यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 5 - Al-Mâ'idah

Al-Mâ'idah (सूरह 5)

Al-Mâ'idah (The Spread Table)

मदनी सूरहमदनी सूरह

परिचयDoctrineStoriesUnseen

यह मदनी सूरह आयतों ११२-११५ में उल्लिखित दस्तरख़्वान की कहानी से अपना नाम पाती है। इसमें कई अहकाम निर्धारित किए गए हैं, जिनमें हलाल और हराम खाने, हज के दौरान शिकार करना और यात्रा के दौरान वसीयत करना शामिल हैं। इसमें अल्लाह के यहूदियों और ईसाइयों के साथ किए गए अहदों का और कैसे उन अहदों का बार-बार उल्लंघन किया गया, इसका ज़िक्र किया गया है। मोमिनों को पैगंबर (ﷺ) द्वारा संप्रेषित अल्लाह के हुक्म का पालन करने की ताकीद की गई है। कुछ ऐसे विषय जिनका पिछली सूरहों में उल्लेख किया गया था, उन्हें यहाँ विस्तार से बताया गया है, जिनमें टूटी हुई क़सम का कफ़्फ़ारा अदा करना, मानव जीवन की पवित्रता और ईसा (ﷺ) की इंसानियत शामिल हैं। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयालु, परम कृपालु है।

Al-Mâ'idah - The Spread Table

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ऐ ईमानवालो!

अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करो। तुम्हारे लिए चौपाए हलाल किए गए हैं—सिवाय उनके जो तुम्हें बताए जा रहे हैं और शिकार करना जब तुम एह्राम की हालत में हो। बेशक, अल्लाह जो चाहता है हुक्म देता है। ऐ ईमानवालो!

अल्लाह के प्रतीकों का अनादर न करो, न हराम महीनों का, न क़ुर्बानी के जानवरों का, न उन जानवरों का जिन पर निशान लगाए गए हों, और न उन लोगों का जो पवित्र घर (काबा) की ओर जा रहे हों, अपने रब का फ़ज़ल और उसकी रज़ा चाहते हुए। जब तुम एह्राम से निकल जाओ, तो शिकार कर सकते हो। और किसी क़ौम की दुश्मनी, जिसने तुम्हें मस्जिद-ए-हराम से रोका था, तुम्हें इस बात पर न उभारे कि तुम ज़्यादती करो। और नेकी और परहेज़गारी में एक-दूसरे का सहयोग करो, और गुनाह और ज़्यादती में सहयोग न करो। और अल्लाह से डरो। बेशक अल्लाह सख़्त अज़ाब देने वाला है। तुम पर हराम किया गया है मुर्दार, खून और सूअर का गोश्त; और वह जिस पर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम पुकारा गया हो; और वह जो गला घोंटकर मारा गया हो, या चोट खाकर मरा हो, या गिरकर मरा हो, या सींग मारकर मारा गया हो; और वह जिसे किसी दरिंदे ने फाड़ खाया हो, सिवाय उसके जिसे तुम ज़बह कर लो; और वह जो थानों पर ज़बह किया गया हो। और यह भी कि तुम पाँसे से फ़ैसला करो। यह सब गुनाह का काम है। आज काफ़िरों ने तुम्हारे दीन से मायूस हो गए हैं। तो उनसे न डरो, मुझसे डरो!

आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे दीन को मुकम्मल कर दिया है, और तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी है, और तुम्हारे लिए इस्लाम को दीन के तौर पर पसंद कर लिया है। लेकिन जो कोई सख़्त भूख से मजबूर हो जाए—गुनाह का इरादा न रखता हो—तो बेशक अल्लाह बख़्शने वाला, निहायत मेहरबान है।