19. निःसंदेह, मनुष्य को अधीर बनाया गया है:
20. जब उसे बुराई छूती है, तो वह व्यथित हो जाता है,
21. और जब उसे भलाई छूती है, तो वह रोकने वाला हो जाता है।
22. सिवाय उन के जो नमाज़ पढ़ते हैं,
23. जो अपनी नमाज़ों को पाबंदी से अदा करते हैं;
24. और जो अपने माल में से हक़ देते हैं
25. भिखारी और गरीबों को;
26. और जो क़यामत के दिन पर ईमान रखते हैं;
27. और वे जो अपने रब के अज़ाब से डरते हैं—
28. कोई भी अपने रब की सज़ा से बेखौफ न हो—
29. और जो अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करते हैं
30. सिवाय अपनी पत्नियों के या उन (दासियों) के जो उनके अधिकार में हैं, तो उन पर कोई दोष नहीं,
31. और जो इसके सिवा कुछ और चाहे, तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ने वाले हैं।
32. और जो अपनी अमानतों और अपने अहदों का पास रखने वाले हैं;
33. और जो अपनी गवाहियों में सच्चे हैं;
34. और जो अपनी नमाज़ों को कायम रखते हैं।
35. ये जन्नतों में होंगे, इज़्ज़त के साथ।