كَفُورًا
٢٤
وَٱذْكُرِ ٱسْمَ رَبِّكَ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
٢٥
وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَٱسْجُدْ لَهُۥ وَسَبِّحْهُ لَيْلًا طَوِيلًا
٢٦

Surah 76 - الإِنْسَان (इंसान) - Verses 23-26


मुनकिरों को पैगाम

27. यक़ीनन वे लोग इस फ़ानी दुनिया से मोहब्बत करते हैं, और अपने सामने आने वाले एक संगीन दिन से ग़ाफ़िल हैं। 28. हमने ही उन्हें पैदा किया और उनकी बनावट को पूर्ण किया। लेकिन यदि हम चाहें तो उन्हें आसानी से दूसरों से बदल सकते हैं। 29. निःसंदेह यह एक नसीहत है। तो जो कोई चाहे अपने रब की ओर सीधा मार्ग अपनाए। 30. लेकिन तुम चाह नहीं सकते जब तक अल्लाह न चाहे। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, अत्यंत बुद्धिमान है। 31. वह जिसे चाहता है अपनी रहमत में दाखिल करता है। और ज़ालिमों के लिए उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है।

إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ يُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ وَيَذَرُونَ وَرَآءَهُمْ يَوْمًا ثَقِيلًا
٢٧
نَّحْنُ خَلَقْنَـٰهُمْ وَشَدَدْنَآ أَسْرَهُمْ ۖ وَإِذَا شِئْنَا بَدَّلْنَآ أَمْثَـٰلَهُمْ تَبْدِيلًا
٢٨
إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًا
٢٩
وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا
٣٠
يُدْخِلُ مَن يَشَآءُ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ وَٱلظَّـٰلِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۢا
٣١

Surah 76 - الإِنْسَان (इंसान) - Verses 27-31


Al-Insân () - अध्याय 76 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा