यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 40 - غَافِر

Ghâfir (सूरह 40)

غَافِر (The Forgiver)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

मूलतः, यह मक्की सूरह पिछली और अगली दोनों सूरहों में प्रस्तुत किए गए मुख्य विचारों पर बल देती है—अर्थात् अल्लाह की असीम दयालुता और उसका कठोर दंड, तथा मानवजाति का अपने रब के प्रति या तो कृतज्ञ होना या अकृतज्ञ होना, और इसके परिणामस्वरूप मिलने वाले प्रतिफल के साथ। यह सब मूसा (अलैहिस्सलाम) की कहानी (आयतों 23-54) में समाहित है—जिसमें फ़िरऔन अकृतज्ञ काफ़िर के रूप में है और फ़िरऔन की क़ौम का एक अज्ञात व्यक्ति कृतज्ञ मोमिन के रूप में है। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को बार-बार सब्र करने की नसीहत की जाती है, यह ध्यान में रखते हुए कि अल्लाह अपने नबियों को कभी निराश नहीं करता (आयतों 51 और 77)। अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

क़ुरआन सर्वशक्तिमान की ओर से है

1. हा-मीम 2. इस किताब का अवतरण अल्लाह की ओर से है—जो सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ है, 3. पापों को क्षमा करने वाला और पश्चाताप स्वीकार करने वाला, दंड देने में कठोर और असीम कृपा वाला। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं है। उसी की ओर अंतिम वापसी है।

حمٓ
١
تَنزِيلُ ٱلْكِتَـٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْعَلِيمِ
٢
غَافِرِ ٱلذَّنۢبِ وَقَابِلِ ٱلتَّوْبِ شَدِيدِ ٱلْعِقَابِ ذِى ٱلطَّوْلِ ۖ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ إِلَيْهِ ٱلْمَصِيرُ
٣

सूरह 40 - غَافِر (क्षमाशील) - आयतें 1-3


काफ़िरों को चेतावनी

4. अल्लाह की आयतों पर काफ़िरों के सिवा कोई झगड़ा नहीं करता। तो उनकी ज़मीन में चहल-पहल तुम्हें धोखे में न डाले। 5. उनसे पहले नूह की क़ौम ने झुठलाया, और उनके बाद (दूसरे) अहज़ाब ने भी। हर उम्मत ने अपने रसूल के ख़िलाफ़ साज़िश की ताकि उसे पकड़ लें, और बातिल के साथ झगड़ा किया ताकि उसके ज़रिए हक़ को मिटा दें। तो मैंने उन्हें पकड़ लिया। और मेरा अज़ाब कैसा था! 6. और इसी तरह तुम्हारे रब का फ़ैसला काफ़िरों पर साबित हो गया है कि वे जहन्नम वाले होंगे।

مَا يُجَـٰدِلُ فِىٓ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ إِلَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُوا فَلَا يَغْرُرْكَ تَقَلُّبُهُمْ فِى ٱلْبِلَـٰدِ
٤
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَٱلْأَحْزَابُ مِنۢ بَعْدِهِمْ ۖ وَهَمَّتْ كُلُّ أُمَّةٍۭ بِرَسُولِهِمْ لِيَأْخُذُوهُ ۖ وَجَـٰدَلُوا بِٱلْبَـٰطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ ٱلْحَقَّ فَأَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ
٥
وَكَذَٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا أَنَّهُمْ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ
٦

