Surah 63 - المُنَافِقُون

Al-Munâfiqûn (सूरह 63)

المُنَافِقُون (The Hypocrites)

मदनी सूरहमदनी सूरह

परिचय

पिछली दो सूरतों की तरह, यह मदनी सूरह ईमानवालों को और अधिक नसीहतें देते हुए समाप्त होती है। मुनाफ़िक़ों को दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोकने और लोगों को उसकी राह में दान करने से हतोत्साहित करने के लिए फटकारा गया है। इसके विपरीत, ईमानवालों को सलाह दी गई है कि वे मृत्यु से पहले दान करें—एक ऐसी सच्चाई जो किसी भी समय आ सकती है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

Al-Munâfiqûn - The Hypocrites

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जब मुनाफ़िक़ आपके पास आते हैं (ऐ पैगंबर), तो वे कहते हैं, “हम गवाही देते हैं कि आप यक़ीनन अल्लाह के रसूल हैं।” और अल्लाह जानता है कि आप उसके रसूल हैं, लेकिन अल्लाह गवाही देता है कि मुनाफ़िक़ वास्तव में झूठे हैं। उन्होंने अपनी (झूठी) क़समों को ढाल बना लिया है, अल्लाह के मार्ग से (लोगों को) रोकते हुए। कितना बुरा है उनका यह कर्म!

यह इसलिए है क्योंकि वे ईमान लाए और फिर ईमान से फिर गए। अतः, उनके दिलों पर मुहर लगा दी गई है, ताकि वे समझ न सकें।