सूरह 40 - غَافِر (क्षमाशील) - आयतें 4-6


फ़रिश्ते ईमान वालों के लिए दुआ करते हैं

7. जो (फ़रिश्ते) अर्श को धारण किए हुए हैं और जो उसके आस-पास हैं, वे अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी तस्बीह करते हैं, उस पर ईमान रखते हैं और ईमान वालों के लिए क्षमा माँगते हैं (कहते हुए): "हमारे रब! तूने हर चीज़ को अपनी दया और ज्ञान से घेर रखा है। अतः उन्हें क्षमा कर दे जो तौबा करते हैं और तेरे मार्ग का अनुसरण करते हैं, और उन्हें जहन्नम की यातना से बचा। 8. हमारे रब! उन्हें उन सदाबहार जन्नतों में दाख़िल कर जिनका तूने उनसे वादा किया है, और उनके माता-पिता, पत्नियों और संतानों में से जो नेक हों, उन्हें भी उनके साथ दाख़िल कर। निःसंदेह तू ही सर्वशक्तिमान, महाज्ञानी है। 9. और उन्हें बुरे कर्मों (के परिणामों) से बचा। क्योंकि जिसे तू उस दिन उसके बुरे कर्मों से बचा लेगा, उस पर तूने निश्चय ही दया की। और यही तो महान सफलता है।"

ٱلَّذِينَ يَحْمِلُونَ ٱلْعَرْشَ وَمَنْ حَوْلَهُۥ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيُؤْمِنُونَ بِهِۦ وَيَسْتَغْفِرُونَ لِلَّذِينَ ءَامَنُوا رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَىْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَٱغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا وَٱتَّبَعُوا سَبِيلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ ٱلْجَحِيمِ
٧
رَبَّنَا وَأَدْخِلْهُمْ جَنَّـٰتِ عَدْنٍ ٱلَّتِى وَعَدتَّهُمْ وَمَن صَلَحَ مِنْ ءَابَآئِهِمْ وَأَزْوَٰجِهِمْ وَذُرِّيَّـٰتِهِمْ ۚ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
٨
وَقِهِمُ ٱلسَّيِّـَٔاتِ ۚ وَمَن تَقِ ٱلسَّيِّـَٔاتِ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمْتَهُۥ ۚ وَذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
٩

सूरह 40 - غَافِر (क्षमाशील) - आयतें 7-9


जहन्नम के निवासी

10. निश्चय ही काफ़िरों को पुकारा जाएगा, 'अल्लाह की तुम पर घृणा, जब तुम्हें ईमान की ओर बुलाया गया और तुमने इनकार किया, तुम्हारी आपस की घृणा से कहीं अधिक थी (आज)।' 11. वे गिड़गिड़ाएँगे, 'हे हमारे रब! तूने हमें दो बार बेजान किया और दो बार जीवन दिया। अब हम अपने गुनाहों को स्वीकार करते हैं। तो क्या कोई निकलने का रास्ता है?' 12. (उन्हें कहा जाएगा,) '(नहीं!) यह इसलिए कि जब केवल अल्लाह को पुकारा जाता था, तो तुमने (दृढ़ता से) इनकार किया। लेकिन जब इबादत में उसके साथ दूसरों को शरीक किया जाता था, तो तुम (आसानी से) मान लेते थे। तो (आज) फ़ैसला केवल अल्लाह का है—जो सर्वोच्च, महान है।'

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا يُنَادَوْنَ لَمَقْتُ ٱللَّهِ أَكْبَرُ مِن مَّقْتِكُمْ أَنفُسَكُمْ إِذْ تُدْعَوْنَ إِلَى ٱلْإِيمَـٰنِ فَتَكْفُرُونَ
١٠
قَالُوا رَبَّنَآ أَمَتَّنَا ٱثْنَتَيْنِ وَأَحْيَيْتَنَا ٱثْنَتَيْنِ فَٱعْتَرَفْنَا بِذُنُوبِنَا فَهَلْ إِلَىٰ خُرُوجٍ مِّن سَبِيلٍ
١١
ذَٰلِكُم بِأَنَّهُۥٓ إِذَا دُعِىَ ٱللَّهُ وَحْدَهُۥ كَفَرْتُمْ ۖ وَإِن يُشْرَكْ بِهِۦ تُؤْمِنُوا ۚ فَٱلْحُكْمُ لِلَّهِ ٱلْعَلِىِّ ٱلْكَبِيرِ
١٢

सूरह 40 - غَافِر (क्षमाशील) - आयतें 10-12